शास्त्रीय संगीत और तबला जुगलबंदी से जीवंत हुई गुरु-शिष्य परंपरा* *गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर शासकीय संगीत महाविद्यालय में आयोजित किया गया सांस्कृतिक कार्यक्रम* *धार, 31 जुलाई 2026।* गुरु पूर्णिमा पर्व के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश शासन संस्कृति विभाग के सौजन्य से शासकीय संगीत महाविद्यालय धार द्वारा ’“संगीत सभा”’ आयोजित कि गयी, संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालित शासकीय संगीत महाविद्यालय धार का आयोजन शासकीय ललित कला महाविद्यालय घोड़ा चौपाटी धार के सभागार में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान, कृतज्ञता प्रकट करना, भारतीय संगीत की सांस्कृतिक विरासत की निरंतरता, कला संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपराओं से जोड़ना एवं गुरु की महानता के प्रति सांस्कृतिक चेतना का संवर्धन करना रहा। घोड़ा चौपाटी स्थित शासकीय ललित कला महाविद्यालय में आयोजित संगीत संध्या ने संगीत एवं कला प्रेमियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की गुरु-शिष्य परंपराओं की अनुपम अनुभूति कराई। कार्यक्रम का शुभारंभ आमंत्रित अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती कांति तिर्की ने उपस्थित अतिथियों का पुष्पमालाओं से आत्मीय स्वागत किया। संध्या सभा में गुरु के प्रति आदर व कृतज्ञता प्रकट करने के लिए महाविद्यालय के समस्त शिक्षकों का, पुष्पमालाओं से सम्मान छात्र-छात्राओं द्वारा किया गया। कार्यक्रम का आगाज़ महाविद्यालय के गुरुजनों के निर्देशन में छात्र-छात्राओं ने गुरु की महिमा व महानता को प्रकट करते हुए गुरु वंदना गाकर किया। इनके साथ तबले पर संगत महाविद्यालय के छात्र श्री गजेन्द्र वामन एवं हारमोनियम पर श्री उर्मिलेश बैरागी ने सुंदर ढंग से संगत की। संगीत सभा की पहली प्रस्तुति में भोपाल के श्री सौरभ शर्मा ने अपने सुमधुर सुरों में आध्यात्मिकता और गुरु भक्ति के स्वरों से शाम को सजाया। उन्होंने अपनी सुरमई प्रस्तुति की शुरुआत राग पूरिया कल्याण में विलंबित खयाल ’भज ले हरि नाम.’......से किया ,जो कि एक ताल में निबद्ध था साथ ही तीन ताल में छोटा ख्याल ’लाखों में एक चुन-चुन बुलावे’......तथा राग शुद्ध कल्याण में द्रुत एकताल में गुरु की महिमा पर बंदिश ’गुरु ही एक गुण आधार’.......गाकर गुरु की वंदना की और अंत में मिश्र राग में ’ठुमरी’ ’सजनवा तुम क्या जानो प्रीत’....प्रस्तुत किया। उनकी गायकी में रागों की शास्त्रीय गंभीरता और भावों की सहज अभिव्यक्ति श्रोताओं को एक विशिष्ट संगीतानुभूति प्रदान कर रही थी। साथ ही तबला और हारमोनियम एवं सारंगी की अर्थपूर्ण संगत से लय और स्वर का अद्भुत समन्वय परिलक्षित हुआ। अपनी प्रस्तुति का भावपूर्ण समापन भक्ति, माधुर्य और गुरु-परंपरा के प्रति उनकी श्रद्धा का सुंदर प्रतीक था। इस संगीत संध्या में उनके साथ हारमोनियम पर श्री उदित नारायण तिवारी, तबले पर श्री उत्कर्ष तिवारी, सारंगी पर मोहम्मद शिरीन और तानपुरे पर श्री भूपेंद्र ढोके संगत कर रहे थे। तत्पश्चात कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति में शा.