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“जैसी करनी वैसी भरनी...” के मूलमंत्र पर जोर देते हुए कहा गया है कि यदि किसी अपराधी ने जुर्म किया है, तो उसे सज़ा मिलना बेहद ज़रूरी है। यह संदेश ख़ासतौर पर बिहार पुलिस के लिए है, जिस पर आरोप है कि उसने वर्दी का नाजायज फायदा उठाकर एक समाजसेवी इंसान को “यमराज के बगैर बुलावे के” ऊपर पहुंचा दिया। इस कृत्य के बाद समाज में न्याय की मांग उठ रही है। इस बात को पुख्ता करने के लिए एक महीने पहले के बिहार के वैशाली जिले के एक मामले का उदाहरण दिया गया है, जहाँ 84 वर्षीय दीपराय को 1992 के हत्या के एक मामले में 34 साल बाद वैशाली कोर्ट ने तीन साल के सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई है। बताया गया है कि दीपराय की पीठ 90 डिग्री झुक गई है और उन्हें चलने के लिए सहारे की ज़रूरत पड़ती है, लेकिन 34 साल पहले, जब वह 50 वर्ष के थे, तब वे एक 'माफिया' थे। उन्होंने अपने पड़ोस के एक व्यक्ति को रिवॉल्वर से मार डाला था, और इससे पहले उन्होंने उस व्यक्ति और उसकी पत्नी के साथ मारपीट भी की थी। इस हत्या मामले में कुल 9 आरोपी थे, जिनमें से 4 अब इस दुनिया में नहीं हैं, जबकि बाकी 4 को 10-10 साल का कठोर कारावास मिला है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कानून उम्र या शरीर की स्थिति नहीं देखता। अब भरतभूषण नामक समाजसेवी की मौत पर सारा उत्तर-पूर्व भारत जाग गया है। चेतावनी दी गई है कि जब कोर्ट इन पुलिसकर्मियों को सज़ा सुनाएगी, तो कोई उनके लिए नहीं जागेगा और न ही उन्हें 7 तोपों की सलामी दी जाएगी, क्योंकि यह सलामी केवल शहीदों को मिलती है, अपराधियों को नहीं। यह भी कहा गया है कि अगर “भरततिवारी” के हाथों शहादत हो जाती, तो उन्हें भी 7 तोपों की सलामी मिल जाती। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, और सभी को कोर्ट के फैसले का इंतज़ार है कि वह कितने समय में क्या निर्णय सुनाती है। अंत में यह संदेश दिया गया है कि दुनिया में न जुल्म रहेगा और न ही जालिम का दबदबा, अगर कुछ रहेगा तो वह सिर्फ प्यार होगा।

7 hrs ago
user_Vimal Kashyap
Vimal Kashyap
Artist धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
7 hrs ago

“जैसी करनी वैसी भरनी...” के मूलमंत्र पर जोर देते हुए कहा गया है कि यदि किसी अपराधी ने जुर्म किया है, तो उसे सज़ा मिलना बेहद ज़रूरी है। यह संदेश ख़ासतौर पर बिहार पुलिस के लिए है, जिस पर आरोप है कि उसने वर्दी का नाजायज फायदा उठाकर एक समाजसेवी इंसान को “यमराज के बगैर बुलावे के” ऊपर पहुंचा दिया। इस कृत्य के बाद समाज में न्याय की मांग उठ रही है। इस बात को पुख्ता करने के लिए एक महीने पहले के बिहार के वैशाली जिले के एक मामले का उदाहरण दिया गया है, जहाँ 84 वर्षीय दीपराय को 1992 के हत्या के एक मामले में 34 साल बाद वैशाली कोर्ट ने तीन साल के सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई है। बताया गया है कि दीपराय की पीठ 90 डिग्री झुक गई है और उन्हें चलने के लिए सहारे की ज़रूरत पड़ती है, लेकिन 34 साल पहले, जब वह 50 वर्ष के थे, तब वे एक 'माफिया' थे। उन्होंने अपने पड़ोस के एक व्यक्ति को रिवॉल्वर से मार डाला था, और इससे पहले उन्होंने उस व्यक्ति

