logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

पश्चिम बंगाल के नए CM शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) की पहली कैबिनेट मीटिंग के बड़े फैसले (11 मई 2026) मुख्य फैसले: बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग: राज्य सरकार ने BSF को 45 दिनों के अंदर ज़मीन ट्रांसफर करने का फैसला लिया है। इससे भारत-बांग्लादेश बॉर्डर (लगभग 2217 किमी) पर लंबे समय से अटकी फेंसिंग पूरी हो सकेगी। CM शुभेंदु ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ज़रूरी बताया। केंद्रीय योजनाओं और कानूनों का लागू होना: ममता सरकार द्वारा रोकी गई कई केंद्र सरकार की योजनाओं को तुरंत लागू करने का ऐलान। इसमें Ayushman Bharat जैसी स्वास्थ्य योजनाएं भी शामिल हैं। नए आपराधिक कानून: पहली कैबिनेट में Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) (भारतीय न्याय संहिता - IPC की जगह) को लागू करने का फैसला। पुराने ब्रिटिश काल के कानूनों की जगह नए कानूनों को प्राथमिकता। अन्य फैसले: सरकारी नौकरियों में आयु सीमा में 5 साल की छूट, विकास कार्यों पर फोकस। बैकग्राउंड BJP ने 2026 विधानसभा चुनाव में भारी जीत हासिल की (207+ सीटें)। 9 मई 2026 को शुभेंदु अधिकारी ने पहले BJP CM के रूप में शपथ ली (ममता बनर्जी के 15 साल के शासन के बाद)। उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों पर जीत दर्ज की (भवानीपुर में ममता को हराया)। CM शुभेंदु का बयान (संक्षेप में): "बॉर्डर की सुरक्षा राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़ी है। 45 दिनों में BSF को ज़मीन सौंप दी जाएगी।" Yeh sab major news sources (The New Indian Express, India Today, Swarajya आदि) पर कन्फर्म है। स्वतंत्र न्यूज़ छत्तीसगढ़ मुद्दों पर बात, स्वतंत्रता के साथ #swatantraupdates #स्वतंत्रन्यूज़छत्तीसगढ़ #swatantranewschhattisgarh #swatantralive #swatantrashort #CGNewsUpdate #CGNews #swatantranewscg Vinod Kumar Pandey SWATANTRA NEWS CHHATTISGARH

1 hr ago
user_SWATANTRA NEW'S CHHATTISGARH
SWATANTRA NEW'S CHHATTISGARH
दुर्ग, दुर्ग, छत्तीसगढ़•
1 hr ago
47262ea2-4da2-40d7-88f5-201c9d3f5e16

पश्चिम बंगाल के नए CM शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) की पहली कैबिनेट मीटिंग के बड़े फैसले (11 मई 2026) मुख्य फैसले: बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग: राज्य सरकार ने BSF को 45 दिनों के अंदर ज़मीन ट्रांसफर करने का फैसला लिया है। इससे भारत-बांग्लादेश बॉर्डर (लगभग 2217 किमी) पर लंबे समय से अटकी फेंसिंग पूरी हो सकेगी। CM शुभेंदु ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ज़रूरी बताया। केंद्रीय योजनाओं और कानूनों का लागू होना: ममता सरकार द्वारा रोकी गई कई केंद्र सरकार की योजनाओं को तुरंत लागू करने का ऐलान। इसमें Ayushman Bharat जैसी स्वास्थ्य योजनाएं भी शामिल हैं। नए आपराधिक कानून: पहली कैबिनेट में Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) (भारतीय न्याय संहिता - IPC की जगह) को लागू करने का फैसला। पुराने ब्रिटिश काल के कानूनों की जगह नए कानूनों को प्राथमिकता। अन्य फैसले: सरकारी नौकरियों में आयु सीमा में 5 साल की छूट, विकास कार्यों पर फोकस। बैकग्राउंड BJP ने 2026 विधानसभा चुनाव में भारी जीत हासिल की (207+ सीटें)। 9 मई 2026 को शुभेंदु अधिकारी ने पहले BJP CM के रूप में शपथ ली (ममता बनर्जी के 15 साल के शासन के बाद)। उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों पर जीत दर्ज की (भवानीपुर में ममता को हराया)। CM शुभेंदु का बयान (संक्षेप में): "बॉर्डर की सुरक्षा राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़ी है। 45 दिनों में BSF को ज़मीन सौंप दी जाएगी।" Yeh sab major news sources (The New Indian Express, India Today, Swarajya आदि) पर कन्फर्म है। स्वतंत्र न्यूज़ छत्तीसगढ़ मुद्दों पर बात, स्वतंत्रता के साथ #swatantraupdates #स्वतंत्रन्यूज़छत्तीसगढ़ #swatantranewschhattisgarh #swatantralive #swatantrashort #CGNewsUpdate #CGNews #swatantranewscg Vinod Kumar Pandey SWATANTRA NEWS CHHATTISGARH

More news from छत्तीसगढ़ and nearby areas
  • पानी की किल्लत पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, महिलाओं ने नेशनल हाईवे पर किया चक्का जाम पानी की किल्लत पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, महिलाओं ने नेशनल हाईवे पर किया चक्का जाम गरियाबंद। जिले के ग्राम पोड में पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सोमवार को सड़क पर देखने को मिला। गांव में लंबे समय से बनी पानी की समस्या से परेशान बड़ी संख्या में महिलाएं बाल्टी और गुंडी लेकर नेशनल हाईवे 130 पर बैठ गईं और चक्का जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में पेयजल की गंभीर समस्या बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। भीषण गर्मी में पानी की परेशानी बढ़ने से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। चक्का जाम के कारण हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आवागमन प्रभावित रहा। सूचना मिलते ही पांडुका पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को समझाइश देकर जाम समाप्त कराने की कोशिश में जुट गई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द पानी की व्यवस्था नहीं की गई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
