मध्य प्रदेश के मैहर स्थित सिविल अस्पताल की व्यवस्थाएँ बद से बदतर हो चुकी हैं, जहाँ लापरवाही और अव्यवस्था का बोलबाला है। पूर्व में, ज़िला प्रशासन ने खबर के बाद अस्पताल का निरीक्षण किया था, जिसके दौरान ज़िला कलेक्टर विदिशा मुखर्जी ने अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही पर कड़ी नाराज़गी व्यक्त की थी। उन्होंने फैली अव्यवस्था को समय रहते दुरुस्त करने का अल्टीमेटम भी दिया था, लेकिन ज़िला कलेक्टर के इन निर्देशों के बावजूद आज तक अस्पताल की बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था में कोई सुधार नहीं आया है। अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के लिए डॉक्टर और नर्स को ढूंढते फिरना पड़ता है। सूत्रकारों के अनुसार, ज़िला स्वास्थ्य अधिकारी का डॉक्टरों को खुला संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते वे मनमानी करते हुए सरकारी तनख्वाह लेने के बावजूद अपनी निजी क्लीनिक चलाते हैं। इसका परिणाम यह है कि मैहर ज़िले से आने वाले सभी मरीज़ परेशान हो रहे हैं, क्योंकि अधिकांश डॉक्टर अपनी निजी क्लीनिक पर मदमस्त रहते हैं। अस्पताल की दुर्दशा इतनी है कि अधिकतर लाइट और पंखे बंद रहते हैं, लैट्रिन-बाथरूम गंदगी से लबालब हैं, और पानी की निकासी की नालियां कचरे से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। मरीजों को मिलने वाले भोजन में भी लापरवाही बरती जा रही है, और ड्यूटी से अधिकांश डॉक्टर नदारत रहते हुए निजी क्लीनिक में मरीजों से मोटी रकम ऐंठते हैं। ड्यूटी पर तैनात महिला नर्सें भी मोबाइल में व्यस्त रहती हैं और मरीज के परिजनों की कई बार गुहार लगाने के बाद भी मरीज़ को देखने नहीं जातीं। अब यह देखना बाकी है कि मैहर सिविल अस्पताल प्रबंधन स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए आख़िर क्या उचित कदम उठाता है, या ऐसा क्या चमत्कार होगा जिससे इस अस्पताल की स्थिति सुधरेगी।
मध्य प्रदेश के मैहर स्थित सिविल अस्पताल की व्यवस्थाएँ बद से बदतर हो चुकी हैं, जहाँ लापरवाही और अव्यवस्था का बोलबाला है। पूर्व में, ज़िला प्रशासन ने खबर के बाद अस्पताल का निरीक्षण किया था, जिसके दौरान ज़िला कलेक्टर विदिशा मुखर्जी ने अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही पर कड़ी नाराज़गी व्यक्त की थी। उन्होंने फैली अव्यवस्था को समय रहते दुरुस्त करने का अल्टीमेटम भी दिया था, लेकिन ज़िला कलेक्टर के इन निर्देशों के बावजूद आज तक अस्पताल की बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था में कोई सुधार नहीं आया है। अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के लिए डॉक्टर और नर्स को ढूंढते फिरना पड़ता है। सूत्रकारों के अनुसार, ज़िला स्वास्थ्य अधिकारी का डॉक्टरों को खुला संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते वे मनमानी करते हुए सरकारी तनख्वाह लेने के बावजूद अपनी निजी क्लीनिक चलाते हैं। इसका परिणाम यह है कि मैहर ज़िले से आने वाले सभी मरीज़ परेशान हो रहे हैं, क्योंकि अधिकांश डॉक्टर अपनी निजी क्लीनिक पर मदमस्त रहते हैं। अस्पताल की दुर्दशा इतनी है कि अधिकतर लाइट और पंखे बंद रहते हैं, लैट्रिन-बाथरूम गंदगी से लबालब हैं, और पानी की निकासी की नालियां कचरे से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। मरीजों को मिलने वाले भोजन में भी लापरवाही बरती जा रही है, और ड्यूटी से अधिकांश डॉक्टर नदारत रहते हुए निजी क्लीनिक में मरीजों से मोटी रकम ऐंठते हैं। ड्यूटी पर तैनात महिला नर्सें भी मोबाइल में व्यस्त रहती हैं और मरीज के परिजनों की कई बार गुहार लगाने के बाद भी मरीज़ को देखने नहीं जातीं। अब यह देखना बाकी है कि मैहर सिविल अस्पताल प्रबंधन स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए आख़िर क्या उचित कदम उठाता है, या ऐसा क्या चमत्कार होगा जिससे इस अस्पताल की स्थिति सुधरेगी।
- टाउन हॉल में रॉयल राजपूत संगठन का एक कार्यक्रम चल रहा था, जब अचानक बिजली चली गई। इस कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर भी उपस्थित थे।1
- जिले के सम्पूर्ण ग्रामीण क्षेत्रों में भाटिया शराब कंपनी के मैनेजर संतोष सिंह के संरक्षण में अवैध शराब का कारोबार तेज़ी से पैर पसार चुका है, जिससे युवा पीढ़ी में नशे की लत लग रही है। यह अवैध धंधा न केवल कानूनी व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन गया है, बल्कि समाज के लिए भी बेहद हानिकारक साबित हो रहा है। आरोप है कि आबकारी विभाग के अधिकारी विजय सिंह की कथित मिलीभगत के कारण इस अवैध कार्य को बढ़ावा मिल रहा है। मा शारदा की धार्मिक नगरी के रूप में प्रसिद्ध मैहर में, यह अवैध शराब का व्यापार शासन के लिए चिंता का विषय बन गया है, खासकर तब जब प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव ने अवैध शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मैहर के नेताओं का आना-जाना उसी रास्ते से होता है जहाँ संतोष सिंह द्वारा अवैध टीन शेड के नीचे शराब बेची जाती है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस अवैध धंधे में नेताओं या प्रशासन की भी सहमति है? अब सभी की निगाहें नवागत जिला कलेक्टर पर टिकी हैं कि वे इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं। ऐसे में, जिला प्रशासन की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह इस अवैध व्यापार को जड़ से खत्म करने के लिए त्वरित और कठोर कार्यवाही करे।1
