बिहार के दरभंगा अंतर्गत लहेरियासराय चट्टी (सिग्नल के पास) से एक बेहद हैरान और परेशान करने वाला नजारा सामने आया है, जहां भारी जाम के बीच खड़े एक व्यक्ति को इतनी तेज पेशाब लगी कि वह बर्दाश्त नहीं कर पाया। मजबूर होकर उसे बीच सड़क पर ही अपनी गाड़ी खड़ी करनी पड़ी और राहगीरों के सामने ही किनारे पर हल्का होना पड़ा। यह घटना शहर की उस गंभीर समस्या को उजागर करती है जिस पर अमूमन लोग बात करने से कतराते हैं, लेकिन यह प्रशासनिक नाकामी से पैदा हुई एक बड़ी मजबूरी बन चुकी है। लाखों की आबादी और रोजाना हजारों राहगीरों की आवाजाही वाले इस मुख्य और व्यस्त मार्ग पर न तो किसी जनप्रतिनिधि का ध्यान है और न ही नगर निगम के अधिकारियों का। शहर में सड़कों को चौड़ा करने और स्मार्ट सिटी के बड़े-बड़े दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन बुनियादी जरूरतें आज भी गायब हैं। पुरुषों को तो मजबूरी में शर्म छोड़कर सड़क किनारे जाना पड़ता है, लेकिन ऐसी स्थिति में महिलाओं को जिस असहनीय पीड़ा और परेशानी से गुजरना पड़ता है उसकी कल्पना भी डरावनी है। स्थानीय जनता इस जमीनी हकीकत को सिस्टम के मुंह पर एक बड़ा तमाचा मान रही है और जिम्मेदार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से जल्द से जल्द यहां सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराने की मांग कर रही है।
बिहार के दरभंगा अंतर्गत लहेरियासराय चट्टी (सिग्नल के पास) से एक बेहद हैरान और परेशान करने वाला नजारा सामने आया है, जहां भारी जाम के बीच खड़े एक व्यक्ति को इतनी तेज पेशाब लगी कि वह बर्दाश्त नहीं कर पाया। मजबूर होकर उसे बीच सड़क पर ही अपनी गाड़ी खड़ी करनी पड़ी और राहगीरों के सामने ही किनारे पर हल्का होना पड़ा। यह घटना शहर की उस गंभीर समस्या को उजागर करती है जिस पर अमूमन लोग बात करने से कतराते हैं, लेकिन यह प्रशासनिक नाकामी से पैदा हुई एक बड़ी मजबूरी बन चुकी है। लाखों की आबादी और रोजाना हजारों राहगीरों की आवाजाही वाले इस मुख्य और व्यस्त मार्ग पर न तो किसी जनप्रतिनिधि का ध्यान है और न ही नगर निगम के अधिकारियों का। शहर में सड़कों को चौड़ा करने और स्मार्ट सिटी के बड़े-बड़े दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन बुनियादी जरूरतें आज भी गायब हैं। पुरुषों को तो मजबूरी में शर्म छोड़कर सड़क किनारे जाना पड़ता है, लेकिन ऐसी स्थिति में महिलाओं को जिस असहनीय पीड़ा और परेशानी से गुजरना पड़ता है उसकी कल्पना भी डरावनी है। स्थानीय जनता इस जमीनी हकीकत को सिस्टम के मुंह पर एक बड़ा तमाचा मान रही है और जिम्मेदार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से जल्द से जल्द यहां सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराने की मांग कर रही है।
- दरभंगा जिला परिषद में विकास योजनाओं में मनमानी और भ्रष्टाचार के खिलाफ कई निर्वाचित सदस्यों ने शनिवार को परिषद परिसर में ही महाधरना शुरू कर दिया है, जिससे इलाके में भारी सियासी हलचल मच गई है। इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे जिला परिषद सदस्य धर्मेंद्र कुमार झा ने जिला परिषद अध्यक्ष के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। धर्मेंद्र झा का गंभीर आरोप है कि जिले में विकास कार्यों को जानबूझकर रोका जा रहा है, जिसके तहत 15वें और 16वें वित्त आयोग की योजनाएं पोर्टल पर लंबित पड़ी हैं। इसके अलावा, 148 स्वीकृत योजनाओं का कार्यादेश अब तक जारी नहीं किया गया है, जिसके चलते मजदूरों और सप्लायर्स का लाखों रुपये का भुगतान महीनों से अटका हुआ है। मामले में बेहद चौंकाने वाली चेतावनी देते हुए धर्मेंद्र कुमार झा ने भावुक होकर कहा कि यदि जिला परिषद में कमीशनखोरी, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो वे आत्मदाह करने को मजबूर हो जाएंगे। इस महाधरना को जिला परिषद उपाध्यक्ष अरुणा कुमारी, लाल कुमार सिंह और मोहम्मद हकीकूल जैसे कई दिग्गज सदस्यों का खुला समर्थन मिला है। इन जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी 10 सूत्री मांगों पर जल्द ही कड़ा फैसला नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन और उग्र रूप अख्तियार करेगा। अब सभी की नजरें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।1