    2
    पानी की किल्लत पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, महिलाओं ने नेशनल हाईवे पर किया चक्का जाम
पानी की किल्लत पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, महिलाओं ने नेशनल हाईवे पर किया चक्का जाम
गरियाबंद। जिले के ग्राम पोड में पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सोमवार को सड़क पर देखने को मिला। गांव में लंबे समय से बनी पानी की समस्या से परेशान बड़ी संख्या में महिलाएं बाल्टी और गुंडी लेकर नेशनल हाईवे 130 पर बैठ गईं और चक्का जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में पेयजल की गंभीर समस्या बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। भीषण गर्मी में पानी की परेशानी बढ़ने से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।
चक्का जाम के कारण हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आवागमन प्रभावित रहा। सूचना मिलते ही पांडुका पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को समझाइश देकर जाम समाप्त कराने की कोशिश में जुट गई।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द पानी की व्यवस्था नहीं की गई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
    user_नागेन्द्र निषाद
    नागेन्द्र निषाद
    राजिम, गरियाबंद, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • कलम की चीख: जब एक बुजुर्ग पत्रकार को अपराधी बना दिया गया… कलम की चीख: जब एक बुजुर्ग पत्रकार को अपराधी बना दिया गया… गरियाबंद। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की हालत आज किस दौर से गुजर रही है, इसका दर्दनाक उदाहरण छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में देखने को मिला। वर्षों तक समाज की आवाज़ बनने वाला एक बुजुर्ग पत्रकार आज खुद व्यवस्था के सवालों के बीच खड़ा दिखाई दे रहा है। जिस व्यक्ति ने पूरी जिंदगी कलम के जरिए गरीबों, पीड़ितों और आम जनता की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुँचाया, आज उसी को अपराधी की तरह पेश किए जाने की कोशिश ने पूरे पत्रकार जगत को भीतर तक झकझोर दिया है। यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि उस हर पत्रकार की पीड़ा है जो सच लिखने का साहस करता है। सवाल यह उठता है कि क्या अब सच बोलना और सच दिखाना भी गुनाह बन चुका है? जिस उम्र में इंसान सम्मान और शांति की उम्मीद करता है, उस उम्र में एक बुजुर्ग पत्रकार को मानसिक प्रताड़ना, अपमान और कार्रवाई का सामना करना पड़े — यह दृश्य केवल पत्रकार समाज ही नहीं, बल्कि हर संवेदनशील नागरिक को विचलित कर रहा है। आखिर वह कौन-सी गुंडागर्दी है, जो एक कमजोर, बुजुर्ग पत्रकार की आंखों में दिखाई दे रही है? क्या व्यवस्था अब इतनी असहज हो चुकी है कि सवाल पूछने वाली कलम भी उसे दुश्मन नजर आने लगी है? विडंबना देखिए… एक तरफ वे लोग जिन पर समाज में भय और हिंसा फैलाने के आरोप लगते रहे हैं, उनके लिए सुरक्षा के बड़े-बड़े इंतजाम किए जाते हैं। करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। लेकिन दूसरी तरफ, जनता की आवाज़ उठाने वाला पत्रकार खुद असुरक्षित महसूस कर रहा है। पत्रकार कभी समाज का दुश्मन नहीं होता। पत्रकार वह आईना होता है जो सत्ता को उसकी सच्चाई दिखाता है। लेकिन जब सत्ता और व्यवस्था उसी आईने को तोड़ने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र खतरे में है। आज गरियाबंद की यह घटना पूरे प्रदेश के पत्रकारों के मन में एक डर पैदा कर रही है। डर इस बात का कि कहीं कल सच लिखने की कीमत उन्हें भी न चुकानी पड़े। यदि एक बुजुर्ग पत्रकार सुरक्षित नहीं है, तो फिर आम नागरिक किस भरोसे न्याय और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की उम्मीद करेगा? प्रदेश के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai, गृहमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों से पत्रकार समाज की यही मांग है कि इस मामले को केवल कानूनी कार्रवाई के नजरिए से नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों की दृष्टि से देखा जाए। क्योंकि अगर कलम डर गई… तो जनता की आवाज़ भी खामोश हो जाएगी। आज जरूरत है पत्रकारों को संरक्षण देने की, उन्हें सम्मान देने की, ताकि वे बिना भय के सच लिख सकें। लोकतंत्र की असली ताकत बंदूक नहीं, बल्कि स्वतंत्र कलम होती है। “अगर सच लिखना अपराध बन गया, तो आने वाला समय लोकतंत्र के लिए सबसे खतरनाक दौर साबित होगा।”
    1
    कलम की चीख: जब एक बुजुर्ग पत्रकार को अपराधी बना दिया गया…
कलम की चीख: जब एक बुजुर्ग पत्रकार को अपराधी बना दिया गया…
गरियाबंद।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की हालत आज किस दौर से गुजर रही है, इसका दर्दनाक उदाहरण छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में देखने को मिला। वर्षों तक समाज की आवाज़ बनने वाला एक बुजुर्ग पत्रकार आज खुद व्यवस्था के सवालों के बीच खड़ा दिखाई दे रहा है। जिस व्यक्ति ने पूरी जिंदगी कलम के जरिए गरीबों, पीड़ितों और आम जनता की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुँचाया, आज उसी को अपराधी की तरह पेश किए जाने की कोशिश ने पूरे पत्रकार जगत को भीतर तक झकझोर दिया है।
यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि उस हर पत्रकार की पीड़ा है जो सच लिखने का साहस करता है।
सवाल यह उठता है कि क्या अब सच बोलना और सच दिखाना भी गुनाह बन चुका है?
