लोक विचार समाचार देवगवां से सामने आई शर्मनाक घटना, सरकारी कुएं पर निजी कब्जे का आरोप देवगवां गांव से एक ऐसी गंभीर घटना सामने आई है, जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया है। गांव निवासी बसीर मोहम्मद ने आरोप लगाया है कि उनके ही सगे भाई जलालुद्दीन द्वारा उनके पिता के नाम से बने शासकीय कुएं को जबरन बंद (रुद्ध) कर दिया गया है, जिससे परिवार के सामने भीषण पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है। पीड़ित बसीर मोहम्मद का कहना है कि जिस कुएं को बंद किया गया है, वह सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज शासकीय कुआं है, बावजूद इसके जलालुद्दीन द्वारा उस पर निजी स्वामित्व जताते हुए पानी लेने से रोका जा रहा है। इतना ही नहीं, पीड़ित को आए दिन जान से मारने की धमकियां भी दी जा रही हैं। इस गंभीर मामले को लेकर पीड़ित द्वारा थाना जियावन में लिखित सूचना भी दी गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि पुलिस द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे पीड़ित परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन यापन करने को मजबूर है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस कुएं से कभी पूरा परिवार पानी लेता था, आज उसी कुएं के कारण परिवार पानी के लिए तरस रहा है। प्रशासन की निष्क्रियता और पुलिस की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब जागता है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। बशीर मोहम्मद प्रशासन से मांग करता है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध शीघ्र कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके। लोक विचार समाचार उपसंपादक : जय प्रकाश द्विवेदी
लोक विचार समाचार देवगवां से सामने आई शर्मनाक घटना, सरकारी कुएं पर निजी कब्जे का आरोप देवगवां गांव से एक ऐसी गंभीर घटना सामने आई है, जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया है। गांव निवासी बसीर मोहम्मद ने आरोप लगाया है कि उनके ही सगे भाई जलालुद्दीन द्वारा उनके पिता के नाम से बने शासकीय कुएं को जबरन बंद (रुद्ध) कर दिया गया है, जिससे परिवार के सामने भीषण पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है। पीड़ित बसीर मोहम्मद का कहना है कि जिस कुएं को बंद किया गया है, वह सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज शासकीय कुआं है, बावजूद इसके जलालुद्दीन द्वारा उस पर निजी स्वामित्व जताते हुए पानी लेने से रोका जा रहा है। इतना ही नहीं, पीड़ित को आए दिन जान से मारने की धमकियां भी दी जा रही हैं। इस गंभीर मामले को लेकर पीड़ित द्वारा थाना जियावन में लिखित सूचना भी दी गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि पुलिस द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे पीड़ित परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन यापन करने को मजबूर है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस कुएं से कभी पूरा परिवार पानी लेता था, आज उसी कुएं के कारण परिवार पानी के लिए तरस रहा है। प्रशासन की निष्क्रियता और पुलिस की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब जागता है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। बशीर मोहम्मद प्रशासन से मांग करता है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध शीघ्र कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके। लोक विचार समाचार उपसंपादक : जय प्रकाश द्विवेदी
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- क्या यही है सुशासन, जहां न्याय की खुलेआम लगती है बोली? मऊगंज जिले की हाटा पुलिस चौकी से जुड़ा ऑडियो बना चर्चा का विषय मध्यप्रदेश में सुशासन और भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन के दावों के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मऊगंज जिले की पुलिस चौकी हाटा में पदस्थ मुंशी राशिरमण साहू से जुड़ा एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया और जनचर्चा में तेजी से वायरल हो रहा है। इस ऑडियो में एक व्यक्ति से काम करने के एवज में लेन-देन और सौदेबाजी की बातचीत होने का दावा किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सामने आई इस रिकॉर्डिंग को सुनकर यह सहज ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि किस तरह से कानून की रखवाली करने वाले तंत्र के भीतर ही न्याय की कीमत तय की जा रही है। बातचीत में कथित तौर पर पैसों के बदले काम कराने, मामले को आगे-पीछे करने और “मैनेज” करने जैसी बातें सुनी जा सकती हैं। यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अगर इस ऑडियो की सत्यता जांच में प्रमाणित होती है, तो यह स्पष्ट संकेत होगा कि किस तरह रिश्वतखोरी ने शासन और प्रशासन की साख को दागदार कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब पुलिस चौकी जैसे स्तर पर इस तरह की गतिविधियां सामने आती हैं, तो आम जनता का कानून और व्यवस्था से विश्वास उठना स्वाभाविक है। सवाल यह भी है कि क्या ऐसे मामलों पर वरिष्ठ अधिकारी स्वतः संज्ञान लेंगे या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल, इस कथित ऑडियो को लेकर पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन जनता और सामाजिक संगठनों की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। अब बड़ा सवाल यही है— क्या यही है वह “सुशासन”, जिसमें न्याय खुलेआम बोली लगाकर बेचा जा रहा है? या फिर शासन-प्रशासन इस मामले में त्वरित कार्रवाई कर यह साबित करेगा कि कानून आज भी बिकाऊ नहीं है1
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