गाजियाबाद के विजय नगर डीपीएस स्कूल के सामने ग्रीन जोन में वर्षों से अवैध कब्जे का आरोप *विजय नगर डीपीएस स्कूल के सामने ग्रीन जोन में वर्षों से अवैध कब्जे का आरोप,* *सब्जी के ठेले, सिलाई मशीन और पटरी कारोबार से सार्वजनिक एवं हरित क्षेत्र प्रभावित होने का दावा—स्थानीय लोगों ने स्थलीय निरीक्षण और कार्रवाई की मांग की* ग्राउंड रिपोर्ट : रविंद्र आर्य गाजियाबाद। विजय नगर स्थित डीपीएस स्कूल के सामने, सिद्धार्थ नगर–विजय नगर चौराहे के पास तथा विधायक संजीव शर्मा के आवास के आसपास ग्रीन जोन और डिवाइडर क्षेत्र में वर्षों से अवैध कब्जे होने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां लंबे समय से सब्जी के ठेले, सिलाई मशीन लगाकर सामान बेचने वाले तथा अन्य पटरी विक्रेता ग्रीन जोन क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए अपना कारोबार कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, सार्वजनिक उपयोग और हरित क्षेत्र के लिए निर्धारित इस स्थान पर लंबे समय से अनेक ठेले और पटरी विक्रेता कारोबार कर रहे हैं। इससे सड़क एवं आसपास के क्षेत्र में यातायात और पैदल आवागमन प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है। लोगों का कहना है कि स्कूलों के आसपास हरित क्षेत्र की सुरक्षा तथा पेड़-पौधों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, लेकिन उक्त स्थान पर ऐसा दिखाई नहीं देता। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि वर्षों से यहां इतने बड़े स्तर पर अस्थायी कब्जे हैं तो संबंधित विभागों द्वारा नियमित निरीक्षण और कार्रवाई क्यों नहीं की गई? *ग्रीन जोन की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था की मांग* स्थानीय लोगों ने नगर निगम, यातायात पुलिस, जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, महापौर, नगर आयुक्त एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मौके का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है। साथ ही यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि उक्त भूमि का वास्तविक भू-उपयोग क्या है और यदि कब्जे अवैध पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। लोगों ने मांग की है कि सड़क के बीच स्थित ग्रीन जोन की सुरक्षा के लिए आवश्यक स्थानों पर खंभे और तार लगाए जाएं, ताकि अवैध कब्जे और आवारा पशुओं की आवाजाही को रोका जा सके। इसके अलावा नगर निगम द्वारा मौके पर सूचना-पट्ट या नोटिस बोर्ड लगाया जाए, जिसमें ग्रीन जोन में अवैध कब्जा करने पर जुर्माने और कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान लिखा हो। *दुकानदारों के लिए नियम और पटरी कब्जों पर सवाल* स्थानीय लोगों का कहना है कि सामान्य दुकानों और प्रतिष्ठानों को किराया, कर एवं अन्य नियमों का पालन करना पड़ता है और सरकार को कर के रूप में राजस्व दिया जाता है। ऐसे में सड़क और सार्वजनिक भूमि पर अस्थायी रूप से कारोबार करने वालों के संबंध में भी नियमों का समान रूप से पालन कराया जाना चाहिए। लोगों का आरोप है कि अवैध कब्जे के कारण वैध रूप से कारोबार करने वाले दुकानदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि ऐसे पटरी क्षेत्रों के आसपास पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे नहीं होने से निगरानी व्यवस्था कमजोर रहती है। स्थानीय स्तर पर यह आशंका भी व्यक्त की गई है कि ऐसी जगहों का फायदा असामाजिक तत्व अथवा नकली मुद्रा चलाने वाले लोग उठा सकते हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति या दुकानदार के खिलाफ नकली मुद्रा से संबंधित शिकायत सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार पीड़ित दुकानदार स्वयं को बचाने के लिए अनजाने में नकली नोट आगे चला देता है, जिसके कारण वास्तविक स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इस प्रकार की किसी भी गतिविधि की पुष्टि केवल