चाईबासा में 'नो-एंट्री' आंदोलन: अनोखा प्रदर्शन, जनता की हुंकार - "सुनो सरकार!" चाईबासा, 28 अक्टूबर 2025 पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा में 'नो-एंट्री' की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन अब एक अनोखा रूप ले चुका है। स्थानीय ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए सड़क पर ही डेरा डाल दिया है। आंदोलनकारियों का यह 'जनता कर्फ्यू' सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। आंदोलन का अनोखा अंदाज़ आंदोलनकारी अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी तरीके अपना रहे हैं। आंदोलन स्थल की कुछ बेहद खास तस्वीरें सामने आई हैं, जो इस प्रकार हैं: सड़क पर चूल्हा और भोजन: ग्रामीण अपने घरों से निकलकर आंदोलन स्थल पर ही रहने को मजबूर हैं। सड़क किनारे चूल्हे जलाकर सामूहिक रूप से भोजन पकाया जा रहा है। यह दृश्य दिखाता है कि आंदोलनकारी लंबे समय तक डटे रहने के लिए तैयार हैं। तंबू और खाट पर बसेरा: आंदोलन स्थल पर छोटे-छोटे तंबू लगाए गए हैं और खाट बिछाकर लोग वहीं आराम कर रहे हैं। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों सहित पूरा समुदाय इस आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है। जनता की आवाज: आंदोलनकारी "जनता की आवाज... सुनो सरकार!" जैसे नारे लिखी तख्तियां और बैनर लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर स्थानीय मुद्दों की अनदेखी कर रही सरकार के खिलाफ जनाक्रोश को दर्शाता है। क्यों हो रहा है आंदोलन? यह आंदोलन मुख्य रूप से नो-एंट्री समय को सख्ती से लागू करने की मांग को लेकर हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी वाहनों के अनियंत्रित परिचालन और नो-एंट्री नियमों की अनदेखी के कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है। हाल ही में हुई एक सड़क दुर्घटना के बाद यह आक्रोश और भड़क उठा, जिसके परिणामस्वरूप यह अनिश्चितकालीन धरना शुरू हुआ। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें हैं: शहरी क्षेत्रों में भारी वाहनों के प्रवेश के लिए निर्धारित 'नो-एंट्री' समय का कड़ाई से पालन किया जाए। हाटगम्हरिया से चाईबासा और चक्रधरपुर की ओर NH-75E के निर्माण कार्य पूरा होने तक नो-एंट्री के समय में संशोधन किया जाए ताकि सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। पीड़ित परिवारों को उचित सरकारी सहायता और मुआवजा मिले। प्रशासन की कार्रवाई प्रशासन ने आंदोलनकारियों पर कार्रवाई भी की है। 27 अक्टूबर को, पुलिस ने इस आंदोलन से जुड़े कुछ प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवा नेताओं, जैसे रमेश बालमुचू और रेयांस सामड को हिरासत में ले लिया था, ताकि परिवहन मंत्री के आवास के सामने होने वाले प्रदर्शनों को रोका जा सके। इसके अलावा, संभावित प्रदर्शनों को रोकने के लिए कुछ क्षेत्रों में निषेधाज्ञा (Prohibitory orders) भी लागू की गई है। जनता की इस अनोखी हुंकार ने चाईबासा में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस जन-आंदोलन पर क्या रुख अपनाती है।
चाईबासा में 'नो-एंट्री' आंदोलन: अनोखा प्रदर्शन, जनता की हुंकार - "सुनो सरकार!" चाईबासा, 28 अक्टूबर 2025 पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा में 'नो-एंट्री' की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन अब एक अनोखा रूप ले चुका है। स्थानीय ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए सड़क पर ही डेरा डाल दिया है। आंदोलनकारियों का यह 'जनता कर्फ्यू' सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। आंदोलन का अनोखा अंदाज़ आंदोलनकारी अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी तरीके अपना रहे हैं। आंदोलन स्थल की कुछ बेहद खास तस्वीरें सामने आई हैं, जो इस प्रकार हैं: सड़क पर चूल्हा और भोजन: ग्रामीण अपने घरों
से निकलकर आंदोलन स्थल पर ही रहने को मजबूर हैं। सड़क किनारे चूल्हे जलाकर सामूहिक रूप से भोजन पकाया जा रहा है। यह दृश्य दिखाता है कि आंदोलनकारी लंबे समय तक डटे रहने के लिए तैयार हैं। तंबू और खाट पर बसेरा: आंदोलन स्थल पर छोटे-छोटे तंबू लगाए गए हैं और खाट बिछाकर लोग वहीं आराम कर रहे हैं। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों सहित पूरा समुदाय इस आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है। जनता की आवाज: आंदोलनकारी "जनता की आवाज... सुनो सरकार!" जैसे नारे लिखी तख्तियां और बैनर लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर स्थानीय मुद्दों की अनदेखी कर रही सरकार के खिलाफ जनाक्रोश को दर्शाता है। क्यों हो रहा है आंदोलन? यह
