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चार बच्चों के हत्या मामले ने लिया नया मोड़ -हत्या आरोपी मां की नाले में मिली लाश- असली कातिल कौन ? अंबेडकर नगर के थाना अकबरपुर अंतर्गत मीरानपुर मोहल्ला के मुरादाबाद में हुए चार बच्चों के निर्शंस हत्या मामले की आरोपी मां की लाश आज नाले में मिली चौंकाने वाली खबर है अब बड़ा सवाल उठता है कि आखिर पांच-पांच हत्याओं का असली कातिल कौन है

3 hrs ago
user_ABN News Plus
ABN News Plus
पत्रकार Ambedkar Nagar, Uttar Pradesh•
3 hrs ago

चार बच्चों के हत्या मामले ने लिया नया मोड़ -हत्या आरोपी मां की नाले में मिली लाश- असली कातिल कौन ? अंबेडकर नगर के थाना अकबरपुर अंतर्गत मीरानपुर मोहल्ला के मुरादाबाद में हुए चार बच्चों के निर्शंस हत्या मामले की आरोपी मां की लाश आज नाले में मिली चौंकाने वाली खबर है अब बड़ा सवाल उठता है कि आखिर पांच-पांच हत्याओं का असली कातिल कौन है

More news from Ambedkar Nagar and nearby areas
  • अंबेडकर नगर में प्रेम प्रसंग के चलते एक युवक हाई टेंशन विद्युत पोल पर चढ़ गया और करीब एक घंटे तक हंगामा करता रहा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने उसे सुरक्षित उतारकर हिरासत में लिया। नाबालिग से शादी के विवाद का मामला सामने आया, पुलिस जांच कर रही है।
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    अंबेडकर नगर में प्रेम प्रसंग के चलते एक युवक हाई टेंशन विद्युत पोल पर चढ़ गया और करीब एक घंटे तक हंगामा करता रहा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने उसे सुरक्षित उतारकर हिरासत में लिया। नाबालिग से शादी के विवाद का मामला सामने आया, पुलिस जांच कर रही है।
    user_PRIMEABN
    PRIMEABN
    News Anchor Akbarpur, Ambedkar Nagar•
    8 hrs ago
  • Post by BALRAM
    1
    Post by BALRAM
    user_BALRAM
    BALRAM
    पत्रकार Allapur, Ambedkar Nagar•
    5 hrs ago
  • **धनघटा/संत कबीर नगर:** हाल ही में अंकिता बॉबी ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के योगदान को याद करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आज समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों के लोग जो सत्ता के गलियारों तक पहुँच पा रहे हैं, वह केवल बाबा साहेब के संविधान की देन है। अंकिता बॉबी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "अगर डॉ. भीमराव अम्बेडकर और उनका बनाया संविधान न होता, तो आज कोई भी विधायक नहीं बन पाता।" **प्रधानमंत्री की शिक्षा और दिशा पर घेरा** इसी कड़ी में उन्होंने क्षेत्र के माननीय विधायक गणेश चंद्र चौहान पर निशाना साधते हुए जनता की ओर से कुछ गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि लोग विधायक जी से यह पूछना चाहते हैं कि देश के प्रधानमंत्री की 'शिक्षा और दिशा' ने क्षेत्र और युवाओं के लिए वास्तव में क्या बदलाव लाया है? अंकिता बॉबी ने विकास कार्यों और जमीनी स्तर पर शिक्षा की स्थिति को लेकर विधायक से जवाबदेही की मांग की है। #GaneshChandraChauhan #AnkitaBobby #BabaSahebAmbedkar #SantKabirNagarNews #YadavInformation
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    **धनघटा/संत कबीर नगर:**
हाल ही में अंकिता बॉबी ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के योगदान को याद करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आज समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों के लोग जो सत्ता के गलियारों तक पहुँच पा रहे हैं, वह केवल बाबा साहेब के संविधान की देन है। अंकिता बॉबी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "अगर डॉ. भीमराव अम्बेडकर और उनका बनाया संविधान न होता, तो आज कोई भी विधायक नहीं बन पाता।"
**प्रधानमंत्री की शिक्षा और दिशा पर घेरा**
इसी कड़ी में उन्होंने क्षेत्र के माननीय विधायक गणेश चंद्र चौहान पर निशाना साधते हुए जनता की ओर से कुछ गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि लोग विधायक जी से यह पूछना चाहते हैं कि देश के प्रधानमंत्री की 'शिक्षा और दिशा' ने क्षेत्र और युवाओं के लिए वास्तव में क्या बदलाव लाया है?
