महंगी चीनी का कारण क्या एथेनॉल है? सरकार ने बताई सच्चाई त्यौहारों का मौसम आते ही चीनी के दाम भी बढ़ना शुरू हो गए हैं, इसे लेकर कई लोगों ने कहा कि ये सब एथेनॉल की वजह से हो रहा है. अब हाल ही में सरकार ने इस पर सफाई पेश की है.चीनी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बाद केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन में इसकी उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए कई कदम उठाए हैं. सरकार के मुताबिक 20 जुलाई को चीनी की औसत कीमत 48.18 रुपये प्रति किलो थी जो 20 अगस्त को बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई.गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर बीमारी के साथ ज्यादा बारिश और जलभराव से भी नुकसान हुआ है. इसके अलावा त्योहारी सीजन में मांग बढ़ना कुछ कारोबारियों और मिलों की जमाखोरी और दुनियाभर में चीनी की सप्लाई कम होना भी कीमत बढ़ने की वजह बताई गई है.दुनिया में भी चीनी की सप्लाई पर दबाव चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. सरकार के मुताबिक 2026-27 में दुनिया में करीब 33 लाख टन चीनी की कमी रहने का अनुमान है. इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गई यानी करीब दो महीने में 16% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट सरकार ने चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए डीलरों पर 400 टन की स्टॉक लिमिट लगा दी है. यह नियम 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा. 1 सितंबर से बड़े खरीदार यानी बल्क कंज्यूमर्स 15 दिन की खपत से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे. केंद्र और राज्य सरकार की टीमें चीनी मिलों में जाकर स्टॉक की जांच भी कर रही हैं ताकि जमाखोरी और कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशों पर रोक लगाई जा सके. 10 लाख टन चीनी का ड्यूटी-फ्री आयात घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति देने का फैसला किया है. साथ ही राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से क्रशिंग शुरू करने की सलाह दी गई है. सरकार का अनुमान है कि इससे अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 3-4 लाख टन के मुकाबले बढ़कर 10 लाख टन से ज्यादा हो सकता है. सरकार का कहना है कि इन कदमों से त्योहारी सीजन में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी.
महंगी चीनी का कारण क्या एथेनॉल है? सरकार ने बताई सच्चाई त्यौहारों का मौसम आते ही चीनी के दाम भी बढ़ना शुरू हो गए हैं, इसे लेकर कई लोगों ने कहा कि ये सब एथेनॉल की वजह से हो रहा है. अब हाल ही में सरकार ने इस पर सफाई पेश की है.चीनी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बाद केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन में इसकी उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए कई कदम उठाए हैं. सरकार के मुताबिक 20 जुलाई को चीनी की औसत कीमत 48.18 रुपये प्रति किलो थी जो 20 अगस्त को बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई.गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर बीमारी के साथ ज्यादा बारिश और जलभराव से भी नुकसान हुआ है. इसके अलावा त्योहारी सीजन में मांग बढ़ना कुछ कारोबारियों और मिलों की जमाखोरी और दुनियाभर में चीनी की सप्लाई कम होना भी कीमत बढ़ने की वजह बताई गई है.दुनिया में भी चीनी की सप्लाई पर दबाव चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. सरकार के मुताबिक 2026-27 में दुनिया में करीब 33 लाख टन चीनी की कमी रहने का अनुमान है. इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन
से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गई यानी करीब दो महीने में 16% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट सरकार ने चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए डीलरों पर 400 टन की स्टॉक लिमिट लगा दी है. यह नियम 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा. 1 सितंबर से बड़े खरीदार यानी बल्क कंज्यूमर्स 15 दिन की खपत से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे. केंद्र और राज्य सरकार की टीमें चीनी मिलों में जाकर स्टॉक की जांच भी कर रही हैं ताकि जमाखोरी और कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशों पर रोक लगाई जा सके. 10 लाख टन चीनी का ड्यूटी-फ्री आयात घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति देने का फैसला किया है. साथ ही राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से क्रशिंग शुरू करने की सलाह दी गई है. सरकार का अनुमान है कि इससे अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 3-4 लाख टन के मुकाबले बढ़कर 10 लाख टन से ज्यादा हो सकता है. सरकार का कहना है कि इन कदमों से त्योहारी सीजन में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी.
