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यह पोस्ट ज्यादा से ज्यादा शेयर करे ताकि ये सड़क जो की सरकारी पास हुआ है अभी तक नहीं बना है बन जाए ग्राम पंचायत पूरेओरीराय जनपद बस्ती की है हमारे गांव में एक सरकारी रास्ता पास हुआ है लेकिन 5 साल हो गए लेकिन अभी तक नहीं बना जी हां मैं बात कर रहा हूं ग्राम पंचायत पूरेओरीराय ब्लॉक दुबौलिया जनपद बस्ती की बात कर रहा हूं आप लोगों की क्या राय यह बन जाना चाहिए की नही आने जाने में लोगो की बड़ी समस्या होती हैं
Yogeshji
यह पोस्ट ज्यादा से ज्यादा शेयर करे ताकि ये सड़क जो की सरकारी पास हुआ है अभी तक नहीं बना है बन जाए ग्राम पंचायत पूरेओरीराय जनपद बस्ती की है हमारे गांव में एक सरकारी रास्ता पास हुआ है लेकिन 5 साल हो गए लेकिन अभी तक नहीं बना जी हां मैं बात कर रहा हूं ग्राम पंचायत पूरेओरीराय ब्लॉक दुबौलिया जनपद बस्ती की बात कर रहा हूं आप लोगों की क्या राय यह बन जाना चाहिए की नही आने जाने में लोगो की बड़ी समस्या होती हैं
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- हमारे गांव में एक सरकारी रास्ता पास हुआ है लेकिन 5 साल हो गए लेकिन अभी तक नहीं बना जी हां मैं बात कर रहा हूं ग्राम पंचायत पूरेओरीराय ब्लॉक दुबौलिया जनपद बस्ती की बात कर रहा हूं आप लोगों की क्या राय यह बन जाना चाहिए की नही आने जाने में लोगो की बड़ी समस्या होती हैं1
- Post by Aditya kashyap1
- अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती।जिले के कलवारी थाना क्षेत्र के महुआ डाबर गांव में सार्वजनिक रास्ते को लेकर विवाद ने हिंसक रूप ले लिया,रास्ता निर्माण को लेकर पहुंचे ग्रामीणों पर दबंगों ने अचानक हमला बोल दिया जिससे मौके पर अफरातफरी मच गई। बताया जा रहा है कि यह विवाद काफी समय से चल रहा था और मामले में एसडीएम द्वारा रास्ता बहाल कराने का आदेश भी जारी किया गया था लेकिन दबंगों पर इसका कोई असर नहीं दिखा,आज जब प्रशासनिक आदेश के बाद ग्रामीण रास्ता बनाने पहुंचे तभी विरोधी पक्ष के लोगों ने घरों की छतों से ईंट-पत्थर बरसाने शुरू कर दिए,अचानक हुए इस हमले से लोग अपनी जान बचाकर भागते नजर आए,घटना का वीडियो भी सामने आया है,जिसमें साफ देखा जा सकता है कि किस तरह छतों से लगातार पथराव किया जा रहा है और नीचे मौजूद लोग बचने की कोशिश कर रहे हैं,सूचना मिलते ही डायल 112 पीआरबी और स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया,पुलिस की मौजूदगी में हालात कुछ हद तक शांत हुए लेकिन गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है,वहीं पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की बात कही जा रही है। वहीं इस पूरे मामले में क्षेत्राधिकारी कलवारी संजय सिंह ने बताया कि कल तहसील दिवस पर खड़ंजा लगाने की बात पर हसमतउल्लाह ने एप्लीकेशन दिया था, पूर्व में भी एसडीएम द्वारा आदेशित किया गया था कि खड़ंजा लगाने में कोई भी विवाद उत्पन्न ना हो इसी संबंध में शहाबुद्दीन समेत महिलाओं द्वारा रोका जा रहा था उन्हें महिलाओं द्वारा एट पत्थर चलाया गया है इस संबंध में उनके विरुद्ध आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। दिलशाद अहमद ख़ां।1