जिस उम्र में इंसान सम्मान और शांति की उम्मीद करता है, उस उम्र में एक बुजुर्ग पत्रकार को मानसिक प्रताड़ना, अपमान और कार्रवाई का सामना करना पड़े — यह दृश्य केवल पत्रकार समाज ही नहीं, बल्कि हर संवेदनशील नागरिक को विचलित कर रहा है।
आखिर वह कौन-सी गुंडागर्दी है, जो एक कमजोर, बुजुर्ग पत्रकार की आंखों में दिखाई दे रही है?
क्या व्यवस्था अब इतनी असहज हो चुकी है कि सवाल पूछने वाली कलम भी उसे दुश्मन नजर आने लगी है?
विडंबना देखिए…
एक तरफ वे लोग जिन पर समाज में भय और हिंसा फैलाने के आरोप लगते रहे हैं, उनके लिए सुरक्षा के बड़े-बड़े इंतजाम किए जाते हैं। करोड़ों रुपए खर्च होते हैं।
लेकिन दूसरी तरफ, जनता की आवाज़ उठाने वाला पत्रकार खुद असुरक्षित महसूस कर रहा है।
पत्रकार कभी समाज का दुश्मन नहीं होता।
पत्रकार वह आईना होता है जो सत्ता को उसकी सच्चाई दिखाता है।
लेकिन जब सत्ता और व्यवस्था उसी आईने को तोड़ने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र खतरे में है।
आज गरियाबंद की यह घटना पूरे प्रदेश के पत्रकारों के मन में एक डर पैदा कर रही है। डर इस बात का कि कहीं कल सच लिखने की कीमत उन्हें भी न चुकानी पड़े।
यदि एक बुजुर्ग पत्रकार सुरक्षित नहीं है, तो फिर आम नागरिक किस भरोसे न्याय और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की उम्मीद करेगा?
प्रदेश के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai, गृहमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों से पत्रकार समाज की यही मांग है कि इस मामले को केवल कानूनी कार्रवाई के नजरिए से नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों की दृष्टि से देखा जाए।
क्योंकि अगर कलम डर गई…
तो जनता की आवाज़ भी खामोश हो जाएगी।
आज जरूरत है पत्रकारों को संरक्षण देने की, उन्हें सम्मान देने की, ताकि वे बिना भय के सच लिख सकें।
लोकतंत्र की असली ताकत बंदूक नहीं, बल्कि स्वतंत्र कलम होती है।
“अगर सच लिखना अपराध बन गया, तो आने वाला समय लोकतंत्र के लिए सबसे खतरनाक दौर साबित होगा।”
    user_जय जोहार छत्तीसगढ़'केसरिया हिंदुस्तान' press
    जय जोहार छत्तीसगढ़'केसरिया हिंदुस्तान' press
    Journalist टिल्डा, रायपुर, छत्तीसगढ़•
    5 hrs ago
  • अंबागढ़ चौकी में एक नए डिस्काउंट स्टोर का भव्य शुभारंभ हुआ है। यहाँ घर की जरूरतों, सजावटी सामानों और बच्चों के खिलौनों सहित कई चीजें मात्र ₹24 की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध हैं। यह स्थानीय निवासियों के लिए खरीदारी का एक किफायती विकल्प है।
    1
    अंबागढ़ चौकी में एक नए डिस्काउंट स्टोर का भव्य शुभारंभ हुआ है। यहाँ घर की जरूरतों, सजावटी सामानों और बच्चों के खिलौनों सहित कई चीजें मात्र ₹24 की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध हैं। यह स्थानीय निवासियों के लिए खरीदारी का एक किफायती विकल्प है।
    user_CG NEWS 78
    CG NEWS 78
    Local News Reporter मोहला, मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी, छत्तीसगढ़•
    13 hrs ago
  • बेटे को खोने के दर्द से उबरी भुवनेश्वरी उमरे, “लखपति दीदी” ने बदल दी पूरे गाँव क बालाघाट के लांजी जनपद के छोटे से ग्राम करेजा में रहने वाली भुवनेश्वरी उमरे की कहानी केवल एक महिला की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, आत्मविश्वास और समाज परिवर्तन की ऐसी मिसाल है, जो हर ग्रामीण महिला को नई प्रेरणा देती है। सामान्य ग्रामीण परिवार से आने वाली भुवनेश्वरी उमरे की जिंदगी कभी खेती और परिवार तक ही सीमित थी। दसवीं तक शिक्षित भुवनेश्वरी अपने परिवार के साथ साधारण जीवन जी रही थीं। लेकिन अचानक आई एक ऐसी त्रासदी ने उनकी दुनिया ही बदल दी। उनके 19 वर्षीय बेटे का असमय निधन हो गया। एक माँ के लिए यह दुख असहनीय था। बेटे के जाने के बाद भुवनेश्वरी पूरी तरह टूट चुकी थीं। घर में सन्नाटा था, मन में गहरी निराशा थी और जिंदगी जैसे थम सी गई थी। परिवार और गाँव के लोग उन्हें संभालने की कोशिश करते रहे, लेकिन एक माँ के दर्द को शब्दों में बांध पाना आसान नहीं था। लेकिन कहते हैं कि मजबूत इरादे सबसे कठिन अंधेरे को भी रोशनी में बदल देते हैं। भुवनेश्वरी ने भी हार नहीं मानी। उन्होंने अपने टूटे हुए मन को फिर से संभाला और जीवन को नई दिशा देने का निर्णय लिया। इसी दौरान वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ीं। समूह गतिविधियों और आजीविका कार्यों ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत किया। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को समाज सेवा और खेती के कार्यों में पूरी तरह समर्पित कर दिया। उन्होंने EBMKN योजना और प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण लिया। सीखने की लगन और मेहनत ने उन्हें जल्द ही गाँव की महिलाओं के बीच एक नई पहचान दिला दी। आज भुवनेश्वरी उमरे “कृषि सखी”, “प्राकृतिक खेती मास्टर ट्रेनर” और ग्रामीण महिलाओं की प्रेरणा बन चुकी हैं। कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (CRP) के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने लगभग 250 स्व-सहायता समूहों के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे गाँव-गाँव जाकर महिलाओं को संगठित करती हैं, उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं और आजीविका से जोड़ने का कार्य करती हैं। भुवनेश्वरी दीदी नियमित रूप से “कृषि पाठशाला” और “पशुपाठशाला” का आयोजन कर किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती की जानकारी देती हैं। उनके प्रयासों का असर यह हुआ कि आज उनके गाँव के अधिकांश किसान प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ चुके हैं। उन्होंने स्वयं आटा चक्की संचालन का कार्य शुरू किया, जिससे परिवार की आय में वृद्धि हुई। इसके साथ ही वे उत्पादक समूह (PG) बनाकर महिलाओं और किसानों को सामूहिक व्यवसाय से जोड़ रही हैं। आज उनकी वार्षिक आय लगभग ढाई लाख रुपये तक पहुँच चुकी है। लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि केवल आर्थिक सफलता नहीं है। उनकी असली सफलता यह है कि जिस महिला ने कभी अपने बेटे को खोने के बाद जीवन से उम्मीद छोड़ दी थी, वही आज सैकड़ों महिलाओं और किसानों को जीने की नई उम्मीद दे रही है।गाँव की महिलाएँ उन्हें केवल “दीदी” नहीं, बल्कि अपने संघर्ष और सफलता की प्रेरणा मानती हैं। भुवनेश्वरी उमरे कहती हैं—“मैंने जीवन में बहुत बड़ा दुख देखा है। एक समय ऐसा था जब मुझे लगता था कि अब कुछ नहीं बचा। लेकिन आजीविका मिशन, खेती और समाज के साथ काम करने से मुझे जीने की नई ताकत मिली। आज जब गाँव की महिलाएँ आत्मनिर्भर बन रही हैं और किसान प्राकृतिक खेती अपना रहे हैं, तब लगता है कि मेरा जीवन फिर से सफल हो गया।”आज भुवनेश्वरी उमरे आत्मनिर्भर भारत, महिला सशक्तिकरण और प्राकृतिक खेती की जीवंत मिसाल बन चुकी हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर दर्द को संकल्प में बदल दिया जाए, तो एक महिला पूरे गाँव की तस्वीर बदल सकती है। भुवनेश्वरी उमरे जैसी “लखपति दीदी” आज उस नए ग्रामीण भारत की पहचान हैं, जहाँ महिलाएँ अब केवल घर तक सीमित नहीं, बल्कि बदलाव की अगुवाई कर रही हैं।
    1
    बेटे को खोने के दर्द से उबरी भुवनेश्वरी उमरे, “लखपति दीदी” ने बदल दी पूरे गाँव क
बालाघाट के लांजी जनपद के छोटे से ग्राम करेजा में रहने वाली भुवनेश्वरी उमरे की कहानी केवल एक महिला की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, आत्मविश्वास और समाज परिवर्तन की ऐसी मिसाल है, जो हर ग्रामीण महिला को नई प्रेरणा देती है।
सामान्य ग्रामीण परिवार से आने वाली भुवनेश्वरी उमरे की जिंदगी कभी खेती और परिवार तक ही सीमित थी। दसवीं तक शिक्षित भुवनेश्वरी अपने परिवार के साथ साधारण जीवन जी रही थीं। लेकिन अचानक आई एक ऐसी त्रासदी ने उनकी दुनिया ही बदल दी। उनके 19 वर्षीय बेटे का असमय निधन हो गया।
एक माँ के लिए यह दुख असहनीय था। बेटे के जाने के बाद भुवनेश्वरी पूरी तरह टूट चुकी थीं। घर में सन्नाटा था, मन में गहरी निराशा थी और जिंदगी जैसे थम सी गई थी। परिवार और गाँव के लोग उन्हें संभालने की कोशिश करते रहे, लेकिन एक माँ के दर्द को शब्दों में बांध पाना आसान नहीं था। लेकिन कहते हैं कि मजबूत इरादे सबसे कठिन अंधेरे को भी रोशनी में बदल देते हैं। भुवनेश्वरी ने भी हार नहीं मानी। उन्होंने अपने टूटे हुए मन को फिर से संभाला और जीवन को नई दिशा देने का निर्णय लिया।