आंदोलन मुख्य रूप से नो-एंट्री समय को सख्ती से लागू करने की मांग को लेकर हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी वाहनों के अनियंत्रित परिचालन और नो-एंट्री नियमों की अनदेखी के कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है। हाल ही में हुई एक सड़क दुर्घटना के बाद यह आक्रोश और भड़क उठा, जिसके परिणामस्वरूप यह अनिश्चितकालीन धरना शुरू हुआ। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें हैं: शहरी क्षेत्रों में भारी वाहनों के प्रवेश के लिए निर्धारित 'नो-एंट्री' समय का कड़ाई से पालन किया जाए। हाटगम्हरिया से चाईबासा और चक्रधरपुर की ओर NH-75E के निर्माण कार्य पूरा होने तक नो-एंट्री के समय में संशोधन किया जाए ताकि
सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। पीड़ित परिवारों को उचित सरकारी सहायता और मुआवजा मिले। प्रशासन की कार्रवाई प्रशासन ने आंदोलनकारियों पर कार्रवाई भी की है। 27 अक्टूबर को, पुलिस ने इस आंदोलन से जुड़े कुछ प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवा नेताओं, जैसे रमेश बालमुचू और रेयांस सामड को हिरासत में ले लिया था, ताकि परिवहन मंत्री के आवास के सामने होने वाले प्रदर्शनों को रोका जा सके। इसके अलावा, संभावित प्रदर्शनों को रोकने के लिए कुछ क्षेत्रों में निषेधाज्ञा (Prohibitory orders) भी लागू की गई है। जनता की इस अनोखी हुंकार ने चाईबासा में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस जन-आंदोलन पर क्या रुख अपनाती है।
- चाईबासा के बरकुंडिया गांव में हाथी ने महिला को पटक कर मार डाला, एक अन्य जख्मी बरकुंडिया गांव के तूरामडीह टोले मे जंगली हाथी ने सोमवार की रात 11 बजे बांस फूस के कच्चे मंदिर को तहस नहस कर सो रही 58 वर्षीय महिला चांदू देवी गोप को पटक कर मार डाला और पुजारी लखन कूदादा को जख्मी कर दिया है। घटना के समय तेज गति से आंधी बारिश हो रही थी। उस समय हाथी द्वारा मंदिर पर हमला कर दिया गया। हाथी द्वारा तहस नहस किए जाने के दौरान उसने सो रही 58 वर्षीय महिला चांदू देवी गोप को पटक कर मार डाला । पुजारी लखन कूदादा लकड़ी और पुआल से दब गया। इस कारण हाथी की उस पर नजर नहीं पड़ी, लेकिन हाथी के पैर से उसका पैर दब जाने के के कारण वह जख्मी हो गया। सुबह गांव के लोग जमा हुए। इस घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग के अधिकारी गांव पहुंचे। वन विभाग द्वारा शव को उठा कर सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम करवाया गया। जख्मी लखन कूदादा का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है। उसकी खराब हालत को देखते हुए उसे आईसीयू वार्ड में दाखिल कराया गया है। शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिवार वालो को सौंप दिया गया है। मृतक महिला चांदू देवी गोप के पुत्र गोपाल गोप ने बताया1
- श्री श्री सार्वजनिक हरि नाम संकीर्तन समिति, राजनगर चांगुआ के तत्वावधान में हरि मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर रविवार को भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया। इस धार्मिक आयोजन में 251 महिलाओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ भाग लिया, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में सराबोर हो गया। कलश यात्रा हरि मंदिर परिसर से गाजे-बाजे के साथ प्रारंभ होकर गांव के तालाब तक पहुंची, जहां पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश में जल भरवाया गया। इसके बाद हरि नाम संकीर्तन करते हुए श्रद्धालु गांव भ्रमण कर पुनः मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर में विधिवत वैदिक मंत्रों के साथ 251 कलश स्थापित कर हरि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई। पूरे आयोजन के दौरान हरिनाम संकीर्तन की ध्वनि से वातावरण भक्तिमय बना रहा। कार्यक्रम के उपरांत समिति की ओर से सभी श्रद्धालुओं के बीच जलपान का वितरण किया गया। समिति द्वारा जानकारी दी गई कि चैत पूर्णिमा के पावन अवसर पर अष्टम पहर अखंड हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें क्षेत्र के विभिन्न संकीर्तन मंडलियों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। नाम यज्ञ में योगदान देने वाली संकीर्तन मंडलियां: बालिक संप्रदाय हेंसल बिल (उत्तम मंडल), बालिका संप्रदाय कालाझरना (जितेंद्र प्रधान), संकीर्तन संप्रदाय भालकी (कामाख्या मंडल), संकीर्तन संप्रदाय दुन्दू पटमदा (जगदीश चंद्र महतो), संकीर्तन संप्रदाय टांगरानी (कबीर दास महतो) एवं संकीर्तन संप्रदाय नौका (फाल्गुनी प्रधान, चित्रसेन प्रधान)।1