- सतना जिले के मैहर क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार ग्रामीण इलाकों में मजबूती से फैल चुका है, जिससे युवाओं को शराब की लत लग रही है। इस अवैध धंधे के पीछे मुख्य रूप से भाटिया शराब कंपनी के मैनेजर संतोष सिंह का नाम सुर्खियों में है। मा शारदा की धार्मिक नगरी के रूप में जाने जाने वाले मैहर में यह व्यापार न केवल कानूनी व्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ है, बल्कि समाज के लिए भी हानिकारक है। इस अवैध कार्य को आबकारी विभाग अधिकारी विजय सिंह की कथित मिलीभगत के चलते बढ़ावा मिल रहा है। यह स्थिति तब है जब प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव ने अवैध शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। विडंबना यह है कि मैहर के नेताओं का उसी रास्ते से आना-जाना होता है जहाँ संतोष सिंह द्वारा अवैध टीन शेड के नीचे शराब बेची जाती है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या नेताओं या प्रशासन की भी इस मामले में सहमति है? अब देखने वाली बात यह होगी कि नवागत जिला कलेक्टर इस अवैध धंधे पर अंकुश लगाने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं। ऐसे में, जिला प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह इस अवैध व्यापार को जड़ से खत्म करने के लिए त्वरित और कठोर कार्यवाही करे, क्योंकि गांव-गांव में फैला भाटिया का शराब युवाओं को नशे की लत लगा रहा है।1
- सतना शहर के सिद्धार्थनगर वार्ड में हुई मात्र 10 मिनट की बारिश ने स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस अल्पकालिक बारिश के कारण वार्ड की सड़कें और गलियाँ पूरी तरह से जलमग्न हो गईं, जिससे सिद्धार्थनगर के निवासियों का जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। इस स्थिति ने 'विकास की पोल खोल दी' है, और स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।1
- सतना जिले के कोटर क्षेत्र में स्थित पशु चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. प्रीतम सिंह पर एक किसान ने गंभीर आरोप लगाए हैं। किसान का दावा है कि उनके बीमार बछड़े को उपचार के दौरान डॉक्टर ने गलत दवा दी, जिसके बाद बछड़े की हालत बिगड़ी और कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो गई। पीड़ित किसान ने बताया कि वह अपने बछड़े को इलाज के लिए पशु चिकित्सालय लाया था, जहाँ उपचार और दवा दिए जाने के बाद उसकी तबीयत में सुधार होने के बजाय लगातार गिरावट आती गई। किसान ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह पशुपालकों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। इसी के साथ, पशुपालन विभाग के अधिकारियों से भी इस पूरे मामले की जांच कराए जाने की मांग उठने लगी है।1
- मैहर के विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी ने कहा है कि उनका शहर कई अन्य शहरों की तुलना में बेहतर स्थिति में है। उन्होंने बताया कि मैहर में सीवर लाइन प्रोजेक्ट अपेक्षाकृत कम समय में पूरा हो रहा है।1
- उत्तराखंड के नगरासू स्थित गुरुद्वारा दमदमा साहिब में पंजाब के निहंग सिखों और प्रशासन के बीच तनावपूर्ण गतिरोध जारी है। पार्किंग विवाद के चलते निहंगों ने गुरुद्वारे पर कब्जा कर लिया है और एक सेवादार को बंधक बना लिया है, जिसे एक बड़ी खबर के तौर पर देखा जा रहा है। प्रशासन और पुलिस द्वारा की गई बातचीत बेनतीजा रहने के बाद, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर, चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में धारा 163 (जो आमतौर पर धारा 144 के तहत होती है) लागू कर दी गई है। इसके अतिरिक्त, कर्णप्रयाग क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं को भी बंद कर दिया गया है और भारी संख्या में पुलिस बल तथा आईटीबीपी के जवानों को तैनात किया गया है।1
- उत्तराखंड के नगरासू स्थित गुरुद्वारा दमदमा साहिब में पंजाब के निहंग सिखों और प्रशासन के बीच गहरा गतिरोध पैदा हो गया है। निहंग सिखों ने गुरुद्वारे पर कब्जा कर लिया है और एक सेवादार को बंधक बना लिया है, जिसके चलते इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है। यह गतिरोध पार्किंग विवाद के कारण शुरू हुआ है। प्रशासन और पुलिस द्वारा निहंगों से की गई बातचीत बेनतीजा रही, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है, और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चमोली तथा रुद्रप्रयाग में धारा 163 (144) लागू कर दी गई है। इसके साथ ही, कर्णप्रयाग क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं को भी बंद कर दिया गया है, और भारी संख्या में पुलिस व आईटीबीपी बल तैनात किए गए हैं।1