- बिहार के दरभंगा जिले के बहादुरपुर क्षेत्र में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है, जहां स्थानीय मंत्री जी के क्षेत्र में पिछले 10 वर्षों से जमा पानी अब जल प्रलय का रूप ले चुका है। इस भीषण जल जमाव की समस्या के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है और पिछले 6 दिनों से लगातार अनशन जारी है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि स्थानीय लोग अपने-अपने घरों को खाली कर मोहल्ला छोड़कर जाने के लिए पूरी तरह से विवश हो गए हैं।1
- दरभंगा में शहर से सटे जितवारपुर चौथ के पास उत्पाद विभाग और मद्य निषेध विभाग की टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एक हाइवा ट्रक से 249 कार्टून शराब बरामद की है। इस कार्रवाई के दौरान टीम ने ट्रक के चालक को भी मौके से गिरफ्तार कर लिया है। बरामद की गई शराब की कुल कीमत करीब 25 लाख रुपये आंकी गई है। इस मामले में आगे की कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किए गए चालक को न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा।1
- दरभंगा में दुबई की वर्जर (Verger) कंपनी के लिए 400 पदों पर सीधी भर्ती का अवसर सामने आया है। इस भर्ती प्रक्रिया के लिए आगामी 12 जुलाई को वॉक-इन इंटरव्यू का आयोजन किया गया है। यह उन उम्मीदवारों के लिए एक सुनहरा मौका है जो विदेश में रोजगार की तलाश कर रहे हैं।1
- दरभंगा के हायाघाट स्थित निमती चौक पर गुरुवार रात्रि करीब 8:50 बजे हुई एक गोलीकांड की घटना के बाद ग्रामीणों का भारी आक्रोश देखने को मिला। संजीव सिंह नामक व्यक्ति को अज्ञात हमलावरों ने दो गोली मार दी, जिसके बाद स्थानीय लोग सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भड़क गए। आक्रोशित ग्रामीणों ने निमती चौक को पूरी तरह जाम कर दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। सूचना मिलते ही जिला से डीएसपी मौके पर पहुंच गए थे, लेकिन ग्रामीणों ने थाना अध्यक्ष सूरज गुप्ता के देर से पहुंचने पर गंभीर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारी ग्रामीण सुरक्षा की मांग को लेकर घंटों तक प्रशासन के अधिकारियों को वार्ता के लिए इंतजार कराते रहे।1
- बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा द्वारा अपना उम्मीदवार बदले जाने के बाद प्रशांत किशोर ने इस विषय पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। इस बदलाव को लेकर उन्होंने कड़े शब्दों का उपयोग किया है और अपनी नाराजगी स्पष्ट रूप से जाहिर की है। प्रशांत किशोर के इस बयान के बाद इलाके की राजनीतिक चर्चाओं में तेजी आई है। उन्होंने भाजपा की इस निर्णय प्रक्रिया और मौजूदा घटनाक्रम को लेकर मोर्चा खोलते हुए अपनी बात रखी है।1
- बिहार के दरभंगा अंतर्गत लहेरियासराय चट्टी (सिग्नल के पास) से एक बेहद हैरान और परेशान करने वाला नजारा सामने आया है, जहां भारी जाम के बीच खड़े एक व्यक्ति को इतनी तेज पेशाब लगी कि वह बर्दाश्त नहीं कर पाया। मजबूर होकर उसे बीच सड़क पर ही अपनी गाड़ी खड़ी करनी पड़ी और राहगीरों के सामने ही किनारे पर हल्का होना पड़ा। यह घटना शहर की उस गंभीर समस्या को उजागर करती है जिस पर अमूमन लोग बात करने से कतराते हैं, लेकिन यह प्रशासनिक नाकामी से पैदा हुई एक बड़ी मजबूरी बन चुकी है। लाखों की आबादी और रोजाना हजारों राहगीरों की आवाजाही वाले इस मुख्य और व्यस्त मार्ग पर न तो किसी जनप्रतिनिधि का ध्यान है और न ही नगर निगम के अधिकारियों का। शहर में सड़कों को चौड़ा करने और स्मार्ट सिटी के बड़े-बड़े दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन बुनियादी जरूरतें आज भी गायब हैं। पुरुषों को तो मजबूरी में शर्म छोड़कर सड़क किनारे जाना पड़ता है, लेकिन ऐसी स्थिति में महिलाओं को जिस असहनीय पीड़ा और परेशानी से गुजरना पड़ता है उसकी कल्पना भी डरावनी है। स्थानीय जनता इस जमीनी हकीकत को सिस्टम के मुंह पर एक बड़ा तमाचा मान रही है और जिम्मेदार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से जल्द से जल्द यहां सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराने की मांग कर रही है।1