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विराटनगर उपखंड कार्यालय पर में सरपंच और वार्ड पंचों के पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया शुरू

13 hrs ago
user_Raj.JANTA SEVA-84 NEWS
Raj.JANTA SEVA-84 NEWS
रिपोर्टर Viratnagar, Jaipur•
13 hrs ago

विराटनगर उपखंड कार्यालय पर में सरपंच और वार्ड पंचों के पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया शुरू

More news from Jaipur and nearby areas
  • विराटनगर उपखंड कार्यालय पर में सरपंच और वार्ड पंचों के पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया शुरू
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    विराटनगर उपखंड कार्यालय पर में सरपंच और वार्ड पंचों के पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया शुरू
    user_Raj.JANTA SEVA-84 NEWS
    Raj.JANTA SEVA-84 NEWS
    रिपोर्टर Viratnagar, Jaipur•
    13 hrs ago
  • शाहपुरा ग्राम पंचायतों के सरपंच पदों के आरक्षण की लॉटरी जेपी बैरवा एसडीएम की मौजूदगी में शाहपुरा में निकाली गई । मुख्य आरक्षण
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    शाहपुरा ग्राम पंचायतों के सरपंच पदों के आरक्षण की लॉटरी जेपी बैरवा एसडीएम की मौजूदगी में शाहपुरा में निकाली गई । मुख्य आरक्षण
    user_Breaking Live News
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    Shahpura, Jaipur•
    7 hrs ago
  • बहरोड़ में नेशनल हाईवे पर बड़ा हादसा, शेरपुर के पास अनियंत्रित पिकअप पलटी, सर्विस लाइन पर खड़ी ईको को मारी टक्कर। नेशनल हाईवे पर गांव शेरपुर के पास सुबह-सुबह बड़ा हादसा हो गया, जिससे हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार कोटपूतली की ओर से आ रही एक पिकअप अचानक अनियंत्रित होकर पलटते हुए सर्विस लाइन पर जा पहुंची। इसी दौरान पिकअप ने वहां सवारी के लिए खड़ी ईको गाड़ी को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों वाहनों के चालकों को अस्पताल पहुंचाया।
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    बहरोड़ में नेशनल हाईवे पर बड़ा हादसा, शेरपुर के पास अनियंत्रित पिकअप पलटी, सर्विस लाइन पर खड़ी ईको को मारी टक्कर।
नेशनल हाईवे पर गांव शेरपुर के पास सुबह-सुबह बड़ा हादसा हो गया, जिससे हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार कोटपूतली की ओर से आ रही एक पिकअप अचानक अनियंत्रित होकर पलटते हुए सर्विस लाइन पर जा पहुंची। इसी दौरान पिकअप ने वहां सवारी के लिए खड़ी ईको गाड़ी को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों वाहनों के चालकों को अस्पताल पहुंचाया।
    user_NARESH Kumar Khanna
    NARESH Kumar Khanna
    Local News Reporter बहरोड़, अलवर, राजस्थान•
    11 hrs ago
  • संघर्ष समिति से निकले सियासी चेहरे: किसका उदय, किसका अस्त? खैरथल। नगरपरिषद चुनाव खत्म हो चुके हैं। नतीजे सामने हैं, चेहरे साफ हैं और सियासी तस्वीर पहले से कहीं ज्यादा स्पष्ट। लेकिन इन नतीजों के बीच खैरथल की उस सियासी कहानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जिसकी पटकथा नगरपरिषद चुनाव से काफी पहले लिखी जा चुकी थी। *यह कहानी है खैरथल जिला मुख्यालय बचाओ संघर्ष समिति की।* एक साल से ज्यादा समय तक चला आंदोलन। धरने, प्रदर्शन, सभाएं और जिला मुख्यालय के मुद्दे पर सड़क से लेकर सत्ता के गलियारों तक संघर्ष। इस आंदोलन ने सिर्फ एक मांग को आवाज नहीं दी, बल्कि खैरथल की स्थानीय राजनीति में कई नए चेहरों को जन्म दिया। आंदोलन की जमीन से निकले इन चेहरों ने अब नगरपरिषद चुनाव में अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत का इम्तिहान दिया। *नतीजे दिलचस्प रहे।