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बाँदा शहर के इमामबाड़ों और अज़ाखानों में इन दिनों गम-ए-हुसैन का माहौल छाया हुआ है। शाम होते ही शहर में मजलिस, मातम और नौहाख्वानी का सिलसिला शुरू हो जाता है, जहाँ बड़ी तादाद में अकीदतमंद हजरत इमाम हुसैन और शोहदाए कर्बला को याद कर अश्कों का नज़राना पेश कर रहे हैं। पूर्वी कोठी में गाजीपुर से आए मौलाना सैय्यद हैदर करबलाई ने मिंबर से इमाम हुसैन की हक और इंसानियत के लिए दी गई कुर्बानी बयान की। अंजुमन अब्बासिया के शमसुल हसन रिजवी ने 'मरहबा, मरहबा ऐ हुसैन मरहबा' नौहा पढ़ा, जिसे सुनकर सभी की आंखें नम हो गईं। इसी तरह अनवरी बेगम कंपाउंड में झाँसी से आए मौलाना सैय्यद फरमान अली आब्दी ने मासूमीन के फज़ाइल और कर्बला के मसाएब पर रोशनी डाली। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हुसैन वो दर हैं जहाँ मजहब की कोई कैद नहीं, और इमाम हुसैन ने जालिम के आगे सर नहीं झुकाया। यहाँ औन अब्बास और शमसुल हसन ने भी नौहाख्वानी की। क्योटरा रेलवे क्रासिंग पर मरहूम मिर्जा बाकर साहब दरोगा के इमामबाड़े में शमसुल हसन रिजवी ने मर्सियाख्वानी की, जिसे सुनकर अहलेबैत के फज़ाइल पर अकीदतमंदों ने वाहवाही की। इसके बाद औन अब्बास ने नौहा पढ़ा और मातमदारों ने सीनाजनी की। इस दौरान अली इमाम आब्दी, मिर्जा यावर हुसैन अधिवक्ता, अली अकबर, आगा अनसार, मजहर हुसैन, रजा मेंहदी, शोएब रिजवी, जफर रजा, शजरुल हसन, वसीम हैदर, शमीम हैदर, साजिद हुसैन, अहमद रजा, हैदर शिकोह अधिवक्ता समेत सैकड़ों अकीदतमंद शामिल हुए। पूरे वातावरण में कर्बला का पैगाम सब्र, कुर्बानी और इंसानियत का गूंज रहा है, और मजलिसों में उठने वाली 'या हुसैन' की सदा यह बता रही है कि हुसैनियत आज भी जिंदा है।

4 hrs ago
user_Altmush Husain
Altmush Husain
बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
4 hrs ago

बाँदा शहर के इमामबाड़ों और अज़ाखानों में इन दिनों गम-ए-हुसैन का माहौल छाया हुआ है। शाम होते ही शहर में मजलिस, मातम और नौहाख्वानी का सिलसिला शुरू हो जाता है, जहाँ बड़ी तादाद में अकीदतमंद हजरत इमाम हुसैन और शोहदाए कर्बला को याद कर अश्कों का नज़राना पेश कर रहे हैं। पूर्वी कोठी में गाजीपुर से आए मौलाना सैय्यद हैदर करबलाई ने मिंबर से इमाम हुसैन की हक और इंसानियत के लिए दी गई कुर्बानी बयान की। अंजुमन अब्बासिया के शमसुल हसन रिजवी ने 'मरहबा, मरहबा ऐ हुसैन मरहबा' नौहा पढ़ा, जिसे सुनकर सभी की आंखें नम हो गईं। इसी तरह अनवरी बेगम कंपाउंड में झाँसी से आए मौलाना सैय्यद फरमान अली आब्दी ने मासूमीन के फज़ाइल और कर्बला के मसाएब पर रोशनी डाली। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हुसैन वो दर हैं जहाँ मजहब की कोई कैद नहीं, और इमाम हुसैन ने जालिम के आगे सर नहीं झुकाया। यहाँ औन अब्बास और शमसुल हसन ने भी नौहाख्वानी की। क्योटरा रेलवे क्रासिंग पर मरहूम मिर्जा बाकर साहब दरोगा के इमामबाड़े में शमसुल हसन रिजवी ने मर्सियाख्वानी की, जिसे सुनकर अहलेबैत के फज़ाइल पर अकीदतमंदों ने वाहवाही की। इसके बाद औन अब्बास ने नौहा पढ़ा और मातमदारों ने सीनाजनी की। इस दौरान अली इमाम आब्दी, मिर्जा यावर हुसैन अधिवक्ता, अली अकबर, आगा अनसार, मजहर हुसैन, रजा मेंहदी, शोएब रिजवी, जफर रजा, शजरुल हसन, वसीम हैदर, शमीम हैदर, साजिद हुसैन, अहमद रजा, हैदर शिकोह अधिवक्ता समेत सैकड़ों अकीदतमंद शामिल हुए। पूरे वातावरण में कर्बला का पैगाम सब्र, कुर्बानी और इंसानियत का गूंज रहा है, और मजलिसों में उठने वाली 'या हुसैन' की सदा यह बता रही है कि हुसैनियत आज भी जिंदा है।

