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योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा के PDA को लेकर कहा कि आप लोग इसका फॉर्मूला ही नहीं बताते। कभी P से पंडित तो कभी पिछड़ा, D से कभी दलित तो कभी डिंपल, A से कभी अगड़ा तो कभी अल्पसंख्यक बताते हो। एक पर डटे रहो तब तो माने कि सही बता रहे हो।

2 hrs ago
user_BSNN
BSNN
Newspaper publisher Pindra, Varanasi•
2 hrs ago

योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा के PDA को लेकर कहा कि आप लोग इसका फॉर्मूला ही नहीं बताते। कभी P से पंडित तो कभी पिछड़ा, D से कभी दलित तो कभी डिंपल, A से कभी अगड़ा तो कभी अल्पसंख्यक बताते हो। एक पर डटे रहो तब तो माने कि सही बता रहे हो।

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  • काशी द्वारा प्रस्तावित योजना के विरोध में चनौली पहुंचे सपा नेता, किसानों की मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन वाराणसी। काशी क्षेत्र में प्रस्तावित योजना को रद्द कराने की मांग को लेकर समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को चनौली गांव पहुंचा। इस दौरान पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह पटेल, चंदौली सांसद वीरेंद्र सिंह, मछलीशहर सांसद प्रिया सरोज, पूर्व मंत्री रीबू श्रीवास्तव, जिला अध्यक्ष सुजीत सिंह लक्कड़ सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और सैकड़ों की संख्या में किसान मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने किसानों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन किसानों की जमीन, आजीविका और भविष्य से समझौता करके नहीं। नेताओं ने कहा कि किसी भी विकास योजना को लागू करने से पहले स्थानीय किसानों से सहमति, पारदर्शी प्रक्रिया और उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाना चाहिए। नेताओं ने मांग की कि प्रस्तावित योजना की शर्तों की दोबारा समीक्षा की जाए, किसानों के हितों की रक्षा की जाए और बिना सहमति किसी भी तरह का अधिग्रहण न किया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अगर किसानों के साथ संवाद और भरोसे का रास्ता अपनाती है तो विकास और किसान हित — दोनों में संतुलन संभव है। किसानों ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उन्हें उनकी जमीन का उचित मूल्य, पुनर्वास और रोजगार की ठोस व्यवस्था चाहिए। किसानों ने मांग की कि किसी भी फैसले से पहले उन्हें भरोसे में लिया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए योजना पर पुनर्विचार करने की मांग की। निष्कर्ष: चनौली में हुए इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास और किसान हितों के बीच संतुलन कैसे बने — जहां बुनियादी ढांचे का विस्तार भी हो और अन्नदाता के अधिकार भी सुरक्षित रहें।
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    काशी द्वारा प्रस्तावित योजना के विरोध में चनौली पहुंचे सपा नेता, किसानों की मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
