पापा और मम्मी दोनों जीवित नहीं है, दादा जी का पेंशन का पैसा आएगा तब नया स्कूल ड्रेस आएगा। फिर गुरुजी ने एक शर्ट पैंट दिया। राजस्थान के हिंडौन सिटी के बमनपुरा के राजकीय महात्मा गांधी विद्यालय के इस बच्चे की कहानी आपको भावुक कर देगा । स्थान: बमनपुरा, हिंडौन सिटी (करौली) हिंडौन सिटी। जहाँ एक ओर हम आधुनिक भारत और चमकते स्कूलों की बात करते हैं, वहीं राजस्थान के बमनपुरा से आई एक तस्वीर दिल को झकझोर देने वाली है। यहाँ के 'राजकीय महात्मा गांधी विद्यालय' में पढ़ने वाले एक मासूम बच्चे की व्यथा सुनकर आज हर आँख नम है। "जब दादा की पेंशन आएगी, तब कपड़े आएंगे" इस बच्चे के सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है। घर की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि तन ढकने के लिए नई स्कूल ड्रेस भी एक "लक्जरी" बन गई है। जब स्कूल में अन्य बच्चों को साफ-सुथरी वर्दी में देखा, तो इस मासूम ने अपनी लाचारी एक ही वाक्य में बयां कर दी— "अभी पैसे नहीं हैं, जब दादा जी की पेंशन आएगी, तब नई ड्रेस आएगी।" यह शब्द केवल एक बच्चे की जरूरत नहीं, बल्कि उस संघर्ष की कहानी हैं जो वह हर दिन जी रहा है। दादा की पेंशन ही इस घर का इकलौता सहारा है, और उसी छोटी सी राशि पर मासूम के सुनहरे भविष्य और बुनियादी जरूरतों की उम्मीदें टिकी हैं। गुरु ने निभाया 'पिता' का धर्म बच्चे की इस बेबसी को देखकर विद्यालय के शिक्षकों का दिल पसीज गया। स्कूल के गुरुजी ने मिसाल पेश करते हुए न केवल बच्चे को ढांढस बंधाया, बल्कि अपनी ओर से उसे शर्ट और पैंट (ड्रेस) भेंट की। शिक्षक के इस छोटे से कदम ने बच्चे के चेहरे पर वो मुस्कान लौटा दी, जो गरीबी की परतों के नीचे कहीं दब गई थी। विद्यालय प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे बच्चों को सरकारी योजनाओं के साथ-साथ सामाजिक सहयोग की भी सख्त जरूरत है। मुख्य बिंदु: स्थान: राजकीय महात्मा गांधी विद्यालय, बमनपुरा (हिंडौन)। स्थिति: माता-पिता का निधन, दादा की पेंशन पर निर्भरता। प्रेरणा: शिक्षक द्वारा स्वयं के खर्च पर ड्रेस उपलब्ध कराना। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि हमारे आसपास ऐसे कई 'नन्हे सितारे' हैं जो अभावों के अंधेरे में भी पढ़ने की हिम्मत जुटा रहे हैं। प्रशासन और समाज को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी बच्चे की शिक्षा और उसके सपने सिर्फ "पेंशन के पैसों" के इंतजार में न दम तोड़ें।
पापा और मम्मी दोनों जीवित नहीं है, दादा जी का पेंशन का पैसा आएगा तब नया स्कूल ड्रेस आएगा। फिर गुरुजी ने एक शर्ट पैंट दिया। राजस्थान के हिंडौन सिटी के बमनपुरा के राजकीय महात्मा गांधी विद्यालय के इस बच्चे की कहानी आपको भावुक कर देगा । स्थान: बमनपुरा, हिंडौन सिटी (करौली) हिंडौन सिटी। जहाँ एक ओर हम आधुनिक भारत और चमकते स्कूलों की बात करते हैं, वहीं राजस्थान के बमनपुरा से आई एक तस्वीर दिल को झकझोर देने वाली है। यहाँ के 'राजकीय महात्मा गांधी विद्यालय' में पढ़ने वाले एक मासूम बच्चे की व्यथा सुनकर आज हर आँख नम है। "जब दादा की पेंशन आएगी, तब