मौदहा विकासखंड के परेहटा गाँव में रपटा निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और निर्माण कार्य को रुकवा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में धांधली की जा रही है और घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। विरोध जताने के लिए करीब 200 ग्रामीण निर्माण स्थल पर पहुँचे और जमकर नारेबाजी की। उनकी प्रमुख मांग है कि रपटा की जगह पुल का निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत 27 मई को जिलाधिकारी (DM) से भी की थी, लेकिन अब तक कोई जाँच न होने से उनमें गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि उन्हें ऐसा विकास नहीं चाहिए जो उनकी जान पर आ बने। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने मौजूदा विधायक के खिलाफ भी अपना आक्रोश व्यक्त किया और चेतावनी दी कि वे 2027 के चुनाव में इसका जवाब देंगे। यह प्रदर्शन आजाद भारत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश द्विवेदी के नेतृत्व में हुआ।
मौदहा विकासखंड के परेहटा गाँव में रपटा निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और निर्माण कार्य को रुकवा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में धांधली की जा रही है और घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। विरोध जताने के लिए करीब 200 ग्रामीण निर्माण स्थल पर पहुँचे और जमकर नारेबाजी की। उनकी प्रमुख मांग है कि रपटा की जगह पुल का निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत 27 मई को जिलाधिकारी (DM) से भी की थी, लेकिन अब तक कोई जाँच न होने से उनमें गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि उन्हें ऐसा विकास नहीं चाहिए जो उनकी जान पर आ बने। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने मौजूदा विधायक के खिलाफ भी अपना आक्रोश व्यक्त किया और चेतावनी दी कि वे 2027 के चुनाव में इसका जवाब देंगे। यह प्रदर्शन आजाद भारत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश द्विवेदी के नेतृत्व में हुआ।
- हमीरपुर के मौदहा नगर में पिछले पाँच दिनों से जारी बिजली और पानी के गंभीर संकट से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। सिचौली पुरवा के निवासियों ने अपनी समस्या के विरोध में नेशनल हाईवे-34 पर चक्काजाम कर दिया। इस प्रदर्शन में महिलाओं सहित बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए, जिसके कारण हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।1
- युवा विकास समिति ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी जारी की है। समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि जलस्रोतों को बचाने के लिए प्रशासन द्वारा जल्द ही धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे आम जनता को साथ लेकर एक बड़ा क्रमिक अनशन और आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे।1
- बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए बढ़ती गर्मी, लगातार कम होते जल स्रोत और पर्यावरणीय असंतुलन एक गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। ये सभी परिस्थितियाँ मिलकर इस क्षेत्र के भविष्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं।1
- बांदा के बिसंडा क्षेत्र में 27 मई को हुई दर्दनाक घटना केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता, अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन के एक खतरनाक गठजोड़ की भयावह परिणति है। इस हादसे में एक ही दिन में सात लोगों की जान चली गई और कई लोग घायल हुए, जिसे इस बात का प्रमाण बताया गया है कि जब कानून कमजोर पड़ता है, तो सड़कों पर मौत बेलगाम दौड़ने लगती है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक ओवरलोड बालू से भरे ट्रक ने पहले ग्राम घूरी निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक रामेश्वर प्रसाद अनुरागी को कुचला और फिर बिसंडा कस्बे में एक ई-रिक्शा को रौंद दिया। इस भयावह हादसे में रामेश्वर प्रसाद अनुरागी के साथ सोहन पुत्र रामलाल, राकेश पुत्र लोटन, ममता पत्नी मुन्ना श्रीवास, नवीन पुत्र शरीफ, शहबाज पुत्र शेरू और साफिया पुत्री शेरू समेत कुल सात लोगों की जान चली गई। सवाल केवल चालक की लापरवाही का नहीं है, बल्कि असली प्रश्न यह है कि इतने भारी और ओवरलोड वाहन किसकी निगरानी में सड़कों पर दौड़ रहे थे, खासकर जब अवैध एवं ओवरलोड बालू का परिवहन उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से लगातार हो रहा है। संबंधित विभागों, परिवहन तंत्र और खनन निगरानी व्यवस्था की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात के दौरान इस घटना पर सवाल उठाए, वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के निर्देश पर पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवारों को न्याय का भरोसा दिलाया। इस त्रासदी को केवल राजनीतिक संवेदना का विषय न मानते हुए, शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक गंभीर टिप्पणी बताया गया है। यदि अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर समय रहते प्रभावी नियंत्रण किया गया होता, तो संभवतः सात परिवार आज अपनों के शोक में डूबे न होते। बालू का कारोबार अब केवल आर्थिक गतिविधि नहीं रह गया है, बल्कि यह कई क्षेत्रों में कानून, पर्यावरण और मानव जीवन को चुनौती देने वाला तंत्र बन चुका है, जिससे नदियों का दोहन, सड़कों का क्षरण और दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। विडंबना यह है कि हर बड़े हादसे के बाद सख्ती की घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन कुछ समय बाद वही ओवरलोड वाहन फिर सड़कों पर दिखाई देने लगते हैं। पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए केवल मुआवजा पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जरूरत इस बात की है कि ट्रक मालिकों, खनन माफियाओं, परिवहन नियमों का उल्लंघन करने वालों और यदि कहीं प्रशासनिक लापरवाही हुई है तो उसके जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई हो। चेतावनी दी गई है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी। बिसंडा की सड़क पर बहा खून आज भी यह सवाल पूछ रहा है कि क्या सात मौतें भी व्यवस्था को झकझोरने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। यदि अब भी अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई, तो यह हादसा केवल एक दुखद स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की अनेक त्रासदियों की चेतावनी साबित होगा।1
- उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अजय राय के निर्देश पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित ने एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बांदा के बिसंडा ब्लॉक का दौरा किया। उन्होंने 27 मई को हुए भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित ने मीडिया को बताया कि 27 मई 2026 को बिसंडा क्षेत्र में ओवरलोड बालू से भरे ट्रक की चपेट में आने से कुल सात लोगों की मौत हो गई थी। उन्होंने घटना का विवरण देते हुए बताया कि पहले बिसंडा कस्बे के पास बांदा रोड स्थित नहर के निकट उसी ट्रक ने ग्राम घूरी निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक रामेश्वर प्रसाद अनुरागी को टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। इसके बाद, वही ट्रक ओरन रोड पर बिसंडा कस्बे में एक ई-रिक्शा को रौंदते हुए आगे निकल गया, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई। इन छह मृतकों में से पांच ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि एक की अस्पताल में इलाज के दौरान मृत्यु हुई। ई-रिक्शा हादसे में जान गंवाने वालों में सोहन पुत्र रामलाल, राकेश पुत्र लोटन, ममता पत्नी मुन्ना श्रीवास, नवीन पुत्र शरीफ, शहबाज पुत्र शेरू और साफिया पुत्री शेरू शामिल थे। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि क्षेत्र में ओवरलोड बालू से भरे ट्रकों का संचालन लगातार जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से अवैध एवं ओवरलोड बालू की ढुलाई के कारण सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं और आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। राजेश दीक्षित ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले ग्राम घूरी पहुंचकर दिवंगत शिक्षक रामेश्वर प्रसाद अनुरागी के परिवार से भेंट की। इसके उपरांत, उन्होंने ग्राम कोर्राही पहुंचकर ई-रिक्शा हादसे में जान गंवाने वाले सोहन, राकेश, ममता, नवीन, शहबाज और साफिया के परिजनों से मिलकर अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की भी कामना की। राजेश दीक्षित ने बताया कि दौरे के बाद, पूरी घटना की जानकारी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के साथ-साथ कांग्रेस के प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व को भेज दी गई है। इस दौरान कांग्रेस जिला कंट्रोल रूम प्रभारी बी. लाल भाई, सोशल मीडिया जिलाध्यक्ष संतोष कुमार द्विवेदी, बिसंडा ब्लॉक अध्यक्ष शिवाकांत मिश्रा, ब्लॉक उपाध्यक्ष रामनिहोर मिश्रा और लालबाबू राजपूत सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।1
- उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में, समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्यों ने बैलगाड़ी के साथ एक जोरदार प्रदर्शन किया।1
- मौदहा विकासखंड के परेहटा गाँव में रपटा निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और निर्माण कार्य को रुकवा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में धांधली की जा रही है और घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। विरोध जताने के लिए करीब 200 ग्रामीण निर्माण स्थल पर पहुँचे और जमकर नारेबाजी की। उनकी प्रमुख मांग है कि रपटा की जगह पुल का निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत 27 मई को जिलाधिकारी (DM) से भी की थी, लेकिन अब तक कोई जाँच न होने से उनमें गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि उन्हें ऐसा विकास नहीं चाहिए जो उनकी जान पर आ बने। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने मौजूदा विधायक के खिलाफ भी अपना आक्रोश व्यक्त किया और चेतावनी दी कि वे 2027 के चुनाव में इसका जवाब देंगे। यह प्रदर्शन आजाद भारत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश द्विवेदी के नेतृत्व में हुआ।1
- हमीरपुर जिले के मौदहा नगर के वार्ड संख्या-19 सिचौली पुरवा में पिछले पाँच दिनों से बिजली और पेयजल आपूर्ति बाधित होने से नाराज़ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। रविवार को बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने रश्मि पेट्रोल पंप के पास नेशनल हाईवे-34 को जाम कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। सूचना मिलने पर क्षेत्राधिकारी राजकुमार पांडे और कोतवाली प्रभारी संतोष सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उनकी समस्याएँ सुनीं और शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग के अधिकारी कई दिनों से बनी बिजली और पानी की समस्या पर उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, और उन पर उपेक्षा व भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद, प्रदर्शनकारियों ने जाम समाप्त कर दिया, जिससे हाईवे पर यातायात सामान्य हो सका। हालांकि, स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली और पेयजल व्यवस्था बहाल नहीं की गई तो वे दोबारा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।2