वाराणसी। काशी क्षेत्र में प्रस्तावित योजना को रद्द कराने की मांग को लेकर समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को चनौली गांव पहुंचा। इस दौरान पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह पटेल, चंदौली सांसद वीरेंद्र सिंह, मछलीशहर सांसद प्रिया सरोज, पूर्व मंत्री रीबू श्रीवास्तव, जिला अध्यक्ष सुजीत सिंह लक्कड़ सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और सैकड़ों की संख्या में किसान मौजूद रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने किसानों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन किसानों की जमीन, आजीविका और भविष्य से समझौता करके नहीं। नेताओं ने कहा कि किसी भी विकास योजना को लागू करने से पहले स्थानीय किसानों से सहमति, पारदर्शी प्रक्रिया और उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
नेताओं ने मांग की कि प्रस्तावित योजना की शर्तों की दोबारा समीक्षा की जाए, किसानों के हितों की रक्षा की जाए और बिना सहमति किसी भी तरह का अधिग्रहण न किया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अगर किसानों के साथ संवाद और भरोसे का रास्ता अपनाती है तो विकास और किसान हित — दोनों में संतुलन संभव है।
किसानों ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उन्हें उनकी जमीन का उचित मूल्य, पुनर्वास और रोजगार की ठोस व्यवस्था चाहिए। किसानों ने मांग की कि किसी भी फैसले से पहले उन्हें भरोसे में लिया जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए योजना पर पुनर्विचार करने की मांग की।
निष्कर्ष: चनौली में हुए इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास और किसान हितों के बीच संतुलन कैसे बने — जहां बुनियादी ढांचे का विस्तार भी हो और अन्नदाता के अधिकार भी सुरक्षित रहें।
    user_गजेन्द्र कुमार सिंह
    गजेन्द्र कुमार सिंह
    Pindra, Varanasi•
    49 min ago
  • योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा के PDA को लेकर कहा कि आप लोग इसका फॉर्मूला ही नहीं बताते। कभी P से पंडित तो कभी पिछड़ा, D से कभी दलित तो कभी डिंपल, A से कभी अगड़ा तो कभी अल्पसंख्यक बताते हो। एक पर डटे रहो तब तो माने कि सही बता रहे हो।
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    योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा के PDA को लेकर कहा कि आप लोग इसका फॉर्मूला ही नहीं बताते। 
कभी P से पंडित तो कभी पिछड़ा, D से कभी दलित तो कभी डिंपल, A से कभी अगड़ा तो कभी अल्पसंख्यक बताते हो। एक पर डटे रहो तब तो माने कि सही बता रहे हो।
    user_BSNN
    BSNN
    Newspaper publisher Pindra, Varanasi•
    2 hrs ago
  • Jai Hind Jay Bharat 🇮🇳🫡
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    Jai Hind Jay Bharat 🇮🇳🫡
    user_Rony Roy singer Varanasi
    Rony Roy singer Varanasi
    Singer Pindra, Varanasi•
    6 hrs ago
  • संसद में उस वक्त माहौल गरमा गया जब एक महिला सांसद ने सरकार पर तीखा हमला बोला। “फिर से चाय बेचेगा तू!” जैसे शब्दों से सदन गूंज उठा और सत्ता पक्ष असहज नजर आया। महिला सांसद ने पूरे आत्मविश्वास के साथ सरकार की नीतियों, बेरोजगारी और महंगाई पर सवाल खड़े किए। उनकी दहाड़ ने न सिर्फ सदन में हलचल मचा दी, बल्कि यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। देखिए पूरा वीडियो और जानिए आखिर ऐसा क्या कहा गया जिसने सियासी तापमान बढ़ा दिया। 👉 वीडियो पसंद आए तो Like, Share और Channel को Subscribe जरूर करें। #SansadLive #ViralSpeech #MahilaSansad #ParliamentNews #PoliticalNews #DeshKiAwaaz #SarkarParHamla #OppositionAttack #BreakingNews #HindiNews #ViralVideo #PoliticsIndia
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    संसद में उस वक्त माहौल गरमा गया जब एक महिला सांसद ने सरकार पर तीखा हमला बोला।
