उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में कप्तानगंज क्षेत्र के सिसवा शुक्ल गांव के पास एक नहर में भटकी हुई दुर्लभ गंगा डॉल्फिन का सोमवार को वन विभाग और विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने सफल रेस्क्यू किया। करीब दो घंटे तक चले इस सघन अभियान के बाद लगभग 147 किलोग्राम वजन वाली गर्भवती मादा डॉल्फिन को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बाहर निकालने के तुरंत बाद डॉल्फिन की स्वास्थ्य जांच की गई और उसके प्राकृतिक आवास को प्राथमिकता देते हुए विशेष डॉल्फिन रेस्क्यू एंबुलेंस से गोरखपुर ले जाकर राजघाट स्थित राप्ती नदी में सुरक्षित छोड़ दिया गया। वन विभाग के अनुसार, डॉल्फिन के नहर में फंसने की प्रारंभिक सूचना मिलने और पहले प्रयास के सफल न होने पर प्रभागीय वनाधिकारी के निर्देश पर यह बड़ा अभियान चलाया गया। इसमें कुशीनगर, गोरखपुर और महराजगंज वन प्रभाग की संयुक्त टीम के साथ लखनऊ की डॉल्फिन रेस्क्यू टीम और गोरखपुर चिड़ियाघर के विशेषज्ञों को लगाया गया था, जिन्हें स्थानीय ग्रामीणों का भी महत्वपूर्ण सहयोग मिला। इस रेस्क्यू के बाद वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि बरसात के मौसम में वन्य जीव नहरों में आ सकते हैं, इसलिए लोग इनमें स्नान करने न जाएं। विभाग ने लोगों से यह भी कहा कि गंगा डॉल्फिन या अन्य किसी संरक्षित वन्यजीव को देखने पर उसे पकड़ने या छेड़ने का प्रयास न करें और तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दें।
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में कप्तानगंज क्षेत्र के सिसवा शुक्ल गांव के पास एक नहर में भटकी हुई दुर्लभ गंगा डॉल्फिन का सोमवार को वन विभाग और विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने सफल रेस्क्यू किया। करीब दो घंटे तक चले इस सघन अभियान के बाद लगभग 147 किलोग्राम वजन वाली गर्भवती मादा डॉल्फिन को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बाहर निकालने के तुरंत बाद डॉल्फिन की स्वास्थ्य जांच की गई और उसके प्राकृतिक आवास को प्राथमिकता देते हुए विशेष डॉल्फिन रेस्क्यू एंबुलेंस से गोरखपुर ले जाकर राजघाट स्थित राप्ती नदी में सुरक्षित छोड़ दिया गया। वन विभाग के अनुसार, डॉल्फिन के नहर में फंसने की प्रारंभिक सूचना मिलने और पहले प्रयास के सफल न होने पर प्रभागीय वनाधिकारी के निर्देश पर यह बड़ा अभियान चलाया गया। इसमें कुशीनगर, गोरखपुर और महराजगंज वन प्रभाग की संयुक्त टीम के साथ लखनऊ की डॉल्फिन रेस्क्यू टीम और गोरखपुर चिड़ियाघर के विशेषज्ञों को लगाया गया था, जिन्हें स्थानीय ग्रामीणों का भी महत्वपूर्ण सहयोग मिला। इस रेस्क्यू के बाद वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि बरसात के मौसम में वन्य जीव नहरों में आ सकते हैं, इसलिए लोग इनमें स्नान करने न जाएं। विभाग ने लोगों से यह भी कहा कि गंगा डॉल्फिन या अन्य किसी संरक्षित वन्यजीव को देखने पर उसे पकड़ने या छेड़ने का प्रयास न करें और तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दें।
- उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में कप्तानगंज क्षेत्र के सिसवा शुक्ल गांव के पास एक नहर में भटकी हुई दुर्लभ गंगा डॉल्फिन का सोमवार को वन विभाग और विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने सफल रेस्क्यू किया। करीब दो घंटे तक चले इस सघन अभियान के बाद लगभग 147 किलोग्राम वजन वाली गर्भवती मादा डॉल्फिन को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बाहर निकालने के तुरंत बाद डॉल्फिन की स्वास्थ्य जांच की गई और उसके प्राकृतिक आवास को प्राथमिकता देते हुए विशेष डॉल्फिन रेस्क्यू एंबुलेंस से गोरखपुर ले जाकर राजघाट स्थित राप्ती नदी में सुरक्षित छोड़ दिया गया। वन विभाग के अनुसार, डॉल्फिन के नहर में फंसने की प्रारंभिक सूचना मिलने और पहले प्रयास के सफल न होने पर प्रभागीय वनाधिकारी के निर्देश पर यह बड़ा अभियान चलाया गया। इसमें कुशीनगर, गोरखपुर और महराजगंज वन प्रभाग की संयुक्त टीम के साथ लखनऊ की डॉल्फिन रेस्क्यू टीम और गोरखपुर चिड़ियाघर के विशेषज्ञों को लगाया गया था, जिन्हें स्थानीय ग्रामीणों का भी महत्वपूर्ण सहयोग मिला। इस रेस्क्यू के बाद वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि बरसात के मौसम में वन्य जीव नहरों में आ सकते हैं, इसलिए लोग इनमें स्नान करने न जाएं। विभाग ने लोगों से यह भी कहा कि गंगा डॉल्फिन या अन्य किसी संरक्षित वन्यजीव को देखने पर उसे पकड़ने या छेड़ने का प्रयास न करें और तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दें।1
- उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में यूरिया खाद की तस्करी रुकने का नाम नहीं ले रही है। जिला कृषि अधिकारी संजीव सिंह ने मोतीचक ब्लॉक के मथौली स्थित साधन सहकारी समिति से टेंपो में लादकर कालाबाजारी के लिए ले जाई जा रही 20 बोरी यूरिया खाद को पकड़ा है। पकड़ी गई यह यूरिया साधन सहकारी समिति की ही बताई जा रही है। इस मामले में जिला कृषि अधिकारी द्वारा की गई जाँच में बड़ा खुलासा हुआ है। जाँच के दौरान पाया गया कि आज केवल 9 बोरी यूरिया बेची गई थी, लेकिन मौके से 20 बोरी यूरिया बरामद की गई। इसके अलावा, समिति की सचिव ने जिन किसानों के नाम बताए थे, उनके नाम बिक्री रजिस्टर में दर्ज ही नहीं पाए गए। जिला कृषि अधिकारी संजीव सिंह ने सचिव द्वारा यूरिया खाद की हेराफेरी किए जाने की बात कहते हुए इस मामले में कड़ी कार्रवाई की है।4
- कुशीनगर के पडरौना स्थित प्राथमिक विद्यालय मैला नगरी का परिसर लगातार हो रही बारिश के कारण पूरी तरह जलमग्न हो गया है। विद्यालय से वर्षा के पानी की निकासी की कोई समुचित व्यवस्था न होने की वजह से पूरा परिसर तालाब में तब्दील हो चुका है, जिससे नन्हे-मुन्ने बच्चों के पठन-पाठन और आवागमन में गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। विद्यालय भवन के निर्माण के समय ही वर्षा जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए थी ताकि बच्चों को इस परेशानी से न जूझना पड़े। यह बदहाल स्थिति संबंधित विभाग और शिक्षण संस्थान के जिम्मेदार अधिकारियों को व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आईना दिखाने के लिए पर्याप्त है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए अब स्थानीय लोगों ने शीघ्र जल निकासी की व्यवस्था कर बच्चों के लिए सुरक्षित एवं सुगम वातावरण उपलब्ध कराने की मांग की है।1