* पंकज रोघा संघर्ष समिति के युवा चेहरों में तेजी से उभरे और पार्षद निर्वाचित हुए। आंदोलन की जमीन से चुनावी राजनीति तक का यह सफर उनके लिए सियासी उपलब्धि के तौर पर देखा जा सकता है। वहीं संघर्ष समिति के सबसे चर्चित चेहरों में शुमार कृष्णा चौधरी को कांग्रेस का टिकट नहीं मिला। उन्होंने निर्दलीय मैदान संभाला, लेकिन जनता ने इस बार उनका साथ नहीं दिया। टिकट न मिलने से शुरू हुई कहानी हार पर जाकर खत्म हुई। सर्वेश गुप्ता, जो व्यापार समिति के अध्यक्ष होने के साथ संघर्ष समिति के मजबूत आधार स्तंभों में रहे, कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। आंदोलन की सियासी पूंजी को चुनावी जीत में बदलने वाले चेहरों में उनका नाम भी शामिल हो गया। इसके उलट ओमप्रकाश रोघा का चुनावी सफर बेहद दिलचस्प रहा। संघर्ष समिति के प्रखर चेहरों में रहे रोघा कांग्रेस के टिकट पर पार्षद का चुनाव हार गए। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। कांग्रेस ने हार के बावजूद उन पर भरोसा जताया और सभापति पद के लिए मैदान में उतार दिया। मुकाबला लॉटरी तक पहुंचा और किस्मत ने इस बार भी साथ नहीं दिया। यानी पार्षद चुनाव में हार और सभापति चुनाव में लॉटरी से हार—सियासत ने उन्हें दो बार मौका दिया, लेकिन दोनों बार परिणाम उनके पक्ष में नहीं आया। गिरीश डाटा की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं रही। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य और कांग्रेस के प्रमुख स्थानीय चेहरों में शामिल डाटा महज दो वोटों के अंतर से चुनाव हार गए। राजनीति में कभी-कभी दो वोट भी पूरी कहानी बदल देते हैं और इस चुनाव ने इसकी मिसाल पेश कर दी। लेकिन सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ आया विक्की चौधरी के मामले में। संघर्ष समिति से निकले युवा और मुखर चेहरों में शामिल तथा नगरपरिषद में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष रहे विक्की चौधरी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। लेकिन जीत के बाद राजनीतिक पाला बदल गया। उन्होंने भाजपा का दामन थामा और अंततः नगरपरिषद की सभापति की कुर्सी तक पहुंच गए। यानी संघर्ष समिति की जमीन से निकला एक चेहरा उस कुर्सी तक पहुंच गया, जो नगरपरिषद की स्थानीय सत्ता का सबसे बड़ा केंद्र मानी जाती है। *आंदोलन की जमीन, राजनीति की मंजिल?* अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कौन जीता और कौन हारा। बड़ा सवाल यह है कि जिस संघर्ष समिति ने इन चेहरों को पहचान दी, उसका आगे क्या होगा? क्या आंदोलन की वह ऊर्जा फिर से जिला मुख्यालय के मुद्दे पर दिखाई देगी? क्या संघर्ष समिति एक बार फिर सड़क पर उतरेगी? क्या जिला मुख्यालय की लड़ाई नगरपरिषद चुनाव के बाद भी उतनी ही प्राथमिकता रहेगी, जितनी चुनाव से पहले थी? या फिर यह पूरा आंदोलन धीरे-धीरे चुनावी राजनीति की सीढ़ी बनकर रह जाएगा? क्योंकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। संघर्ष समिति से जुड़े कई चेहरे चुनावी राजनीति में उतरे। किसी ने जीत हासिल की, किसी को हार मिली, किसी की राजनीतिक दिशा बदली और किसी की उम्मीद लॉटरी के फैसले पर आकर अटक गई। यानी संघर्ष समिति ने चेहरे तो बहुत दिए, लेकिन अब सवाल उसके अपने भविष्य का है। क्या संघर्ष समिति फिर खड़ी होगी या उसके योद्धा अपनी-अपनी राजनीतिक मंजिलों की ओर निकल चुके हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि जिस आंदोलन ने नेताओं को जन्म दिया, वही नेता अब आंदोलन से आगे निकल गए हैं? खैरथल की राजनीति में आने वाले दिनों में इस सवाल का जवाब बेहद महत्वपूर्ण होगा। क्योंकि जिला मुख्यालय का मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ है। और अगर मुद्दा जिंदा है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि संघर्ष समिति भी जिंदा रहती है या सिर्फ उसकी राजनीतिक विरासत। फिलहाल नगरपरिषद चुनाव ने इतना तो साफ कर दिया है कि संघर्ष समिति की कहानी में कई किरदार थे—कुछ चुनाव जीतकर आगे बढ़े, कुछ हारकर पीछे छूट गए और कुछ सत्ता की सीढ़ियां चढ़ गए। अब अगला अध्याय जनता लिखेगी— संघर्ष समिति के आंदोलन का या फिर उसके आंदोलन से निकले नेताओं की राजनीति का।
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    संघर्ष समिति से निकले सियासी चेहरे: किसका उदय, किसका अस्त?
