मध्य प्रदेश में डबल इंजन सरकार का एक नया कारनामा सामने आया है, जहां बीएड और अन्य शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेजों की मान्यता में भारी घोटाला कर सत्ता ने सारी हदें पार कर दी हैं। तथाकथित रामराज में कागजों पर आलीशान और सुविधाओं से लैस दिखने वाले कई कॉलेज असलियत में खाली खेत या बंद पड़े खंडहर हैं। इन 'अदृश्य' कॉलेजों से हर साल आंकड़ों में सैकड़ों शिक्षक बनकर निकल रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, भोपाल के विदिशा रोड पर स्थित 'श्रीराम कॉलेज' को दस्तावेजों में बड़ा कैंपस दिखाया गया है, लेकिन मौके पर सिर्फ खाली जमीन या दूसरे नाम के कॉलेज ही मिले हैं। हद तो यह है कि कहीं-कहीं एक ही कृषि भूमि पर कागजों में तीन-तीन संस्थान चल रहे हैं और सालों से बंद खंडहरों को डिग्री कॉलेज दिखाया गया है। इस गंभीर शैक्षणिक धोखाधड़ी पर अब बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी भी सवालों के घेरे में है, जहां चौकीदार ही चोर की भूमिका में नजर आ रहा है और विपक्ष ने इस ठगी पर कड़े सवाल उठाए हैं। इस महा ठगी का एक और बड़ा उदाहरण इंदौर के खजराना में सामने आया है, जहां 100 बिस्तरों वाला प्रस्तावित सरकारी अस्पताल पिछले 6 साल से सिर्फ कागजों पर ही चल रहा है। जून 2020 में मंजूर हुए इस 'लापता' अस्पताल के लिए अब तक जमीन भी आवंटित नहीं हुई है और ग्राउंड जीरो पर एक ईंट तक नहीं रखी गई। इसके बावजूद, अस्पताल के लिए स्वीकृत 87 डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्तियां, तबादले और वेतन का खेल आंकड़ों में लगातार जारी है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए इसे जनता के स्वास्थ्य और सरकारी धन का भारी दुरुपयोग बताया है। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों और सरकार ने सफाई दी है कि जमीन न मिलने के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ था और स्टाफ को बेकार बैठाने के बजाय दूसरे अस्पतालों और संजीवनी क्लीनिकों में समायोजित किया गया है।
मध्य प्रदेश में डबल इंजन सरकार का एक नया कारनामा सामने आया है, जहां बीएड और अन्य शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेजों की मान्यता में भारी घोटाला कर सत्ता ने सारी हदें पार कर दी हैं। तथाकथित रामराज में कागजों पर आलीशान और सुविधाओं से लैस दिखने वाले कई कॉलेज असलियत में खाली खेत या बंद पड़े खंडहर हैं। इन 'अदृश्य' कॉलेजों से हर साल आंकड़ों में सैकड़ों शिक्षक बनकर निकल रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, भोपाल के विदिशा रोड पर स्थित 'श्रीराम कॉलेज' को दस्तावेजों में बड़ा कैंपस दिखाया गया है, लेकिन मौके पर सिर्फ खाली जमीन या दूसरे नाम के कॉलेज ही मिले हैं। हद तो यह है कि कहीं-कहीं एक ही कृषि भूमि पर कागजों में तीन-तीन संस्थान चल रहे हैं और सालों से बंद खंडहरों को डिग्री कॉलेज दिखाया गया है। इस गंभीर शैक्षणिक धोखाधड़ी पर अब बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी भी सवालों के घेरे में है, जहां चौकीदार ही चोर की भूमिका में नजर आ रहा है और विपक्ष ने इस ठगी पर कड़े सवाल उठाए हैं। इस महा ठगी का एक और बड़ा उदाहरण इंदौर के खजराना में सामने आया है, जहां 100 बिस्तरों वाला प्रस्तावित सरकारी अस्पताल पिछले 6 साल से सिर्फ कागजों पर ही चल रहा है। जून 2020 में मंजूर हुए इस 'लापता' अस्पताल के लिए अब तक जमीन भी आवंटित नहीं हुई है और ग्राउंड जीरो पर एक ईंट तक नहीं रखी गई। इसके बावजूद, अस्पताल के लिए स्वीकृत 87 डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्तियां, तबादले और वेतन का खेल आंकड़ों में लगातार जारी है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए इसे जनता के स्वास्थ्य और सरकारी धन का भारी दुरुपयोग बताया है। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों और सरकार ने सफाई दी है कि जमीन न मिलने के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ था और स्टाफ को बेकार बैठाने के बजाय दूसरे अस्पतालों और संजीवनी क्लीनिकों में समायोजित किया गया है।
- लखनऊ के सरोजनी नगर में पिछले तीन महीने से सफाई नहीं हुई है। यहाँ सफाई न होने से समस्या बनी हुई है और सबसे बड़ी बात यह है कि इस संबंध में कोई सुनवाई भी नहीं की जा रही है।1
- लखनऊ के दुबग्गा में हमेशा पानी भरा रहने की वजह से बच्चों को स्कूल जाने में काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस जलभराव के कारण आम लोगों को भी भारी परेशानी हो रही है। स्कूल जाते समय बच्चे आधे भीग जाते हैं और उनके कपड़े भी गिर जाते हैं। हमेशा पानी भरे रहने की वजह से बच्चों और स्थानीय लोगों को रोज इस गंभीर समस्या से जूझना पड़ रहा है।2
- लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे की स्थिति अभी से ही बिगड़ने लगी है, जहां अभी से ही भारी जाम लगने लगा है। इसके साथ ही एक्सप्रेसवे के बगल में की गई साफ-सफाई पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या एक्सप्रेसवे के बगल में कोई सफाई की भी गई है या नहीं।1
- लखनऊ के जोन 8 के अंतर्गत आने वाले रुचि खंड 2, निकट फिरंगी खेड़ा में नगर निगम की घोर अनदेखी को लेकर तीखा आक्रोश है। स्थानीय स्तर पर साफ तौर पर आरोप लगाया जा रहा है कि नगर निगम को क्षेत्र में कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। इस प्रशासनिक उदासीनता और लापरवाही के रवैये के खिलाफ स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।1
- मध्य प्रदेश में डबल इंजन सरकार का एक नया कारनामा सामने आया है, जहां बीएड और अन्य शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेजों की मान्यता में भारी घोटाला कर सत्ता ने सारी हदें पार कर दी हैं। तथाकथित रामराज में कागजों पर आलीशान और सुविधाओं से लैस दिखने वाले कई कॉलेज असलियत में खाली खेत या बंद पड़े खंडहर हैं। इन 'अदृश्य' कॉलेजों से हर साल आंकड़ों में सैकड़ों शिक्षक बनकर निकल रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, भोपाल के विदिशा रोड पर स्थित 'श्रीराम कॉलेज' को दस्तावेजों में बड़ा कैंपस दिखाया गया है, लेकिन मौके पर सिर्फ खाली जमीन या दूसरे नाम के कॉलेज ही मिले हैं। हद तो यह है कि कहीं-कहीं एक ही कृषि भूमि पर कागजों में तीन-तीन संस्थान चल रहे हैं और सालों से बंद खंडहरों को डिग्री कॉलेज दिखाया गया है। इस गंभीर शैक्षणिक धोखाधड़ी पर अब बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी भी सवालों के घेरे में है, जहां चौकीदार ही चोर की भूमिका में नजर आ रहा है और विपक्ष ने इस ठगी पर कड़े सवाल उठाए हैं। इस महा ठगी का एक और बड़ा उदाहरण इंदौर के खजराना में सामने आया है, जहां 100 बिस्तरों वाला प्रस्तावित सरकारी अस्पताल पिछले 6 साल से सिर्फ कागजों पर ही चल रहा है। जून 2020 में मंजूर हुए इस 'लापता' अस्पताल के लिए अब तक जमीन भी आवंटित नहीं हुई है और ग्राउंड जीरो पर एक ईंट तक नहीं रखी गई। इसके बावजूद, अस्पताल के लिए स्वीकृत 87 डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्तियां, तबादले और वेतन का खेल आंकड़ों में लगातार जारी है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए इसे जनता के स्वास्थ्य और सरकारी धन का भारी दुरुपयोग बताया है। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों और सरकार ने सफाई दी है कि जमीन न मिलने के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ था और स्टाफ को बेकार बैठाने के बजाय दूसरे अस्पतालों और संजीवनी क्लीनिकों में समायोजित किया गया है।1
- लखनऊ के थाना गाजीपुर क्षेत्र के पॉलिटेक्निक पुलिस चौकी में एक नए अतिरिक्त कक्ष का विधिवत उद्घाटन किया गया है। पहले से संचालित चौकी परिसर में तैयार किए गए इस नए कक्ष का शुभारंभ डीसीपी पूर्वी डॉ. दीक्षा शर्मा ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया। इस खास मौके पर पूरे चौकी परिसर को गुब्बारों और आकर्षक सजावट से सजाया गया था, जिससे कार्यक्रम का माहौल काफी उत्साहपूर्ण रहा। इस उद्घाटन समारोह के दौरान पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे। इनमें एडीसीपी पूर्वी अमोल मुरकुट, एसीपी गाज़ीपुर, थाना गाजीपुर के प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार मौर्य और पॉलिटेक्निक चौकी प्रभारी मनोज कुमार प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इनके साथ ही थाना गाजीपुर के सभी चौकी प्रभारी, उपनिरीक्षक, हेड कांस्टेबल, पुलिसकर्मी और क्षेत्र के कई समाजसेवी व गणमान्य नागरिक भी इस कार्यक्रम के साक्षी बने। इस नवनिर्मित कक्ष के शुरू होने से पुलिस व्यवस्था को और अधिक मजबूती मिलेगी। इससे पुलिस कार्यों के सुचारू संचालन, महत्वपूर्ण अभिलेखों के सुव्यवस्थित रखरखाव और चौकी में अपनी फरियाद लेकर आने वाले लोगों की सुनवाई के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पुलिस सुविधाओं के इस विस्तार से आम जनता को और अधिक प्रभावी व बेहतर पुलिस सेवाएं प्रदान करने में मदद मिलेगी।1
- कल ही शुरू हुए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर व्यवस्था की पोल खुल गई है, जहां उद्घाटन के ठीक अगले ही दिन से लाइटें जलना बंद हो गई हैं। कल ही इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर इसे चालू किया गया था, लेकिन आज से ही यहां की लाइटें गुल हो चुकी हैं। इस लापरवाही को दिखाते हुए एक वीडियो भी साझा किया गया है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि चालू होने के तुरंत बाद ही एक्सप्रेसवे पर लाइटें काम नहीं कर रही हैं।1
- लखनऊ के दुबग्गा में हरदोई रोड स्थित अंधे की चौकी क्षेत्र में भारी जलभराव और सड़कों की खस्ता हालत के कारण ई-रिक्शा पलटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। सड़क पर बने गड्ढों और भीषण जलभराव के चलते महिलाओं और बच्चों सहित कई सवारियों को मामूली चोटें आई हैं। लखनऊ में यह जलभराव अब जानलेवा बन गया है और सड़कों की खस्ताहाल स्थिति ने लोगों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। जल-निकासी की इस बेहद खराब व्यवस्था को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी गुस्सा है। इस मार्ग पर यात्रा करने वालों को अपनी सुरक्षा के लिए फिलहाल इस रास्ते से बचने की सलाह दी गई है। यदि इस मार्ग से गुजरना मजबूरी हो, तो गहरे पानी वाले हिस्सों में जाने से बचने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत उत्तर प्रदेश पुलिस से संपर्क करने को कहा गया है।1