और उसकी पत्नी के साथ मारपीट भी की थी। इस हत्या मामले में कुल 9 आरोपी थे, जिनमें से 4 अब इस दुनिया में नहीं हैं, जबकि बाकी 4 को 10-10 साल का कठोर कारावास मिला है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कानून उम्र या शरीर की स्थिति नहीं देखता। अब भरतभूषण नामक समाजसेवी की मौत पर सारा उत्तर-पूर्व भारत जाग गया है। चेतावनी दी गई है कि जब कोर्ट इन पुलिसकर्मियों को सज़ा सुनाएगी, तो कोई उनके लिए नहीं जागेगा और न ही उन्हें 7 तोपों की सलामी दी जाएगी, क्योंकि यह सलामी केवल शहीदों को मिलती है, अपराधियों को नहीं। यह भी कहा गया है कि अगर “भरततिवारी” के हाथों शहादत हो जाती, तो उन्हें भी 7 तोपों की सलामी मिल जाती। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, और सभी को कोर्ट के फैसले का इंतज़ार है कि वह कितने समय में क्या निर्णय सुनाती है। अंत में यह संदेश दिया गया है कि दुनिया में न जुल्म रहेगा और न ही जालिम का दबदबा, अगर कुछ रहेगा तो वह सिर्फ प्यार होगा।

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  • धौलपुर जिले के भभूतिपुरा गांव में चंबल के कुख्यात पूर्व दस्यु जगन गुर्जर की ति ये की बैठक में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा से बड़ी संख्या में गुर्जर समाज के लोग उमड़ पड़े। यह बैठक अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में 29 जून को जगन गुर्जर की हुई हत्या के बाद बुलाई गई थी, जिसके बाद से यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। समाज के प्रतिनिधियों ने इस दौरान आगे की रणनीति पर गहन चर्चा की। बैठक में गुर्जर समाज ने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख रूप से जगन गुर्जर के भाई पप्पू गुर्जर को अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल से धौलपुर जेल स्थानांतरित करने की मांग शामिल है। इसके अलावा, समाज ने सरकार से अन्य लंबित मांगों पर भी जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया। समुदाय ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 12 जुलाई तक उनकी ये सभी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो गुर्जर समाज द्वारा गठित 21 सदस्यीय समिति अगली रणनीति तय करते हुए बड़े आंदोलन की शुरुआत करेगी। फिलहाल, प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए है और क्षेत्र में शांतिपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
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    धौलपुर जिले के भभूतिपुरा गांव में चंबल के कुख्यात पूर्व दस्यु जगन गुर्जर की ति ये की बैठक में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा से बड़ी संख्या में गुर्जर समाज के लोग उमड़ पड़े। यह बैठक अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में 29 जून को जगन गुर्जर की हुई हत्या के बाद बुलाई गई थी, जिसके बाद से यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। समाज के प्रतिनिधियों ने इस दौरान आगे की रणनीति पर गहन चर्चा की।

बैठक में गुर्जर समाज ने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख रूप से जगन गुर्जर के भाई पप्पू गुर्जर को अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल से धौलपुर जेल स्थानांतरित करने की मांग शामिल है। इसके अलावा, समाज ने सरकार से अन्य लंबित मांगों पर भी जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया। समुदाय ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 12 जुलाई तक उनकी ये सभी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो गुर्जर समाज द्वारा गठित 21 सदस्यीय समिति अगली रणनीति तय करते हुए बड़े आंदोलन की शुरुआत करेगी।