इसी दौरान वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ीं। समूह गतिविधियों और आजीविका कार्यों ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत किया। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को समाज सेवा और खेती के कार्यों में पूरी तरह समर्पित कर दिया। उन्होंने EBMKN योजना और प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण लिया। सीखने की लगन और मेहनत ने उन्हें जल्द ही गाँव की महिलाओं के बीच एक नई पहचान दिला दी। आज भुवनेश्वरी उमरे “कृषि सखी”, “प्राकृतिक खेती मास्टर ट्रेनर” और ग्रामीण महिलाओं की प्रेरणा बन चुकी हैं।
कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (CRP) के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने लगभग 250 स्व-सहायता समूहों के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे गाँव-गाँव जाकर महिलाओं को संगठित करती हैं, उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं और आजीविका से जोड़ने का कार्य करती हैं।
भुवनेश्वरी दीदी नियमित रूप से “कृषि पाठशाला” और “पशुपाठशाला” का आयोजन कर किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती की जानकारी देती हैं। उनके प्रयासों का असर यह हुआ कि आज उनके गाँव के अधिकांश किसान प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ चुके हैं। उन्होंने स्वयं आटा चक्की संचालन का कार्य शुरू किया, जिससे परिवार की आय में वृद्धि हुई। इसके साथ ही वे उत्पादक समूह (PG) बनाकर महिलाओं और किसानों को सामूहिक व्यवसाय से जोड़ रही हैं। आज उनकी वार्षिक आय लगभग ढाई लाख रुपये तक पहुँच चुकी है।
लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि केवल आर्थिक सफलता नहीं है। उनकी असली सफलता यह है कि जिस महिला ने कभी अपने बेटे को खोने के बाद जीवन से उम्मीद छोड़ दी थी, वही आज सैकड़ों महिलाओं और किसानों को जीने की नई उम्मीद दे रही है।गाँव की महिलाएँ उन्हें केवल “दीदी” नहीं, बल्कि अपने संघर्ष और सफलता की प्रेरणा मानती हैं।
भुवनेश्वरी उमरे कहती हैं—“मैंने जीवन में बहुत बड़ा दुख देखा है। एक समय ऐसा था जब मुझे लगता था कि अब कुछ नहीं बचा। लेकिन आजीविका मिशन, खेती और समाज के साथ काम करने से मुझे जीने की नई ताकत मिली। आज जब गाँव की महिलाएँ आत्मनिर्भर बन रही हैं और किसान प्राकृतिक खेती अपना रहे हैं, तब लगता है कि मेरा जीवन फिर से सफल हो गया।”आज भुवनेश्वरी उमरे आत्मनिर्भर भारत, महिला सशक्तिकरण और प्राकृतिक खेती की जीवंत मिसाल बन चुकी हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर दर्द को संकल्प में बदल दिया जाए, तो एक महिला पूरे गाँव की तस्वीर बदल सकती है। भुवनेश्वरी उमरे जैसी “लखपति दीदी” आज उस नए ग्रामीण भारत की पहचान हैं, जहाँ महिलाएँ अब केवल घर तक सीमित नहीं, बल्कि बदलाव की अगुवाई कर रही हैं।
    user_Ramanuj Tidke
    Ramanuj Tidke
    Local News Reporter लांजी, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
    33 min ago
  • जनपद के सामने तेज रफ़्तार बाइक सवार ने पैदल चल रही महिला को मारी ठोकर सिर और पैर में आई गंभीर चोंट दरअसल पूरा घटना बोड़ला थाना क्षेत्र अंतर्गत नगर पंचायत बोड़ला में स्थित जनपद पंचायत के सामने का है जहाँ पर सोमवार कि दोपहर 1:30 बजे के एक तेज रफ़्तार बाइक सवार ने रोड़ में पैदल चल रही एक महिला को जबरदस्त ठोंकर मर दिया हादसे में महिला कि सिर और पैर में गंभीर चोट आई है जिनको परिजनों अपने हाथो में उठकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोड़ला में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है जहाँ पर महिला कि उपचार जारी हैं.
    1
    जनपद के सामने तेज रफ़्तार बाइक सवार ने पैदल चल रही महिला को मारी ठोकर सिर और पैर में आई गंभीर चोंट 
दरअसल पूरा घटना बोड़ला थाना क्षेत्र अंतर्गत नगर पंचायत बोड़ला में स्थित जनपद पंचायत के सामने का है जहाँ पर सोमवार कि दोपहर 1:30 बजे के एक तेज रफ़्तार बाइक सवार ने रोड़ में पैदल चल रही एक महिला को जबरदस्त ठोंकर मर दिया हादसे में महिला कि सिर और पैर में गंभीर चोट आई है जिनको परिजनों अपने हाथो में उठकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोड़ला में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है जहाँ पर महिला कि उपचार जारी हैं.
