एरीज में हो रहा वायु प्रदूषण पर मंथन, विदेशों से भी हवा के साथ आता है प्रदूषण आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज सभागार में स्कूल ऑफ एयरोसोल मॉडलिंग नामक कार्यशाला सोमवार से शुरू हो गई है। एरोसोल और जलवायु परिवर्तन को लेकर में कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) मुंबई के एरोसोल विशेषज्ञ प्रो वाईएस मय्या ने कहा कि युवाओं के योगदान के बिना पर्यावरण को संतुलित किया जाना आसान नहीं है। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक का ज्ञान बेहद जरूरी है। एरीज के निदेशक डा मनीष नाजा ने कहा कि वर्तमान में प्रदूषण उत्सर्जन की अनेकों श्रोत हैं। नग्न आंखों से नहीं दिखाई देने वाले प्रदुषित अनेकों कण दुनिया में एक स्थान से दूसरे स्थानों में फैल जाते हैं। इसके लिए जब तक इनकी उत्पत्ति के श्रोत का पता नहीं चलेगा, तब तक निदान भी नहीं हो सकेगा। एयरोसोल मॉडलिंग बेहद महत्वपूर्ण तकनीक है, इसके जरिए प्रदूषण के श्रोत की जानकारी जुटाई जा सकती हैं । एयरोसोल मॉडलिंग को लेकर ही यह कार्यशाला आयोजित की गई है। जिसका लाभ विभिन्न नगरों से पहुंचे विद्यार्थियों को मिल सकेगा। आइएएसटीए मुंबई के सचिव डॉ मनीष जोशी ने कहा कि विकासशील देशों में धूल, कण और अन्य प्रदूषित गैसों की समस्या पर काबू पाने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। उन्होंने दुनिया के कई देशों में प्रदूषण की बढ़ती मात्रा पर जानकारी दी। डा नरेंद्र सिंह ने हिमालय के पिघलते ग्लेशियरों के साथ मध्य हिमालय क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर प्रकाश डाला। डॉ उमेश दुम्का ने ट्रांस गंगा समेत उत्तर भारत में एरोसोल की वृद्धि के कारणों और उनके दुष्प्रभावों की जानकारी दी। इस अवसर पर डा जेसी पांडे, डा प्रियंका श्रीवास्तव, मोहित पवार समेत विभिन्न महानगरों से पहुंचे शोध छात्र समेत एरीज के वैज्ञानिक मौजूद थे।
एरीज में हो रहा वायु प्रदूषण पर मंथन, विदेशों से भी हवा के साथ आता है प्रदूषण आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज सभागार में स्कूल ऑफ एयरोसोल मॉडलिंग नामक कार्यशाला सोमवार से शुरू हो गई है। एरोसोल और जलवायु परिवर्तन को लेकर में कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) मुंबई के एरोसोल विशेषज्ञ प्रो वाईएस मय्या ने कहा कि युवाओं के योगदान के बिना पर्यावरण को संतुलित किया जाना आसान नहीं है। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक का ज्ञान बेहद जरूरी है। एरीज के निदेशक डा मनीष नाजा ने कहा कि वर्तमान में प्रदूषण उत्सर्जन की अनेकों श्रोत हैं। नग्न आंखों से नहीं दिखाई देने वाले प्रदुषित अनेकों कण दुनिया में एक स्थान से दूसरे स्थानों में फैल जाते हैं। इसके लिए जब तक इनकी उत्पत्ति के श्रोत का पता नहीं चलेगा, तब तक निदान भी नहीं हो सकेगा। एयरोसोल
मॉडलिंग बेहद महत्वपूर्ण तकनीक है, इसके जरिए प्रदूषण के श्रोत की जानकारी जुटाई जा सकती हैं । एयरोसोल मॉडलिंग को लेकर ही यह कार्यशाला आयोजित की गई है। जिसका लाभ विभिन्न नगरों से पहुंचे विद्यार्थियों को मिल सकेगा। आइएएसटीए मुंबई के सचिव डॉ मनीष जोशी ने कहा कि विकासशील देशों में धूल, कण और अन्य प्रदूषित गैसों की समस्या पर काबू पाने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। उन्होंने दुनिया के कई देशों में प्रदूषण की बढ़ती मात्रा पर जानकारी दी। डा नरेंद्र सिंह ने हिमालय के पिघलते ग्लेशियरों के साथ मध्य हिमालय क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर प्रकाश डाला। डॉ उमेश दुम्का ने ट्रांस गंगा समेत उत्तर भारत में एरोसोल की वृद्धि के कारणों और उनके दुष्प्रभावों की जानकारी दी। इस अवसर पर डा जेसी पांडे, डा प्रियंका श्रीवास्तव, मोहित पवार समेत विभिन्न महानगरों से पहुंचे शोध छात्र समेत एरीज के वैज्ञानिक मौजूद थे।
- विडियो देखें- रूद्रप्रयाग (उत्तराखंड ) रुद्रप्रयाग मेघा कंपनी का टनल ऐसे टूट रहा है जैसे मेघ बरस रहा है इसके टूटते ही मची अफरा तफरी।1
- Post by Surendra Kumar1