अंकिता बॉबी ने विकास कार्यों और जमीनी स्तर पर शिक्षा की स्थिति को लेकर विधायक से जवाबदेही की मांग की है। 
#GaneshChandraChauhan #AnkitaBobby #BabaSahebAmbedkar #SantKabirNagarNews #YadavInformation
    user_Vindhyavasini Yadav
    Vindhyavasini Yadav
    Local News Reporter Ghanghata, Sant Kabeer Nagar•
    3 hrs ago
  • अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती।जिले के कलवारी थाना क्षेत्र के महुआ डाबर गांव में सार्वजनिक रास्ते को लेकर विवाद ने हिंसक रूप ले लिया,रास्ता निर्माण को लेकर पहुंचे ग्रामीणों पर दबंगों ने अचानक हमला बोल दिया जिससे मौके पर अफरातफरी मच गई। बताया जा रहा है कि यह विवाद काफी समय से चल रहा था और मामले में एसडीएम द्वारा रास्ता बहाल कराने का आदेश भी जारी किया गया था लेकिन दबंगों पर इसका कोई असर नहीं दिखा,आज जब प्रशासनिक आदेश के बाद ग्रामीण रास्ता बनाने पहुंचे तभी विरोधी पक्ष के लोगों ने घरों की छतों से ईंट-पत्थर बरसाने शुरू कर दिए,अचानक हुए इस हमले से लोग अपनी जान बचाकर भागते नजर आए,घटना का वीडियो भी सामने आया है,जिसमें साफ देखा जा सकता है कि किस तरह छतों से लगातार पथराव किया जा रहा है और नीचे मौजूद लोग बचने की कोशिश कर रहे हैं,सूचना मिलते ही डायल 112 पीआरबी और स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया,पुलिस की मौजूदगी में हालात कुछ हद तक शांत हुए लेकिन गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है,वहीं पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की बात कही जा रही है। वहीं इस पूरे मामले में क्षेत्राधिकारी कलवारी संजय सिंह ने बताया कि कल तहसील दिवस पर खड़ंजा लगाने की बात पर हसमतउल्लाह ने एप्लीकेशन दिया था, पूर्व में भी एसडीएम द्वारा आदेशित किया गया था कि खड़ंजा लगाने में कोई भी विवाद उत्पन्न ना हो इसी संबंध में शहाबुद्दीन समेत महिलाओं द्वारा रोका जा रहा था उन्हें महिलाओं द्वारा एट पत्थर चलाया गया है इस संबंध में उनके विरुद्ध आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। दिलशाद अहमद ख़ां।
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    अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती।जिले के कलवारी थाना क्षेत्र के महुआ डाबर गांव में सार्वजनिक रास्ते को लेकर विवाद ने हिंसक रूप ले लिया,रास्ता निर्माण को लेकर पहुंचे ग्रामीणों पर दबंगों ने अचानक हमला बोल दिया जिससे मौके पर अफरातफरी मच गई।
बताया जा रहा है कि यह विवाद काफी समय से चल रहा था और मामले में एसडीएम द्वारा रास्ता बहाल कराने का आदेश भी जारी किया गया था लेकिन दबंगों पर इसका कोई असर नहीं दिखा,आज जब प्रशासनिक आदेश के बाद ग्रामीण रास्ता बनाने पहुंचे तभी विरोधी पक्ष के लोगों ने घरों की छतों से ईंट-पत्थर बरसाने शुरू कर दिए,अचानक हुए इस हमले से लोग अपनी जान बचाकर भागते नजर आए,घटना का वीडियो भी सामने आया है,जिसमें साफ देखा जा सकता है कि किस तरह छतों से लगातार पथराव किया जा रहा है और नीचे मौजूद लोग बचने की कोशिश कर रहे हैं,सूचना मिलते ही डायल 112 पीआरबी और स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया,पुलिस की मौजूदगी में हालात कुछ हद तक शांत हुए लेकिन गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है,वहीं पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की बात कही जा रही है।
वहीं इस पूरे मामले में क्षेत्राधिकारी कलवारी संजय सिंह ने बताया कि कल तहसील दिवस पर खड़ंजा लगाने की बात पर हसमतउल्लाह ने एप्लीकेशन दिया था, पूर्व में भी एसडीएम द्वारा आदेशित किया गया था कि खड़ंजा लगाने में कोई भी विवाद उत्पन्न ना हो इसी संबंध में शहाबुद्दीन समेत महिलाओं द्वारा रोका जा रहा था उन्हें महिलाओं द्वारा एट पत्थर चलाया गया है इस संबंध में उनके विरुद्ध आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
दिलशाद अहमद ख़ां।
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • Post by अनिल कुमार प्रजापति
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    Post by अनिल कुमार प्रजापति
    user_अनिल कुमार प्रजापति
    अनिल कुमार प्रजापति
    Voice of people घनघटा, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • Jabalpur cruise tragedy | Viral mother-child photo fake or real?