“फिर से चाय बेचेगा तू!” जैसे शब्दों से सदन गूंज उठा और सत्ता पक्ष असहज नजर आया।
महिला सांसद ने पूरे आत्मविश्वास के साथ सरकार की नीतियों, बेरोजगारी और महंगाई पर सवाल खड़े किए। उनकी दहाड़ ने न सिर्फ सदन में हलचल मचा दी, बल्कि यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।
देखिए पूरा वीडियो और जानिए आखिर ऐसा क्या कहा गया जिसने सियासी तापमान बढ़ा दिया।
👉 वीडियो पसंद आए तो Like, Share और Channel को Subscribe जरूर करें।
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#SarkarParHamla
#OppositionAttack
#BreakingNews
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    user_NEWS TIME UP
    NEWS TIME UP
    Waiter/Waitress Bhadohi, Uttar Pradesh•
    4 hrs ago
  • 52 थाल चढ़ावा, पगड़ी बांधे ससुरालीजन; नवरत्न जड़ित छत्र तले सजा राजसी श्रृंगार, बांसफाटक से टेढ़ीनीम तक गूंजा ‘हर-हर महादेव’ वाराणसी। विजया एकादशी की संध्या काशी के लिए केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि लोकआस्था, परंपरा और उल्लास का विराट उत्सव बन गई। सगुन की पीली-पीली हल्दी ने जब भोलेनाथ को दूल्हे के रूप में सजा दिया, तो पूरी नगरी शिवमय हो उठी। बांसफाटक स्थित श्रीमहंत लिंगिया महाराज (शिवप्रसाद पाण्डेय) के आवास ‘धर्म निवास’ से निकली भव्य शोभायात्रा ने टेढ़ीनीम तक ऐसा आध्यात्मिक दृश्य रचा, जिसे देखने हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। डमरुओं की थाप, शंखनाद और “हर-हर महादेव” के गगनभेदी उद्घोष के बीच शोभायात्रा आगे बढ़ी। मार्ग में जगह-जगह पुष्पवर्षा हुई। महिलाएं मंगलगीत गाती रहीं और युवा शिवभक्ति में झूमते नजर आए। जब यह यात्रा टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पहुंची, तब वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य काशी विश्वनाथ मंदिर की पंचबदन चल प्रतिमा पर विधि-विधान से सगुन की हल्दी अर्पित की गई। हल्दी लगते ही बाबा का स्वरूप दूल्हे के तेज में आलोकित हो उठा। दीपों की आभा, धूप-चंदन की सुवास और मंत्रों की गंभीर ध्वनि ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। लोकगीतों में झूमी काशी, परंपरा ने लिया भावनात्मक रूप हल्दी अनुष्ठान के दौरान महिलाओं के कंठ से निकले मंगलस्वर पूरे परिसर में गूंजते रहे— “पीली-पीली हल्दी भोला के लगावा सखी, जल्दी-जल्दी अड़भंगी के भस्म छुड़ावा सखी…” इसके साथ ही और भी लोकगीत गूंजे— “हल्दी के रंग में रंगलें महादेव, गौरा के संग सजे आज देवाधिदेव…” “भोला के अंगेना सजी आज बारात, हल्दी लगावें सखियन, गावे मंगल गात…” इन गीतों ने स्पष्ट कर दिया कि काशी में शिव केवल आराध्य नहीं, बल्कि घर के दूल्हे हैं। यहां हर रस्म में परिवार जैसा अपनापन झलकता है। 52 थालों में सजी श्रद्धा, ससुराल से निभी परंपरा शोभायात्रा की विशेषता रही 52 थालों में सजा चढ़ावा। इन थालों में हल्दी, चंदन, फल, मेवा और मांगलिक सामग्री सजाई गई थी। श्रद्धालुओं ने इन्हें सिर पर धारण कर बाबा के विवाहोत्सव में अपनी सहभागिता निभाई। बाबा के ससुराल माने जाने वाले सारंगनाथ मंदिर से पगड़ी बांधे ससुरालीजन हल्दी लेकर पहुंचे। यह दृश्य किसी पारंपरिक विवाह से कम नहीं था। श्रीमहंत लिंगिया महाराज के नेतृत्व में ससुराली परंपरा निभाई गई। मार्ग में श्रद्धालुओं ने जयघोष किया, बच्चों ने डमरू बजाया और महिलाओं ने मंगलगीतों से वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। 