उन्नाव में एक नागरिक ने अपने घर के अत्यधिक निकट लगे सार्वजनिक ट्रांसफार्मर से चौबीसों घंटे दुर्घटना के खतरे की शिकायत की है। उनका कहना है कि यह ट्रांसफार्मर 'साक्षात मौत को बुलावा' है। इसे हटवाने के लिए कई बार ग्राम प्रधान से गुहार लगाई गई, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। एक बार जब ट्रांसफार्मर बदला जा रहा था, तो शिकायतकर्ता ने इसे वहाँ रखने से मना किया और एक जिम्मेदार अधिकारी से बात की। हालांकि, अधिकारी ने समाधान देने के बजाय शिकायतकर्ता को ही एक लाख रुपये का अनुमानित खर्च बताकर पैसे मांगे। अधिकारी ने धमकी भी दी कि यदि ट्रांसफार्मर रखने से रोका गया, तो सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में अंदर कर दिया जाएगा। ग्राम प्रधान ने भी आश्वासन दिया था, लेकिन यह बात आई-गई हो गई और कोई कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ता ने चिंता व्यक्त की है कि यदि कभी ट्रांसफार्मर में खराबी आती है या वह फट जाता है और कोई हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी विद्युत विभाग या सरकार की होगी। उन्होंने आम जनता और सरकार से इस गंभीर समस्या के निदान में सहयोग करने का अनुरोध किया है।
उन्नाव में एक नागरिक ने अपने घर के अत्यधिक निकट लगे सार्वजनिक ट्रांसफार्मर से चौबीसों घंटे दुर्घटना के खतरे की शिकायत की है। उनका कहना है कि यह ट्रांसफार्मर 'साक्षात मौत को बुलावा' है। इसे हटवाने के लिए कई बार ग्राम प्रधान से गुहार लगाई गई, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। एक बार जब ट्रांसफार्मर बदला जा रहा था, तो शिकायतकर्ता ने इसे वहाँ रखने से मना किया और एक जिम्मेदार अधिकारी से बात की। हालांकि, अधिकारी ने समाधान देने के बजाय शिकायतकर्ता को ही एक लाख रुपये का अनुमानित खर्च बताकर पैसे मांगे। अधिकारी ने धमकी भी दी कि यदि ट्रांसफार्मर रखने से रोका गया, तो सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में अंदर कर दिया जाएगा। ग्राम प्रधान ने भी आश्वासन दिया था, लेकिन यह बात आई-गई हो गई और कोई कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ता ने चिंता व्यक्त की है कि यदि कभी ट्रांसफार्मर में खराबी आती है या वह फट जाता है और कोई हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी विद्युत विभाग या सरकार की होगी। उन्होंने आम जनता और सरकार से इस गंभीर समस्या के निदान में सहयोग करने का अनुरोध किया है।
- उन्नाव में एक नागरिक ने अपने घर के अत्यधिक निकट लगे सार्वजनिक ट्रांसफार्मर से चौबीसों घंटे दुर्घटना के खतरे की शिकायत की है। उनका कहना है कि यह ट्रांसफार्मर 'साक्षात मौत को बुलावा' है। इसे हटवाने के लिए कई बार ग्राम प्रधान से गुहार लगाई गई, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। एक बार जब ट्रांसफार्मर बदला जा रहा था, तो शिकायतकर्ता ने इसे वहाँ रखने से मना किया और एक जिम्मेदार अधिकारी से बात की। हालांकि, अधिकारी ने समाधान देने के बजाय शिकायतकर्ता को ही एक लाख रुपये का अनुमानित खर्च बताकर पैसे मांगे। अधिकारी ने धमकी भी दी कि यदि ट्रांसफार्मर रखने से रोका गया, तो सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में अंदर कर दिया जाएगा। ग्राम प्रधान ने भी आश्वासन दिया था, लेकिन यह बात आई-गई हो गई और कोई कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ता ने चिंता व्यक्त की है कि यदि कभी ट्रांसफार्मर में खराबी आती है या वह फट जाता है और कोई हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी विद्युत विभाग या सरकार की होगी। उन्होंने आम जनता और सरकार से इस गंभीर समस्या के निदान में सहयोग करने का अनुरोध किया है।1
- उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक एक दुखद घटना के बाद भावुक हो उठे और उनकी आँखें भर आईं। उन्होंने बताया है कि इस घटना में अब तक 14 बच्चों की मौत हो चुकी है। जानकारी दी गई कि बचाव अभियान के दौरान एक दीवार को तोड़कर लोगों को बाहर निकाला गया।1