पुलिस जांच के बाद ही हो सकती है। *ग्रीन जोन और पेड़-पौधों की सुरक्षा का मामला* स्थानीय लोगों के अनुसार, ग्रीन जोन की उचित घेराबंदी नहीं होने के कारण आवारा पशुओं का समूह यहां पहुंच जाता है और पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाता है। लोगों का कहना है कि यदि क्षेत्र में तार, खंभे अथवा अन्य सुरक्षा व्यवस्था की जाए और नियमित निगरानी हो तो ग्रीन जोन को सुरक्षित रखा जा सकता है। स्थानीय लोगों ने नगर निगम और विधायक संजीव शर्मा से भी इस मामले में गंभीरता से संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि ग्रीन जोन को अवैध कब्जों से मुक्त कराकर पेड़-पौधों की सुरक्षा, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सीसीटीवी निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए। मांग है कि संबंधित विभाग मौके पर निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करें और यदि अवैध कब्जे पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। सूचना/शिकायत हेतु संपर्क: डीपीएस स्कूल एवं स्थानीय लोग
गाजियाबाद के विजय नगर डीपीएस स्कूल के सामने ग्रीन जोन में वर्षों से अवैध कब्जे का आरोप *विजय नगर डीपीएस स्कूल के सामने ग्रीन जोन में वर्षों से अवैध कब्जे का आरोप,* *सब्जी के ठेले, सिलाई मशीन और पटरी कारोबार से सार्वजनिक एवं हरित क्षेत्र प्रभावित होने का दावा—स्थानीय लोगों ने स्थलीय निरीक्षण और कार्रवाई की मांग की* ग्राउंड रिपोर्ट : रविंद्र आर्य गाजियाबाद। विजय नगर स्थित डीपीएस स्कूल के सामने, सिद्धार्थ नगर–विजय नगर चौराहे के पास तथा विधायक संजीव शर्मा के आवास के आसपास ग्रीन जोन और डिवाइडर क्षेत्र में वर्षों से अवैध कब्जे होने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां लंबे समय से सब्जी के ठेले, सिलाई मशीन लगाकर सामान बेचने वाले तथा अन्य पटरी विक्रेता ग्रीन जोन क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए अपना कारोबार कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, सार्वजनिक उपयोग और हरित क्षेत्र के लिए निर्धारित इस स्थान पर लंबे समय से अनेक ठेले और पटरी विक्रेता कारोबार कर रहे हैं। इससे सड़क एवं आसपास के क्षेत्र में यातायात और पैदल आवागमन प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई
है। लोगों का कहना है कि स्कूलों के आसपास हरित क्षेत्र की सुरक्षा तथा पेड़-पौधों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, लेकिन उक्त स्थान पर ऐसा दिखाई नहीं देता। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि वर्षों से यहां इतने बड़े स्तर पर अस्थायी कब्जे हैं तो संबंधित विभागों द्वारा नियमित निरीक्षण और कार्रवाई क्यों नहीं की गई? *ग्रीन जोन की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था की मांग* स्थानीय लोगों ने नगर निगम, यातायात पुलिस, जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, महापौर, नगर आयुक्त एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मौके का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है। साथ ही यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि उक्त भूमि का वास्तविक भू-उपयोग क्या है और यदि कब्जे अवैध पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। लोगों ने मांग की है कि सड़क के बीच स्थित ग्रीन जोन की सुरक्षा के लिए आवश्यक स्थानों पर खंभे और तार लगाए जाएं, ताकि अवैध कब्जे और आवारा पशुओं की आवाजाही को रोका जा सके। इसके अलावा नगर निगम द्वारा मौके पर सूचना-पट्ट या नोटिस बोर्ड लगाया जाए, जिसमें ग्रीन जोन में अवैध
