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Jabalpur cruise tragedy | Viral mother-child photo fake or real? Jabalpur cruise tragedy | Viral mother-child photo fake or real?
Shankar
Jabalpur cruise tragedy | Viral mother-child photo fake or real? Jabalpur cruise tragedy | Viral mother-child photo fake or real?
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- अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती।जिले के कलवारी थाना क्षेत्र के महुआ डाबर गांव में सार्वजनिक रास्ते को लेकर विवाद ने हिंसक रूप ले लिया,रास्ता निर्माण को लेकर पहुंचे ग्रामीणों पर दबंगों ने अचानक हमला बोल दिया जिससे मौके पर अफरातफरी मच गई। बताया जा रहा है कि यह विवाद काफी समय से चल रहा था और मामले में एसडीएम द्वारा रास्ता बहाल कराने का आदेश भी जारी किया गया था लेकिन दबंगों पर इसका कोई असर नहीं दिखा,आज जब प्रशासनिक आदेश के बाद ग्रामीण रास्ता बनाने पहुंचे तभी विरोधी पक्ष के लोगों ने घरों की छतों से ईंट-पत्थर बरसाने शुरू कर दिए,अचानक हुए इस हमले से लोग अपनी जान बचाकर भागते नजर आए,घटना का वीडियो भी सामने आया है,जिसमें साफ देखा जा सकता है कि किस तरह छतों से लगातार पथराव किया जा रहा है और नीचे मौजूद लोग बचने की कोशिश कर रहे हैं,सूचना मिलते ही डायल 112 पीआरबी और स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया,पुलिस की मौजूदगी में हालात कुछ हद तक शांत हुए लेकिन गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है,वहीं पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की बात कही जा रही है। वहीं इस पूरे मामले में क्षेत्राधिकारी कलवारी संजय सिंह ने बताया कि कल तहसील दिवस पर खड़ंजा लगाने की बात पर हसमतउल्लाह ने एप्लीकेशन दिया था, पूर्व में भी एसडीएम द्वारा आदेशित किया गया था कि खड़ंजा लगाने में कोई भी विवाद उत्पन्न ना हो इसी संबंध में शहाबुद्दीन समेत महिलाओं द्वारा रोका जा रहा था उन्हें महिलाओं द्वारा एट पत्थर चलाया गया है इस संबंध में उनके विरुद्ध आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। दिलशाद अहमद ख़ां।1
- Jabalpur cruise tragedy | Viral mother-child photo fake or real?1
- हमारे गांव में एक सरकारी रास्ता पास हुआ है लेकिन 5 साल हो गए लेकिन अभी तक नहीं बना जी हां मैं बात कर रहा हूं ग्राम पंचायत पूरेओरीराय ब्लॉक दुबौलिया जनपद बस्ती की बात कर रहा हूं आप लोगों की क्या राय यह बन जाना चाहिए की नही आने जाने में लोगो की बड़ी समस्या होती हैं1
- Post by Aditya kashyap1
- राम जानकी मार्ग पर लगे एन एच का बोर्ड टूट कर लटका फंसा डबल डेकर बस यात्री परेशान बसवारी गांव संत कबीर नगर पिछले बुधवार को चक्रवर्ती तूफान के दौरान राम जानकी मार्ग पर पुलिस चौकी लौहरैया के पास सड़क के ऊपर लगा एन एच 27 का भारी भरकम बोर्ड टूट कर लटक रहा है । जो यात्रियों के जान का खतरा बना हुआ है रविवार को सुबह गोरखपुर से दिल्ली जाने वाली एक डबल डेकर यात्री बस बोर्ड में टच हो गयी जिससे बस में बैठे यात्री परेशान हो गये सड़क पर जाम की स्थिति आ गयी घटना की जानकारी एन एच के अधिकारियों