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    Jabalpur cruise tragedy | Viral mother-child photo fake or real?
    user_Shankar
    Shankar
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • अम्बेडकर नगर में हुए चार बच्चों के कत्ल का मामला जिसमे आरोपी बनी है कलयुगी मां
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    अम्बेडकर नगर में हुए चार बच्चों के कत्ल का मामला जिसमे आरोपी बनी है कलयुगी मां
    user_ABN News Plus
    ABN News Plus
    पत्रकार Ambedkar Nagar, Uttar Pradesh•
    8 hrs ago
  • धनघटा शनिचरा रोड पेट्रोल पंप पर दलाली करते हुए पकड़े गए लोग आप लोगों से यह निवेदन है कि जब भी आप पेट्रोल भरा है तो जीरो देखकर ही भराए 🙏 #जानताकेसाथ #धनघटा
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    धनघटा शनिचरा रोड पेट्रोल पंप पर दलाली करते हुए पकड़े गए लोग आप लोगों से यह निवेदन है कि जब भी आप पेट्रोल भरा है तो जीरो देखकर ही भराए 🙏 #जानताकेसाथ #धनघटा
    user_जनता के साथ
    जनता के साथ
    Student union घनघटा, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    12 hrs ago
  • अजीत मिश्रा (खोजी) सिद्धार्थनगर: विकास की 'सीढ़ी' ने ली मासूम की जान, सिस्टम की सुस्ती ने बढ़ाई सांसें! ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश सरकारी लापरवाही की इंतहा: जमीन पर नाकाम रहा प्रशासन, तो आसमान से उतारनी पड़ी जिंदगी! मौत की टंकी: क्या मासूमों की बलि लेने के लिए खड़ी की गई थीं ये इमारतें? सिस्टम सोता रहा, टंकी पर सांसें अटकती रहीं: हेलीकॉप्टर ने बचाई दो जानें, पर एक मां की गोद हुई सूनी। खौफनाक शनिवार: खेल-खेल में काल के गाल में समाया मासूम, घंटों लाचार खड़ा रहा प्रशासन। आसमान में रेस्क्यू, जमीन पर सिसकियां: सिद्धार्थनगर हादसे ने झकझोर दी बस्ती मंडल की रूह। SDRF फेल, हेलीकॉप्टर से हुआ खेल: आखिर कब तक घटिया निर्माण की कीमत चुकाएंगे मासूम? साहब! ये हादसा नहीं हत्या है: कांशीराम आवास की टूटी सीढ़ी ने खोली विकास की पोल। सिद्धार्थनगर की त्रासदी: कागजों पर मेंटेनेंस और हकीकत में मौत का जाल! सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में शनिवार को जो हुआ, उसने सरकारी दावों और प्रशासन की कार्यकुशलता की पोल खोलकर रख दी है। कांशीराम आवास स्थित पानी की टंकी की सीढ़ी क्या टूटी, मानों भ्रष्टाचार और अनदेखी की जर्जर इमारत ढह गई। इस हादसे में एक मासूम की जान चली गई, जबकि दो जिंदगी और मौत के बीच मेडिकल कॉलेज में जूझ रहे हैं। सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि दो किशोरों को बचाने के लिए प्रशासन को आसमान की ओर ताकना पड़ा, क्योंकि जमीन पर हमारा 'सिस्टम' लाचार खड़ा था। हादसा या प्रशासनिक हत्या? यह महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही है। सवाल यह है कि: जिस पानी की टंकी की सीढ़ियां इतनी जर्जर थीं कि बच्चों का वजन तक न सह