कपड़े आएंगे" इस बच्चे के सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है। घर की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि तन ढकने के लिए नई स्कूल ड्रेस भी एक "लक्जरी" बन गई है। जब स्कूल में अन्य बच्चों को साफ-सुथरी वर्दी में देखा, तो इस मासूम ने अपनी लाचारी एक ही वाक्य में बयां कर दी— "अभी पैसे नहीं हैं, जब दादा जी की पेंशन आएगी, तब नई ड्रेस आएगी।" यह शब्द केवल एक बच्चे की जरूरत नहीं, बल्कि उस संघर्ष की कहानी हैं जो वह हर दिन जी रहा है। दादा की पेंशन ही इस घर का इकलौता सहारा है, और उसी छोटी सी राशि पर मासूम के सुनहरे भविष्य और बुनियादी जरूरतों की उम्मीदें टिकी हैं। गुरु ने निभाया 'पिता' का धर्म बच्चे की इस बेबसी को देखकर विद्यालय के शिक्षकों का दिल पसीज गया। स्कूल के गुरुजी ने मिसाल पेश करते हुए न केवल बच्चे को ढांढस बंधाया, बल्कि अपनी ओर से उसे शर्ट और पैंट (ड्रेस) भेंट की। शिक्षक के इस छोटे से कदम ने बच्चे के चेहरे पर वो मुस्कान लौटा दी, जो गरीबी की परतों के नीचे कहीं दब गई थी। विद्यालय प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे बच्चों को सरकारी योजनाओं के साथ-साथ सामाजिक सहयोग की भी सख्त जरूरत है। मुख्य बिंदु: स्थान: राजकीय महात्मा गांधी विद्यालय, बमनपुरा (हिंडौन)। स्थिति: माता-पिता का निधन, दादा की पेंशन पर निर्भरता। प्रेरणा: शिक्षक द्वारा स्वयं के खर्च पर ड्रेस उपलब्ध कराना। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि हमारे आसपास ऐसे कई 'नन्हे सितारे' हैं जो अभावों के अंधेरे में भी पढ़ने की हिम्मत जुटा रहे हैं। प्रशासन और समाज को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी बच्चे की शिक्षा और उसके सपने सिर्फ "पेंशन के पैसों" के इंतजार में न दम तोड़ें।
- Arbaz KhanCar Nicobar, Nicobars🫀🥰on 13 March
- Malva Darshan NewsRamganj Mandi, Kota😡on 13 March
- Malva Darshan NewsRamganj Mandi, Kota👏on 13 March
- Post by Mahendar.merotha1
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- Post by Kuamr Sonu1
- Post by जीतू वर्मा1
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- Post by Mahendar.merotha1
- धरना स्थल पर आर पार की लड़ाई की लेंगे शपथ -एक साल 55 दिन से लगातार जारी है जेके मजदूरों का आंदोलन कोटा। बकाया भुगतान की मांग को लेकर 18 फरवरी 2025 से चल रहा जेके फैक्ट्री के मजदूरों का धरना सोमवार को लगातार एक साल और 55 वें दिन भी जारी रहा। सोमवार को नेताओं ने बैठक कर संविधान बचाओ जागरूकता रैली निकालकर 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती मनाने का निर्णय लिया। साथ ही धरना स्थल पर अपने अधिकारों के लिए सरकार से आप पार की लड़ाई करने की शपथ ली जाएगी। नेताओं ने इसके लिए सभी मजदूरों से मंगलवार को सुबह 11 बजे अधिक से अधिक संख्या में धरना स्थल पर आने की अपील की है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू नहीं कर रही सरकार सीटू के मीडिया प्रभारी मुरारीलाल बैरवा ने बताया कि फैक्ट्री बंद होने के समय 4200 मजदूरों-कर्मचारियों का 260 करोड़ रुपये से अधिक वेतन, ग्रेच्युटी और अन्य लाभ बकाया था। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 18 प्रतिशत ब्याज जोड़कर यह राशि 500 करोड़ रुपए से अधिक हो चुकी है। राजस्थान सरकार ने यह स्वीकार किया है कि बकाया फैक्ट्री प्लांट की ओर है।सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2023 में मजदूरों के पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को बकाया भुगतान का आदेश दिया था। इसके बावजूद पालना नहीं हुई। सरकार ने 24 जून 2025 को अराफात ग्रुप को बेदखल कर फैक्ट्री प्लांट की जमीन अपने कब्जे में ले ली, लेकिन मजदूरों को अब तक भुगतान नहीं किया गया। धरने में लगातार बढ़ रही मजदूरों की उपस्थिति 18 फरवरी 2025 से तीनों मजदूर यूनियनों (सीटू से जुड़ी) के संयुक्त नेतृत्व में चल रहा है। सोमवार को यूनियन रजिस्टर में 930 मजदूरों ने उपस्थिति दर्ज कराई, जिसमें सैकड़ों महिलाएं शामिल रहीं। शहर के विकास में बाधा बन रहे जनप्रतिनिधि धरने पर यूनियन रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज करने वाले कामरेड महावीर प्रसाद ने बताया कि धरने में बड़ी संख्या में महिलाएं और परिजन शामिल हैं। कामरेड अली मोहम्मद ने बताया कि धरने को संबोधित करते हुए मजदूर नेता कामरेड हबीब खान, कामरेड उमाशंकर और कामरेड नरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार भूमाफियाओं और कोटा के कारपोरेट दलालों के साथ मिली हुई है। स्थानीय विधायक, सांसद और जनप्रतिनिधि भी शहर के विकास में बाधा बन रहे हैं। बाबा साहेब की प्रतिमा पर करेंगे माल्यार्पण मजदूर नेताओं ने 14 अप्रैल 2026 को संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती पर संविधान बचाओ जागरूकता रैली निकालने की घोषणा की है। रैली जिला कलेक्ट्रेट गेट से शुरू होकर जिला न्यायालय परिसर में बाबा साहेब की प्रतिमा के सामने पहुंचेगी, जहां माल्यार्पण कर मजदूर सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ने की शपथ लेंगे। नेताओं ने कोटा शहर की आम जनता, महिलाओं और मजदूरों से अपील की है कि वे 11 बजे ज्यादा से ज्यादा संख्या में धरना स्थल पर पहुंचें। धरने के दौरान मानव श्रृंखला बनाकर नारेबाजी की गई और जिला कलेक्टर से बकाया वेतन भुगतान की मांग की गई। धरने पर ये रहे मौजूद धरने में कामरेड कालीचरण सोनी, कामरेड केदार जोशी, कामरेड गोपाल शर्मा, कामरेड अली मोहम्मद, कामरेड सतीश चंद त्रिवेदी, कामरेड हनुमान सिंह, कामरेड अशोक सिंह, कामरेड गुलाब शंकर, कामरेड गिरजा शंकर पांडे, कामरेड बच्चन जयसवाल, कामरेड लटूर लाल, कामरेड गणेश प्रसाद, कामरेड रामफूल, कामरेड जेठाराम, कामरेड छीतर लाल, कामरेड भवर लाल, कामरेड लक्ष्मीकांत वाजपेयी सहित सैकड़ों मजदूर डटे हुए हैं। महिला मजदूरों में रेशमा देवी, कैलाशी बाई, राजकुमारी, राजू वर्मा, जाहिदा बानो, नजमा बेगम, बानो बी, शकीला, मंजू कश्यप, बदाम बाई, मोदी बाई, मूर्ति बाई, कबूतरी बाई, धन्नी बाई, मोतिया बाई, उर्मिला बाई आदि बड़ी संख्या में शामिल हैं।4