- कुशीनगर के तमकुहीराज तहसील में राजस्व अभिलेखों में फर्जीवाड़े के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। एसडीएम आकांक्षा मिश्रा की गोपनीय जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद विशुनपुरा थाना क्षेत्र के दुदही कस्बा स्थित 'टीपू इन्फॉर्मेशन एवं ऑनलाइन सेंटर' (टूर एंड ट्रेवल्स एजेंसी) पर छापेमारी की गई है। इस अचानक हुई कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ थाना विशुनपुरा में एफआईआर दर्ज कराई गई है। एसडीएम आकांक्षा मिश्रा के अनुसार, अक्टूबर 2025 में ग्राम तुर्कवलिया साहबगंज के राजस्व अभिलेखों में फर्जी प्रविष्टियों का मामला सामने आया था, जिसके बाद रिकॉर्ड को सही कराकर तहसील परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इसके बाद ग्राम धोकरहा और बड़हरा बुजुर्ग में भी फर्जी आदेशों के आधार पर राजस्व अभिलेखों में फेरबदल के मामले उजागर हुए। इसी गोपनीय जांच के सुरागों पर कार्रवाई करते हुए दुदही कस्बे के इस ऑनलाइन सेंटर पर करीब तीन घंटे तक दस्तावेजों की गहन जांच और पूछताछ की गई। जांच के दौरान संदिग्ध पाए जाने पर लैपटॉप और सीपीयू को टीम ने अपने कब्जे में ले लिया है, हालांकि एसडीएम ने इस मामले में मीडिया के कैमरे पर कोई भी बयान देने से साफ इनकार कर दिया। फिलहाल, जिन राजस्व अभिलेखों में फर्जी प्रविष्टियां पाई गई हैं, उन्हें विधिक प्रक्रिया के तहत संशोधित करने की कार्रवाई जारी है और प्रशासन पूरे नेटवर्क की जांच कर रहा है। राजस्व अभिलेखों में फर्जीवाड़े के खिलाफ इसे अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि सरकारी अभिलेखों के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।3
- उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के खड्डा क्षेत्र में इस सड़क पर इंटरलॉकिंग का कार्य कराए जाने की बात सामने आई है।1
- कुशीनगर में यूरिया खाद की तस्करी और कालाबाजारी थमने का नाम नहीं ले रही है। इसी कड़ी में मोतीचक ब्लॉक के मथौली स्थित साधन सहकारी समिति से टेंपो में लादकर कालाबाजारी के लिए ले जाई जा रही 20 बोरी यूरिया खाद को जिला कृषि अधिकारी ने पकड़ा है। इस मामले में जिला कृषि अधिकारी संजीव कुमार सिंह की जांच में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। रिकॉर्ड के अनुसार आज केवल 9 बोरी यूरिया बेची गई थी, लेकिन मौके से 20 बोरी खाद बरामद की गई। इसके अलावा, समिति की सचिव द्वारा जिन किसानों के नाम बताए गए थे, वे सरकारी अभिलेखों में दर्ज ही नहीं थे। सचिव द्वारा यूरिया खाद की इस खुली हेराफेरी को देखते हुए जिला कृषि अधिकारी ने इस पर सख्त कार्रवाई की है।1
- उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के हाटा में बारिश भी लोगों की खुशियों को नहीं रोक सकी। यहां मौसम की बाधा के बावजूद बेहद उत्साह के साथ 142 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया।1
- बिहार के पश्चिमी चंपारण में धान की खेती के महत्वपूर्ण समय पर यूरिया खाद का भारी संकट खड़ा हो गया है, जिससे किसान परेशान होकर दर-दर भटकने को मजबूर हैं। खेतों के तैयार होने के बावजूद यूरिया की कमी के कारण खेती का काम रुकने लगा है और फसल प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। खाद की दुकानों के बाहर किसानों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जहां किसानों का आरोप है कि घंटों लाइन में लगने के बाद भी उन्हें यूरिया नहीं मिल पा रही है। इस किल्लत से किसानों में चिंता का माहौल व्याप्त है। स्थानीय किसानों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि क्षेत्र में जल्द से जल्द पर्याप्त मात्रा में यूरिया खाद उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही उन्होंने वितरण व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग की है ताकि किसी भी किसान को खाद के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े।1