फिलहाल, प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए है और क्षेत्र में शांतिपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
    user_Deepu Verma Journalist Dholpur
    Deepu Verma Journalist Dholpur
    धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    36 min ago
  • भारत तिवारी की शहादत को समर्पित 80 वीडियो साझा करने की घोषणा की गई है, जिनमें से प्रत्येक वीडियो रोचक मीडिया से भरपूर होगा। इस श्रृंखला के तहत, एक वीडियो में सावित्री जटावनी ने भोजपुर कांड पर एक फिल्मी रील प्रस्तुत की है, जिसमें यह दर्शाया गया है कि देश के लिए लड़ने वालों को अंततः गोली खानी पड़ती है या फांसी पर चढ़ना पड़ता है। इस संदर्भ में, फिल्म 'क्रांतिवीर' की पूरी जानकारी साझा की गई है। 'क्रांतिवीर' फिल्म का निर्देशन और निर्माण मेहुल कुमार ने किया है, जिसकी कहानी के.के. सिंह ने लिखी है। फिल्म में नाना पाटेकर के संवाद स्वयं नाना पाटेकर ने लिखे हैं, जिसके लिए उन्हें 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेता' का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला, जबकि मेहुल कुमार को 'सर्वश्रेष्ठ फिल्मफेयर अवार्ड' से सम्मानित किया गया था। यह फिल्म 22 जुलाई 1994 को रिलीज़ हुई थी, जिसमें डैनी डेन्जोंगप्पा, परेश रावल, नाना पाटेकर, फरीदा जलाल, डिंपल कपाड़िया, अतुल अग्निहोत्री और ममता कुलकर्णी ने महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं। डिंपल कपाड़िया ने एक गरीब पत्रकार का किरदार निभाया है जिसे माफिया डराते रहते हैं। वहीं, नाना पाटेकर के चरित्र को 9 साल की उम्र में माँ (फरीदा जलाल) द्वारा पीटे जाने के बाद घर छोड़कर चलती मोटर की सीढ़ी पर लटककर परेश रावल के आश्रय में पहुँचने वाले एक समाजवादी क्रांतिवीर के रूप में दर्शाया गया है, ठीक भरत भूषण की तरह। इस संदर्भ में, भरतभूषण तिवारी का यह कथन भी प्रस्तुत किया गया है कि उन्होंने बलिदान देने के लिए आरा की भूमि को चुना था, चाहे वह रामलीला मैदान हो या डीएम ऑफिस।
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    भारत तिवारी की शहादत को समर्पित 80 वीडियो साझा करने की घोषणा की गई है, जिनमें से प्रत्येक वीडियो रोचक मीडिया से भरपूर होगा। इस श्रृंखला के तहत, एक वीडियो में सावित्री जटावनी ने भोजपुर कांड पर एक फिल्मी रील प्रस्तुत की है, जिसमें यह दर्शाया गया है कि देश के लिए लड़ने वालों को अंततः गोली खानी पड़ती है या फांसी पर चढ़ना पड़ता है। इस संदर्भ में, फिल्म 'क्रांतिवीर' की पूरी जानकारी साझा की गई है।

'क्रांतिवीर' फिल्म का निर्देशन और निर्माण मेहुल कुमार ने किया है, जिसकी कहानी के.के. सिंह ने लिखी है। फिल्म में नाना पाटेकर के संवाद स्वयं नाना पाटेकर ने लिखे हैं, जिसके लिए उन्हें 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेता' का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला, जबकि मेहुल कुमार को 'सर्वश्रेष्ठ फिल्मफेयर अवार्ड' से सम्मानित किया गया था। यह फिल्म 22 जुलाई 1994 को रिलीज़ हुई थी, जिसमें डैनी डेन्जोंगप्पा, परेश रावल, नाना पाटेकर, फरीदा जलाल, डिंपल कपाड़िया, अतुल अग्निहोत्री और ममता कुलकर्णी ने महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं। डिंपल कपाड़िया ने एक गरीब पत्रकार का किरदार निभाया है जिसे माफिया डराते रहते हैं। वहीं, नाना पाटेकर के चरित्र को 9 साल की उम्र में माँ (फरीदा जलाल) द्वारा पीटे जाने के बाद घर छोड़कर चलती मोटर की सीढ़ी पर लटककर परेश रावल के आश्रय में पहुँचने वाले एक समाजवादी क्रांतिवीर के रूप में दर्शाया गया है, ठीक भरत भूषण की तरह।