कब्जा करने पर जुर्माने और कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान लिखा हो। *दुकानदारों के लिए नियम और पटरी कब्जों पर सवाल* स्थानीय लोगों का कहना है कि सामान्य दुकानों और प्रतिष्ठानों को किराया, कर एवं अन्य नियमों का पालन करना पड़ता है और सरकार को कर के रूप में राजस्व दिया जाता है। ऐसे में सड़क और सार्वजनिक भूमि पर अस्थायी रूप से कारोबार करने वालों के संबंध में भी नियमों का समान रूप से पालन कराया जाना चाहिए। लोगों का आरोप है कि अवैध कब्जे के कारण वैध रूप से कारोबार करने वाले दुकानदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि ऐसे पटरी क्षेत्रों के आसपास पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे नहीं होने से निगरानी व्यवस्था कमजोर रहती है। स्थानीय स्तर पर यह आशंका भी व्यक्त की गई है कि ऐसी जगहों का फायदा असामाजिक तत्व अथवा नकली मुद्रा चलाने वाले लोग उठा सकते हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति या दुकानदार के खिलाफ नकली मुद्रा से संबंधित शिकायत सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार पीड़ित दुकानदार स्वयं को बचाने के
लिए अनजाने में नकली नोट आगे चला देता है, जिसके कारण वास्तविक स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इस प्रकार की किसी भी गतिविधि की पुष्टि केवल पुलिस जांच के बाद ही हो सकती है। *ग्रीन जोन और पेड़-पौधों की सुरक्षा का मामला* स्थानीय लोगों के अनुसार, ग्रीन जोन की उचित घेराबंदी नहीं होने के कारण आवारा पशुओं का समूह यहां पहुंच जाता है और पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाता है। लोगों का कहना है कि यदि क्षेत्र में तार, खंभे अथवा अन्य सुरक्षा व्यवस्था की जाए और नियमित निगरानी हो तो ग्रीन जोन को सुरक्षित रखा जा सकता है। स्थानीय लोगों ने नगर निगम और विधायक संजीव शर्मा से भी इस मामले में गंभीरता से संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि ग्रीन जोन को अवैध कब्जों से मुक्त कराकर पेड़-पौधों की सुरक्षा, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सीसीटीवी निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए। मांग है कि संबंधित विभाग मौके पर निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करें और यदि अवैध कब्जे पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। सूचना/शिकायत हेतु संपर्क: डीपीएस स्कूल एवं स्थानीय लोग
- 500 मोबाइल की ‘दुकान’ सजी, कीमत एक करोड़ से ज्यादा… पुलिस ने लौटाई लोगों की खोई मुस्कान। गाजियाबाद के ट्रांस हिंडन जोन में बुधवार को पुलिस की प्रेसवार्ता का नजारा कुछ ऐसा था, मानो पुलिस कार्यालय में मोबाइल की दुकान सज गई हो। सामने एक-दो नहीं, बल्कि 500 मोबाइल फोन करीने से रखे थे और इन्हें इस तरह सजाया गया था कि दूर से ही ‘500’ का अंक साफ नजर आ रहा था। चोरी और गुम हुए मोबाइल की बरामदगी के लिए चलाए गए अभियान में ट्रांस हिंडन जोन की साइबर, सर्विलांस और थाना पुलिस ने अलग-अलग कंपनियों के 500 मोबाइल फोन बरामद किए। बरामद मोबाइल की कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। पुलिस ने CEIR पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के आधार पर तकनीकी साक्ष्यों, सर्विलांस और मैनुअल इनपुट की मदद से इन मोबाइल को ट्रेस किया। इसके बाद मोबाइल के वास्तविक स्वामियों की पहचान कर उन्हें फोन वापस सौंप दिए गए। मोबाइल वापस मिलने के बाद स्वामियों के चेहरे पर खुशी साफ नजर आई। किसी को अपना महंगा स्मार्टफोन वापस मिला तो किसी के लिए फोन में मौजूद जरूरी डेटा और यादें वापस मिलना बड़ी राहत रही। सबसे ज्यादा 111 मोबाइल कौशाम्बी थाना, 100 इंदिरापुरम, 81 साहिबाबाद, 66 खोड़ा, 54 टीला मोड़, 45 शालीमार गार्डन और 43 मोबाइल लिंक रोड थाना पुलिस ने बरामद किए। प्रेसवार्ता में जब 500 मोबाइल एक साथ रखे गए, तो पूरा नजारा किसी मोबाइल शोरूम जैसा दिखाई दिया। पुलिस ने भी मोबाइल को कुछ इस अंदाज में सजाया कि ‘500’ का आंकड़ा साफ दिखाई दे, मानो बरामदगी का पूरा हिसाब एक नजर में सामने रख दिया गया हो। 500 मोबाइल की बरामदगी और एक करोड़ से ज्यादा की कीमत—ट्रांस हिंडन पुलिस की इस कार्रवाई ने न सिर्फ आंकड़ा बड़ा किया, बल्कि 500 लोगों के चेहरे पर मुस्कान भी लौटा दी।1