सकीं, उसकी मेंटेनेंस का बजट आखिर किसकी जेब में गया? रिहायशी इलाके में स्थित इस मौत के जाल (टंकी) की घेराबंदी क्यों नहीं की गई थी? क्या प्रशासन को किसी मासूम की बलि चढ़ने का इंतजार था? रेस्क्यू के नाम पर 'तमाशा' और SDRF की नाकामी शनिवार को हादसा हुआ, लेकिन गोरखपुर से पहुंची SDRF की टीम घंटों तक केवल "रास्ता न बन पाने" का बहाना बनाती रही। अत्याधुनिक उपकरणों का दम भरने वाली टीम एक अदद सीढ़ी या रेस्क्यू ब्रिज तक नहीं बना सकी। दो किशोर पूरी रात मौत के साये में टंकी के ऊपर भूखे-प्यासे फंसे रहे, और नीचे खड़ा प्रशासन सिर्फ फाइलों और फोन कॉल में उलझा रहा। "जब जमीन पर तैनात टीमें पंगु साबित हुईं, तब जाकर रविवार सुबह 5 बजे हेलीकॉप्टर मंगवाना पड़ा। जो काम घंटों पहले स्थानीय स्तर पर सूझबूझ से हो सकता था, उसके लिए करोड़ों का तामझाम जुटाना पड़ा। यह देरी सिस्टम की संवेदनहीनता का जीता-जागता सबूत है।" भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते कांशीराम आवास कांशीराम आवासों की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। घटिया निर्माण सामग्री और रखरखाव के अभाव में ये इमारतें अब 'कब्रगाह' बनती जा रही हैं। शनिवार को टूटी वह सीढ़ी दरअसल उस भ्रष्टाचार की कड़ी है, जिसकी जांच कागजों से बाहर कभी निकलती ही नहीं। तीखे सवाल: मृतक बच्चे के परिवार की भरपाई क्या सिर्फ मुआवजे के चंद टुकड़ों से हो जाएगी? उन अधिकारियों पर एफआईआर (FIR) कब होगी, जिनकी निगरानी में यह जर्जर ढांचा खड़ा था? क्या जिले की अन्य पानी की टंकियों का सेफ्टी ऑडिट होगा, या अगले हादसे का इंतजार किया जाएगा? निष्कर्ष: सिद्धार्थनगर की यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि सिस्टम को आम आदमी की जान की परवाह नहीं है। हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू कर लेना भले ही प्रशासन अपनी पीठ थपथपाने का जरिया बना ले, लेकिन सच तो यही है कि एक मां की गोद सूनी हो चुकी है और इसके जिम्मेदार सफेदपोश और लापरवाह इंजीनियर ही हैं। अब वक्त केवल सांत्वना का नहीं, बल्कि सख्त कार्रवाई और जवाबदेही तय करने का है।
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    अजीत मिश्रा (खोजी)
सिद्धार्थनगर: विकास की 'सीढ़ी' ने ली मासूम की जान, सिस्टम की सुस्ती ने बढ़ाई सांसें!
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश
सरकारी लापरवाही की इंतहा: जमीन पर नाकाम रहा प्रशासन, तो आसमान से उतारनी पड़ी जिंदगी!
मौत की टंकी: क्या मासूमों की बलि लेने के लिए खड़ी की गई थीं ये इमारतें?
सिस्टम सोता रहा, टंकी पर सांसें अटकती रहीं: हेलीकॉप्टर ने बचाई दो जानें, पर एक मां की गोद हुई सूनी।
खौफनाक शनिवार: खेल-खेल में काल के गाल में समाया मासूम, घंटों लाचार खड़ा रहा प्रशासन।
आसमान में रेस्क्यू, जमीन पर सिसकियां: सिद्धार्थनगर हादसे ने झकझोर दी बस्ती मंडल की रूह।
SDRF फेल, हेलीकॉप्टर से हुआ खेल: आखिर कब तक घटिया निर्माण की कीमत चुकाएंगे मासूम?