- उन्नाव में सदर विधायक पंकज गुप्ता ने अपने निजी आवास स्थित कार्यालय में आयोजित जनता दरबार में लोगों की समस्याओं को सुना। इस दौरान लगभग दो दर्जन से अधिक फरियादी अपनी शिकायतें लेकर विधायक जी के पास पहुंचे, जहाँ विधायक ने तुरंत संबंधित अधिकारियों को फोन लगाकर उनके निस्तारण के निर्देश दिए। जनता दरबार में समाजसेवी पत्रकार मोहम्मद इदरीस ने मुस्कान पैलेस के पीछे लगभग 10 वर्षों से बाँस-बल्लियों के सहारे हो रहे विद्युत उपयोग की जटिल समस्या को उठाते हुए विद्युत खंभे लगवाने की बात कही। इसके साथ ही, उन्होंने लोधनहार चौराहे से लेकर काशीराम रोड तक पक्का मार्ग बनवाने की भी माँग रखी। विधायक पंकज गुप्ता ने जल्द ही आश्वासन दिया कि मुस्कान पैलेस के पीछे विद्युत पोल लगवा दिए जाएँगे और पक्का मार्ग बनवाने के लिए जिलाधिकारी एवं नगर पालिका को अवगत करा दिया जाएगा। विधायक पंकज गुप्ता ने उपस्थित सभी लोगों को जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान करने का भरोसा दिलाया। इस जनता दरबार में अत्ताउल्लाह खान, वारिस अली, अजीजुल हसन और मोहम्मद फैजान सहित कई लोग मौजूद रहे।2
- कानपुर के रावतपुर थाना क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ पीड़िता रत्ना देवी ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर बच्ची होने की आशंका के चलते जबरन गर्भपात कराने और गंभीर मारपीट का आरोप लगाया है। यह मामला 23 जून को एक प्रेस वार्ता के दौरान नेशनल मीडिया प्रेस क्लब कार्यालय में सामने आया, जहाँ पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाई। रत्ना देवी ने पुलिस को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उनकी शादी 21 फरवरी 2025 को रावतपुर गांव निवासी अजय कुरील से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद उन्हें पता चला कि पति किसी अन्य लड़की से बातचीत करता है, जिसका विरोध करने पर अजय कुरील शराब के नशे में उनके साथ मारपीट करने लगा और जान से मारने की धमकी भी दी। जब उन्होंने ससुराल पक्ष से इस संबंध में शिकायत की, तो उन्हें कोई सहयोग नहीं मिला और लगातार मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। मामला तब और गंभीर हो गया जब रत्ना देवी गर्भवती हुईं। अल्ट्रासाउंड के बाद 23 फरवरी 2026 को ससुराल पक्ष को गर्भ में पल रहे बच्चे के लड़की होने की जानकारी मिली। इसके बाद पति अजय कुरील, ससुर अशोक कुमार, सास राजकुमारी और देवर अर्जुन ने कथित तौर पर रत्ना देवी पर जबरन गर्भपात कराने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीड़िता के इनकार करने पर ससुराल पक्ष ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की, आरोप है कि पेट पर लात-घूंसे मारे गए, जिससे गर्भ में पल रही बच्ची की मौत हो गई। मारपीट के दौरान रत्ना देवी बेहोश हो गईं, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और होश आने पर उन्हें अपने गर्भपात होने का पता चला। पीड़िता रत्ना देवी का यह भी आरोप है कि उन्होंने “बेटी बचाओ” हेल्पलाइन, महिला हेल्पलाइन 1090 और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब उन्होंने पुलिस प्रशासन से आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए न्याय की मांग की है। यह मामला न सिर्फ घरेलू हिंसा बल्कि बेटियों के प्रति समाज की विकृत मानसिकता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।1
- उत्तर प्रदेश के वाराणसी में दशाश्वमेध घाट पर गंगा नदी के बीच में एक नाव पर चिकन पकाए जाने और शराब पार्टी होने का एक वीडियो सामने आया है। यह नाव एक बीजेपी पार्षद के स्वामित्व वाली बताई जा रही है, जिसमें यह घटना रिकॉर्ड हुई है। वीडियो में गंगा की पावन जलधारा के बीच में इस तरह की गतिविधियां स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं, जिससे यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।1