- Jabalpur cruise tragedy | Viral mother-child photo fake or real?1
- रिपोर्ट विपिन पांडेय ए बी न्यूज़ अयोध्या नजूल की जमीन पर कब्जे का मामला, प्लाट पर चला प्रशासन का बुलडोजर, कई प्लाट खाली कराए गए,तथाकथित प्रॉपर्टी डीलर ताज मोहम्मद ने 35 लोगों को अपनी पैतृक जमीन बता कर मौखिक रुप से बेचीं थी नजूल की जमीन, करोड़ों रुपए लेकर हुआ है फरार, लोगों की गाढी कमाई मिली मिट्टी में, थाना कैंट के गैस गोदाम के पास पराग डेरी के पीछे का मामला, नजूल की जमीन के निर्माण पर नजूल के लेखपाल की मिली भगत की आशंका.1
- दबंगों द्वारा शौचालय टैंक निर्माण कर अवैध ढंग से रास्ता रोकने की नाकाम कोशिश विफल अयोध्या / अंबेडकरनगर दबंगों ने स्थाई निर्माण के लिए आम रास्ते के बीचों-बीच उक्त उद्दंड, सरकस भू माफिया राकेश कुमार मौर्य,प्रभावती,उमेश मौर्य,भारतीआदि द्वारा हिंदी प्रचार प्रसार सेवा संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री डॉoसम्राट अशोक मौर्य के बसखारी अंबेडकर नगर स्थित आवास के सामने सार्वजनिक रास्ते में शौचालय टैंक का निर्माण कर मार्ग बाधित करने की कोशिश को उच्चाधिकारियों ने नाकाम कर दियाl विदित हो रास्ता बाधित होने से प्रभावित लोगों द्वारा शिकायत दर्ज करने के उपरांत बसखारी किछौछा के अत्यंत सक्रिय नगर पंचायत अध्यक्ष ओमकार गुप्ता,सक्रिय अधिशासी अधिकारी,टांडा तहसील के लोकप्रिय उप जिलाधिकारी डॉoशशी शेखर,सी.ओ.परिक्षेत्र अकबरपुर,सक्रिय थाना अध्यक्ष बसखारी सुनील कुमार पांडेय,लेखपाल पुनीत पटेल,जनपद में नवागत तेज तर्रार एस.पी.प्राची सिंह, विद्वानअपर आयुक्त प्रशासन श्रीमानअजयकांत सैनी,पुलिस उप महा निरीक्षक श्रीमान सोमेन बर्मा आदि तमाम अधिकारियों की त्वरित सक्रियता से जारी आदेशों निर्देशों के फल स्वरूप जनपद अंबेडकर नगर पंचायत के वार्ड नंबर 10 में उक्त अवैध शौचालय टैंक को तोड़कर अवरुद्ध मार्ग को आम जन मानस के लिए नगर पंचायत के कर्मचारियों ने प्रशासन की मौजूदगी में रास्ता साफ कियाl इस संबंध में टांडा तहसील के उप जिलाधिकारी महोदय को शिकायती पत्र सौंपा गया। जिसमें विद्वान उप जिलाधिकारी महोदय ने तत्काल समुचित कार्रवाई कर रास्ता बाधित करने वालों को दंडित करने का निर्देश बसखारी थाने के प्रभारी निरीक्षक महोदय को दिया, जिसमें उक्त भू माफिया राकेश मौर्य को पुलिस ने कुछ धाराओं में पाबंद भी किया था। इस संबंध रास्ता बाधित होने से प्रभावित होने वाले निवासियों में प्रमुख रूप से रमेश मौर्य,रामजीत मौर्य,संतोष मौर्य, मंतोष मौर्य,जोगिंदर मौर्य,महेंद्र मौर्य सम्राट अशोक मौर्य,डाo चंद्रगुप्त मौर्य इत्यादि प्रभावित होने वाले निवासियों ने प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बताया