    user_Jeevan Yadav
    Jeevan Yadav
    Local News Reporter कवर्धा, कबीरधाम, छत्तीसगढ़•
    1 hr ago
  • हत्या प्रकरण में त्वरित कार्यवाही करते हुए आरोपी गिरफ्तार, घटना में प्रयुक्त रक्तरंजित कपड़ा जप्त कबीरधाम पुलिस द्वारा थाना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत घटित हत्या के प्रकरण में त्वरित एवं प्रभावी कार्यवाही करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। पुलिस अधीक्षक कबीरधाम धर्मेन्द्र सिंह के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेन्द्र बघेल एवं अमित पटेल तथा डीएसपी आशीष शुक्ला के मार्गदर्शन में थाना कोतवाली कवर्धा पुलिस टीम द्वारा पूरी गंभीरता एवं तत्परता के साथ कार्यवाही की गई। प्रार्थी नूतन यादव निवासी पैठूपारा कवर्धा द्वारा थाना कवर्धा में रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि उसका छोटा भाई भैयालाल यादव उर्फ भूपेन्द्र दिनांक 10/05/2026 को सुबह से ठाकुर पारा निवासी अमन ठाकुर के साथ था। काफी देर तक घर वापस नहीं आने पर उसकी तलाश की गई। तलाश के दौरान ठाकुर पारा स्थित एक मकान में भैयालाल यादव उर्फ भूपेन्द्र गंभीर रूप से घायल एवं रक्तरंजित अवस्था में पड़ा मिला, जिसकी मृत्यु हो चुकी थी। घटना की सूचना पर थाना कवर्धा में अपराध क्रमांक 181/2026 धारा 103(1) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। घटना की सूचना मिलते ही थाना कोतवाली पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची एवं घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया। शव पंचनामा कार्यवाही उपरांत शव का पोस्टमार्टम कराया गया तथा आसपास के लोगों एवं संबंधित गवाहों से विस्तृत पूछताछ की गई। विवेचना के दौरान संदेही अखिलेष ठाकुर उर्फ अमन ठाकुर से पूछताछ की गई, जिसमें उसके द्वारा घटना के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि दिनांक 10/05/2026 को वह एवं मृतक भूपेन्द्र यादव साथ में विभिन्न स्थानों पर घूमते हुए शराब सेवन कर रहे थे। बाद में दोनों उसके घर पहुंचे, जहां शराब सेवन के दौरान आपसी विवाद एवं गाली-गलौच की स्थिति निर्मित हो गई। विवाद बढ़ने पर दोनों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसमें आरोपी द्वारा मृतक को जमीन पर पटक दिया गया। गिरने से मृतक के सिर में गंभीर चोट आई और वह अचेत हो गया। घटना के बाद आरोपी ने अपने पहने हुए रक्तरंजित कपड़े बदलकर घर में छुपा दिए थे। आरोपी का विवरण : अखिलेष ठाकुर उर्फ अमन ठाकुर पिता दिलीप साहू, उम्र 33 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 22 ठाकुर पारा कवर्धा, थाना कवर्धा, जिला कबीरधाम (छत्तीसगढ़)। आरोपी के मेमोरेण्डम कथन के आधार पर पुलिस द्वारा घटना के समय पहने गये रक्तरंजित कपड़े को विधिवत जप्त किया गया। विवेचना के दौरान संकलित साक्ष्यों, गवाहों के कथनों एवं आरोपी से प्राप्त जानकारी के आधार पर आरोपी अखिलेष ठाकुर उर्फ अमन ठाकुर पिता दिलीप साहू, उम्र 33 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 22 ठाकुर पारा कवर्धा को दिनांक 11/05/2026 को विधिवत गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी की सूचना आरोपी के परिजनों को दी गई तथा आरोपी को न्यायालय में प्रस्तुत कर न्यायिक अभिरक्षा हेतु आवेदन किया गया है। प्रकरण में थाना कोतवाली कवर्धा की टीम द्वारा त्वरित, सतर्क एवं सराहनीय कार्यवाही करते हुए महत्वपूर्ण साक्ष्य संकलित कर आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार किया गया। कबीरधाम पुलिस द्वारा मामले की विवेचना जारी है।
    4
    हत्या प्रकरण में त्वरित कार्यवाही करते हुए आरोपी गिरफ्तार, घटना में प्रयुक्त रक्तरंजित कपड़ा जप्त
कबीरधाम पुलिस द्वारा थाना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत घटित हत्या के प्रकरण में त्वरित एवं प्रभावी कार्यवाही करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। 
पुलिस अधीक्षक कबीरधाम धर्मेन्द्र सिंह के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेन्द्र बघेल एवं अमित पटेल तथा डीएसपी आशीष शुक्ला के मार्गदर्शन में थाना कोतवाली कवर्धा पुलिस टीम द्वारा पूरी गंभीरता एवं तत्परता के साथ कार्यवाही की गई।
प्रार्थी नूतन यादव निवासी पैठूपारा कवर्धा द्वारा थाना कवर्धा में रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि उसका छोटा भाई भैयालाल यादव उर्फ भूपेन्द्र दिनांक 10/05/2026 को सुबह से ठाकुर पारा निवासी अमन ठाकुर के साथ था। काफी देर तक घर वापस नहीं आने पर उसकी तलाश की गई। तलाश के दौरान ठाकुर पारा स्थित एक मकान में भैयालाल यादव उर्फ भूपेन्द्र गंभीर रूप से घायल एवं रक्तरंजित अवस्था में पड़ा मिला, जिसकी मृत्यु हो चुकी थी। घटना की सूचना पर थाना कवर्धा में अपराध क्रमांक 181/2026 धारा 103(1) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।
घटना की सूचना मिलते ही थाना कोतवाली पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची एवं घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया। शव पंचनामा कार्यवाही उपरांत शव का पोस्टमार्टम कराया गया तथा आसपास के लोगों एवं संबंधित गवाहों से विस्तृत पूछताछ की गई। विवेचना के दौरान संदेही अखिलेष ठाकुर उर्फ अमन ठाकुर से पूछताछ की गई, जिसमें उसके द्वारा घटना के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि दिनांक 10/05/2026 को वह एवं मृतक भूपेन्द्र यादव साथ में विभिन्न स्थानों पर घूमते हुए शराब सेवन कर रहे थे। बाद में दोनों उसके घर पहुंचे, जहां शराब सेवन के दौरान आपसी विवाद एवं गाली-गलौच की स्थिति निर्मित हो गई। विवाद बढ़ने पर दोनों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसमें आरोपी द्वारा मृतक को जमीन पर पटक दिया गया। गिरने से मृतक के सिर में गंभीर चोट आई और वह अचेत हो गया। घटना के बाद आरोपी ने अपने पहने हुए रक्तरंजित कपड़े बदलकर घर में छुपा दिए थे।
