क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, अगमकुआँ, पटना के अंतर्गत 16 जुलाई 2026 को आदिवासी स्वास्थ्य रक्षा अनुसंधान कार्यक्रम 2026-27 के तहत विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया गया। प्रभारी अनुसंधान अधिकारी डॉ० बनमाली दास के दिशा-निर्देशन और परियोजना प्रमुख अन्वेषक व अनुसंधान अधिकारी (आयु०) डॉ० अशोक कुमार सिन्हा के मार्गदर्शन में बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैती प्रखंड अंतर्गत मोहनपुर गाँव में एक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में कुल 50 लाभार्थी रोगियों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला। इसी कड़ी में, भारत भर में आयुष चिकित्सा पद्धति पर विशेष ध्यान देते हुए जनसंख्या के स्वास्थ्य-सेवा लेने के व्यवहार और प्रमुख स्वास्थ्य प्रणाली हितधारकों की धारणा का मूल्यांकन करने के लिए एक समुदाय-आधारित क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन के तहत सर्वे भी किया गया। परियोजना के इस कार्यक्रम के अंतर्गत आज कुल 11 घरों का सर्वे सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में परियोजना के सदस्य मुख्य रूप से सम्मिलित रहे, जिनमें अनुसंधान अधिकारी डॉ० अशोक कुमार सिन्हा, एस.आर.एफ. डॉ. कैलाश कुमार पटेल, एस.आर.एफ. डॉ० शमीम आलम, फार्मासिस्ट श्री अर्नब मेटे, एम.टी.ए. श्री ललन कुमार पासवान और वाहन चालक श्री मनोज कुमार शामिल हैं।
क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, अगमकुआँ, पटना के अंतर्गत 16 जुलाई 2026 को आदिवासी स्वास्थ्य रक्षा अनुसंधान कार्यक्रम 2026-27 के तहत विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया गया। प्रभारी अनुसंधान अधिकारी डॉ० बनमाली दास के दिशा-निर्देशन और परियोजना प्रमुख अन्वेषक व अनुसंधान अधिकारी (आयु०) डॉ० अशोक कुमार सिन्हा के मार्गदर्शन में बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैती प्रखंड अंतर्गत मोहनपुर गाँव में एक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में कुल 50 लाभार्थी रोगियों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला। इसी कड़ी में, भारत भर में आयुष चिकित्सा पद्धति पर विशेष ध्यान देते हुए जनसंख्या के स्वास्थ्य-सेवा लेने के व्यवहार और प्रमुख स्वास्थ्य प्रणाली हितधारकों की धारणा का मूल्यांकन करने के लिए एक समुदाय-आधारित क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन के तहत सर्वे भी किया गया। परियोजना के इस कार्यक्रम के अंतर्गत आज कुल 11 घरों का सर्वे सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में परियोजना के सदस्य मुख्य रूप से सम्मिलित रहे, जिनमें अनुसंधान अधिकारी डॉ० अशोक कुमार सिन्हा, एस.आर.एफ. डॉ. कैलाश कुमार पटेल, एस.आर.एफ. डॉ० शमीम आलम, फार्मासिस्ट श्री अर्नब मेटे, एम.टी.ए. श्री ललन कुमार पासवान और वाहन चालक श्री मनोज कुमार शामिल हैं।
- क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, अगमकुआँ, पटना के अंतर्गत 16 जुलाई 2026 को आदिवासी स्वास्थ्य रक्षा अनुसंधान कार्यक्रम 2026-27 के तहत विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया गया। प्रभारी अनुसंधान अधिकारी डॉ० बनमाली दास के दिशा-निर्देशन और परियोजना प्रमुख अन्वेषक व अनुसंधान अधिकारी (आयु०) डॉ० अशोक कुमार सिन्हा के मार्गदर्शन में बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैती प्रखंड अंतर्गत मोहनपुर गाँव में एक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में कुल 50 लाभार्थी रोगियों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला। इसी कड़ी में, भारत भर में आयुष चिकित्सा पद्धति पर विशेष ध्यान देते हुए जनसंख्या के स्वास्थ्य-सेवा लेने के व्यवहार और प्रमुख स्वास्थ्य प्रणाली हितधारकों की धारणा का मूल्यांकन करने के लिए एक समुदाय-आधारित क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन के तहत सर्वे भी किया गया। परियोजना के इस कार्यक्रम के अंतर्गत आज कुल 11 घरों का सर्वे सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में परियोजना के सदस्य मुख्य रूप से सम्मिलित रहे, जिनमें अनुसंधान अधिकारी डॉ० अशोक कुमार सिन्हा, एस.आर.एफ. डॉ. कैलाश कुमार पटेल, एस.आर.एफ. डॉ० शमीम आलम, फार्मासिस्ट श्री अर्नब मेटे, एम.टी.ए. श्री ललन कुमार पासवान और वाहन चालक श्री मनोज कुमार शामिल हैं।1
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- प्रयागराज के नैनी ब्रिज पर साथ मिलकर जान देने की कसम खाने वाले एक प्रेमी जोड़े में से प्रेमी तो कूद गया, लेकिन प्रेमिका उसे छोड़कर भाग गई। दोनों साथ में जान देने का वादा करके ब्रिज पर पहुंचे थे। जब दोनों छलांग लगाने लगे तो प्रेमी पहले कूद गया। प्रेमी को कूदते देख प्रेमिका की हिम्मत जवाब दे गई और वह मौके से भाग खड़ी हुई। गनीमत रही कि वहां मौजूद गोताखोरों ने फुर्ती दिखाते हुए प्रेमी की जान बचा ली और वह अब पूरी तरह सुरक्षित है। इस घटना के बाद अब यह बड़ा सवाल है कि क्या किसी पर भरोसा करना सही है, जहां साथ में मरने की कसमें खाने वाली प्रेमिका ही प्रेमी को ऐसे छोड़कर भाग गई।1