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पूर्णिया जिला के अंतर्गत डगरुआ प्रखंड में कुल 18 पंचायतें हैं, लेकिन वहां एक भी डिग्री कॉलेज नहीं है। पूर्णिया जिला के अंतर्गत डगरुआ प्रखंड में कुल 18 पंचायतें हैं, लेकिन वहां एक भी डिग्री कॉलेज नहीं है।
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पूर्णिया जिला के अंतर्गत डगरुआ प्रखंड में कुल 18 पंचायतें हैं, लेकिन वहां एक भी डिग्री कॉलेज नहीं है। पूर्णिया जिला के अंतर्गत डगरुआ प्रखंड में कुल 18 पंचायतें हैं, लेकिन वहां एक भी डिग्री कॉलेज नहीं है।
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- पूर्णिया जिला के अंतर्गत डगरुआ प्रखंड में कुल 18 पंचायतें हैं, लेकिन वहां एक भी डिग्री कॉलेज नहीं है।1
- आप सभी देश वाशियो को मेरी तरफ से होली की ढेर सारी शुभकामनाएं!!1
- Post by Radhe krishna1
- बजट सत्र के दौरान अर्राबारी से खुटिया,चहट गांव एवं भीखमपुर गांव वाली सड़क नदी कटान का भेंट चढ़ रहा है। उक्त सड़के गांव से निकले का एक मात्र रास्ता है। मैं उक्त तीनों सड़कों को बचाने हेतु कटावरोधक कार्य किया जाए. #AbdulHannan #GhulamSarwar #Baisi1
- इंशाअल्लाह बिहार पूर्णिया रामनगर में हर घर से नया आयतुल ख़ामनाई जनम लेगा याद रखो2
- होली को लेकर शांति,समिति बैठक जलालगढ़ थाना परिसर में, होली खेले लाल ग़ुलाल लगाए, यह पर्व खुशी का त्यौहार हैं1
- जलालगढ़ वार्ड संख्या 2 में एक ही घर में लगातार दो दिनों तक चोरी की घटना सामने आने से इलाके में दहशत का माहौल है। वार्ड नंबर आठ निवासी मोहम्मद इनकाम पिता– निजामुद्दीन के घर को चोरों ने निशाना बनाया। उनका घर इंडियन पब्लिक स्कूल के पश्चिम बगल स्थित है। जानकारी के अनुसार, चोरों ने घर का ताला तोड़कर गैस सिलेंडर, प्रिंटर, हीटर, चार्जर, एक एचपी का मोटर, हेलोजिंग लाइट समेत अन्य सामान की चोरी कर ली। लगातार दो दिन तक हुई इस घटना से गृहस्वामी और आसपास के लोग हैरान हैं। प्रातः जब गृहस्वामी की नजर घर पर पड़ी तो अंदर रखा सामान गायब मिला। इसके बाद उन्होंने जलालगढ़ थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। गृहस्वामी ने बताया कि क्षेत्र अपेक्षाकृत एकांत है और रात करीब एक बजे तक अज्ञात लोगों का आना-जाना जारी रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में नियमित पुलिस गश्ती नहीं होने के कारण चोरी की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। इलाके के लोगों ने पुलिस प्रशासन से नियमित पेट्रोलिंग की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।1
- प्रदेश के हजारों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। हमारी मांग है कि छोटे स्तर पर मांस, मछली और मुर्गा बेचने वालों के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता समाप्त की जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक अपना रोजगार चला सकें।सरकार को चाहिए कि रोज़ी-रोटी कमाने वाले लोगों को परेशान करने के बजाय उनके व्यवसाय को सुगम और सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए। #AIMIM #बिहार_विधानसभा #जनहित_की_आवाज़ #रोजगार_बचाओ #छोटे_व्यापारी_की_आवाज़1