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डंपर में हुई दो युवकों की मौत के बाद एनटीपीसी के डंपरों के खिलाफ लोगों का प्रदर्शन शव के साथ प्रदर्शन

4 hrs ago
user_पंकज गुप्ता "पत्रकार"
पंकज गुप्ता "पत्रकार"
Advertising agency नरसिंहपुर, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
4 hrs ago

डंपर में हुई दो युवकों की मौत के बाद एनटीपीसी के डंपरों के खिलाफ लोगों का प्रदर्शन शव के साथ प्रदर्शन

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  • Post by पंकज गुप्ता "पत्रकार"
    1
    Post by पंकज गुप्ता "पत्रकार"
    user_पंकज गुप्ता "पत्रकार"
    पंकज गुप्ता "पत्रकार"
    Advertising agency नरसिंहपुर, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • तहसील गाडरवारा प्रवीण राजपूत गाडरवारा में दर्दनाक सड़क हादसे के बाद लोगों का आक्रोश भड़क उठा। हादसे में दो लोगों की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाते हुए बीच चौराहे पर मृत शव को जलाने का प्रयास किया, जिससे पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। बताया जा रहा है कि शहर के कांच मंदिर के पास खड़े एक डंपर से टकराकर भूरा यादव और ओ.पी. ममार की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना से गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने आमगांव तिराहे पर चक्का जाम कर दिया और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। लोगों की मांग थी कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाइश देने का प्रयास किया। बीच चौराहे पर शव जलाने की कोशिश से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। फिलहाल प्रशासन मामले को शांत कराने में जुटा है और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों पर कब सख्ती होगी, ताकि ऐसे दर्दनाक हादसे दोबारा न हों।
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    तहसील गाडरवारा 
प्रवीण राजपूत 
गाडरवारा में दर्दनाक सड़क हादसे के बाद लोगों का आक्रोश भड़क उठा।
हादसे में दो लोगों की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाते हुए बीच चौराहे पर मृत शव को जलाने का प्रयास किया, जिससे पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया।
बताया जा रहा है कि शहर के कांच मंदिर के पास खड़े एक डंपर से टकराकर भूरा यादव और ओ.पी. ममार की मौके पर ही मौत हो गई थी।
घटना से गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने आमगांव तिराहे पर चक्का जाम कर दिया और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
लोगों की मांग थी कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाइश देने का प्रयास किया।
बीच चौराहे पर शव जलाने की कोशिश से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
फिलहाल प्रशासन मामले को शांत कराने में जुटा है और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों पर कब सख्ती होगी, ताकि ऐसे दर्दनाक हादसे दोबारा न हों।
    user_दैनिक भारत संवाद न्यूज
    दैनिक भारत संवाद न्यूज
    News Anchor नरसिंहपुर, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • Post by मनोज नौरिया
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    Post by मनोज नौरिया
    user_मनोज नौरिया
    मनोज नौरिया
    Graphic designer नरसिंहपुर, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • station Ganj rosra ki halat hai
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    station Ganj rosra ki halat hai
    user_Nilesh kahar
    Nilesh kahar
    नरसिंहपुर, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • सतीश विश्वकर्मा की रिपोर्ट स्काई इंडिया टीवी चैनल गाडरवारा ​गाडरवारा में मौत का तांडव: डंपर के कहर से 3 दिन में 4 जानें गईं, आक्रोशित परिजनों का शांतिदूत तिराहे पर चक्का जाम ​
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    सतीश विश्वकर्मा की रिपोर्ट   स्काई इंडिया टीवी चैनल      गाडरवारा 
