शनि ग्रह के रिंग्स के रहस्य , वैज्ञानिकों ने किया बड़ा खुलासा शनि ग्रह के छल्लों की उत्पत्ति का रहस्य उजागर हो गया है। शनि के अपने ही दो उपग्रहों के आपस में टकराने के कारण इसके छल्ले अस्तित्व में आए। छल्लों की उम्र 10 करोड़ साल है। शनि ग्रह अपने छल्लों के कारण सौर मंडल के अन्य ग्रहों की तुलना में खास पहचान रखता है। शनि अपने करीब 29 सालों के परिभ्रमणकाल में जब इसके छल्ले स्पष्ट नजर आते हैं तो इसकी सुंदरता धरती से देखने लायक होती है। मगर इनके छल्लों की उत्पत्ति को वैज्ञानिकों के बीच चर्चाएं अक्सर होती रही हैं, लेकिन अब बहस के इस मुद्दे पर विराम लग चुका है। कैल्टेक के साउथ वेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट और पेरिस स्थित ऑब्जरवेटरी डी पेरिस के वैज्ञानिकों के संयुक्त रिसर्च से शनि के छल्लों की उत्पत्ति का खुलासा हो पाया है। शोधकर्ता वैज्ञानिकों का कहना है कि पहले शनि का एक और उपग्रह हुआ करता था, इसका नाम प्रोटो हाईप्रियन था। यह उपग्रह टाइटन के इतने करीब आया कि उससे टकरा गया। इस टक्कर में प्रोटो हाईप्रियन टूटकर बिखर गया और इसका मलवा शनि के छल्ले बनाता चला गया। आज भी शनि के चारों ओर इसका मलवा बिखरा हुआ है, जो छल्लों से लिपटता जा रहा है। इस भीषण टकराव में मलवे का कुछ हिस्सा टाइटन से जा मिला और टाइटन का आकार भी बड़ा हो गया। वैज्ञानिकों के अनुसार तब टाइटन इतना बड़ा नहीं था, मलवा शामिल होने के कारण ही यह आकार में बड़ा हो गया और वर्तमान में शनि का सबसे बड़े उपग्रह बन गया। यह भी कहा गया है कि इस टक्कर ने शनि को भी प्रभावित किया और उसके झुकाव में बढ़ोतरी हो गई, जो 26.7 डिग्री पहुंच गई। रिसर्च में यह भी साफ किया गया है कि टक्कर से पहले टाइटन में चंद्रमा की सतह की तरह पिंडों के टकराने से विशाल गड्ढे हुआ करते थे, जो प्रोटो हाईप्रियन के के मलवे से भर गए। इसलिए टाइटन की सतह सपाट नजर आती है। यह रिसर्च पेपर इसी माह प्लेनेटरी साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वरिष्ठ खगोल वैज्ञानिक डा शशिभूषण पांडे कहते हैं कि हमारे सौर मंडल समेत ग्रहों के निर्माण को लेकर अभी भी कई प्रश्न अनुत्तरित हैं। अब शनि के ग्रहों के निर्माण को लेकर किया गया खुलासा सराहनीय है। इस रिसर्च के बाद शनि के छल्लों को लेकर अन्य जानकारियां भी आने लगेंगी।
शनि ग्रह के रिंग्स के रहस्य , वैज्ञानिकों ने किया बड़ा खुलासा शनि ग्रह के छल्लों की उत्पत्ति का रहस्य उजागर हो गया है। शनि के अपने ही दो उपग्रहों के आपस में टकराने के कारण इसके छल्ले अस्तित्व में आए। छल्लों की उम्र 10 करोड़ साल है। शनि ग्रह अपने छल्लों के कारण सौर मंडल के अन्य ग्रहों की तुलना में खास पहचान रखता है। शनि अपने करीब 29 सालों के परिभ्रमणकाल में जब इसके छल्ले स्पष्ट नजर आते हैं तो इसकी सुंदरता धरती से देखने लायक होती है। मगर इनके छल्लों की उत्पत्ति को वैज्ञानिकों के बीच चर्चाएं अक्सर होती रही हैं, लेकिन अब बहस के इस मुद्दे पर विराम लग चुका है। कैल्टेक के साउथ वेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट और पेरिस स्थित ऑब्जरवेटरी डी पेरिस के वैज्ञानिकों के संयुक्त रिसर्च से शनि के छल्लों की उत्पत्ति का खुलासा हो पाया है। शोधकर्ता वैज्ञानिकों का कहना है कि पहले शनि का एक और उपग्रह हुआ करता था, इसका नाम प्रोटो हाईप्रियन था। यह उपग्रह टाइटन के इतने करीब आया कि उससे टकरा गया। इस टक्कर में प्रोटो हाईप्रियन टूटकर बिखर गया और इसका मलवा शनि के छल्ले बनाता चला गया। आज भी शनि के चारों ओर इसका मलवा बिखरा हुआ है, जो छल्लों से लिपटता जा रहा है। इस भीषण टकराव में मलवे का कुछ हिस्सा टाइटन से जा मिला और टाइटन का आकार भी बड़ा हो गया। वैज्ञानिकों के अनुसार तब टाइटन इतना बड़ा नहीं था, मलवा शामिल होने के कारण ही यह आकार में बड़ा हो गया और वर्तमान में शनि का सबसे बड़े उपग्रह बन गया। यह भी कहा गया है कि इस टक्कर ने शनि को भी प्रभावित किया और उसके झुकाव में बढ़ोतरी हो गई, जो 26.7 डिग्री पहुंच गई। रिसर्च में यह भी साफ किया गया है कि टक्कर से पहले टाइटन में चंद्रमा की सतह की तरह पिंडों के टकराने से विशाल गड्ढे हुआ करते थे, जो प्रोटो हाईप्रियन के के मलवे से भर गए। इसलिए टाइटन की सतह सपाट नजर आती है। यह रिसर्च पेपर इसी माह प्लेनेटरी साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वरिष्ठ खगोल वैज्ञानिक डा शशिभूषण पांडे कहते हैं कि हमारे सौर मंडल समेत ग्रहों के निर्माण को लेकर अभी भी कई प्रश्न अनुत्तरित हैं। अब शनि के ग्रहों के निर्माण को लेकर किया गया खुलासा सराहनीय है। इस रिसर्च के बाद शनि के छल्लों को लेकर अन्य जानकारियां भी आने लगेंगी।
- *जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण/जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र, नैनीताल *तहसील नैनीताल*- वर्षा हो रही है *तहसील धारी*- वर्षा हो रही हैं। *तहसील हल्द्वानी*- हल्की वर्षा हो रही हैं। *तहसील कैंचीधाम*- वर्षा हो रही हैं। *तहसील बेतालघाट* वर्षा हो रही हैं। *तहसील खनस्यू*- हल्की वर्षा हो रही हैं। *तहसील रामनगर*- हल्की वर्षा हो रही हैं। *तहसील कालाढूंगी* हल्की वर्षा हो रही हैं। *तहसील लालकुआं*- हल्की वर्षा हो रही हैं। ** विद्युत आपूर्ति** :- सामान्य *मार्गो की स्थिति*- जनपद में समस्त मोटर मार्ग यातायात हेतु सुचारू हैं *नालों की स्थिति* - सामान्य । (ड्यूटी प्रभारी), जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र,नैनीताल।4
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