खैरथल। नगरपरिषद चुनाव खत्म हो चुके हैं। नतीजे सामने हैं, चेहरे साफ हैं और सियासी तस्वीर पहले से कहीं ज्यादा स्पष्ट। लेकिन इन नतीजों के बीच खैरथल की उस सियासी कहानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जिसकी पटकथा नगरपरिषद चुनाव से काफी पहले लिखी जा चुकी थी।
*यह कहानी है खैरथल जिला मुख्यालय बचाओ संघर्ष समिति की।*
एक साल से ज्यादा समय तक चला आंदोलन। धरने, प्रदर्शन, सभाएं और जिला मुख्यालय के मुद्दे पर सड़क से लेकर सत्ता के गलियारों तक संघर्ष। इस आंदोलन ने सिर्फ एक मांग को आवाज नहीं दी, बल्कि खैरथल की स्थानीय राजनीति में कई नए चेहरों को जन्म दिया। आंदोलन की जमीन से निकले इन चेहरों ने अब नगरपरिषद चुनाव में अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत का इम्तिहान दिया।
*नतीजे दिलचस्प रहे।*
पंकज रोघा संघर्ष समिति के युवा चेहरों में तेजी से उभरे और पार्षद निर्वाचित हुए। आंदोलन की जमीन से चुनावी राजनीति तक का यह सफर उनके लिए सियासी उपलब्धि के तौर पर देखा जा सकता है।
वहीं संघर्ष समिति के सबसे चर्चित चेहरों में शुमार कृष्णा चौधरी को कांग्रेस का टिकट नहीं मिला। उन्होंने निर्दलीय मैदान संभाला, लेकिन जनता ने इस बार उनका साथ नहीं दिया। टिकट न मिलने से शुरू हुई कहानी हार पर जाकर खत्म हुई।
सर्वेश गुप्ता, जो व्यापार समिति के अध्यक्ष होने के साथ संघर्ष समिति के मजबूत आधार स्तंभों में रहे, कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। आंदोलन की सियासी पूंजी को चुनावी जीत में बदलने वाले चेहरों में उनका नाम भी शामिल हो गया।
इसके उलट ओमप्रकाश रोघा का चुनावी सफर बेहद दिलचस्प रहा। संघर्ष समिति के प्रखर चेहरों में रहे रोघा कांग्रेस के टिकट पर पार्षद का चुनाव हार गए। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। कांग्रेस ने हार के बावजूद उन पर भरोसा जताया और सभापति पद के लिए मैदान में उतार दिया। मुकाबला लॉटरी तक पहुंचा और किस्मत ने इस बार भी साथ नहीं दिया। यानी पार्षद चुनाव में हार और सभापति चुनाव में लॉटरी से हार—सियासत ने उन्हें दो बार मौका दिया, लेकिन दोनों बार परिणाम उनके पक्ष में नहीं आया।
गिरीश डाटा की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं रही। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य और कांग्रेस के प्रमुख स्थानीय चेहरों में शामिल डाटा महज दो वोटों के अंतर से चुनाव हार गए। राजनीति में कभी-कभी दो वोट भी पूरी कहानी बदल देते हैं और इस चुनाव ने इसकी मिसाल पेश कर दी।
लेकिन सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ आया विक्की चौधरी के मामले में।
संघर्ष समिति से निकले युवा और मुखर चेहरों में शामिल तथा नगरपरिषद में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष रहे विक्की चौधरी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। लेकिन जीत के बाद राजनीतिक पाला बदल गया। उन्होंने भाजपा का दामन थामा और अंततः नगरपरिषद की सभापति की कुर्सी तक पहुंच गए।
यानी संघर्ष समिति की जमीन से निकला एक चेहरा उस कुर्सी तक पहुंच गया, जो नगरपरिषद की स्थानीय सत्ता का सबसे बड़ा केंद्र मानी जाती है।
*आंदोलन की जमीन, राजनीति की मंजिल?*
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कौन जीता और कौन हारा।
बड़ा सवाल यह है कि जिस संघर्ष समिति ने इन चेहरों को पहचान दी, उसका आगे क्या होगा?