​गाडरवारा में मौत का तांडव: डंपर के कहर से 3 दिन में 4 जानें गईं, आक्रोशित परिजनों का शांतिदूत तिराहे पर चक्का जाम
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    user_Satish Vishwakarma
    Satish Vishwakarma
    Photographer नरसिंहपुर, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • समर कैंप' नहीं, यह 'संस्कार कैंप': 15 साल के नन्हे पथिक, गुरु के साथ निकले 3000 किमी की नर्मदा परिक्रमा पर ​नर्सिंगपुर। जहाँ आज की पीढ़ी गर्मी की छुट्टियों में महंगे समर कैंपों में स्विमिंग, पेंटिंग और गैजेट्स के बीच अपना समय बिताती है, वहीं 15 साल की उम्र के 7 बच्चों ने एक ऐसा मार्ग चुना है जो उनके भविष्य की नींव को 'संस्कारों' से सींच रहा है। कंधे पर झोला, हाथ में लाठी और पैरों में छाले लिए ये नन्हे पथिक अपने गुरु के सानिध्य में माँ नर्मदा की पैदल परिक्रमा पर निकले हैं। 45 डिग्री की तपती दोपहरी, ऊबड़-खाबड़ रास्ते और मीलों का सफर—ये बच्चे किसी सुख-सुविधा की तलाश में नहीं, बल्कि 'मैया' की भक्ति में लीन हैं। इन बच्चों के चेहरों पर जो चमक है, वह एसी-कूलर के कमरों में नहीं मिलती। 'नर्मदे हर' के जयकारे के साथ कदम-दर-कदम बढ़ती यह यात्रा केवल परिक्रमा नहीं, बल्कि एक कठिन तपस्या है, जिसे इन बच्चों ने स्वेच्छा से चुना है। आमतौर पर लोग जीवन की भागदौड़ के बाद रिटायरमेंट के समय चार धाम की यात्रा का संकल्प लेते हैं, लेकिन इन बच्चों ने 15 साल की कच्ची उम्र में ही 3000 किलोमीटर की दुर्गम परिक्रमा का संकल्प लेकर सबको हैरान कर दिया है। अमरकंटक से शुरू हुई यह यात्रा दादा महाराज मंदिर होते हुए अब माँ के तटों के साथ-साथ आगे बढ़ रही है। ​सोच बदल दी इन नन्हे पथिकों ने इन बच्चों ने समाज को एक नई दिशा दिखाई है। जहाँ हम और आप गर्मियों की छुट्टियों में शिमला, मनाली जैसे हिल स्टेशनों का सपना देखते हैं, वहीं इन बच्चों ने भौतिक सुखों को त्यागकर माँ नर्मदा के दर्शन और उनके प्रति कृतज्ञता को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया है। ​यह 'संस्कार कैंप' न केवल इन बच्चों के साहस को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि यदि सही मार्गदर्शन (गुरु) और संकल्प शक्ति हो, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। यह यात्रा आने वाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा है कि धर्म, आस्था और अनुशासन का मार्ग ही जीवन का सच्चा 'कैंप' है।
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    समर कैंप' नहीं, यह 'संस्कार कैंप': 15 साल के नन्हे पथिक, गुरु के साथ निकले 3000 किमी की नर्मदा परिक्रमा पर
​नर्सिंगपुर। जहाँ आज की पीढ़ी गर्मी की छुट्टियों में महंगे समर कैंपों में स्विमिंग, पेंटिंग और गैजेट्स के बीच अपना समय बिताती है, वहीं 15 साल की उम्र के 7 बच्चों ने एक ऐसा मार्ग चुना है जो उनके भविष्य की नींव को 'संस्कारों' से सींच रहा है। कंधे पर झोला, हाथ में लाठी और पैरों में छाले लिए ये नन्हे पथिक अपने गुरु के सानिध्य में माँ नर्मदा की पैदल परिक्रमा पर निकले हैं। 45 डिग्री की तपती दोपहरी, ऊबड़-खाबड़ रास्ते और मीलों का सफर—ये बच्चे किसी सुख-सुविधा की तलाश में नहीं, बल्कि 'मैया' की भक्ति में लीन हैं। इन बच्चों के चेहरों पर जो चमक है, वह एसी-कूलर के कमरों में नहीं मिलती। 'नर्मदे हर' के जयकारे के साथ कदम-दर-कदम बढ़ती यह यात्रा केवल परिक्रमा नहीं, बल्कि एक कठिन तपस्या है, जिसे इन बच्चों ने स्वेच्छा से चुना है।
आमतौर पर लोग जीवन की भागदौड़ के बाद रिटायरमेंट के समय चार धाम की यात्रा का संकल्प लेते हैं, लेकिन इन बच्चों ने 15 साल की कच्ची उम्र में ही 3000 किलोमीटर की दुर्गम परिक्रमा का संकल्प लेकर सबको हैरान कर दिया है। अमरकंटक से शुरू हुई यह यात्रा दादा महाराज मंदिर होते हुए अब माँ के तटों के साथ-साथ आगे बढ़ रही है।
​सोच बदल दी इन नन्हे पथिकों ने
इन बच्चों ने समाज को एक नई दिशा दिखाई है। जहाँ हम और आप गर्मियों की छुट्टियों में शिमला, मनाली जैसे हिल स्टेशनों का सपना देखते हैं, वहीं इन बच्चों ने भौतिक सुखों को त्यागकर माँ नर्मदा के दर्शन और उनके प्रति कृतज्ञता को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया है।