आरोपी का विवरण :
अखिलेष ठाकुर उर्फ अमन ठाकुर पिता दिलीप साहू, उम्र 33 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 22 ठाकुर पारा कवर्धा, थाना कवर्धा, जिला कबीरधाम (छत्तीसगढ़)।
आरोपी के मेमोरेण्डम कथन के आधार पर पुलिस द्वारा घटना के समय पहने गये रक्तरंजित कपड़े को विधिवत जप्त किया गया। विवेचना के दौरान संकलित साक्ष्यों, गवाहों के कथनों एवं आरोपी से प्राप्त जानकारी के आधार पर आरोपी अखिलेष ठाकुर उर्फ अमन ठाकुर पिता दिलीप साहू, उम्र 33 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 22 ठाकुर पारा कवर्धा को दिनांक 11/05/2026 को विधिवत गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी की सूचना आरोपी के परिजनों को दी गई तथा आरोपी को न्यायालय में प्रस्तुत कर न्यायिक अभिरक्षा हेतु आवेदन किया गया है।
प्रकरण में थाना कोतवाली कवर्धा की टीम द्वारा त्वरित, सतर्क एवं सराहनीय कार्यवाही करते हुए महत्वपूर्ण साक्ष्य संकलित कर आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार किया गया। कबीरधाम पुलिस द्वारा मामले की विवेचना जारी है।
    user_Laxminarayan Namdev (UNA)
    Laxminarayan Namdev (UNA)
    Local News Reporter कवर्धा, कबीरधाम, छत्तीसगढ़•
    1 hr ago
  • कलम की चीख: जब एक बुजुर्ग पत्रकार को अपराधी बना दिया गया… कलम की चीख: जब एक बुजुर्ग पत्रकार को अपराधी बना दिया गया… संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल/9131419735 गरियाबंद। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की हालत आज किस दौर से गुजर रही है, इसका दर्दनाक उदाहरण छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में देखने को मिला। वर्षों तक समाज की आवाज़ बनने वाला एक बुजुर्ग पत्रकार आज खुद व्यवस्था के सवालों के बीच खड़ा दिखाई दे रहा है। जिस व्यक्ति ने पूरी जिंदगी कलम के जरिए गरीबों, पीड़ितों और आम जनता की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुँचाया, आज उसी को अपराधी की तरह पेश किए जाने की कोशिश ने पूरे पत्रकार जगत को भीतर तक झकझोर दिया है। यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि उस हर पत्रकार की पीड़ा है जो सच लिखने का साहस करता है। सवाल यह उठता है कि क्या अब सच बोलना और सच दिखाना भी गुनाह बन चुका है? जिस उम्र में इंसान सम्मान और शांति की उम्मीद करता है, उस उम्र में एक बुजुर्ग पत्रकार को मानसिक प्रताड़ना, अपमान और कार्रवाई का सामना करना पड़े — यह दृश्य केवल पत्रकार समाज ही नहीं, बल्कि हर संवेदनशील नागरिक को विचलित कर रहा है। आखिर वह कौन-सी गुंडागर्दी है, जो एक कमजोर, बुजुर्ग पत्रकार की आंखों में दिखाई दे रही है? क्या व्यवस्था अब इतनी असहज हो चुकी है कि सवाल पूछने वाली कलम भी उसे दुश्मन नजर आने लगी है? विडंबना देखिए… एक तरफ वे लोग जिन पर समाज में भय और हिंसा फैलाने के आरोप लगते रहे हैं, उनके लिए सुरक्षा के बड़े-बड़े इंतजाम किए जाते हैं। करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। लेकिन दूसरी तरफ, जनता की आवाज़ उठाने वाला पत्रकार खुद असुरक्षित महसूस कर रहा है। पत्रकार कभी समाज का दुश्मन नहीं होता। पत्रकार वह आईना होता है जो सत्ता को उसकी सच्चाई दिखाता है। लेकिन जब सत्ता और व्यवस्था उसी आईने को तोड़ने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र खतरे में है। आज गरियाबंद की यह घटना पूरे प्रदेश के पत्रकारों के मन में एक डर पैदा कर रही है। डर इस बात का कि कहीं कल सच लिखने की कीमत उन्हें भी न चुकानी पड़े। यदि एक बुजुर्ग पत्रकार सुरक्षित नहीं है, तो फिर आम नागरिक किस भरोसे न्याय और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की उम्मीद करेगा? प्रदेश के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai, गृहमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों से पत्रकार समाज की यही मांग है कि इस मामले को केवल कानूनी कार्रवाई के नजरिए से नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों की दृष्टि से देखा जाए। क्योंकि अगर कलम डर गई… तो जनता की आवाज़ भी खामोश हो जाएगी। आज जरूरत है पत्रकारों को संरक्षण देने की, उन्हें सम्मान देने की, ताकि वे बिना भय के सच लिख सकें। लोकतंत्र की असली ताकत बंदूक नहीं, बल्कि स्वतंत्र कलम होती है। “अगर सच लिखना अपराध बन गया, तो आने वाला समय लोकतंत्र के लिए सबसे खतरनाक दौर साबित होगा।”
    1
    कलम की चीख: जब एक बुजुर्ग पत्रकार को अपराधी बना दिया गया…
कलम की चीख: जब एक बुजुर्ग पत्रकार को अपराधी बना दिया गया…
संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल/9131419735
गरियाबंद।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की हालत आज किस दौर से गुजर रही है, इसका दर्दनाक उदाहरण छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में देखने को मिला। वर्षों तक समाज की आवाज़ बनने वाला एक बुजुर्ग पत्रकार आज खुद व्यवस्था के सवालों के बीच खड़ा दिखाई दे रहा है। जिस व्यक्ति ने पूरी जिंदगी कलम के जरिए गरीबों, पीड़ितों और आम जनता की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुँचाया, आज उसी को अपराधी की तरह पेश किए जाने की कोशिश ने पूरे पत्रकार जगत को भीतर तक झकझोर दिया है।
यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि उस हर पत्रकार की पीड़ा है जो सच लिखने का साहस करता है।
सवाल यह उठता है कि क्या अब सच बोलना और सच दिखाना भी गुनाह बन चुका है?