संगीत महाविद्यालय मंदसौर के सुप्रसिद्ध युवा तबला वादक श्री निशांत शर्मा व उनके शिष्य श्री नयन चौहान की तबला-जुगलबंदी ने गुरु शिष्य-परंपरा का अद्भुत समन्वय एवं सांस्कृतिक सौंदर्य से माहौल को ताल व लयानंद से सराबोर कर दिया। श्री निशांत शर्मा अपने गुरु फर्रुखाबाद घराने के प्रसिद्ध तबला वादक स्व. पं. शंकर घोष जी के शिष्य, गुरु परंपरा का निर्वाह करते हुए इस घराने के प्रसिद्ध युवा तबला वादक हैं। उन्होंने विभिन्न लयों में तबला वादन कर दर्शकों को लय और ताल की अद्भुत अनुभूति कराई। उन्होंने अपने तबला वादन की शुरुआत प्रसिद्ध तीन ताल विलंबित लय में ’उठान , पेशकार , पारंपरिक फर्रुखाबाद और अजराड़ा घरानों के कायदे प्रस्तुत किये एवं मध्य लय में फर्रुखाबाद घराने के शैली की ’रौ’ एवं ’अंगुस्ताना’ बहुत ही सुंदर लयकारी के साथ प्रस्तुत कि। द्रुत लय में ’पारंपरिक गत, टुकड़ा, चक्करदार तिहाई, लग्गी-लड़ी’ इत्यादि का तबला वादन में अद्भुत प्रदर्शन कर अपने वादन को विराम दिया। हारमोनियम पर लहरा-श्री ऐश्वर्य देशमुख ने बहुत ही सुंदर ढंग से दिया। गुरु की महिमा व महानता को दर्शाती हुई इन संगीत प्रस्तुतियों ने जीवन में गुरु के महत्व को रेखांकित किया। शास्त्रीय गायन और तबला जुगलबंदी की मनमोहक प्रस्तुतियों ने गुरु शिष्य-परंपरा को और भी जीवंत कर दिया। स्वर-लय-ताल और भक्ति-भाव सौंदर्य के अद्भुत समन्वय से सुसज्जित यह प्रस्तुतियां भारतीय शास्त्रीय संगीत की सांस्कृतिक परंपरा, रस सौंदर्य और आध्यात्मिक संवेदना का अनुपम उत्सव सिद्ध होता नजर आयी। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट तबला वादन एवं गायन प्रस्तुतियों ने वातावरण को कला-साधना और सांस्कृतिक सौंदर्य से सराबोर कर दिया।गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित यह संध्या भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं कलाओं की समृद्ध विरासत, सृजनात्मकता और सांस्कृतिक मूल्यों व गुरु-शिष्य परंपराओं, गुरु की महानता के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुई, कार्यक्रम में सभी प्रस्तुतियों के अंत में कलाकारों का स्वागत-सत्कार व सम्मान महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती कांति तिर्की द्वारा शॉल-श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन श्रीमती प्रिया शर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम में शासकीय संगीत तथा शासकीय ललित महाविद्यालय के समस्त विद्यार्थीगण, स्टाफ सदस्य-श्री सोमत सिंह, श्री रविंद्र डोडवे,श्रीमती शशि चौधरी, श्री देशराज वशिष्ठ, श्री मनीष खसरावल, श्री प्रेम सिंह सिकरवार, श्री दुर्गेश बिरथरे, श्री नवनीत लोकरे, श्री भूपेंद्र सिंह चौहान, श्रीमती नंदिनी खरमले, श्री उदय, पियूष, पवन, गोपाल, गिरधारी, सुधि श्रोताओं एवं विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठ संगीतज्ञ श्री लक्ष्मीकांत जोशी जी, श्रीमती वृषाली देशमुख, श्री गौरव मालक,श्री दीपक खलतकर एवं दर्शक दीर्घा में प्रमुख रूप से श्री अतुल कालभवर, श्री महेश कुमार अग्रवाल, डॉ. हेमंत जायसवाल, डॉ.बिट्टो जोशी, श्रीमती मेघा वाडकर, श्री आशीष शर्मा तथा शहर के गणमान्य दर्शक व श्रोतागण बड़ी संख्या में उपस्थित थे। दर्शकों एवं श्रोताओं द्वारा तालियों की गड़गड़ाहट से कार्यक्रम प्रस्तुतियों को बहुत सराहा गया।
शास्त्रीय संगीत और तबला जुगलबंदी से जीवंत हुई गुरु-शिष्य परंपरा* *गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर शासकीय संगीत महाविद्यालय में आयोजित किया गया सांस्कृतिक कार्यक्रम* *धार, 31 जुलाई 2026।