इस संदर्भ में, भरतभूषण तिवारी का यह कथन भी प्रस्तुत किया गया है कि उन्होंने बलिदान देने के लिए आरा की भूमि को चुना था, चाहे वह रामलीला मैदान हो या डीएम ऑफिस।
    user_Vimal Kashyap
    Vimal Kashyap
    Artist धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • पूर्व दस्यु जगन गुर्जर की हत्या के मामले को लेकर गुर्जर समाज का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में, रविवार को धौलपुर के बाड़ी उपखंड के भवुतिपुरा गांव में जगन गुर्जर की तेरहवीं बैठक और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें गुर्जर समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए। इस सभा में सरकार पर अजमेर में हुए लिखित समझौते की शर्तों का पालन नहीं करने का गंभीर आरोप लगाया गया। जगन गुर्जर के पुत्र आशाराम के आह्वान पर आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में समाज के लोगों ने मामले की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की और आगे की रणनीति तय की। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि अजमेर में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार के साथ जो लिखित समझौता हुआ था, उसकी शर्तों पर अब तक कोई अमल नहीं हुआ है। परिजनों का आरोप है कि उन्हें अभी तक पुलिस सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई है, और अजमेर जेल में बंद पूर्व दस्यु पप्पू गुर्जर का भी अन्य जेल में स्थानांतरण नहीं किया गया है। सभा में मौजूद समाज के लोगों ने सरकार के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए चेतावनी दी कि यदि 12 जुलाई तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो गुर्जर समाज एक व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए विवश होगा। इस बैठक में आंदोलन की रूपरेखा को लेकर भी विस्तृत मंथन किया गया।
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    पूर्व दस्यु जगन गुर्जर की हत्या के मामले को लेकर गुर्जर समाज का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में, रविवार को धौलपुर के बाड़ी उपखंड के भवुतिपुरा गांव में जगन गुर्जर की तेरहवीं बैठक और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें गुर्जर समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए। इस सभा में सरकार पर अजमेर में हुए लिखित समझौते की शर्तों का पालन नहीं करने का गंभीर आरोप लगाया गया।

जगन गुर्जर के पुत्र आशाराम के आह्वान पर आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में समाज के लोगों ने मामले की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की और आगे की रणनीति तय की। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि अजमेर में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार के साथ जो लिखित समझौता हुआ था, उसकी शर्तों पर अब तक कोई अमल नहीं हुआ है। परिजनों का आरोप है कि उन्हें अभी तक पुलिस सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई है, और अजमेर जेल में बंद पूर्व दस्यु पप्पू गुर्जर का भी अन्य जेल में स्थानांतरण नहीं किया गया है।

सभा में मौजूद समाज के लोगों ने सरकार के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए चेतावनी दी कि यदि 12 जुलाई तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो गुर्जर समाज एक व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए विवश होगा। इस बैठक में आंदोलन की रूपरेखा को लेकर भी विस्तृत मंथन किया गया।
    user_Afaq ahmed
    Afaq ahmed
    Court reporter धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    13 hrs ago
  • आगरा जिले के खेरागढ़ स्थित भोपुर गांव में कुछ लोगों द्वारा गांव के नाले पर अवैध कब्जा कर लिया गया है, जिसके कारण वहां गंभीर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। एक स्थानीय मजदूर व्यक्ति ने बताया कि इस अवैध कब्जे के चलते उनके मकान के चारों ओर पानी भर गया है और पानी की निकासी पूरी तरह से रुक गई है। इस जलभराव के कारण उनकी मकान की दीवार के गिरने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है, और दीवार कभी भी गिर सकती है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि कुछ अन्य लोगों ने उनकी दीवार पर भी अवैध कब्जा कर रखा है, जिससे उनके बच्चों को भी नुकसान पहुँचने की आशंका है। मजदूर ने जिलाधिकारी जी से निवेदन किया है कि वे इस गंभीर मामले को तत्काल संज्ञान में लें और जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई करें।
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    आगरा जिले के खेरागढ़ स्थित भोपुर गांव में कुछ लोगों द्वारा गांव के नाले पर अवैध कब्जा कर लिया गया है, जिसके कारण वहां गंभीर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। एक स्थानीय मजदूर व्यक्ति ने बताया कि इस अवैध कब्जे के चलते उनके मकान के चारों ओर पानी भर गया है और पानी की निकासी पूरी तरह से रुक गई है।