- महंगी चीनी का कारण क्या एथेनॉल है? सरकार ने बताई सच्चाई त्यौहारों का मौसम आते ही चीनी के दाम भी बढ़ना शुरू हो गए हैं, इसे लेकर कई लोगों ने कहा कि ये सब एथेनॉल की वजह से हो रहा है. अब हाल ही में सरकार ने इस पर सफाई पेश की है.चीनी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बाद केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन में इसकी उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए कई कदम उठाए हैं. सरकार के मुताबिक 20 जुलाई को चीनी की औसत कीमत 48.18 रुपये प्रति किलो थी जो 20 अगस्त को बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई.गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर बीमारी के साथ ज्यादा बारिश और जलभराव से भी नुकसान हुआ है. इसके अलावा त्योहारी सीजन में मांग बढ़ना कुछ कारोबारियों और मिलों की जमाखोरी और दुनियाभर में चीनी की सप्लाई कम होना भी कीमत बढ़ने की वजह बताई गई है.दुनिया में भी चीनी की सप्लाई पर दबाव चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. सरकार के मुताबिक 2026-27 में दुनिया में करीब 33 लाख टन चीनी की कमी रहने का अनुमान है. इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गई यानी करीब दो महीने में 16% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट सरकार ने चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए डीलरों पर 400 टन की स्टॉक लिमिट लगा दी है. यह नियम 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा. 1 सितंबर से बड़े खरीदार यानी बल्क कंज्यूमर्स 15 दिन की खपत से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे. केंद्र और राज्य सरकार की टीमें चीनी मिलों में जाकर स्टॉक की जांच भी कर रही हैं ताकि जमाखोरी और कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशों पर रोक लगाई जा सके. 10 लाख टन चीनी का ड्यूटी-फ्री आयात घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति देने का फैसला किया है. साथ ही राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से क्रशिंग शुरू करने की सलाह दी गई है. सरकार का अनुमान है कि इससे अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 3-4 लाख टन के मुकाबले बढ़कर 10 लाख टन से ज्यादा हो सकता है. सरकार का कहना है कि इन कदमों से त्योहारी सीजन में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी.2
- नीमच में जनसुनवाई शिविर, 12 सीएम हेल्पलाइन शिकायतों का संतुष्टिपूर्वक निराकरण नीमच में पुलिस कंट्रोल रूम स्थित सभाकक्ष में 25 अगस्त को जिला स्तरीय जनसुनवाई एवं शिकायत निवारण शिविर आयोजित हुआ। पुलिस अधीक्षक श्री राजेश व्यास ने आवेदकों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और संबंधित थाना प्रभारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। शिविर में सीएम हेल्पलाइन की लेवल-1, 2 और 3 की 12 शिकायतों का संतुष्टिपूर्वक निराकरण कर उन्हें बंद करवाया गया। वहीं करीब 26 आवेदकों ने अपनी समस्याएं एसपी के समक्ष रखीं। एसपी ने अधिकारियों को समयबद्ध और निष्पक्ष कार्रवाई के निर्देश दिए। शिविर में भूमि विवाद, पुलिस कार्रवाई सहित विभिन्न मामलों पर सुनवाई की गई।1