* गुरु पूर्णिमा पर्व के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश शासन संस्कृति विभाग के सौजन्य से शासकीय संगीत महाविद्यालय धार द्वारा ’“संगीत सभा”’ आयोजित कि गयी, संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालित शासकीय संगीत महाविद्यालय धार का आयोजन शासकीय ललित कला महाविद्यालय घोड़ा चौपाटी धार के सभागार में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान, कृतज्ञता प्रकट करना, भारतीय संगीत की सांस्कृतिक विरासत की निरंतरता, कला संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपराओं से जोड़ना एवं गुरु की महानता के प्रति सांस्कृतिक चेतना का संवर्धन करना रहा। घोड़ा चौपाटी स्थित शासकीय ललित कला महाविद्यालय में आयोजित संगीत संध्या ने संगीत एवं कला प्रेमियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की गुरु-शिष्य परंपराओं की अनुपम अनुभूति कराई। कार्यक्रम का शुभारंभ आमंत्रित अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती कांति तिर्की ने उपस्थित अतिथियों का पुष्पमालाओं से आत्मीय स्वागत किया। संध्या सभा में गुरु के प्रति आदर व कृतज्ञता प्रकट करने के लिए महाविद्यालय के समस्त शिक्षकों का, पुष्पमालाओं से सम्मान छात्र-छात्राओं द्वारा किया गया। कार्यक्रम का आगाज़ महाविद्यालय के गुरुजनों के निर्देशन में छात्र-छात्राओं ने गुरु की महिमा व महानता को प्रकट करते हुए गुरु वंदना गाकर किया। इनके साथ तबले पर संगत महाविद्यालय के छात्र श्री गजेन्द्र वामन एवं हारमोनियम पर श्री उर्मिलेश बैरागी ने सुंदर ढंग से संगत की। संगीत सभा की पहली प्रस्तुति में भोपाल के श्री सौरभ शर्मा ने अपने सुमधुर सुरों में आध्यात्मिकता और गुरु भक्ति के स्वरों से शाम को सजाया। उन्होंने अपनी सुरमई प्रस्तुति की शुरुआत राग पूरिया कल्याण में विलंबित खयाल ’भज ले हरि नाम.’......से किया ,जो कि एक ताल में निबद्ध था साथ ही तीन ताल में छोटा ख्याल ’लाखों में एक चुन-चुन बुलावे’......तथा राग शुद्ध कल्याण में द्रुत एकताल में गुरु की महिमा पर बंदिश ’गुरु ही एक गुण आधार’.......गाकर गुरु की वंदना की और अंत में मिश्र राग में ’ठुमरी’ ’सजनवा तुम क्या जानो प्रीत’....प्रस्तुत किया। उनकी गायकी में रागों की शास्त्रीय गंभीरता और भावों की सहज अभिव्यक्ति श्रोताओं को एक विशिष्ट संगीतानुभूति प्रदान कर रही थी। साथ ही तबला और हारमोनियम एवं सारंगी की अर्थपूर्ण संगत से लय और स्वर का अद्भुत समन्वय परिलक्षित हुआ। अपनी प्रस्तुति का भावपूर्ण समापन भक्ति, माधुर्य और गुरु-परंपरा के प्रति उनकी श्रद्धा का सुंदर प्रतीक था। इस संगीत संध्या में उनके साथ हारमोनियम पर श्री उदित नारायण तिवारी, तबले पर श्री उत्कर्ष तिवारी, सारंगी पर मोहम्मद शिरीन और तानपुरे पर श्री भूपेंद्र ढोके संगत कर रहे थे। तत्पश्चात कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति में शा.संगीत महाविद्यालय मंदसौर के सुप्रसिद्ध युवा तबला वादक श्री निशांत शर्मा व उनके शिष्य श्री नयन चौहान की तबला-जुगलबंदी ने गुरु शिष्य-परंपरा का अद्भुत समन्वय एवं सांस्कृतिक सौंदर्य से माहौल को ताल व लयानंद से सराबोर कर दिया। श्री निशांत शर्मा अपने गुरु फर्रुखाबाद घराने के प्रसिद्ध तबला वादक स्व. पं. शंकर घोष जी के शिष्य, गुरु परंपरा का निर्वाह करते हुए इस घराने के प्रसिद्ध युवा तबला वादक हैं। उन्होंने विभिन्न लयों में तबला वादन कर दर्शकों को लय और ताल की अद्भुत अनुभूति कराई। उन्होंने अपने तबला वादन की शुरुआत प्रसिद्ध तीन ताल विलंबित लय में ’उठान , पेशकार , पारंपरिक फर्रुखाबाद और अजराड़ा घरानों के कायदे प्रस्तुत किये एवं मध्य लय में फर्रुखाबाद घराने के शैली की ’रौ’ एवं ’अंगुस्ताना’ बहुत ही सुंदर लयकारी के साथ प्रस्तुत कि। द्रुत लय में ’पारंपरिक गत, टुकड़ा, चक्करदार तिहाई, लग्गी-लड़ी’ इत्यादि का तबला वादन में अद्भुत प्रदर्शन कर अपने वादन को विराम दिया। हारमोनियम पर लहरा-श्री ऐश्वर्य देशमुख ने बहुत ही सुंदर ढंग से दिया। गुरु की महिमा व महानता को दर्शाती हुई इन संगीत प्रस्तुतियों ने जीवन में गुरु के महत्व को रेखांकित किया। शास्त्रीय गायन और तबला जुगलबंदी की मनमोहक प्रस्तुतियों ने गुरु शिष्य-परंपरा को और भी जीवंत कर दिया। स्वर-लय-ताल और भक्ति-भाव सौंदर्य के अद्भुत समन्वय से सुसज्जित यह प्रस्तुतियां भारतीय शास्त्रीय संगीत की सांस्कृतिक परंपरा, रस सौंदर्य और आध्यात्मिक संवेदना का अनुपम उत्सव सिद्ध होता नजर आयी। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट तबला वादन एवं गायन प्रस्तुतियों ने वातावरण को कला-साधना और सांस्कृतिक सौंदर्य से सराबोर कर दिया।गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित यह संध्या भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं कलाओं की समृद्ध विरासत, सृजनात्मकता और सांस्कृतिक मूल्यों व गुरु-शिष्य परंपराओं, गुरु की महानता के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुई, कार्यक्रम में सभी प्रस्तुतियों के अंत में कलाकारों का स्वागत-सत्कार व सम्मान महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती कांति तिर्की द्वारा शॉल-श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन श्रीमती प्रिया शर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम में शासकीय संगीत तथा शासकीय ललित महाविद्यालय के समस्त विद्यार्थीगण, स्टाफ सदस्य-श्री सोमत सिंह, श्री रविंद्र डोडवे,श्रीमती शशि चौधरी, श्री देशराज वशिष्ठ, श्री मनीष खसरावल, श्री प्रेम सिंह सिकरवार, श्री दुर्गेश बिरथरे, श्री नवनीत लोकरे, श्री भूपेंद्र सिंह चौहान, श्रीमती नंदिनी खरमले, श्री उदय, पियूष, पवन, गोपाल, गिरधारी, सुधि श्रोताओं एवं विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठ संगीतज्ञ श्री लक्ष्मीकांत जोशी जी, श्रीमती वृषाली देशमुख, श्री गौरव मालक,श्री दीपक खलतकर एवं दर्शक दीर्घा में प्रमुख रूप से श्री अतुल कालभवर, 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- VIRAL VIDEO की निकली अलग कहानी! जिसे पति बताया गया, वह निकला पूर्व मालिक... पीड़िता ने किया बड़ा खुलासा इंदौर के विजय नगर क्षेत्र में महिला से मारपीट के वायरल वीडियो मामले में नया मोड़ सामने आया है। पीड़ित महिला ने दावा किया है कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति उसका पति नहीं, बल्कि उसका पूर्व मालिक है। महिला का आरोप है कि वह लंबे समय से उसे परेशान करता था, मारपीट करता था और बदनाम करने की धमकी देता था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले ने सोशल मीडिया पर वायरल दावों की सत्यता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।1
- मोदी जी का नया वीडियो बहुत ही प्रेरणादायक है जय श्री राम जय हिंद जय भारत 🏹1
- इंदौर में सफर के दौरान बुजुर्ग के बैग से 12 तोले सोने के जेवर चोरी, 14 लाख के आभूषण गायब पुलिस के मुताबिक फरियादी पवन सिंह महाराष्ट्र से अपनी बेटी के साथ ट्रेन से इंदौर पहुंचे थे। रेलवे स्टेशन से उन्होंने शेयरिंग ई-रिक्शा लिया और स्कीम नंबर-78 स्थित अपने घर के लिए रवाना हुए। घर पहुंचने पर जब उन्होंने बैग देखा तो उसमें रखे करीब 12 तोले सोने-चांदी के जेवर गायब थे। जेवरों की अनुमानित कीमत 13 से 14 लाख रुपये बताई जा रही है। शिकायत मिलते ही लसूडिया पुलिस ने चोरी का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ई-रिक्शा चालक और अन्य सवारियों से पूछताछ कर रही है। साथ ही रेलवे स्टेशन से लेकर स्कीम नंबर-78 तक के मार्ग पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, ताकि चोरी करने वाले तक पहुंचा जा सके। बाइट: पराग सैनी, एसीपी, इंदौर1
- अगर बिजली और खाद की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो 10 और 11 तारीख को उग्र आंदोलन किया जाएगा1