इस जलभराव के कारण उनकी मकान की दीवार के गिरने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है, और दीवार कभी भी गिर सकती है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि कुछ अन्य लोगों ने उनकी दीवार पर भी अवैध कब्जा कर रखा है, जिससे उनके बच्चों को भी नुकसान पहुँचने की आशंका है। मजदूर ने जिलाधिकारी जी से निवेदन किया है कि वे इस गंभीर मामले को तत्काल संज्ञान में लें और जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई करें।
    user_प्रेम कश्यप
    प्रेम कश्यप
    Kheragarh, Agra•
    1 hr ago
  • बाड़ी में पूर्व दस्यु जगन गुर्जर की हत्या के मामले को लेकर गुर्जर समाज में गहरा आक्रोश है। इस घटना के बाद आयोजित जगन गुर्जर की तीये की बैठक में समाज के सैकड़ों लोग एकजुट हुए, जहाँ श्रद्धांजलि सभा में आगे की रणनीति पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में गुर्जर समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतराम तंवर और प्रदेश अध्यक्ष साहब सिंह गुर्जर सहित मुरैना विधायक दिनेश गुर्जर और पूर्व विधायक अर्जुन सिंह चेची ने भी शिरकत की। गुर्जर समाज के युवा प्रह्लाद बैसला और रामवीर पोसवाल के साथ अन्य युवाओं ने भी अपनी बात रखी। सभी उपस्थित लोगों के बीच एक सहमति बनी, जिसके तहत सरकार से कुछ प्रमुख माँगें की गईं। समाज की मुख्य माँगों में यह शामिल है कि पगड़ी रसम तक सरकार अपने सभी लिखित वादों को पूरा करे। इसके अतिरिक्त, लाल सिंह और पान सिंह को जल्द से जल्द पेरोल दी जाए और बाड़ी थाना अधिकारी के खिलाफ तुरंत कार्यवाही की जाए। गुर्जर समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इन माँगों को पूरा नहीं किया, तो पगड़ी रसम के बाद एक उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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    बाड़ी में पूर्व दस्यु जगन गुर्जर की हत्या के मामले को लेकर गुर्जर समाज में गहरा आक्रोश है। इस घटना के बाद आयोजित जगन गुर्जर की तीये की बैठक में समाज के सैकड़ों लोग एकजुट हुए, जहाँ श्रद्धांजलि सभा में आगे की रणनीति पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

इस महत्वपूर्ण बैठक में गुर्जर समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतराम तंवर और प्रदेश अध्यक्ष साहब सिंह गुर्जर सहित मुरैना विधायक दिनेश गुर्जर और पूर्व विधायक अर्जुन सिंह चेची ने भी शिरकत की। गुर्जर समाज के युवा प्रह्लाद बैसला और रामवीर पोसवाल के साथ अन्य युवाओं ने भी अपनी बात रखी। सभी उपस्थित लोगों के बीच एक सहमति बनी, जिसके तहत सरकार से कुछ प्रमुख माँगें की गईं।