- नन्हे हाथों का हरियाली संकल्प बी.आर. संस्था ने दिया पर्यावरण जागरूकता संदेश नीमच। की बी.आर. संस्था फाउंडेशन ने राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय, शाहपुरा में 'उत्सव अभियान' के तहत पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया, जिसका नेतृत्व बाल पर्यावरण योद्धा श्रेया कुमावत ने किया। संस्था के संस्थापक कृष्ण परिहार के जन्मदिन पर आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं ने वृक्षारोपण, जल संरक्षण, और प्लास्टिक मुक्त वातावरण का संकल्प लिया। कार्यक्रम में फिजूलखर्ची के बजाय जन्मदिन और वर्षगांठ जैसे अवसरों को समाजसेवा और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का संदेश दिया गया।1
- NEWS:-पिपलिया स्टेशन पर रेल सुविधाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन, हनुमान चालीसा का पाठ कर जताया विरोध मनासा।पिपलिया रेलवे स्टेशन पर यात्री ट्रेनों के ठहराव सहित विभिन्न रेल समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर मंगलवार को रेल सुविधा विस्तार समिति के बैनर तले नगर व क्षेत्रवासियों ने प्रदर्शन किया। सुबह 10 बजे स्टेशन स्थित बालाजी मंदिर पर समिति सदस्यों ने हनुमान चालीसा का पाठ कर रेलवे अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को सद्बुद्धि देने की कामना की। इसके बाद नारेबाजी करते हुए क्षेत्रवासी स्टेशन कार्यालय पहुंचे और मंडल रेल प्रबंधक के नाम स्टेशन अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया कि पिपलिया स्टेशन क्षेत्र का महत्वपूर्ण कृषि, व्यापारिक एवं आवागमन का केंद्र है। यह स्टेशन आसपास के दर्जनों गांवों एवं कस्बों के लिए प्रमुख रेल संपर्क माध्यम है। क्षेत्र के किसान अपनी कृषि उपज के परिवहन, व्यापारी व्यापारिक कार्यों, विद्यार्थी शिक्षा तथा श्रमिक एवं कर्मचारी रोजगार एवं दैनिक आवागमन के लिए इसी स्टेशन पर निर्भर हैं। इसके अलावा धार्मिक, सामाजिक एवं पारिवारिक कारणों से भी बड़ी संख्या में यात्री प्रतिदिन यहां से रेल यात्रा करते हैं। समिति ने कहा कि इसके बावजूद पिपलिया स्टेशन पर कई आवश्यक रेल सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। यात्री ट्रेनों के पर्याप्त ठहराव नहीं होने से क्षेत्रवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों को अन्य स्टेशनों पर जाकर ट्रेन पकड़ने की मजबूरी रहती है, जिससे समय एवं धन दोनों की अतिरिक्त बर्बादी होती है।क्षेत्रवासियों ने रेलवे से पिपलिया स्टेशन पर प्रमुख यात्री ट्रेनों के ठहराव शुरू करने, बंद किए गए ठहरावों को पुनः बहाल करने तथा स्टेशन पर आवश्यक यात्री सुविधाओं का विस्तार करने की मांग की। समिति ने चेतावनी दी कि मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं हुआ तो आगामी दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।1
- श्री सांवरिया सेठ जी के आज के लाइव दर्शन 🙏✨ | घर बैठे करें प्रभु के दिव्य दर्शन, पाएं सेठ जी का आशीर्वाद 🌺❤️ श्री सांवरिया सेठ जी के आज के लाइव दर्शन 🙏✨ | घर बैठे करें प्रभु के दिव्य दर्शन, पाएं सेठ जी का आशीर्वाद 🌺❤️1