- कानपुर के रावतपुर थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक पीड़िता ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज के लालच में तथा गर्भ में पल रही बच्ची के लड़की होने की जानकारी मिलने पर बेरहमी से मारपीट करने का आरोप लगाया है, जिससे उसका गर्भपात हो गया और गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। पीड़िता रत्ना देवी ने 23 जून, मंगलवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान नेशनल मीडिया प्रेस क्लब कार्यालय में अपनी यह समस्या बताई। रत्ना देवी ने पुलिस को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उनकी शादी 21 फरवरी 2025 को रावतपुर गाँव निवासी अजय कुरील से हुई थी। रत्ना देवी के अनुसार, शादी के कुछ समय बाद ही उन्हें पता चला कि उनके पति किसी अन्य लड़की से बातचीत करते हैं। जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो पति अजय कुरील शराब के नशे में उनके साथ मारपीट करने लगे और अक्सर गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी भी देते थे। पीड़िता ने जब ससुराल पक्ष से इस संबंध में शिकायत की, तब भी उन्हें कोई सहयोग नहीं मिला, बल्कि उन्हें लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब रत्ना देवी गर्भवती हुईं। आरोप है कि अल्ट्रासाउंड के बाद 23 फरवरी 2026 को ससुराल पक्ष को यह जानकारी मिली कि गर्भ में पल रहा बच्चा लड़की है। इसके बाद पति अजय कुरील, ससुर अशोक कुमार, सास राजकुमारी और देवर अर्जुन ने कथित तौर पर रत्ना देवी पर जबरन गर्भपात कराने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीड़िता का आरोप है कि जब उन्होंने गर्भपात कराने से इनकार किया, तो ससुराल पक्ष ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की, जिसमें पेट पर लात-घूंसे मारे गए, जिसके परिणामस्वरूप गर्भ में पल रही बच्ची की मौत हो गई। मारपीट के दौरान रत्ना देवी बेहोश हो गईं, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। होश में आने पर रत्ना देवी को पता चला कि उनका गर्भपात हो चुका है। पीड़िता का यह भी आरोप है कि उन्होंने 'बेटी बचाओ' हेल्पलाइन, महिला हेल्पलाइन 1090 और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब पीड़िता ने पुलिस प्रशासन से आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए न्याय की मांग की है। यह मामला न सिर्फ घरेलू हिंसा को उजागर करता है, बल्कि बेटियों के प्रति समाज की विकृत मानसिकता और शासन-प्रशासन की कथित निष्क्रियता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।1
- जगदलपुर में एक भव्य योग आयोजन हुआ, जिसे 'योग का महाकुंभ' और 'योग का महासंगम' बताया गया। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों, विशेषकर महिलाओं और जनप्रतिनिधियों ने अपनी भागीदारी दर्ज की, जिसने सबका ध्यान खींचा और इसे जन जागरूकता की एक मिसाल बना दिया। यह आयोजन एक जन आंदोलन में बदल गया, जहाँ सैकड़ों महिलाओं और जनप्रतिनिधियों ने मिलकर फिट इंडिया का दमदार संदेश दिया। पूरे शहर में अनुशासन और उत्साह का माहौल गूंज उठा, जिससे एक ऐतिहासिक एकजुटता दिखी और स्वस्थ भारत का संकल्प भी दोहराया गया। यह विशेष रिपोर्ट ब्यूरो चीफ हेमू साय के साथ संवाददाता कमल साय द्वारा प्रस्तुत की गई है।1
- एक अत्यंत दुखद घटना में, एक कोचिंग सेंटर ने मौत के जाल का रूप ले लिया है, जिसके चलते 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। इस गंभीर घटना की सूचना मिलते ही, मुख्यमंत्री योगी तुरंत अस्पताल पहुंचे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस पूरे प्रकरण के लिए जिम्मेदार दोषियों के खिलाफ कड़ी और बड़ी कार्रवाई की जाएगी।1