समाज की मुख्य माँगों में यह शामिल है कि पगड़ी रसम तक सरकार अपने सभी लिखित वादों को पूरा करे। इसके अतिरिक्त, लाल सिंह और पान सिंह को जल्द से जल्द पेरोल दी जाए और बाड़ी थाना अधिकारी के खिलाफ तुरंत कार्यवाही की जाए। गुर्जर समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इन माँगों को पूरा नहीं किया, तो पगड़ी रसम के बाद एक उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
    user_रोहित वर्मा
    रोहित वर्मा
    Farmer बारी, धौलपुर, राजस्थान•
    10 hrs ago
  • अजमेर जेल में एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहाँ उच्च सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई। जानकारी के अनुसार, विष्णु जाट ने जगन गुर्जर का गला घोंटकर इस घटना को अंजाम दिया।
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    अजमेर जेल में एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहाँ उच्च सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई। जानकारी के अनुसार, विष्णु जाट ने जगन गुर्जर का गला घोंटकर इस घटना को अंजाम दिया।
    user_Suraj kushwah
    Suraj kushwah
    Farmer बारी, धौलपुर, राजस्थान•
    17 hrs ago
  • अम्बाह तहसील के रुअर गाँव में ग्रामीण एक आम रास्ते की बहाली की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, 1996 से पहले रुअर नहर से एक सार्वजनिक रास्ता (शहर) मौजूद था, लेकिन 1996 में हुए बंदोबस्त के बाद यह रास्ता केवल मानचित्रों में सिमट कर रह गया है और अब जमीन पर दिखाई नहीं देता। इससे किसानों को बैलगाड़ियों से अपने खेतों तक पहुँचने में असुविधा हो रही है, क्योंकि अब उन्हें वहाँ तक पहुँचने का कोई मार्ग नहीं मिलता। यह रास्ता अब उन्हीं खेतों में अपने-अपने कब्ज़े में ले लिया गया है, जिससे आम नागरिकों को निकलने में परेशानी हो रही है और यह विवाद का कारण बन गया है। इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने हल्का पटवारी से निवेदन किया था। शिकायत के बाद, गाँव के हल्का पटवारी ने जमीनी हकीकत जानने का प्रयास किया और 1996 के बाद के नक्शे से मिलान किया। जांच के आधार पर, उन्हें जमीन पर कोई भी सरकारी आम रास्ता दिखाई नहीं दिया। पटवारी ने अपनी जांच रिपोर्ट पंचनामा के रूप में तैयार की है और ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि इस जांच को उनके वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुँचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द एक टीम बनाकर आम रास्ते की सही जानकारी निकाली जाएगी ताकि इस समस्या का निराकरण किया जा सके। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी जमीन/सरकारी शहर पर कब्ज़े हो चुके हैं, जो आपसी विवाद का कारण बन रहे हैं।
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    अम्बाह तहसील के रुअर गाँव में ग्रामीण एक आम रास्ते की बहाली की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, 1996 से पहले रुअर नहर से एक सार्वजनिक रास्ता (शहर) मौजूद था, लेकिन 1996 में हुए बंदोबस्त के बाद यह रास्ता केवल मानचित्रों में सिमट कर रह गया है और अब जमीन पर दिखाई नहीं देता। इससे किसानों को बैलगाड़ियों से अपने खेतों तक पहुँचने में असुविधा हो रही है, क्योंकि अब उन्हें वहाँ तक पहुँचने का कोई मार्ग नहीं मिलता। यह रास्ता अब उन्हीं खेतों में अपने-अपने कब्ज़े में ले लिया गया है, जिससे आम नागरिकों को निकलने में परेशानी हो रही है और यह विवाद का कारण बन गया है।

इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने हल्का पटवारी से निवेदन किया था। शिकायत के बाद, गाँव के हल्का पटवारी ने जमीनी हकीकत जानने का प्रयास किया और 1996 के बाद के नक्शे से मिलान किया। जांच के आधार पर, उन्हें जमीन पर कोई भी सरकारी आम रास्ता दिखाई नहीं दिया।