- सूर्यागांव क्षेत्र में वन्य जीव के हमले में महिला की मौत के बाद वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संदिग्ध बाघिन को ट्रेंकुलाइज कर पकड़ लिया है। तीन दिन से लगातार चल रही कॉम्बिंग के बाद सोमवार रात करीब नौ बजे टीम को यह सफलता मिली। वन विभाग के अनुसार पकड़ी गई बाघिन की उम्र करीब ढाई से तीन वर्ष आंकी गई है। इसे फिलहाल रानीबाग रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया है, जहां इसकी निगरानी की जा रही है। हालांकि अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि यही बाघिन महिला की मौत के लिए जिम्मेदार है। इसके लिए डीएनए सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाएंगे और मृतका के सैंपल से मिलान के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। घटना से एक दिन पहले इसी क्षेत्र में एक बैल का भी शिकार हुआ था। टीम ने उसी स्थान के आसपास निगरानी बढ़ा दी थी। रविवार को जंतवाल गांव के पास जंगल में मृत बैल मिलने के बाद ट्रेंकुलाइज टीम ने वहीं डेरा डाल दिया। सोमवार रात जब टीम को बैल के पास हलचल दिखी, तो कुछ ही देर में एक बाघ को शिकार खाते हुए देखा गया। इसके बाद ट्रेंकुलाइज टीम प्रभारी डॉ. हिमांशु पांगती ने रात 9:05 बजे बाघ पर बेहोशी का डार्ट फायर किया। करीब 20 मिनट बाद सर्च करने पर कुछ दूरी पर बाघिन बेहोश हालत में मिल गई।1
- नासा का मिशन आर्टेमिस 2 में सवार चार यात्रियों का दल चंद्रमा के बेहद करीब जा पहुंचा है और 4070 मील दूर से चंद्रमा का ऑब्जर्वेशन कर रहा है। नासा का कहना है कि यह दूरी ऐतिहासिक है। जिसने अपोलो 13 द्वारा बनाई दूरी का रिकॉर्ड तोड़ा है। अंतरिक्ष यात्रियों का यह दल चांद के प्रभाव वाले यानी गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में है और चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा हैं । ओरियन कैप्सूल में सवार 5 अप्रैल को चंद्रमा के करीब पहुंच गए थे। चंद्र यात्रियों का दल निरंतर चंद्रमा की तस्वीरें ले रहे हैं और धरती को भेज रहे हैं। चंद्र यात्रियों को चन्द्रमा की कक्षा तक पहुंचने में 4 दिन लगे। पांचवे दिन चंद्रमा की परिक्रमा कर रहे हैं। परिक्रमा पूरी होने के बाद छठे दिन पृथ्वी को वापस लौट जाएंगे। पृथ्वी तक वापस पहुंचने में चार दिन लगेंगे और 10वें दिन प्रशांत महासागर सागर में लैंड करेंगे। आर्टेमिस ll की अभी तक सफल रहे मिशन से नासा के वैज्ञानिक बेहद खुश हैं। चार यात्रियों के दल द्वारा भेजी जा रही तस्वीरें इन दिनों सोसल मीडिया में छाई हैं। चारों अंतरिक्ष यात्री के नाम वाइजमैन, ग्लोवर, कोच और हैनसेन हैं। जिसमें नासा के 3 और कनाडा स्पेस एजेंसी का एक अंतरिक्ष यात्री सवार है। नासा का यह ऐतिहासिक मिशन है। इसका उद्देश्य चांद पर बेस कैंप स्थापित करना है। बेस कैंप स्थापित करने का सफर आर्टेमिस के अगले मिशन में शुरू होगा। चंद्रमा की सतह पर बेस कैंप का मतलब होगा कि नासा ने चांद पर बस्ती बसाने का कार्य शुरू कर दिया है। इसके बाद मंगल ग्रह पर जाने की तैयारी करेगा, जो संभवतः आर्टेमिस 5 में पूरा किया जाएगा।4
- कालाढूंगी छत का जंगला गिरने से 6 घायल जिसमें दो बच्चे भी शामिल1
- माननीय सांसद जी ने अपने संसदीय कार्य क्षेत्र में वन्य जीवों द्वारा हो रही घटनाओं (मानव-वन्यजीव संघर्ष) को रोकने के लिए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम हेतु तत्काल ठोस एवं प्रभावी कदम उठाए जाएं, जिससे आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा, कि हमारी सरकार मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और लोगों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।1
- रानीखेत: रानीखेत के चौगांव-फल्दाकोट, जैनोली सैमधार चैतव कौतिक समिति द्वारा अड्डू प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व ब्लॉक प्रमुख ताड़ीखेत रचना रावत और पूर्व प्रधान उपराड़ी प्रदीप बिष्ट ने रिबन काटकर किया।जैनोली में आयोजित चैतव मेले के दौरान झोड़ा, चांचरी सहित कई पारंपरिक प्रतियोगिताएं और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।लेकिन इस बार अड्डू प्रतियोगिता खास आकर्षण का केंद्र रही। अड्डू एक पारंपरिक खेल है, जिसे पुराने समय में महिलाएं बेहद पसंद करती थीं, लेकिन समय के साथ यह खेल धीरे-धीरे लुप्त होता चला गया।समिति के अध्यक्ष कृपाल राम आर्य ने इस पारंपरिक खेल को फिर से जीवंत करने की पहल की, जिसके चलते इस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस आयोजन को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला।1
- विडियो देखें- रूद्रपुर (उत्तराखंड) रुद्रपुर कैंप में सड़कों पर उतरी पब्लिक,-लोग बोले,बोरा गैस एजेंसी चोर है! चंन्द्रा गैस एजेंसी की तारीफ, दोनों एजेंसी है आमने-सामने क्या कहना है स्थानीय लोगों का गैस को लेकर सुनिए1