- भारतीय क्रिकेट टीम में सिलेक्ट हुए सारांश जैन ने पिता सुबोध कुमार जैन को बताया अपना आदर्श नरेंद्र हिरवानी और अमय खुरासिया के सिखाये गुर आ रहे हैं काम गांधी हॉल इंदौर इंदौर। श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय क्रिकेट टीम में चयनित ऑल राउंडर सारांश जैन शुक्रवार को मीडिया से रूबरु हुए। उन्होंने उम्मीद जताई कि श्रीलंका के विरुद्ध खेले जाने वाली टेस्ट सीरीज में उन्हें अंतिम 11 खिलाड़ियों में मौका मिलेगा और वह अपने करियर का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे। स्टेट प्रेस क्लब,मप्र के रूबरु कार्यक्रम में उन्होंने मीडिया से बात करते हुए अपनी सफलता का क्रेडिट अपने पिता को दिया। सारांश जैन के पिता सुबोध कुमार जैन मुंह के कैंसर से जब जूझ रहे थे उस समय सारांश एमपीसीए के टूर में ऑस्ट्रेलिया गए हुए थे। उस समय परिवार ने उन्हें नहीं बताया कि पिता के कैंसर का ऑपरेशन चल रहा है। सारांश जब इंदौर लोटे तो वह इस बात से बहुत नाराज़ हुए। सारांश ने बताया की उनके पिता ने कहा की वह जितना अच्छा क्रिकेट खेलेगा वह उतनी जल्दी ठीक हो जाएँगे। सारांश ने इसीलिए अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को दिया। उन्होंने बताया कि पिता के साथ साथ नरेंद्र हिरवानी और अमय खुरासिया ने उन्हें गेंदबाजी के गुर सिखाए हैं। प्रसिद्ध गेंदबाज़ रविचन्द्रन अश्वीन और हरभजन सिंह उनके आदर्श खिलाड़ी हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में हरभजन सिंह ने उन्हें मंत्र दिया है कि कुछ पाने के लिए खोना नहीं कुछ करना पड़ता है। इसी बात को उन्होंने अपने जीवन में ढल कर मेहनत को दोगुना कर दिया है। बातचीत में सारांश ने अपने 26 वर्षों के संघर्ष, परिवार के सहयोग, पिता के सपने और टीम इंडिया तक पहुंचने के सफर को साझा किया। सारांश ने कहा कि भारतीय जर्सी पहनना उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना था और अब उनका लक्ष्य मैदान पर शानदार प्रदर्शन कर इंदौर और देश का नाम रोशन करना है। भारतीय टेस्ट टीम में चयन की खुशी सारांश जैन के चेहरे पर साफ दिखाई दी। उन्होंने बताया कि जिस दिन टीम का ऐलान हुआ उस दिन वे इंदौर के गुमास्ता नगर नाकोड़ा जैन मंदिर एवं रणजीत हनुमान मंदिर में दर्शन करने गए थे। मंदिर से लौटकर जैसे ही गाड़ी में बैठे सोशल मीडिया पर अपने चयन की खबर देखी। शुरुआत में उन्हें भरोसा नहीं हुआ, लेकिन लगातार आने वाले फोन कॉल और बधाई संदेशों ने इस ऐतिहासिक पल को सच साबित कर दिया। सारांश ने कहा कि यह पल उनके और पूरे परिवार के लिए बेहद भावुक था। उन्होंने कहा कि इंदौर हमेशा से खेल प्रतिभाओं की धरती रहा है और अब उनकी कोशिश होगी कि भारतीय टीम के लिए शानदार प्रदर्शन कर शहर का नाम दुनिया भर में और ऊंचा करें। सारांश ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि टीम इंडिया तक पहुंचने का यह सफर आसान नहीं था। कई बार परिस्थितियां ऐसी बनीं कि क्रिकेट छोड़ने का भी मन हुआ, लेकिन परिवार ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने अपने पिता सुबोध जैन के सपने को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा बताया। पूर्व रणजी क्रिकेटर रहे उनके पिता हमेशा चाहते थे कि बेटा एक दिन भारत का प्रतिनिधित्व करे। चयन के बाद पिता का भावुक संदेश उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है। सारांश ने अपने बड़े भाई, पूरे परिवार और मध्यप्रदेश टीम के कोच चंद्रकांत पंडित का भी आभार जताते हुए कहा कि अब उनकी पूरी तैयारी भारतीय टीम के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने की है। भारतीय टीम सम्भवतः 3 अगस्त को श्रीलंका दौरे पर रवाना होगी।