क्या आंदोलन की वह ऊर्जा फिर से जिला मुख्यालय के मुद्दे पर दिखाई देगी?
क्या संघर्ष समिति एक बार फिर सड़क पर उतरेगी?
क्या जिला मुख्यालय की लड़ाई नगरपरिषद चुनाव के बाद भी उतनी ही प्राथमिकता रहेगी, जितनी चुनाव से पहले थी?
या फिर यह पूरा आंदोलन धीरे-धीरे चुनावी राजनीति की सीढ़ी बनकर रह जाएगा?
क्योंकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी है।
संघर्ष समिति से जुड़े कई चेहरे चुनावी राजनीति में उतरे। किसी ने जीत हासिल की, किसी को हार मिली, किसी की राजनीतिक दिशा बदली और किसी की उम्मीद लॉटरी के फैसले पर आकर अटक गई।
यानी संघर्ष समिति ने चेहरे तो बहुत दिए, लेकिन अब सवाल उसके अपने भविष्य का है।
क्या संघर्ष समिति फिर खड़ी होगी या उसके योद्धा अपनी-अपनी राजनीतिक मंजिलों की ओर निकल चुके हैं?
कहीं ऐसा तो नहीं कि जिस आंदोलन ने नेताओं को जन्म दिया, वही नेता अब आंदोलन से आगे निकल गए हैं?
खैरथल की राजनीति में आने वाले दिनों में इस सवाल का जवाब बेहद महत्वपूर्ण होगा।
क्योंकि जिला मुख्यालय का मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ है। और अगर मुद्दा जिंदा है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि संघर्ष समिति भी जिंदा रहती है या सिर्फ उसकी राजनीतिक विरासत।
फिलहाल नगरपरिषद चुनाव ने इतना तो साफ कर दिया है कि संघर्ष समिति की कहानी में कई किरदार थे—कुछ चुनाव जीतकर आगे बढ़े, कुछ हारकर पीछे छूट गए और कुछ सत्ता की सीढ़ियां चढ़ गए।
अब अगला अध्याय जनता लिखेगी—
संघर्ष समिति के आंदोलन का या फिर उसके आंदोलन से निकले नेताओं की राजनीति का।
    user_Pramod Kewlani
    Pramod Kewlani
    Local News Reporter खैरथल, अलवर, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • जिला परिषद सदस्य, प्रधान एवं पंचायत समिति सदस्यों के लिए वर्गवार एवं महिला आरक्षण की लॉटरी निकाली* दौसा, आगामी पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनावों के लिए जिले में जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य एवं प्रधान पद के लिए वर्गवार आरक्षण तथा महिला आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया बुधवार को आयोजित की गई। जिला कलक्टर डॉ. सौम्या झा की अध्यक्षता में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निर्देशानुसार जिला कलक्ट्रेट के सभागार कक्ष में आरक्षण एवं लॉटरी प्रक्रिया सम्पन्न हुई। लॉटरी प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों के अनुसार प्रधान, जिला परिषद सदस्य एवं पंचायत समिति सदस्य पदों के लिए वर्गवार आरक्षण तथा महिला आरक्षण का निर्धारण किया गया। इस अवसर पर अतिरिक्त जिला कलक्टर अरविंद शर्मा, नगर सुधार न्यास सचिव गंगाधर मीणा, पंचायत समितियों के रिटर्निंग अधिकारी तथा विभिन्न राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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    जिला परिषद सदस्य, प्रधान एवं पंचायत समिति सदस्यों के लिए वर्गवार एवं महिला आरक्षण की लॉटरी निकाली*
दौसा,  आगामी पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनावों के लिए जिले में जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य एवं प्रधान पद के लिए वर्गवार आरक्षण तथा महिला आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया बुधवार को आयोजित की गई।