- डीएसटी की कार्रवाई, 10 हजार रुपये का इनामी आरोपी गिरफ्तार। दैनिक वीरधरा राजस्थान। चित्तौड़गढ़। डीएसटी ने कार्रवाई करते हुए पुलिस थाना शंभूपुरा के एनडीपीएस एक्ट के प्रकरण में वांछित 10 हजार रुपये के इनामी आरोपी कमलेश पाटीदार को गिरफ्तार किया है। जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि वांछित आरोपी गिरफ्तार करने हेतु पुलिस निरीक्षक जोधाराम के निर्देशन में डीएसटी प्रभारी एएसआई सूरज कुमार मय जाप्ते की टीम गठित की गई जरिए मुखबिर एएसआई सूरज कुमार को सूचना मिली कि जिले के शंभूपुरा थाने के एनडीपीएस के प्रकरण में वांछित ₹10,000 का इनामी कमलेश पाटीदार अपने घर पर आया हुआ है और आज मनासा किसी काम से आएगा सूचना विश्वसनीय होने से टीम प्रभारी मय टीम के मनासा बस स्टैंड पहुंचे जहां पर चुकनी की तरफ से आने वाली बस से मुखबिर के बताए हुए हुलिए का एक आदमी बस से उतरा जिसको पड़कर नाम पता पूछा तो उसने अपना नाम कमलेश पिता मांगीलाल जाति पाटीदार निवासी चुकनी थाना मनासा, जिला नीमच (एमपी) होना बताया, जिसे डिटेन कर शंभूपुरा थाना पुलिस को अग्रिम अनुसंधान हेतु सुपुर्द किया गया। आरोपी स्वयं कोई मोबाइल नहीं रखता नहीं कोई डिवाइस रखता था सुबह शाम ही घर पर रहता था दिन में बाहर खेतों में घूम फिर कर समय व्यतीत करता था।1
- घुटने साईटिका सर्वाइकल सिर दर्द का सफ़ल ईलाज आयुष हॉस्पिटल चितौड़गढ़ में हो रहा है 83020838352
- केंद्र सरकार ने बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के लिए ₹35 प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर प्याज बेचने का फैसला त्योहारों का सीजन आ रहा है. इस दौरान लाखों भारतीय परिवारों के लिए प्याज की बढ़ती कीमतों को नजरअंदाज करना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है. ऐसे में देश भर में प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम कसने के लिए सरकार ने अपने रिजर्व स्टॉक को स्पेशल रेलवे रैक के जरिए उन शहरों में भेजने का काम शुरू कर दिया है, जहां प्याज के लिए ग्राहकों को ज्यादा कीमतें चुकानी पड़ रही हैं. सरकार ने इस ऑपरेउपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के मुताबिक, शुरुआती स्तर में यह प्याज देश के 5 बड़े उच्च-खपत वाले शहरों में भेजा जा रहा है, जहां इसे 35 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर बेचा जाएगा. अभी जिस खेप की 'कांदा एक्सप्रेस' में लोडिंग की जा रही है, उसके बुधवार, 26 अगस्त तक तय बाजारों में पहुंचने की उम्मीद है. 'कांदा एक्सप्रेस' के पहले चरण के 5 प्रमुख शहर दिल्ली (Delhi / NCR)चेन्नई (Chennai)मदुरै (Madurai)एर्नाकुलम / कोच्चि (Ernakulam / Kochi)गुवाहाटी (Guwahati)शन का नाम 'कांदा एक्सप्रेस' रखा है. केंद्र का यह फैसला देश भर में प्याज की कीमतों में तेजी से हुई बढ़ोतरी के बाद आया है. 24 अगस्त को यानी कि कल सोमवार को पूरे देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 43.53 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल यह 27.37 रुपये थी. यानी कि साल भर में कीमतों में 59% से ज्यादा का उछाल आया है. औसत थोक कीमत भी सालाना आधार पर 68% बढ़कर 35.58 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई. दिल्ली और चेन्नई जैसे कुछ बड़े शहरों के खुदरा बाजारों में प्याज 55 से 65 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है. कोलकाता में भी कीमत 53 रुपये प्रति किलोग्राम है. अगस्त-सितंबर में त्योहारी मांग और मौसम की दिक्कतों के कारण कीमतों में आए इस उछाल को रोकने के लिए सरकार के पास 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक मौजूद है, जिसे चरणों में जारी किया जा रहा है.2