को दिए गए मोबाइल से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन ना तो फोन उठा ना ही बोर्ड हटाने की कोई व्यवस्था कराई गई राहगीर बसवारी निवासी रामनिवास हरिजन निवासी लक्ष्मी नारायण धनघटा निवासी राम प्रकाश ने बताया कि पिछले बुधवार को ही आंधी तूफान के दौरान सड़क के ऊपर लगे बोर्ड टूटकर लटक गया तब से इस हालत में पड़ा हुआ है हालत यह है कि अगर थोड़ी सी भी हवा चली तो वह आने जाने वाले किसी भी यात्री के ऊपर गिर कर जान ले सकता है । यात्रियों ने इसकी जानकारी एसडीएम धनघटा को दे दी है समाचार लिखे जाने तक बोर्ड हटाने की कोई कार्रवाई नहीं हो सकी थी जिससे यात्रियों में बरसात का माहौल है2
- झपटमारी के मामले में चार अभियुक्त गिरफ्तार, भेजा गया न्यायालय बेलहर,संतकबीरनगर । झपटमारी के एक मामले में चार अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। बेलहरकला थाना पुलिस ने 3 मई 2026 को बेलहर कुशहरा पक्की सड़क पुलिया के पास से इन आरोपियों को पकड़ा। उनके पास से एक सैमसंग एंड्रॉइड मोबाइल, 1600 रुपये नकद और घटना में प्रयुक्त एक मोटरसाइकिल बरामद की गई है। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों की पहचान अजय उर्फ गोपाल यादव पुत्र श्री प्रकाश यादव, सुमित उर्फ गोलू पुत्र रामदयाल, अजय उर्फ काजू पुत्र अमेरिका यादव और राजकपूर निषाद पुत्र स्व. रंगीलाल के रूप में हुई है। ये सभी मंझरिया पठानटोला बनकटवा, थाना बेलहरकला, जनपद संतकबीरनगर के निवासी हैं। यह मामला 2 मई 2026 को अशोक पाठक पुत्र हरिहर पाठक निवासी दासडीह, थाना बेलहरकला द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से संबंधित है। पाठक ने बेलहरकला थाने में तहरीर दी थी कि जब वह अपने ई-रिक्शा से दासडीह के लिए जा रहे थे, तभी दरही पुल के पास यह घटना हुई। शिकायत के अनुसार, अभियुक्त गोलू, गोपाल यदुवंशी, अजय यादव और राजकपूर अपनी अपाचे मोटरसाइकिल से आए और पाठक के ई-रिक्शा के सामने अपनी बाइक लगा दी। उन्होंने पाठक के साथ मारपीट की और उनका मोबाइल फोन व जेब में रखे पैसे छीनकर फरार हो गए। इस शिकायत के आधार पर बेलहरकला थाने में मुकदमा संख्या 123/2026, धारा 309(6) और 126(2) बीएनएस के तहत पंजीकृत किया गया था। साक्ष्य संकलन के बाद, जांच में धारा 309(6) बीएनएस के तहत अपराध न पाकर, जुर्म धारा 304(2) बीएनएस के तहत पाया गया। चारों अभियुक्तों को न्यायालय भेज दिया गया।2
- Post by अनिल कुमार प्रजापति4
- अजीत मिश्रा (खोजी) सिद्धार्थनगर: विकास की 'सीढ़ी' ने ली मासूम की जान, सिस्टम की सुस्ती ने बढ़ाई सांसें! ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश सरकारी लापरवाही की इंतहा: जमीन पर नाकाम रहा प्रशासन, तो आसमान से उतारनी पड़ी जिंदगी! मौत की टंकी: क्या मासूमों की बलि लेने के लिए खड़ी की गई थीं ये इमारतें? सिस्टम सोता रहा, टंकी पर सांसें अटकती रहीं: हेलीकॉप्टर ने बचाई दो जानें, पर एक मां की गोद हुई सूनी। खौफनाक शनिवार: खेल-खेल में काल के गाल में समाया मासूम, घंटों लाचार खड़ा रहा प्रशासन। आसमान में रेस्क्यू, जमीन पर सिसकियां: सिद्धार्थनगर हादसे ने झकझोर दी बस्ती मंडल की रूह। SDRF फेल, हेलीकॉप्टर से हुआ खेल: आखिर कब तक घटिया निर्माण की कीमत चुकाएंगे मासूम? साहब! ये हादसा नहीं हत्या है: कांशीराम आवास की टूटी सीढ़ी ने खोली विकास की पोल। सिद्धार्थनगर की त्रासदी: कागजों पर मेंटेनेंस और हकीकत में मौत का जाल! सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में शनिवार को जो हुआ, उसने सरकारी दावों और प्रशासन की कार्यकुशलता की पोल खोलकर रख दी है। कांशीराम आवास स्थित पानी की टंकी की सीढ़ी क्या टूटी, मानों भ्रष्टाचार और अनदेखी की जर्जर इमारत ढह गई। इस हादसे में एक मासूम की जान चली गई, जबकि दो जिंदगी और मौत के बीच मेडिकल कॉलेज में जूझ रहे हैं। सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि दो किशोरों को बचाने के लिए प्रशासन को आसमान की ओर ताकना पड़ा, क्योंकि जमीन पर हमारा 'सिस्टम' लाचार खड़ा था। हादसा या प्रशासनिक हत्या? यह महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही है। सवाल यह है कि: जिस पानी की टंकी की सीढ़ियां इतनी जर्जर थीं कि बच्चों का वजन तक न सह सकीं, उसकी मेंटेनेंस का बजट आखिर किसकी जेब में गया? रिहायशी इलाके में स्थित इस मौत के जाल (टंकी) की घेराबंदी क्यों नहीं की गई थी? क्या प्रशासन को किसी मासूम की बलि चढ़ने का इंतजार था? रेस्क्यू के नाम पर 'तमाशा' और SDRF की नाकामी शनिवार को हादसा हुआ, लेकिन गोरखपुर से पहुंची SDRF की टीम घंटों तक केवल "रास्ता न बन पाने" का बहाना बनाती रही। अत्याधुनिक उपकरणों का दम भरने वाली टीम एक अदद सीढ़ी या रेस्क्यू ब्रिज तक नहीं बना सकी। दो किशोर पूरी रात मौत के साये में टंकी के ऊपर भूखे-प्यासे फंसे रहे, और नीचे खड़ा प्रशासन सिर्फ फाइलों और फोन कॉल में उलझा रहा। "जब जमीन पर तैनात टीमें पंगु साबित हुईं, तब जाकर रविवार सुबह 5 बजे हेलीकॉप्टर मंगवाना पड़ा। जो काम घंटों पहले स्थानीय स्तर पर सूझबूझ से हो सकता था, उसके लिए करोड़ों का तामझाम जुटाना पड़ा। यह देरी सिस्टम की संवेदनहीनता का जीता-जागता सबूत है।" भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते कांशीराम आवास कांशीराम आवासों की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। घटिया निर्माण सामग्री और रखरखाव के अभाव में ये इमारतें अब 'कब्रगाह' बनती जा रही हैं। शनिवार को टूटी वह सीढ़ी दरअसल उस भ्रष्टाचार की कड़ी है, जिसकी जांच कागजों से बाहर कभी निकलती ही नहीं। तीखे सवाल: मृतक बच्चे के परिवार की भरपाई क्या सिर्फ मुआवजे के चंद टुकड़ों से हो जाएगी? उन अधिकारियों पर एफआईआर (FIR) कब होगी, जिनकी निगरानी में यह जर्जर ढांचा खड़ा था? क्या जिले की अन्य पानी की टंकियों का सेफ्टी ऑडिट होगा, या अगले हादसे का इंतजार किया जाएगा? निष्कर्ष: सिद्धार्थनगर की यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि सिस्टम को आम आदमी की जान की परवाह नहीं है। हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू कर लेना भले ही प्रशासन अपनी पीठ थपथपाने का जरिया बना ले, लेकिन सच तो यही है कि एक मां की गोद सूनी हो चुकी है और इसके जिम्मेदार सफेदपोश और लापरवाह इंजीनियर ही हैं। अब वक्त केवल सांत्वना का नहीं, बल्कि सख्त कार्रवाई और जवाबदेही तय करने का है।1