- गाजियाबाद टीला मोड़ पुलिस को मिली बड़ी सफलता, चोरी का खुलासा, 2 आरोपी गिरफ्तार। गाजियाबाद :- थाना टीला मोड़ पुलिस ने चोरी की घटना का पर्दाफाश करते हुए 2 शातिर अभियुक्तों इमरान 25 वर्ष और उसके भाई रिहान उर्फ बाबू 19 वर्ष को तुलसीनिकेतन पशु चिकित्सालय भौपुरा के पास से गिरफ्तार किया है। तुलसीनिकेतन निवासी हैदर अब्बास ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 15 जून से 5 अगस्त के बीच उनके बंद पड़े घर की अलमारी से लगभग ढाई से तीन लाख रुपये और सोने का हार चोरी हो गया था। पुलिस ने धारा 305(a) BNS के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर की सूचना के आधार पर चेकिंग के दौरान 9 सितंबर को दोनों आरोपियों को दबोच लिया गया। अभियुक्तों के पास से चोरी का 1 पीली धातु का गले का हार अनुमानित कीमत ₹2 लाख और ₹5000 नगद बरामद हुए हैं। मामले में धारा 317(2) व 331(4) BNS की बढ़ोतरी कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।2
- ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों हो जाओ सावधान, कहीं आपके भी सामान में ना निकले गोबर ! ग्रेटर नोएडा में ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर बड़ा फ्रॉड! एंड्रॉयड डिवाइस की जगह पैकेट में निकला गोबर ग्रेटर नोएडा में ऑनलाइन ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दनकौर कोतवाली क्षेत्र के आकाश नगर निवासी एक युवक ने वेबसाइट के जरिए एंड्रॉयड डिवाइस ऑर्डर की थी और उसकी पूरी रकम ऑनलाइन भुगतान की थी। बताया जा रहा है कि जब कोरियर घर पहुंचा और युवक ने पैकेट खोलकर देखा तो उसके होश उड़ गए। पैकेट में एंड्रॉयड डिवाइस की जगह गोबर रखा हुआ था। पीड़ित ने इसे ऑनलाइन फ्रॉड बताते हुए पुलिस से शिकायत की है और मामले की जांच कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब सवाल यह है कि आखिर ऑनलाइन ऑर्डर के पैकेट में डिवाइस की जगह गोबर कैसे पहुंच गया? पुलिस मामले की जांच में जुटी है।1
- सपने में सांप देखना पानी देखना पितृ दोष के लक्षण है पितृ दोष के कारण इंसान हमेशा परेशान रहता है पितृदोष मुक्ति के लिए कमेंट करें अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें 85272336461
- गांव कनावनी का धरना लगातार 27 वें दिन भी जारी, किसानों ने कहा—खतौनी से प्राधिकरण का नाम हटाकर किसानों के नाम बहाल किए जाएं दिनांक: 09 सितंबर 2026, बुधवार स्थान: कनावनी गांव कनावनी के किसानों का अपनी मांगों को लेकर चल रहा धरना बुधवार को लगातार 27 वें दिन भी जारी रहा। धरने पर किसानों ने एकजुट होकर कहा कि उनकी खसरा-खतौनी में प्राधिकरण द्वारा दर्ज किए गए नाम को हटाकर किसानों के नाम तत्काल प्रभाव से पुनः बहाल किए जाएं। किसानों ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को अवॉर्ड की प्रक्रिया पूरी करने के लिए छह माह का समय दिया था किसानों का कहना है कि निर्धारित छह माह की अवधि समाप्त होने के बाद भी अब 18 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक कनावनी के किसानों की भूमि का वैध अवॉर्ड घोषित नहीं किया गया है। किसानों ने कहा कि जब भूमि का वैध अवॉर्ड घोषित नहीं हुआ और किसानों को उनकी भूमि का भुगतान भी नहीं किया गया, तो राजस्व रिकॉर्ड में प्राधिकरण का नाम दर्ज रहना उचित नहीं है किसानों का आरोप है कि बिना भुगतान किए ही उनकी भूमि को प्राधिकरण के नाम दर्ज कर दिया गया ऐसे में किसानों की मांग है कि खसरा-खतौनी में दर्ज प्राधिकरण के नाम को हटाकर किसानों के नाम तत्काल बहाल किए जाएं। किसानों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और किसानों ने कहा कि जब तक राजस्व रिकॉर्ड में किसानों के नाम बहाल नहीं किए जाते, तब तक धरना लगातार और अनवरत जारी रहेगा। किसान मथन सिंह नागर ने