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चित्तौड़गढ़ लोकसभा सांसद प्रत्याशी2024 कमल मीणा बहुजन समाज पार्टी जिला अध्यक्ष प्रतापगढ़ राजस्थान गांव अचारी पोस्ट सुबी तहसील छोटी सादड़ी जिला प्रतापगढ़ राजस्थान 9660737539 9079008107
न्यूज़ रिपोर्टर कमल मीणा
चित्तौड़गढ़ लोकसभा सांसद प्रत्याशी2024 कमल मीणा बहुजन समाज पार्टी जिला अध्यक्ष प्रतापगढ़ राजस्थान गांव अचारी पोस्ट सुबी तहसील छोटी सादड़ी जिला प्रतापगढ़ राजस्थान 9660737539 9079008107
More news from राजस्थान and nearby areas
- गांव अचारी पोस्ट सुबी तहसील छोटी सादड़ी जिला प्रतापगढ़ राजस्थान 9660737539 90790081071
- छोटी सादड़ी जिला अफीम अधिकारी आशीष भटनागर ने बताया कि उपखंड क्षेत्र के लगभग 4000 काश्तकार अपनी अफीम की फसल के उपज नारकोटिक्स विभाग के अधिकारियों को तोड़ लेंगे किसानों के छाया पानी की समुचित व्यवस्था की गई है4
- प्रतापगढ़ शहर के गांधी चौराहा पर उस वक्त हड़कंप मच गया… जब एक खड़ी बाइक में अचानक आग लग गई… 🔥 देखते ही देखते बाइक आग की लपटों में घिर गई… और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया… 👮♂️ लेकिन इसी बीच… मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी प्रकाश जी आचार्य ने बहादुरी और सूझबूझ दिखाते हुए… तुरंत आग पर काबू पा लिया… ✅ जिससे एक बड़ा हादसा टल गया… 👀 प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक… अगर समय रहते आग नहीं बुझाई जाती… तो आसपास खड़े अन्य वाहनों को भी नुकसान हो सकता था… 🔥 देखते ही देखते बाइक आग की लपटों में घिर गई… और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया… 👮♂️ लेकिन इसी बीच… मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी प्रकाश जी आचार्य ने बहादुरी और सूझबूझ दिखाते हुए… तुरंत आग पर काबू पा लिया… ✅ जिससे एक बड़ा हादसा टल गया… 👀 प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक… अगर समय रहते आग नहीं बुझाई जाती… तो आसपास खड़े अन्य वाहनों को भी नुकसान हो सकता था…1
- Post by Raj Raj1
- धरियावद थाना की बड़ी कार्यवाही, चेन स्नैचिंग प्रयास के बाद पुलिस का विशेष अभियान,मोटरसाइकिल पकड़ अभियान जुबेर अहमद धरियावद धरियावद-गत दिनों धरियावद थाना क्षेत्र के गांधी नगर इलाके में दो अज्ञात मोटरसाइकिल सवारों द्वारा एक महिला की चेन छीनने के प्रयास की घटना सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन सतर्क हो गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए बी.आदित्य के संज्ञान में मामला आते ही तत्काल विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। जिला पुलिस अधीक्षक के आदेश की पालना में धरियावद थाना में प्रशिक्षु आरपीएस अधिकारी शक्ति दायमा (अजमेर-ब्यावर) एवं थाना प्रभारी हजारी लाल मीणा के नेतृत्व में पुलिस जाब्ते ने पूरे थाना सर्कल क्षेत्र में विशेष सर्च अभियान चलाया। अभियान के दौरान नगर के गांधी नगर सहित विभिन्न क्षेत्रों में बिना नंबर प्लेट की संदिग्ध मोटर साइकिलों की गहन जांच की गई। पुलिस टीम द्वारा सुबह से शाम तक चलाए गए इस अभियान में कई संदिग्ध दोपहिया वाहनों को रोका गया तथा उनके दस्तावेजों की जांच की गई। जिन वाहनों के पास आवश्यक दस्तावेज नहीं पाए गए अथवा वाहन बिना नंबर प्लेट के पाए गए, उन्हें जब्त कर थाना परिसर लाया गया। पुलिस द्वारा जब्त किए गए वाहनों पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत नियमानुसार कार्रवाई की गई। इस दौरान पुलिस ने आमजन से भी अपील की कि वे बिना नंबर प्लेट अथवा बिना दस्तावेज के वाहन का उपयोग न करें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।3
