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लखनऊ के याहियागंज वार्ड में याहियागंज चौकी से महज कुछ ही कदमों की दूरी पर स्थित सूरज धागा स्टोर द्वारा लंबे समय से भारी गंदगी फैलाई गई है। इस गंदगी की काफी समय से सफाई नहीं की गई है, जिसके चलते वहां से गुजरने वाले स्थानीय लोग इस गंदगी के बीच से ही आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। इलाके में फैली असहनीय बदबू के कारण स्थानीय लोगों का जीना बेहद मुश्किल हो चुका है। यह गंदगी अब लोगों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है और संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए बच्चों के अभिभावकों में गहरी चिंता बनी हुई है। सूरज धागे वाले द्वारा इस गंदगी को साफ नहीं कराए जाने और जिम्मेदारों की इस घोर लापरवाही पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
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लखनऊ के याहियागंज वार्ड में याहियागंज चौकी से महज कुछ ही कदमों की दूरी पर स्थित सूरज धागा स्टोर द्वारा लंबे समय से भारी गंदगी फैलाई गई है। इस गंदगी की काफी समय से सफाई नहीं की गई है, जिसके चलते वहां से गुजरने वाले स्थानीय लोग इस गंदगी के बीच से ही आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। इलाके में फैली असहनीय बदबू के कारण स्थानीय लोगों का जीना बेहद मुश्किल हो चुका है। यह गंदगी अब लोगों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है और संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए बच्चों के अभिभावकों में गहरी चिंता बनी हुई है। सूरज धागे वाले द्वारा इस गंदगी को साफ नहीं कराए जाने और जिम्मेदारों की इस घोर लापरवाही पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
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- लखनऊ के याहियागंज वार्ड में याहियागंज चौकी से महज कुछ ही कदमों की दूरी पर स्थित सूरज धागा स्टोर द्वारा लंबे समय से भारी गंदगी फैलाई गई है। इस गंदगी की काफी समय से सफाई नहीं की गई है, जिसके चलते वहां से गुजरने वाले स्थानीय लोग इस गंदगी के बीच से ही आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। इलाके में फैली असहनीय बदबू के कारण स्थानीय लोगों का जीना बेहद मुश्किल हो चुका है। यह गंदगी अब लोगों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है और संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए बच्चों के अभिभावकों में गहरी चिंता बनी हुई है। सूरज धागे वाले द्वारा इस गंदगी को साफ नहीं कराए जाने और जिम्मेदारों की इस घोर लापरवाही पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।1
- लखनऊ के माल थाना क्षेत्र स्थित सैदापुर चौकी के पास नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है। यहाँ सैदापुर देशी शराब ठेके पर सुबह 6:00 बजे से ही शराब की बिक्री शुरू हो जाती है, जहाँ ग्राहकों का जमावड़ा लगा रहता है। स्थानीय लोगों में इस खुलेआम हो रहे अवैध कारोबार को लेकर भारी नाराजगी है। आबकारी और पुलिस विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में मूकदर्शक बने हुए हैं और अवैध बिक्री धड़ल्ले से जारी है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध धंधा चल रहा है और इस पर ठोस कार्रवाई कब की जाएगी।1
- लखनऊ के सदर में स्थित सुविधाओं से लैस मेदांता हॉस्पिटल में अचानक सीलिंग गिरने से हड़कंप मच गया है। अस्पताल में रिसेप्शन के पास ऊपरी हिस्से के साइड वाली सीलिंग नीचे गिर गई, जिससे वहां मौजूद मरीजों और तीमारदारों में भारी खौफ का माहौल है। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सुविधाओं से लैस मेदांता हॉस्पिटल की इस तरह सीलिंग गिरने से मरीज और उनके तीमारदार बेहद दहशत में हैं।1
- लखनऊ के सैरपुर थाना क्षेत्र के उर्दू फारसी आईआईएम रोड पर एक बेहद अमानवीय मामला सामने आया है। यहां अपनी निजी जमीन पर 22 सालों से चौकीदारी कर रही एक दलित महिला सुमन रावत के घर पर दलालों ने जबरन बुल्डोजर चलवा दिया। हद तो तब हो गई जब अपनी चौकीदारी का हक और पैसा मांगने पर पीड़ित महिला को न्याय दिलाने के बजाय पुलिस ने ही उसे जेल भेजने की धमकी दे डाली। दरअसल, कानपुर के रहने वाले जावेद अहमद ने 22 साल पहले इस पीड़ित महिला को दो बिस्वा जमीन और 5 हजार रुपये महीना देने का वादा किया था। लेकिन अपना वादा पूरा करने के बजाय जावेद अहमद ने मुनेश्वर यादव के साथ मिलकर महिला के आशियाने पर जबरन बुल्डोजर चलवाकर उसे जमींदोज कर दिया। इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका भी बेहद संदिग्ध नजर आ रही है। सामने आई जानकारी के अनुसार, दलालों ने पीड़ित महिला को इस जमीन से जबरन हटाने के लिए 15 लाख रुपये का ठेका लिया था। इसके बाद महिला के नाम पर 15 लाख रुपये का बंदरबांट कर लिया गया, जबकि पीड़ित महिला को महज 70 हजार रुपये थमाकर एक सादे कागज पर उसका अंगूठा लगवा लिया गया। दबंगों ने महिला के घर का सारा सामान जमींदोज कर दिया और घर में रखे कीमती जेवरात व अन्य सामान भी चोरी कर लिए। इस तबाही के बाद पीड़ित महिला अपने छोटे-छोटे बच्चों और पूरे परिवार के साथ तपती गर्मी और बरसात में फुटपाथ पर सोने को मजबूर है। पीड़ित दलित महिला मार्च 2026 से लगातार न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही है।1