- Post by Ravi Gupta4
- राजनगर चाॅगुआ में हरि मंदिर प्राण प्रतिष्ठा , 251 महिलाओं की भव्य कलश यात्रा से गूंजा क्षेत्र। श्री श्री सार्वजनिक हरि नाम संकीर्तन समिति राजनगर चाॅगुआ के तत्वावधान में हरि मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर मंगलवार को भव्य कलश यात्रा आयोजन किया गया । इस धार्मिक आयोजन में 251 महिलाओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ भाग लिया , जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय में माहौल में सराबोर हो गया। कलश यात्रा हरि मंदिर परिसर से गाजे बाजे के साथ प्रारंभ होकर खरकाई नदी घाट ,मुरुमडीह तक पहुंची। जहां पंडितों द्वारा वैदिक मंत्र उच्चारण के बीच कलश में जल भरवाया गया। इसके बाद हरि नाम संकीर्तन करते हुए श्रद्धालु गांव भ्रमण कर पुनः मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर में विधिवत वैदिक मंत्र के साथ 251 कलश स्थापित कर हरि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई। पूरे आयोजन के दौरान हरिनाम संकीर्तन की ध्वनि से वातावरण भक्ति में बना रहा। कार्यक्रम के उपरांत समिति की ओर से सभी श्रद्धालुओं के बीच जलपान का वितरण किया गया। समिति द्वारा जानकारी दी गई की चैत्र पूर्णिमा के पावन अवसर पर अष्टम प्रहार अखंड हरी नाम संकीर्तन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें क्षेत्र के विभिन्न संकीर्तन मंडलियों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। कलश यात्रा को सफल संचालन के लिए कमेटी के अध्यक्ष - श्री अश्विनी महतो ,सचिव -रितेश महतो , कोषाध्यक्ष - सोनेलाल महतो ,संयोजक श्री जवाहरलाल महतो ,मुख्य संयोजक एवं मूर्ति दाता श्री श्रवण महतो ,जमीन दाता- श्री डोमन महतो, सदस्य - दिलीप महतो ,अशोक महतो ,नरेंद्र महतो, नकुल महतो ,उदित महतो ,गुरुचरण महतो ,कमलेश्वर महतो ,रघुनाथ महतो, जागाय महतो ,प्रफुल्लो महतो, शिवचरण महतो ,बादल महतो ,खिरोद महतो ,सुभाष महतो ,रमेश पान, घनश्याम महतो ,जगत महतो ,राजीव महतो ,बाबलू प्रमाणिक ,महादेव महतो, रासु महतो ,सागर महतो ,पवन महतो विकास महतो ,कृष्णा महतो एवं चाॅगुआ राजनगर ग्रामवासी का सहरनीय योगदान।1
- ग्राहक बनकर आए अपराधी ने मानगो उलीडीह थाना अंतर्गत शंकोसाई रोड न.1 में रिफ्यूजी कॉलोनी के सामने स्थित विश्वनाथ ज्वेलर्स में प्रवेश कर दुकान में मौजूद विश्वनाथ दत्ता जी के बेटे को झांसे में लेकर लगभग 25 लाख रुपए के जेवर लेकर फरार हो गया । दुकानदार विश्वनाथ दत्ता ने मामले की जानकारी भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह को दिया । सूचना मिलते ही मौके में पहुंचे विकास सिंह ने पीड़ित दुकानदार से मिलकर घटने जानकारी एवं सीसीटीवी फुटेज जिले के वरीय पुलिस अधिकारियों को उपलब्ध कराया ।1
- मनोहरपुर। मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बन गया है। इस घटना को लेकर भारत आदिवासी पार्टी के जिला अध्यक्ष सुशील बारला ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही बताया है। उन्होंने कहा कि प्रसव के दौरान मां और नवजात की मौत अत्यंत दुखद और चिंताजनक घटना है। यदि अस्पताल में समय पर उचित इलाज और व्यवस्था उपलब्ध होती, तो शायद इस तरह की घटना को रोका जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं, जिसके कारण मरीजों को अक्सर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सुशील बारला ने राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा कि मृतका के परिजनों को 25 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाए, ताकि पीड़ित परिवार को कुछ राहत मिल सके। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि मनोहरपुर उप स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सेवाओं को जल्द से जल्द सुधारा जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी डॉक्टर या स्वास्थ्य कर्मी की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। इस घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है और स्थानीय लोग स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं।1
- Post by Gautam Raftaar media1
- जंगली हाथी के कहर से क्षेत्र में दहशत।पुजारी मौसी को कुचला,एक गंभीर,वन विभाग पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा।1