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बाँदा पुलिस ने 'पहले सेहत, फिर ड्यूटी' का महत्वपूर्ण संदेश दिया। इस पहल के तहत पुलिस लाइन में एक विशाल योग शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें सहायक पुलिस अधीक्षक मेविस टॉक सहित सभी अधिकारियों और जवानों ने उत्साहपूर्वक योगाभ्यास किया। शिविर में मौजूद योगाचार्यों और विशेषज्ञों ने विभिन्न योग आसनों और प्राणायाम की विस्तृत जानकारी दी और सभी जवानों से उनका अभ्यास कराया। जवानों ने शारीरिक और मानसिक सेहत में सुधार लाने, तनावमुक्त जीवन जीने तथा कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न आसन किए। यह पहल केवल पुलिस लाइन तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि जिले के हर थाने में भी योग शिविर लगाए गए, जहाँ थाना प्रभारियों से लेकर सिपाहियों तक सभी ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रतिसार निरीक्षक बेलास यादव सहित कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी इन शिविरों में उपस्थित रहे। बाँदा के पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल का मानना है कि 'योग से जवान तंदुरुस्त होगा, तो अपराधी होंगे पस्त'। इस आयोजन के माध्यम से वर्दीधारियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि एक स्वस्थ और सेहतमंद पुलिस बल ही एक सुरक्षित समाज की गारंटी है।
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    12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बाँदा पुलिस ने 'पहले सेहत, फिर ड्यूटी' का महत्वपूर्ण संदेश दिया। इस पहल के तहत पुलिस लाइन में एक विशाल योग शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें सहायक पुलिस अधीक्षक मेविस टॉक सहित सभी अधिकारियों और जवानों ने उत्साहपूर्वक योगाभ्यास किया।

शिविर में मौजूद योगाचार्यों और विशेषज्ञों ने विभिन्न योग आसनों और प्राणायाम की विस्तृत जानकारी दी और सभी जवानों से उनका अभ्यास कराया। जवानों ने शारीरिक और मानसिक सेहत में सुधार लाने, तनावमुक्त जीवन जीने तथा कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न आसन किए। यह पहल केवल पुलिस लाइन तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि जिले के हर थाने में भी योग शिविर लगाए गए, जहाँ थाना प्रभारियों से लेकर सिपाहियों तक सभी ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रतिसार निरीक्षक बेलास यादव सहित कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी इन शिविरों में उपस्थित रहे।

बाँदा के पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल का मानना है कि 'योग से जवान तंदुरुस्त होगा, तो अपराधी होंगे पस्त'। इस आयोजन के माध्यम से वर्दीधारियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि एक स्वस्थ और सेहतमंद पुलिस बल ही एक सुरक्षित समाज की गारंटी है।
    user_Altmush Husain
    Altmush Husain
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • बांदा शहर के कोतवाली नगर क्षेत्र में एक व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। परिजन गंभीर हालत में घायल व्यक्ति को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे थे, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस के अनुसार, मृतक के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं, जिसके बाद परिजनों की तहरीर के आधार पर कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच के लिए फील्ड यूनिट, फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड ने घटनास्थल का निरीक्षण कर महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं। घटना के खुलासे के लिए पुलिस की चार विशेष टीमें गठित की गई हैं और सभी पहलुओं पर गहन जांच जारी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। सहायक पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्राधिकारी नगर सुश्री मेविस टॉक ने बताया है कि जल्द ही इस घटना का सफल अनावरण किया जाएगा।
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    बांदा शहर के कोतवाली नगर क्षेत्र में एक व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। परिजन गंभीर हालत में घायल व्यक्ति को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे थे, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस के अनुसार, मृतक के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं, जिसके बाद परिजनों की तहरीर के आधार पर कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