सारांश ने उम्मीद जताई की उन्हें अंतिम ग्यारह में अवसर मिलेगा। कार्यक्रम में सारांश के पिता सुबोध जैन, माता संगीता जैन, पत्नी हर्षित जैन और भाई सौरभ जैन भी मौजूद थे। सारांश का स्वागत डॉ. सुशील पगारे,कमल कस्तूरी, पंकज क्षीरसागर, सुनील जैन, सोनाली यादव एवं संजय मेहता ने किया। स्टेट प्रेस क्लब, मप्र की तरफ से अध्यक्ष प्रवीण खरीवाल ने सारांश जैन को स्मृति चिन्ह भेंट किया कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी मौजूद थे। भास्कर समाचार सेवा के लिए मुश्ताक शेख की रिपोर्ट1
- इंदौर मध्य प्रदेश में वीडियो हुआ वायरल पीड़ित महिला ने बताई बातें वह मेरा पति नहीं वह टेंट हाउस का मालिक निकाला वह महिला को बदनाम करने उसको प्रताड़ित करता था ऐसे व्यक्ति के ऊपर कानूनी कार्रवाई होना चाहिए पीड़ित महिला का वीडियो आया सामने1
- वाइरल वीडियो में स्कूली छात्राओं ने अपने माता पिता से सन्देश के माध्यम से बच्चो को मोबाइल न देने की एक मार्मिक अपील1
- बारिश के बीच जलती चिता का वीडियो वायरल, व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल एक तरफ विकास और जन-कल्याणकारी योजनाओं के बड़े-बड़े दावे हैं, तो दूसरी तरफ जमीन पर बदहाली की यह झकझोर देने वाली तस्वीर। मध्य प्रदेश के धार जिले से सामने आई एक घटना ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है, जहां तेज बारिश के बीच एक मासूम के अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीणों को तिरपाल का सहारा लेना पड़ा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शासन और स्थानीय प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह घटना शुक्रवार की है, जहां धार जिले के दसई स्थित अनाज मंडी परिसर में आदिवासी समाज के एक बालक की सर्पदंश से मौत हो गई थी। इसके बाद जब परिजन और समाज के लोग बालक का अंतिम संस्कार करने पहुंचे, तभी अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। श्मशान घाट पर पक्के शेड और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में परिजनों को जलती चिता को भीगने से बचाने के लिए खुद हाथों में तिरपाल तानकर खड़े रहना पड़ा। किसी ग्रामीण ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है। एक तरफ सरकार द्वारा आदिवासियों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए करोड़ों रुपये की कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाने का दावा किया जाता है। वहीं दूसरी तरफ, धरातल पर सामने आ रही ऐसी तस्वीरें यह बयां करती हैं कि आज भी इस वर्ग तक बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पा रही हैं। समाज के एक व्यक्ति के अनुसार, क्षेत्र में आदिवासी समाज के लिए श्मशान घाट की समुचित व्यवस्था नहीं है और स्थानीय सरपंच द्वारा इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में ऐसे स्थानों पर शेड उपलब्ध होने चाहिए ताकि शोक संतप्त परिजनों को परेशानी का सामना न करना पडे इस वीडियो के सामने आने के बाद स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में अंतिम संस्कार स्थलों पर स्थायी शेड और आवश्यक व्यवस्थाएं होना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी परिवार को दुख की इस घड़ी में ऐसी लाचारी का सामना न करना पड़े। अब देखना यह होगा कि इस वीडियो के संज्ञान में आने के बाद स्थानीय प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या दसई में जल्द ही एक सर्वसुविधायुक्त श्मशान घाट का निर्माण हो पाएगा3