कहा कि किसानों की मांग उनके अधिकार और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ी है। जब तक किसानों के नाम दोबारा बहाल नहीं किए जाते, तब तक किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेंगे। किसान लखीराम शर्मा ने कहा कि किसानों की भूमि का भुगतान किए बिना उसे प्राधिकरण के नाम दर्ज किया जाना किसानों के साथ अन्याय है किसानों की खसरा-खतौनी में उनका नाम तत्काल वापस दर्ज किया जाना चाहिए। किसान चतर सिंह नागर ने कहा कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठा रहे हैं किसानों का यह संघर्ष अपनी जमीन और राजस्व रिकॉर्ड में अपने अधिकार की बहाली के लिए है और मांग पूरी होने तक जारी रहेगा। किसान परवीन नागर ने कहा कि कनावनी के किसान अपनी मांग को लेकर पूरी तरह एकजुट हैं। जब तक किसानों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में बहाल नहीं किए जाते, तब तक धरना जारी रहेगा। आज धरने में शामिल रहे: श्री चन्द नागर जगदीश शर्मा, महेंद्र नागर, पप्पू बैसला, श्याम सिंह अधाना, देवेन्द्र नागर, भगवत सिंह, तिरखा जाटव, जयपाल नागर, मनीराम नागर अशोक कसाना आदि।1
- गाजियाबाद के विजय नगर डीपीएस स्कूल के सामने ग्रीन जोन में वर्षों से अवैध कब्जे का आरोप *विजय नगर डीपीएस स्कूल के सामने ग्रीन जोन में वर्षों से अवैध कब्जे का आरोप,* *सब्जी के ठेले, सिलाई मशीन और पटरी कारोबार से सार्वजनिक एवं हरित क्षेत्र प्रभावित होने का दावा—स्थानीय लोगों ने स्थलीय निरीक्षण और कार्रवाई की मांग की* ग्राउंड रिपोर्ट : रविंद्र आर्य गाजियाबाद। विजय नगर स्थित डीपीएस स्कूल के सामने, सिद्धार्थ नगर–विजय नगर चौराहे के पास तथा विधायक संजीव शर्मा के आवास के आसपास ग्रीन जोन और डिवाइडर क्षेत्र में वर्षों से अवैध कब्जे होने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां लंबे समय से सब्जी के ठेले, सिलाई मशीन लगाकर सामान बेचने वाले तथा अन्य पटरी विक्रेता ग्रीन जोन क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए अपना कारोबार कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, सार्वजनिक उपयोग और हरित क्षेत्र के लिए निर्धारित इस स्थान पर लंबे समय से अनेक ठेले और पटरी विक्रेता कारोबार कर रहे हैं। इससे सड़क एवं आसपास के क्षेत्र में यातायात और पैदल आवागमन प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है। लोगों का कहना है कि स्कूलों के आसपास हरित क्षेत्र की सुरक्षा तथा पेड़-पौधों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, लेकिन उक्त स्थान पर ऐसा दिखाई नहीं देता। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि वर्षों से यहां इतने बड़े स्तर पर अस्थायी कब्जे हैं तो संबंधित विभागों द्वारा नियमित निरीक्षण और कार्रवाई क्यों नहीं की गई? *ग्रीन जोन की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था की मांग* स्थानीय लोगों ने नगर निगम, यातायात पुलिस, जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, महापौर, नगर आयुक्त एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मौके का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है। साथ ही यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि उक्त भूमि का वास्तविक भू-उपयोग क्या है और यदि कब्जे अवैध पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। लोगों ने मांग की है कि सड़क के बीच स्थित ग्रीन जोन की सुरक्षा के लिए आवश्यक स्थानों पर खंभे और तार लगाए जाएं, ताकि अवैध कब्जे और आवारा पशुओं की आवाजाही को रोका जा सके। इसके अलावा नगर निगम द्वारा मौके पर सूचना-पट्ट या नोटिस बोर्ड लगाया जाए, जिसमें ग्रीन जोन में अवैध कब्जा करने पर जुर्माने और कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान लिखा हो। *दुकानदारों के लिए नियम और पटरी कब्जों पर सवाल* स्थानीय लोगों का कहना है कि सामान्य दुकानों