जिला कलक्टर डॉ. सौम्या झा की अध्यक्षता में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निर्देशानुसार जिला कलक्ट्रेट के सभागार कक्ष में आरक्षण एवं लॉटरी प्रक्रिया सम्पन्न हुई। लॉटरी प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों के अनुसार प्रधान, जिला परिषद सदस्य एवं पंचायत समिति सदस्य पदों के लिए वर्गवार आरक्षण तथा महिला आरक्षण का निर्धारण किया गया।
इस अवसर पर अतिरिक्त जिला कलक्टर अरविंद शर्मा, नगर सुधार न्यास सचिव गंगाधर मीणा, पंचायत समितियों के रिटर्निंग अधिकारी तथा विभिन्न राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
    user_पत्रकार दीपक सैनी
    पत्रकार दीपक सैनी
    Court reporter Dausa, Rajasthan•
    8 hrs ago
  • किशनगढ़ बास के बासडा रोड पर स्थित कर्मचारी कॉलोनी के सामने वाली गली में शिवाजी महाराज के मंदिर में पिछले कई दिनों से चल रहे गणेश स्थापना कार्यक्रम का आज समापन हुआ इस मौके पर कॉलोनी वासियों द्वारा दिन में भंडारे का आयोजन किया गया और गणेश महाराज जी का विसर्जन भी किया गया इस मौके पर डीजे के साथ झांकी निकाली गई
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    किशनगढ़ बास के बासडा रोड पर स्थित कर्मचारी कॉलोनी के सामने वाली गली में शिवाजी महाराज के मंदिर में पिछले कई दिनों से चल रहे गणेश स्थापना कार्यक्रम का आज समापन हुआ इस मौके पर कॉलोनी वासियों द्वारा दिन में भंडारे का आयोजन किया गया और गणेश महाराज जी का विसर्जन भी किया गया इस मौके पर डीजे के साथ झांकी निकाली गई
    user_सुनील कान्त गोल्डी
    सुनील कान्त गोल्डी
    रिपोर्टर किशनगढ़ बास, अलवर, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • श्रीगंगानगर में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान विधायक जयदीप बिहाणी का गुस्सा चर्चा में श्रीगंगानगर। नगर परिषद श्रीगंगानगर के नवनिर्वाचित सभापति अजय दावड़ा और उपसभापति पुष्पा रानी का शपथ ग्रहण समारोह गुरुवार को आयोजित हुआ। कार्यक्रम में विधायक जयदीप बिहाणी, भाजपा के कई नेता और अंध विद्यालय के संचालक पद्मश्री ब्रह्मदेव महाराज सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान कुछ लोग बुके लेकर मंच पर शुभकामनाएं देने के लिए पहुंचने लगे। बताया जा रहा है कि विधायक ने उन्हें मंच पर आने से रोका। इसी दौरान बुके फेंके जाने की बात सामने आई, जिसके बाद विधायक जयदीप बिहाणी नाराज हो गए और मंच पर ही अपना आपा खोते नजर आए। वायरल हो रहे वीडियो में विधायक को गुस्से में कहते सुना जा 'सकता है- "ओ कोई तरीको है? अठै बुके फेंक दिया... म्हानै कोई जरूरत कोनी तेरी।" इसके बाद उन्होंने अपने करीबी बंटी वाल्मीकि से संबंधित व्यक्ति को बाहर ले जाने के लिए कहा। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने विधायक को शांत कराने की कोशिश की। मंच पर बैठे अन्य अतिथियों ने पूरे घटनाक्रम के दौरान संयम बनाए रखा। बाद में विधायक को मंच पर बैठाया गया और "सियावर रामचंद्र जी की जय" के उद्घोष के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया।