11 वैदिक ब्राह्मणों के मंत्रोच्चार से संपन्न हुआ पूजन टेढ़ीनीम पहुंचने पर 11 वैदिक ब्राह्मणों ने विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया। मंत्रों की गूंज और घी के दीपों की रोशनी के बीच बाबा की पंचबदन प्रतिमा पर हल्दी अर्पित की गई। यह क्षण शिव विवाह की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक बना। श्रद्धालुओं ने इसे अत्यंत मंगलकारी माना और बाबा के दूल्हा स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य समझा। नवरत्न जड़ित छत्र तले सजा राजसी स्वरूप सायंकाल आयोजन से जुड़े संजीव रत्न मिश्र ने बाबा का भव्य श्रृंगार किया। पारंपरिक आभूषणों और पुष्पमालाओं से सुसज्जित बाबा का स्वरूप देखते ही बन रहा था। इसी क्रम में महंत वाचस्पति तिवारी के सानिध्य में नवरत्न जड़ित छत्र का विधिवत पूजन किया गया। छत्र के नीचे विराजमान बाबा का स्वरूप राजसी और अलौकिक प्रतीत हुआ—मानो स्वयं कैलाशपति विवाहोत्सव के लिए काशी के आंगन में विराजे हों। श्रद्धालु देर रात तक दर्शन करते रहे और वातावरण में भक्ति की अविरल धारा बहती रही। धर्म निवास से टेढ़ीनीम तक उमड़ा आस्था का सैलाब बांसफाटक स्थित धर्म निवास से लेकर टेढ़ीनीम तक का मार्ग केवल शोभायात्रा का रास्ता नहीं रहा, बल्कि आस्था की जीवंत धारा बन गया। हर गली-चौराहे पर श्रद्धालु खड़े होकर शोभायात्रा का स्वागत करते रहे। “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के उद्घोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। युवाओं की टोली डमरू बजाती आगे बढ़ी तो महिलाएं थाल सजाकर मंगलगीत गाती रहीं। शिव विवाह की पहली आहट, महाशिवरात्रि की ओर बढ़ते कदम विजया एकादशी पर चढ़ी यह सगुन की हल्दी शिव विवाह की रस्मों की पहली आहट है। अब महाशिवरात्रि तक काशी में विवाहोत्सव की तैयारियां और तेज होंगी। हल्दी की यह रस्म केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि काशी की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव है। यहां परंपरा केवल निभाई नहीं जाती—उसे जिया जाता है, संजोया जाता है और पीढ़ियों तक आगे बढ़ाया जाता है। आस्था, उल्लास और लोकसंस्कृति का संगम पीली-पीली हल्दी के रंग में रची यह शाम एक बार फिर साबित कर गई कि काशी की पहचान उसकी जीवंत लोकपरंपराओं में बसती है। 52 थालों में सजी श्रद्धा, पगड़ी बांधे ससुरालीजन, वैदिक मंत्रों की गूंज और नवरत्न जड़ित छत्र के नीचे सजा दूल्हा स्वरूप—इन सबने मिलकर एक ऐसा दृश्य रचा, जो काशी की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत चित्र बन गया। विजया एकादशी की यह संध्या शिव विवाह की औपचारिक शुरुआत के रूप में याद रखी जाएगी। अब पूरा शहर अपने दूल्हे बाबा की बारात के इंतजार में है—और काशी, एक बार फिर, शिवभक्ति की अनुपम छटा में डूबी हुई है।
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    52 थाल चढ़ावा, पगड़ी बांधे ससुरालीजन; नवरत्न जड़ित छत्र तले सजा राजसी श्रृंगार, बांसफाटक से टेढ़ीनीम तक गूंजा ‘हर-हर महादेव’
वाराणसी। विजया एकादशी की संध्या काशी के लिए केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि लोकआस्था, परंपरा और उल्लास का विराट उत्सव बन गई। सगुन की पीली-पीली हल्दी ने जब भोलेनाथ को दूल्हे के रूप में सजा दिया, तो पूरी नगरी शिवमय हो उठी। बांसफाटक स्थित श्रीमहंत लिंगिया महाराज (शिवप्रसाद पाण्डेय) के आवास ‘धर्म निवास’ से निकली भव्य शोभायात्रा ने टेढ़ीनीम तक ऐसा आध्यात्मिक दृश्य रचा, जिसे देखने हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े।