जिस उम्र में इंसान सम्मान और शांति की उम्मीद करता है, उस उम्र में एक बुजुर्ग पत्रकार को मानसिक प्रताड़ना, अपमान और कार्रवाई का सामना करना पड़े — यह दृश्य केवल पत्रकार समाज ही नहीं, बल्कि हर संवेदनशील नागरिक को विचलित कर रहा है।
आखिर वह कौन-सी गुंडागर्दी है, जो एक कमजोर, बुजुर्ग पत्रकार की आंखों में दिखाई दे रही है?
क्या व्यवस्था अब इतनी असहज हो चुकी है कि सवाल पूछने वाली कलम भी उसे दुश्मन नजर आने लगी है?
विडंबना देखिए…
एक तरफ वे लोग जिन पर समाज में भय और हिंसा फैलाने के आरोप लगते रहे हैं, उनके लिए सुरक्षा के बड़े-बड़े इंतजाम किए जाते हैं। करोड़ों रुपए खर्च होते हैं।
लेकिन दूसरी तरफ, जनता की आवाज़ उठाने वाला पत्रकार खुद असुरक्षित महसूस कर रहा है।
पत्रकार कभी समाज का दुश्मन नहीं होता।
पत्रकार वह आईना होता है जो सत्ता को उसकी सच्चाई दिखाता है।
लेकिन जब सत्ता और व्यवस्था उसी आईने को तोड़ने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र खतरे में है।
आज गरियाबंद की यह घटना पूरे प्रदेश के पत्रकारों के मन में एक डर पैदा कर रही है। डर इस बात का कि कहीं कल सच लिखने की कीमत उन्हें भी न चुकानी पड़े।
यदि एक बुजुर्ग पत्रकार सुरक्षित नहीं है, तो फिर आम नागरिक किस भरोसे न्याय और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की उम्मीद करेगा?
प्रदेश के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai, गृहमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों से पत्रकार समाज की यही मांग है कि इस मामले को केवल कानूनी कार्रवाई के नजरिए से नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों की दृष्टि से देखा जाए।
क्योंकि अगर कलम डर गई…
तो जनता की आवाज़ भी खामोश हो जाएगी।
आज जरूरत है पत्रकारों को संरक्षण देने की, उन्हें सम्मान देने की, ताकि वे बिना भय के सच लिख सकें।
लोकतंत्र की असली ताकत बंदूक नहीं, बल्कि स्वतंत्र कलम होती है।
“अगर सच लिखना अपराध बन गया, तो आने वाला समय लोकतंत्र के लिए सबसे खतरनाक दौर साबित होगा।”
    user_जय जोहार छत्तीसगढ़'केसरिया हिंदुस्तान' press
    जय जोहार छत्तीसगढ़'केसरिया हिंदुस्तान' press
    Journalist टिल्डा, रायपुर, छत्तीसगढ़•
    5 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ के औंधी स्थित महतारी वंदन योजना KYC सेंटर में भारी हंगामा हुआ। प्रक्रिया के दौरान महिलाओं से कथित अभद्र व्यवहार के बाद वे आक्रोशित हो गईं और प्रदर्शन किया।
    1
    छत्तीसगढ़ के औंधी स्थित महतारी वंदन योजना KYC सेंटर में भारी हंगामा हुआ। प्रक्रिया के दौरान महिलाओं से कथित अभद्र व्यवहार के बाद वे आक्रोशित हो गईं और प्रदर्शन किया।
    user_CG NEWS 78
    CG NEWS 78
    Local News Reporter मोहला, मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी, छत्तीसगढ़•
    14 hrs ago
  • माल वाहन गाड़ियों भी सवारी ले जाते हुए बलौदा बाजार मुख्यालय से गुजर कर जा रही है गाड़ियां यातायात के नियमों का उड़ा रहे हैं धज्जियां अब देखते हैं क्या ऐसे लोगों पर भी होगी कार्रवाई
    1
    माल वाहन गाड़ियों भी सवारी ले जाते हुए बलौदा बाजार मुख्यालय से गुजर कर जा रही है गाड़ियां यातायात के नियमों का उड़ा रहे हैं धज्जियां अब देखते हैं क्या ऐसे लोगों पर भी होगी कार्रवाई
    user_गोविंद राम 9294731537
    गोविंद राम 9294731537
    Palari, Baloda Bazar•
    5 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.