और प्रतिष्ठानों को किराया, कर एवं अन्य नियमों का पालन करना पड़ता है और सरकार को कर के रूप में राजस्व दिया जाता है। ऐसे में सड़क और सार्वजनिक भूमि पर अस्थायी रूप से कारोबार करने वालों के संबंध में भी नियमों का समान रूप से पालन कराया जाना चाहिए। लोगों का आरोप है कि अवैध कब्जे के कारण वैध रूप से कारोबार करने वाले दुकानदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि ऐसे पटरी क्षेत्रों के आसपास पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे नहीं होने से निगरानी व्यवस्था कमजोर रहती है। स्थानीय स्तर पर यह आशंका भी व्यक्त की गई है कि ऐसी जगहों का फायदा असामाजिक तत्व अथवा नकली मुद्रा चलाने वाले लोग उठा सकते हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति या दुकानदार के खिलाफ नकली मुद्रा से संबंधित शिकायत सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार पीड़ित दुकानदार स्वयं को बचाने के लिए अनजाने में नकली नोट आगे चला देता है, जिसके कारण वास्तविक स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इस प्रकार की किसी भी गतिविधि की पुष्टि केवल पुलिस जांच के बाद ही हो सकती है। *ग्रीन जोन और पेड़-पौधों की सुरक्षा का मामला* स्थानीय लोगों के अनुसार, ग्रीन जोन की उचित घेराबंदी नहीं होने के कारण आवारा पशुओं का समूह यहां पहुंच जाता है और पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाता है। लोगों का कहना है कि यदि क्षेत्र में तार, खंभे अथवा अन्य सुरक्षा व्यवस्था की जाए और नियमित निगरानी हो तो ग्रीन जोन को सुरक्षित रखा जा सकता है। स्थानीय लोगों ने नगर निगम और विधायक संजीव शर्मा से भी इस मामले में गंभीरता से संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि ग्रीन जोन को अवैध कब्जों से मुक्त कराकर पेड़-पौधों की सुरक्षा, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सीसीटीवी निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए। मांग है कि संबंधित विभाग मौके पर निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करें और यदि अवैध कब्जे पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। सूचना/शिकायत हेतु संपर्क: डीपीएस स्कूल एवं स्थानीय लोग4
- मुरादनगर पुलिस ने जाटव समाज के नेताओं को किया हाउस अरेस्ट दीपक के परिजनों से मिलना चाहते थे जाटव समाजके लोग हापुड़ के बदनौली में पुरानी रंजिश में दलित युवक दीपक उर्फ गोलू की हत्या, कर दी गई थी नमस्कार, आप देख रहे हैं नेशनल टुडे 24x7। बड़ी खबर हापुड़ के बदनौली से है, जहां पुरानी रंजिश को लेकर हुई फायरिंग में घायल दलित युवक दीपक उर्फ गोलू की मेरठ मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई थी गाजियाबाद के मुरादनगर कस्बे के रहने वाले जाटव समाज के लोग हापुड़ जाने की तैयारी कर रहे थे। मुरादनगर पुलिस ने किया हाउस अरेस्ट* - पुलिस ने पूर्व पार्षद योगेंद्र जाटव की दुकान पर पहुंचकर योगेंद्र जाटव पूर्व पार्षद, कमल जाटव पूर्व पार्षद, सुरेश चंद जाटव बसपा नेता, विनोद जाटव, चंद्र जाटव, नीतू जाटव सभी को हाउस अरेस्ट कर लिया और हापुड़ जाने से रोक दिया। पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुरादनगर थाने पुलिस ने यह कार्रवाई की है। दोनों बने रहिए नेशनल टुडे 24x7 के साथ। *रिपोर्ट: वीरेंद्र पत्रकार*4
- ओडिशा के बालासोर से रेस्क्यू किए गए पांच बेबी ओरंगुटान, जबकि भारत में है बैन! ओडिशा के बालासोर के जंगलों से रेस्क्यू किए गए पांच बेबी ओरंगुटान को भुवनेश्वर के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क लाया गया है. सभी को सीआरएबी में रखा गया है, जहां अब उनकी देखभाल और परवरिश की जाएगी. आपको बता दे कि भारत में और ओरंगुटान जानवर नहीं पाए जाते है, यह ज्यादातर अफ्रीका में पाए जाते हैं, ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यह भारत में कैसे आए!1