डमरुओं की थाप, शंखनाद और “हर-हर महादेव” के गगनभेदी उद्घोष के बीच शोभायात्रा आगे बढ़ी। मार्ग में जगह-जगह पुष्पवर्षा हुई। महिलाएं मंगलगीत गाती रहीं और युवा शिवभक्ति में झूमते नजर आए। जब यह यात्रा टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पहुंची, तब वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य काशी विश्वनाथ मंदिर की पंचबदन चल प्रतिमा पर विधि-विधान से सगुन की हल्दी अर्पित की गई।
हल्दी लगते ही बाबा का स्वरूप दूल्हे के तेज में आलोकित हो उठा। दीपों की आभा, धूप-चंदन की सुवास और मंत्रों की गंभीर ध्वनि ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
लोकगीतों में झूमी काशी, परंपरा ने लिया भावनात्मक रूप
हल्दी अनुष्ठान के दौरान महिलाओं के कंठ से निकले मंगलस्वर पूरे परिसर में गूंजते रहे—
“पीली-पीली हल्दी भोला के लगावा सखी,
जल्दी-जल्दी अड़भंगी के भस्म छुड़ावा सखी…”
इसके साथ ही और भी लोकगीत गूंजे—
“हल्दी के रंग में रंगलें महादेव,
गौरा के संग सजे आज देवाधिदेव…”
“भोला के अंगेना सजी आज बारात,
हल्दी लगावें सखियन, गावे मंगल गात…”
इन गीतों ने स्पष्ट कर दिया कि काशी में शिव केवल आराध्य नहीं, बल्कि घर के दूल्हे हैं। यहां हर रस्म में परिवार जैसा अपनापन झलकता है।
52 थालों में सजी श्रद्धा, ससुराल से निभी परंपरा
शोभायात्रा की विशेषता रही 52 थालों में सजा चढ़ावा। इन थालों में हल्दी, चंदन, फल, मेवा और मांगलिक सामग्री सजाई गई थी। श्रद्धालुओं ने इन्हें सिर पर धारण कर बाबा के विवाहोत्सव में अपनी सहभागिता निभाई।
बाबा के ससुराल माने जाने वाले सारंगनाथ मंदिर से पगड़ी बांधे ससुरालीजन हल्दी लेकर पहुंचे। यह दृश्य किसी पारंपरिक विवाह से कम नहीं था। श्रीमहंत लिंगिया महाराज के नेतृत्व में ससुराली परंपरा निभाई गई।
मार्ग में श्रद्धालुओं ने जयघोष किया, बच्चों ने डमरू बजाया और महिलाओं ने मंगलगीतों से वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।
11 वैदिक ब्राह्मणों के मंत्रोच्चार से संपन्न हुआ पूजन
टेढ़ीनीम पहुंचने पर 11 वैदिक ब्राह्मणों ने विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया। मंत्रों की गूंज और घी के दीपों की रोशनी के बीच बाबा की पंचबदन प्रतिमा पर हल्दी अर्पित की गई।
यह क्षण शिव विवाह की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक बना। श्रद्धालुओं ने इसे अत्यंत मंगलकारी माना और बाबा के दूल्हा स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य समझा।
नवरत्न जड़ित छत्र तले सजा राजसी स्वरूप
सायंकाल आयोजन से जुड़े संजीव रत्न मिश्र ने बाबा का भव्य श्रृंगार किया। पारंपरिक आभूषणों और पुष्पमालाओं से सुसज्जित बाबा का स्वरूप देखते ही बन रहा था।
इसी क्रम में महंत वाचस्पति तिवारी के सानिध्य में नवरत्न जड़ित छत्र का विधिवत पूजन किया गया। छत्र के नीचे विराजमान बाबा का स्वरूप राजसी और अलौकिक प्रतीत हुआ—मानो स्वयं कैलाशपति विवाहोत्सव के लिए काशी के आंगन में विराजे हों।
श्रद्धालु देर रात तक दर्शन करते रहे और वातावरण में भक्ति की अविरल धारा बहती रही।
धर्म निवास से टेढ़ीनीम तक उमड़ा आस्था का सैलाब
बांसफाटक स्थित धर्म निवास से लेकर टेढ़ीनीम तक का मार्ग केवल शोभायात्रा का रास्ता नहीं रहा, बल्कि आस्था की जीवंत धारा बन गया। हर गली-चौराहे पर श्रद्धालु खड़े होकर शोभायात्रा का स्वागत करते रहे।
“हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के उद्घोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। युवाओं की टोली डमरू बजाती आगे बढ़ी तो महिलाएं थाल सजाकर मंगलगीत गाती रहीं।
शिव विवाह की पहली आहट, महाशिवरात्रि की ओर बढ़ते कदम
विजया एकादशी पर चढ़ी यह सगुन की हल्दी शिव विवाह की रस्मों की पहली आहट है। अब महाशिवरात्रि तक काशी में विवाहोत्सव की तैयारियां और तेज होंगी।
हल्दी की यह रस्म केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि काशी की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव है। यहां परंपरा केवल निभाई नहीं जाती—उसे जिया जाता है, संजोया जाता है और पीढ़ियों तक आगे बढ़ाया जाता है।
आस्था, उल्लास और लोकसंस्कृति का संगम
पीली-पीली हल्दी के रंग में रची यह शाम एक बार फिर साबित कर गई कि काशी की पहचान उसकी जीवंत लोकपरंपराओं में बसती है। 52 थालों में सजी श्रद्धा, पगड़ी बांधे ससुरालीजन, वैदिक मंत्रों की गूंज और नवरत्न जड़ित छत्र के नीचे सजा दूल्हा स्वरूप—इन सबने मिलकर एक ऐसा दृश्य रचा, जो काशी की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत चित्र बन गया।
विजया एकादशी की यह संध्या शिव विवाह की औपचारिक शुरुआत के रूप में याद रखी जाएगी। अब पूरा शहर अपने दूल्हे बाबा की बारात के इंतजार में है—और काशी, एक बार फिर, शिवभक्ति की अनुपम छटा में डूबी हुई है।
    user_Anurag Kashyap
    Anurag Kashyap
    Sadar, Varanasi•
    7 hrs ago
  • varanasi news banaras news
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    varanasi news 
banaras news
    user_आवाज News
    आवाज News
    सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    18 hrs ago
  • 🚨 ब्रेकिंग: वाराणसी जिला कोर्ट बम से उड़ाने की धमकी! पूरा परिसर खाली, बम निरोधक दस्ता तैनात! 😰 #KachahariBlastAlert #वाराणसी #कचहरी_धमकी #बम_धमकी #वाराणसी_ब्रेकिंग #VaranasiCourt #BombThreatVaranasi #KachahariVaranasi #UPPolice #वाराणसी_न्यूज #ViralVaranasi #BanarasNews #YogiAdityanath #UPNewsLive #वाराणसी_कोर्ट #PoliceAction
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    🚨 ब्रेकिंग: वाराणसी जिला कोर्ट बम से उड़ाने की धमकी! पूरा परिसर खाली, बम निरोधक दस्ता तैनात! 😰 #KachahariBlastAlert #वाराणसी #कचहरी_धमकी #बम_धमकी #वाराणसी_ब्रेकिंग #VaranasiCourt #BombThreatVaranasi #KachahariVaranasi #UPPolice #वाराणसी_न्यूज #ViralVaranasi #BanarasNews #YogiAdityanath #UPNewsLive #वाराणसी_कोर्ट #PoliceAction
    user_Rishu Pathak
    Rishu Pathak
    सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    21 hrs ago
  • नोएडा में वेलेंटाइन डे वाले दिन प्रेमी जोड़े की लाश कार में मिली है… पुलिस का कहना है कि सुमित ने पहले रेखा को गोली मारी फिर खुद को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली। सुमित त्रिलोकपुरी दिल्ली का रहने वाला था और रेखा सेक्टर 58 नोएडा की
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    नोएडा में वेलेंटाइन डे वाले दिन प्रेमी जोड़े की लाश कार में मिली है…
पुलिस का कहना है कि सुमित ने पहले रेखा को गोली मारी फिर खुद को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
सुमित त्रिलोकपुरी दिल्ली का रहने वाला था और रेखा सेक्टर 58 नोएडा की
    user_BSNN
    BSNN
    Newspaper publisher Pindra, Varanasi•
    3 hrs ago
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