साहब! ये हादसा नहीं हत्या है: कांशीराम आवास की टूटी सीढ़ी ने खोली विकास की पोल।
सिद्धार्थनगर की त्रासदी: कागजों पर मेंटेनेंस और हकीकत में मौत का जाल!
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में शनिवार को जो हुआ, उसने सरकारी दावों और प्रशासन की कार्यकुशलता की पोल खोलकर रख दी है। कांशीराम आवास स्थित पानी की टंकी की सीढ़ी क्या टूटी, मानों भ्रष्टाचार और अनदेखी की जर्जर इमारत ढह गई। इस हादसे में एक मासूम की जान चली गई, जबकि दो जिंदगी और मौत के बीच मेडिकल कॉलेज में जूझ रहे हैं। सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि दो किशोरों को बचाने के लिए प्रशासन को आसमान की ओर ताकना पड़ा, क्योंकि जमीन पर हमारा 'सिस्टम' लाचार खड़ा था।
हादसा या प्रशासनिक हत्या?
यह महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही है। सवाल यह है कि:
जिस पानी की टंकी की सीढ़ियां इतनी जर्जर थीं कि बच्चों का वजन तक न सह सकीं, उसकी मेंटेनेंस का बजट आखिर किसकी जेब में गया?
रिहायशी इलाके में स्थित इस मौत के जाल (टंकी) की घेराबंदी क्यों नहीं की गई थी?
क्या प्रशासन को किसी मासूम की बलि चढ़ने का इंतजार था?
रेस्क्यू के नाम पर 'तमाशा' और SDRF की नाकामी
शनिवार को हादसा हुआ, लेकिन गोरखपुर से पहुंची SDRF की टीम घंटों तक केवल "रास्ता न बन पाने" का बहाना बनाती रही। अत्याधुनिक उपकरणों का दम भरने वाली टीम एक अदद सीढ़ी या रेस्क्यू ब्रिज तक नहीं बना सकी। दो किशोर पूरी रात मौत के साये में टंकी के ऊपर भूखे-प्यासे फंसे रहे, और नीचे खड़ा प्रशासन सिर्फ फाइलों और फोन कॉल में उलझा रहा।
"जब जमीन पर तैनात टीमें पंगु साबित हुईं, तब जाकर रविवार सुबह 5 बजे हेलीकॉप्टर मंगवाना पड़ा। जो काम घंटों पहले स्थानीय स्तर पर सूझबूझ से हो सकता था, उसके लिए करोड़ों का तामझाम जुटाना पड़ा। यह देरी सिस्टम की संवेदनहीनता का जीता-जागता सबूत है।"
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते कांशीराम आवास
कांशीराम आवासों की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। घटिया निर्माण सामग्री और रखरखाव के अभाव में ये इमारतें अब 'कब्रगाह' बनती जा रही हैं। शनिवार को टूटी वह सीढ़ी दरअसल उस भ्रष्टाचार की कड़ी है, जिसकी जांच कागजों से बाहर कभी निकलती ही नहीं।
तीखे सवाल:
मृतक बच्चे के परिवार की भरपाई क्या सिर्फ मुआवजे के चंद टुकड़ों से हो जाएगी?
उन अधिकारियों पर एफआईआर (FIR) कब होगी, जिनकी निगरानी में यह जर्जर ढांचा खड़ा था?
क्या जिले की अन्य पानी की टंकियों का सेफ्टी ऑडिट होगा, या अगले हादसे का इंतजार किया जाएगा?
निष्कर्ष: सिद्धार्थनगर की यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि सिस्टम को आम आदमी की जान की परवाह नहीं है। हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू कर लेना भले ही प्रशासन अपनी पीठ थपथपाने का जरिया बना ले, लेकिन सच तो यही है कि एक मां की गोद सूनी हो चुकी है और इसके जिम्मेदार सफेदपोश और लापरवाह इंजीनियर ही हैं। अब वक्त केवल सांत्वना का नहीं, बल्कि सख्त कार्रवाई और जवाबदेही तय करने का है।
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    12 hrs ago
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