- चित्तौड़गढ़ जिले में ‘मौताणा’ (मृत्यु पर मुआवजा देने की प्रथा) अब एक गंभीर सामाजिक और औद्योगिक चुनौती का रूप ले चुकी है। ताजा मामला शम्भूपुरा क्षेत्र का है, जहां एक हादसे के बाद फिर से यह परंपरा चर्चा में आ गई और फैक्ट्री प्रबंधन पर मुआवजे को लेकर दबाव बना। जानकारी के अनुसार, जोरावर खेड़ा निवासी 34 वर्षीय आजाद सिंह चुंडावत उर्फ चंदू, जो आदित्य सीमेंट फैक्ट्री में ठेका पद्धति पर कार्यरत था, गुरुवार रात ड्यूटी समाप्त होने के करीब पांच घंटे बाद घर लौट रहा था। इस दौरान शम्भूपुरा गोशाला के सामने, फैक्ट्री से लगभग दो किलोमीटर दूरी पर उसकी बाइक एक बैल से टकरा गई। गंभीर रूप से घायल आजाद सिंह को जिला चिकित्सालय ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। मृतक के परिवार में पांच वर्षीय एक बच्चा है, जबकि उसकी पत्नी गर्भवती है। घटना की सूचना मिलते ही शुक्रवार सुबह से ही समाजजन बड़ी संख्या में आदित्य सीमेंट फैक्ट्री के बाहर एकत्रित हो गए और 25 लाख रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को नौकरी तथा बच्चों की आजीवन शिक्षा का खर्च उठाने की मांग करने लगे। मौके पर शम्भूपुरा थाना अधिकारी और पुलिस उपाधीक्षक मय जाप्ता पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। फैक्ट्री प्रबंधन और समाजजनों के बीच लंबी वार्ता के बाद दोपहर लगभग तीन बजे समझौता हुआ। आदित्य सिमेंट फेक्ट्री प्रबंधन ने मानवीय आधार पर 15 लाख रुपये मुआवजा, पीएफ सहित अन्य देयकों का भुगतान तथा मृतक की पत्नी को ठेका पद्धति पर रोजगार देने का आश्वासन दिया। इसके बाद मामला शांत हुआ। उल्लेखनीय है कि दुर्घटना के समय मृतक ड्यूटी पर नहीं था, फिर भी औद्योगिक कार्य में बाधा न आए और सामाजिक तनाव से बचने के उद्देश्य से प्रबंधन ने यह निर्णय लिया। मौताणा प्रथा: परंपरा बनाम कानून चित्तौड़गढ़ जिले में ‘मौताणा’ की प्रथा वर्ष 2000 के आसपास हिन्दुस्तान जिंक में शुरू हुई मानी जाती है और धीरे-धीरे यह एक सामाजिक दबाव का रूप ले चुकी है। किसी कर्मचारी—चाहे वह स्थायी हो या अस्थायी—की बीमारी या दुर्घटना से मृत्यु होने पर परिजन और समाजजन संबंधित फैक्ट्री से मुआवजा मांगते हैं, भले ही घटना कार्यस्थल या ड्यूटी के दौरान न हुई हो। कानूनी दृष्टि से, मुआवजा केवल उन मामलों में देय होता है, जहां मृत्यु कार्यस्थल पर या कार्य से संबंधित कारणों से हुई हो, जैसा कि श्रम कानूनों और कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम में प्रावधानित है। इसके विपरीत, ‘मौताणा’ सामाजिक परंपरा पर आधारित है, जिसका कानून में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। औद्योगिक प्रबंधन की दुविधा फैक्ट्री प्रबंधन अक्सर उत्पादन बाधित होने, आर्थिक नुकसान और श्रमिक असंतोष या यूनियनबाजी से बचने के लिए दबाव में आकर मुआवजा देने को विवश हो जाते हैं। इससे यह प्रथा और अधिक मजबूत होती जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस विषय पर प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश और सख्ती नहीं अपनाई गई, तो भविष्य में यह प्रथा उद्योगों के लिए बड़ी समस्या बन सकती है। प्रशासन की भूमिका आवश्यक इस तरह की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि सामाजिक संवेदनाओं और कानूनी प्रावधानों के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है। प्रशासन, उद्योग और समाज के बीच संवाद स्थापित कर इस प्रथा को नियंत्रित करना समय की मांग बन चुका है।1
- Post by Baba1
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