किअगर रास्ता बंद हो गया होता तो उनके आने-जाने व भवन निर्माण से संबंधित सामग्री लाने ले जाने में काफी दिक्कतें हो जातीं। इस परिप्रेक्ष्य में वरिष्ठ पत्रकार हिंदी दैनिक जनहित सत्ता के ब्यूरो प्रमुख राम केर सिंह,उमाशंकर त्रिपाठी,वाइस ऑफ मुसाफिर की रेनू गुप्ता,साहित्य सम्राट के संपादक डॉoसम्राटअशोक मौर्य,वाराणसी ब्यूरो प्रमुख डॉoचंद्रगुप्त मौर्य,अंबेडकर नगर प्रभारी डॉoसम्राट श्री कृष्णा मनमोहन मौर्य,जनमोर्चा हिंदी दैनिक के जगदंबा श्रीवास्तव,डॉoनृपेंद्र बहादुर श्रीवास्तव(मान्यता प्राप्त पत्रकार),दहकती खबरें की ब्यूरो प्रमुख नीलम सिंह, संतोष तिवारी,आचार्य स्कंद दास,निकिता,वरिष्ठ पत्रकार दिनेश सिंह,विंध्यवासिनी शरण पांडिया,विद्वानअधिवक्ता व पत्रकार सत्य प्रकाश मौर्य, विश्व नारी शक्ति सेना प्रमुख गुड़िया त्रिपाठी,प्रिया श्रीवास्तव्,प्रिया शुक्लाआदि ने प्रशासन की सक्रियता की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया ।1
- अंबेडकर नगर मीरानपुर मोहल्ले में दिल दहला देने वाली घटना, चार मासूम बच्चों की निर्मम हत्याअंबेडकर नगर जनपद मुख्यालय अकबरपुर के मीरानपुर मोहल्ले में शनिवार दोपहर तीन बजे एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। एक घर के अंदर बिस्तर पर चार छोटे बच्चों के खून से लथपथ शव मिले। घर का दरवाजा अंदर से बंद था और बच्चों की मां घर से गायब बताई जा रही है।मृतक बच्चों की पहचान महरुआ निवासी नियाज की पत्नी के पुत्र शफीक, सऊद, उमर तथा पुत्री बयान के रूप में हुई है। परिवार मीरानपुर मोहल्ले में रहता था। नियाज पिछले कई वर्षों से सऊदी अरब में नौकरी कर रहे हैं और उन्होंने वहां एक पाकिस्तानी महिला से निकाह भी कर लिया था।पुलिस जांच मे हत्या की आशंका जताई जा रही है कि पति के दूसरे निकाह की बात जानकर महिला तनावग्रस्त रहती थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई। मामले की गहन छानबीन की जा रही है।1
- अजीत मिश्रा (खोजी) सिद्धार्थनगर: विकास की 'सीढ़ी' ने ली मासूम की जान, सिस्टम की सुस्ती ने बढ़ाई सांसें! ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश सरकारी लापरवाही की इंतहा: जमीन पर नाकाम रहा प्रशासन, तो आसमान से उतारनी पड़ी जिंदगी! मौत की टंकी: क्या मासूमों की बलि लेने के लिए खड़ी की गई थीं ये इमारतें? सिस्टम सोता रहा, टंकी पर सांसें अटकती रहीं: हेलीकॉप्टर ने बचाई दो जानें, पर एक मां की गोद हुई सूनी। खौफनाक शनिवार: खेल-खेल में काल के गाल में समाया मासूम, घंटों लाचार खड़ा रहा प्रशासन। आसमान में रेस्क्यू, जमीन पर सिसकियां: सिद्धार्थनगर हादसे ने झकझोर दी बस्ती मंडल की रूह। SDRF फेल, हेलीकॉप्टर से हुआ खेल: आखिर कब तक घटिया निर्माण की कीमत चुकाएंगे मासूम? साहब! ये हादसा नहीं हत्या है: कांशीराम आवास की टूटी सीढ़ी ने खोली विकास की पोल। सिद्धार्थनगर की त्रासदी: कागजों पर मेंटेनेंस और हकीकत में मौत का