पटवारी ने अपनी जांच रिपोर्ट पंचनामा के रूप में तैयार की है और ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि इस जांच को उनके वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुँचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द एक टीम बनाकर आम रास्ते की सही जानकारी निकाली जाएगी ताकि इस समस्या का निराकरण किया जा सके। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी जमीन/सरकारी शहर पर कब्ज़े हो चुके हैं, जो आपसी विवाद का कारण बन रहे हैं।
    user_पत्रकार-धर्मेन्द्र सिंह तोमर
    पत्रकार-धर्मेन्द्र सिंह तोमर
    Voice of people अंबाह, मुरैना, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • एक वायरल वीडियो के विश्लेषण के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के अथोली पुलिस स्टेशन में चालीस फौजियों ने घुसकर पुलिसकर्मियों की पिटाई कर दी, जिसमें उनके हाथ-पैर तोड़ दिए गए। इस घटना के पीछे की वजह यह बताई गई है कि सैन्यकर्मियों का मानना था कि वे "इंसानियत बरत रहे हैं" जबकि पुलिसकर्मी "सिर पर चढ़कर बोल रहे" थे। इस "दंगल" के बाद अथोली पुलिस स्टेशन के पुलिस अधिकारी यह "सबक" सीख गए होंगे कि उन्हें सैन्यकर्मियों से "टकराना नहीं चाहिए", क्योंकि सैनिक दुश्मन को सीधे गोली से समझाने की कसम खाते हैं। इसी क्रम में, जोधपुर, राजस्थान के वकीलों ने एक पूरे पुलिस थाने को निलंबित करवा दिया और उसके "हेकड़ी दिखाने वाले", "अपशब्दता करने वाले" SHO रीडर को भी निलंबित करा दिया। यह मामला 1 दिसंबर-25 का बताया गया है। इस घटना से यह संदेश दिया गया कि SHO को भी वकीलों से न टकराने का सबक मिला होगा, क्योंकि वकील कानून की अधिक धाराएं जानते हैं। यह दोनों घटनाएं इस बात पर जोर देती हैं कि कैसे "हर डान माफिया के ऊपर भी छोटा माफिया भारी पड़ जाता है", इसलिए किसी को अपने "गुरूर घमंड में" नहीं रहना चाहिए। इसके अतिरिक्त, बिहार के मुख्यमंत्री का नाम "राकेश चौधरी" बताया गया है, जिन्होंने अपनी "पॉवर रुतबा दिखाने" के लिए खुद को "सम्राट चौधरी" बना लिया है। दावा किया गया है कि उनकी शक्ल से ही वे "माफिया" लगते हैं। उन पर यह भी आरोप है कि वे सातवीं कक्षा तक पढ़े हैं और सात व्यक्तियों के खून के आरोपी हैं। आरोप के अनुसार, 26 साल के राकेश चौधरी ने फर्जी सर्टिफिकेट में खुद को 14 साल का नाबालिग बताकर बरी करवा लिया था। निष्कर्षतः, इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि सेना और वकील पुलिस बल पर भारी पड़ जाते हैं, और पुलिस को इन दोनों के आगे झुकना पड़ता है।
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    एक वायरल वीडियो के विश्लेषण के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के अथोली पुलिस स्टेशन में चालीस फौजियों ने घुसकर पुलिसकर्मियों की पिटाई कर दी, जिसमें उनके हाथ-पैर तोड़ दिए गए। इस घटना के पीछे की वजह यह बताई गई है कि सैन्यकर्मियों का मानना था कि वे "इंसानियत बरत रहे हैं" जबकि पुलिसकर्मी "सिर पर चढ़कर बोल रहे" थे। इस "दंगल" के बाद अथोली पुलिस स्टेशन के पुलिस अधिकारी यह "सबक" सीख गए होंगे कि उन्हें सैन्यकर्मियों से "टकराना नहीं चाहिए", क्योंकि सैनिक दुश्मन को सीधे गोली से समझाने की कसम खाते हैं।

इसी क्रम में, जोधपुर, राजस्थान के वकीलों ने एक पूरे पुलिस थाने को निलंबित करवा दिया और उसके "हेकड़ी दिखाने वाले", "अपशब्दता करने वाले" SHO रीडर को भी निलंबित करा दिया। यह मामला 1 दिसंबर-25 का बताया गया है। इस घटना से यह संदेश दिया गया कि SHO को भी वकीलों से न टकराने का सबक मिला होगा, क्योंकि वकील कानून की अधिक धाराएं जानते हैं। यह दोनों घटनाएं इस बात पर जोर देती हैं कि कैसे "हर डान माफिया के ऊपर भी छोटा माफिया भारी पड़ जाता है", इसलिए किसी को अपने "गुरूर घमंड में" नहीं रहना चाहिए।

इसके अतिरिक्त, बिहार के मुख्यमंत्री का नाम "राकेश चौधरी" बताया गया है, जिन्होंने अपनी "पॉवर रुतबा दिखाने" के लिए खुद को "सम्राट चौधरी" बना लिया है। दावा किया गया है कि उनकी शक्ल से ही वे "माफिया" लगते हैं। उन पर यह भी आरोप है कि वे सातवीं कक्षा तक पढ़े हैं और सात व्यक्तियों के खून के आरोपी हैं। आरोप के अनुसार, 26 साल के राकेश चौधरी ने फर्जी सर्टिफिकेट में खुद को 14 साल का नाबालिग बताकर बरी करवा लिया था।

निष्कर्षतः, इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि सेना और वकील पुलिस बल पर भारी पड़ जाते हैं, और पुलिस को इन दोनों के आगे झुकना पड़ता है।
    user_Vimal Kashyap
    Vimal Kashyap
    Artist धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    5 hrs ago
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