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    श्रीगंगानगर में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान विधायक जयदीप बिहाणी का गुस्सा चर्चा में
श्रीगंगानगर। नगर परिषद श्रीगंगानगर के नवनिर्वाचित सभापति अजय दावड़ा और उपसभापति पुष्पा रानी का शपथ ग्रहण समारोह गुरुवार को आयोजित हुआ। कार्यक्रम में विधायक जयदीप बिहाणी, भाजपा के कई नेता और अंध विद्यालय के संचालक पद्मश्री ब्रह्मदेव महाराज सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान कुछ लोग बुके लेकर मंच पर शुभकामनाएं देने के लिए पहुंचने लगे। बताया जा रहा है कि विधायक ने उन्हें मंच पर आने से रोका। इसी दौरान बुके फेंके जाने की बात सामने आई, जिसके बाद विधायक जयदीप बिहाणी नाराज हो गए और मंच पर ही अपना आपा खोते नजर आए।
वायरल हो रहे वीडियो में विधायक को गुस्से में कहते सुना जा 'सकता है- "ओ कोई तरीको है? अठै बुके फेंक दिया... म्हानै कोई जरूरत कोनी तेरी।" इसके बाद उन्होंने अपने करीबी बंटी वाल्मीकि से संबंधित व्यक्ति को बाहर ले जाने के लिए कहा।
मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने विधायक को शांत कराने की कोशिश की। मंच पर बैठे अन्य अतिथियों ने पूरे घटनाक्रम के दौरान संयम बनाए रखा। बाद में विधायक को मंच पर बैठाया गया और "सियावर रामचंद्र जी की जय" के उद्घोष के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया।
    user_Sunita sharma
    Sunita sharma
    Court reporter जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • सभापति बनते ही एक्शन मोड में कमल यादव, सुबह-सुबह नगर परिषद पहुंचकर संभाला सफाई व्यवस्था का मोर्चा बहरोड़,नवनिर्वाचित सभापति कमल यादव पदभार संभालते ही एक्शन मोड में आ गए हैं। पदभार ग्रहण करने के साथ ही उन्होंने कामकाज शुरू कर दिया है। सभापति कमल यादव सुबह जल्दी नगर परिषद पहुंचे और सफाई व्यवस्था का मोर्चा संभाला। उन्होंने सफाई कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कमल यादव के नेतृत्व में बहरोड़ में स्वच्छता अभियान शुरू हुआ है। सभापति ने कहा कि अब बहरोड़ को स्वच्छ और सुंदर बनाया जाएगा। शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर सभापति का बड़ा बयान भी सामने आया है। उन्होंने स्वच्छ शहर के संकल्प को दोहराया।
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    सभापति बनते ही एक्शन मोड में कमल यादव, सुबह-सुबह नगर परिषद पहुंचकर संभाला सफाई व्यवस्था का मोर्चा
बहरोड़,नवनिर्वाचित सभापति कमल यादव पदभार संभालते ही एक्शन मोड में आ गए हैं। पदभार ग्रहण करने के साथ ही उन्होंने कामकाज शुरू कर दिया है।
सभापति कमल यादव सुबह जल्दी नगर परिषद पहुंचे और सफाई व्यवस्था का मोर्चा संभाला। उन्होंने सफाई कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
कमल यादव के नेतृत्व में बहरोड़ में स्वच्छता अभियान शुरू हुआ है। सभापति ने कहा कि अब बहरोड़ को स्वच्छ और सुंदर बनाया जाएगा। शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर सभापति का बड़ा बयान भी सामने आया है। उन्होंने स्वच्छ शहर के संकल्प को दोहराया।
    user_NARESH Kumar Khanna
    NARESH Kumar Khanna
    Local News Reporter बहरोड़, अलवर, राजस्थान•
    11 hrs ago
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