जाल! सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में शनिवार को जो हुआ, उसने सरकारी दावों और प्रशासन की कार्यकुशलता की पोल खोलकर रख दी है। कांशीराम आवास स्थित पानी की टंकी की सीढ़ी क्या टूटी, मानों भ्रष्टाचार और अनदेखी की जर्जर इमारत ढह गई। इस हादसे में एक मासूम की जान चली गई, जबकि दो जिंदगी और मौत के बीच मेडिकल कॉलेज में जूझ रहे हैं। सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि दो किशोरों को बचाने के लिए प्रशासन को आसमान की ओर ताकना पड़ा, क्योंकि जमीन पर हमारा 'सिस्टम' लाचार खड़ा था। हादसा या प्रशासनिक हत्या? यह महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही है। सवाल यह है कि: जिस पानी की टंकी की सीढ़ियां इतनी जर्जर थीं कि बच्चों का वजन तक न सह सकीं, उसकी मेंटेनेंस का बजट आखिर किसकी जेब में गया? रिहायशी इलाके में स्थित इस मौत के जाल (टंकी) की घेराबंदी क्यों नहीं की गई थी? क्या प्रशासन को किसी मासूम की बलि चढ़ने का इंतजार था? रेस्क्यू के नाम पर 'तमाशा' और SDRF की नाकामी शनिवार को हादसा हुआ, लेकिन गोरखपुर से पहुंची SDRF की टीम घंटों तक केवल "रास्ता न बन पाने" का बहाना बनाती रही। अत्याधुनिक उपकरणों का दम भरने वाली टीम एक अदद सीढ़ी या रेस्क्यू ब्रिज तक नहीं बना सकी। दो किशोर पूरी रात मौत के साये में टंकी के ऊपर भूखे-प्यासे फंसे रहे, और नीचे खड़ा प्रशासन सिर्फ फाइलों और फोन कॉल में उलझा रहा। "जब जमीन पर तैनात टीमें पंगु साबित हुईं, तब जाकर रविवार सुबह 5 बजे हेलीकॉप्टर मंगवाना पड़ा। जो काम घंटों पहले स्थानीय स्तर पर सूझबूझ से हो सकता था, उसके लिए करोड़ों का तामझाम जुटाना पड़ा। यह देरी सिस्टम की संवेदनहीनता का जीता-जागता सबूत है।" भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते कांशीराम आवास कांशीराम आवासों की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। घटिया निर्माण सामग्री और रखरखाव के अभाव में ये इमारतें अब 'कब्रगाह' बनती जा रही हैं। शनिवार को टूटी वह सीढ़ी दरअसल उस भ्रष्टाचार की कड़ी है, जिसकी जांच कागजों से बाहर कभी निकलती ही नहीं। तीखे सवाल: मृतक बच्चे के परिवार की भरपाई क्या सिर्फ मुआवजे के चंद टुकड़ों से हो जाएगी? उन अधिकारियों पर एफआईआर (FIR) कब होगी, जिनकी निगरानी में यह जर्जर ढांचा खड़ा था? क्या जिले की अन्य पानी की टंकियों का सेफ्टी ऑडिट होगा, या अगले हादसे का इंतजार किया जाएगा? निष्कर्ष: सिद्धार्थनगर की यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि सिस्टम को आम आदमी की जान की परवाह नहीं है। हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू कर लेना भले ही प्रशासन अपनी पीठ थपथपाने का जरिया बना ले, लेकिन सच तो यही है कि एक मां की गोद सूनी हो चुकी है और इसके जिम्मेदार सफेदपोश और लापरवाह इंजीनियर ही हैं। अब वक्त केवल सांत्वना का नहीं, बल्कि सख्त कार्रवाई और जवाबदेही तय करने का है।1