​यह 'संस्कार कैंप' न केवल इन बच्चों के साहस को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि यदि सही मार्गदर्शन (गुरु) और संकल्प शक्ति हो, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। यह यात्रा आने वाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा है कि धर्म, आस्था और अनुशासन का मार्ग ही जीवन का सच्चा 'कैंप' है।
    user_पत्रकार आशीष कुमार दुबे
    पत्रकार आशीष कुमार दुबे
    Media and information sciences faculty नरसिंहपुर, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • ​डोंगरगांव: डोंगरगांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम मेहरा खेड़ा में आज अचानक भीषण आग लग गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि देखते ही देखते आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गया। ​डायल 112 और दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई ​घटना की सूचना मिलते ही गाडरवारा से डायल 112 की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। इस दौरान टीम में स्टाफ दीपक गौरव और पायलट अरुण रजक मुस्तैदी से तैनात रहे। डायल 112 की टीम ने न केवल स्थिति को संभाला बल्कि राहत कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए फायर ब्रिगेड के साथ समन्वय स्थापित किया। ​कड़ी मशक्कत के बाद पाया काबू ​आग बुझाने के लिए NTPC और CISF के दमकल कर्मियों को बुलाया गया। दमकल कर्मियों, सीआईएसएफ जवानों और डायल 112 के स्टाफ ने मिलकर मोर्चा संभाला। काफी देर तक चली कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह से नियंत्रण पा लिया गया। ​जान-माल की सुरक्षा ​डायल 112 के स्टाफ दीपक गौरव और पायलट अरुण रजक की सजगता और दमकल विभाग की सक्रियता से एक बड़ा हादसा होने से बच गया। समय रहते आग पर काबू पा लेने से आसपास की संपत्तियों को कोई बड़ी क्षति नहीं हुई। पुलिस प्रशासन अब आग लगने के कारणों की जांच कर रहा है। ​स्थानीय ग्रामीणों ने इस त्वरित सहायता के लिए गाडरवारा डायल 112 की टीम और दमकल कर्मियों की सराहना की है।
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    ​डोंगरगांव: डोंगरगांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम मेहरा खेड़ा में आज अचानक भीषण आग लग गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि देखते ही देखते आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
​डायल 112 और दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई
​घटना की सूचना मिलते ही गाडरवारा से डायल 112 की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। इस दौरान टीम में स्टाफ दीपक गौरव और पायलट अरुण रजक मुस्तैदी से तैनात रहे। डायल 112 की टीम ने न केवल स्थिति को संभाला बल्कि राहत कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए फायर ब्रिगेड के साथ समन्वय स्थापित किया।
​कड़ी मशक्कत के बाद पाया काबू
​आग बुझाने के लिए NTPC और CISF के दमकल कर्मियों को बुलाया गया। दमकल कर्मियों, सीआईएसएफ जवानों और डायल 112 के स्टाफ ने मिलकर मोर्चा संभाला। काफी देर तक चली कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह से नियंत्रण पा लिया गया।
​जान-माल की सुरक्षा
​डायल 112 के स्टाफ दीपक गौरव और पायलट अरुण रजक की सजगता और दमकल विभाग की सक्रियता से एक बड़ा हादसा होने से बच गया। समय रहते आग पर काबू पा लेने से आसपास की संपत्तियों को कोई बड़ी क्षति नहीं हुई। पुलिस प्रशासन अब आग लगने के कारणों की जांच कर रहा है।
​स्थानीय ग्रामीणों ने इस त्वरित सहायता के लिए गाडरवारा डायल 112 की टीम और दमकल कर्मियों की सराहना की है।
    user_अरुण रजक
    अरुण रजक
    Narsinghpur, Madhya Pradesh•
    9 hrs ago
  • Post by पंकज गुप्ता "पत्रकार"
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    Post by पंकज गुप्ता "पत्रकार"
    user_पंकज गुप्ता "पत्रकार"
    पंकज गुप्ता "पत्रकार"
    Advertising agency नरसिंहपुर, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
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