मामले की जांच के लिए फील्ड यूनिट, फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड ने घटनास्थल का निरीक्षण कर महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं। घटना के खुलासे के लिए पुलिस की चार विशेष टीमें गठित की गई हैं और सभी पहलुओं पर गहन जांच जारी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। सहायक पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्राधिकारी नगर सुश्री मेविस टॉक ने बताया है कि जल्द ही इस घटना का सफल अनावरण किया जाएगा।
    user_Surash Sahu
    Surash Sahu
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • देश के अमृतकाल में प्रवेश करने और विकास के तीव्र गति से आगे बढ़ने के तमाम दावों के बावजूद, उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की मवई बुजुर्ग स्थित एक दलित बस्ती की जमीनी हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल उठाती है। यह बस्ती विकास की कथित 'राजपथ' से पूरी तरह कटी हुई है, जहां आज भी न कोई उचित सड़क है, न नाली की व्यवस्था है और न ही शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं मौजूद हैं। भले ही सरकारी फाइलों और चुनावी भाषणों में विकास 'संतोषजनक' दिखाया जाता हो, लेकिन इस बस्ती में वह आज भी रास्ता ही तलाश रहा है। बरसात का मौसम यहां के लोगों के लिए 'मुसीबत' बनकर आता है, जब पानी आसमान से कम और 'व्यवस्था की उदासीनता' से ज्यादा बरसता है, जिससे घरों के सामने दलदल बन जाता है। यहाँ के बच्चे बचपन से ही यह सीख जाते हैं कि विकास एक ऐसा शब्द है जो भाषणों में तो रहता है, पर बस्तियों तक नहीं पहुँचता। लोग वर्षों से अपनी फरियाद कर रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतें केवल आवेदनों में, आवेदन फाइलों में और फाइलें लंबे इंतजार में बदल जाती हैं, और उनकी आवाज उन वातानुकूलित कमरों तक नहीं पहुँच पाती जहाँ विकास की नई परिभाषाएँ गढ़ी जाती हैं। सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आता है जब एक माँ अपनी बेटी की शादी से पहले दहेज की चिंता नहीं करती, बल्कि बारात के गाँव तक पहुँचने के लिए सड़क न होने की चिंता में रोती है। यह आँसू करोड़ों के विकास का दावा करने वाली व्यवस्था के चेहरे पर एक सवाल हैं, जो कुछ मीटर सड़क भी उपलब्ध नहीं करा पाती। इतिहास जब इस दौर को लिखेगा, तो वह यह जरूर दर्ज करेगा कि यह वह समय था जब विकास के महलों में जश्न मनाया जा रहा था और उसी देश के एक कोने में कुछ लोग कीचड़ में धँसकर यह पूछ रहे थे कि, 'क्या हम भी इसी भारत के नागरिक हैं, या सिर्फ़ आँकड़ों की भीड़ में गुम एक अनसुनी बस्ती?' और तब विकास शायद चुप रहेगा, क्योंकि उसके पास भाषण तो बहुत हैं, लेकिन इस बस्ती के सवालों का जवाब नहीं।
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    देश के अमृतकाल में प्रवेश करने और विकास के तीव्र गति से आगे बढ़ने के तमाम दावों के बावजूद, उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की मवई बुजुर्ग स्थित एक दलित बस्ती की जमीनी हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल उठाती है। यह बस्ती विकास की कथित 'राजपथ' से पूरी तरह कटी हुई है, जहां आज भी न कोई उचित सड़क है, न नाली की व्यवस्था है और न ही शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं मौजूद हैं। भले ही सरकारी फाइलों और चुनावी भाषणों में विकास 'संतोषजनक' दिखाया जाता हो, लेकिन इस बस्ती में वह आज भी रास्ता ही तलाश रहा है।

बरसात का मौसम यहां के लोगों के लिए 'मुसीबत' बनकर आता है, जब पानी आसमान से कम और 'व्यवस्था की उदासीनता' से ज्यादा बरसता है, जिससे घरों के सामने दलदल बन जाता है। यहाँ के बच्चे बचपन से ही यह सीख जाते हैं कि विकास एक ऐसा शब्द है जो भाषणों में तो रहता है, पर बस्तियों तक नहीं पहुँचता। लोग वर्षों से अपनी फरियाद कर रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतें केवल आवेदनों में, आवेदन फाइलों में और फाइलें लंबे इंतजार में बदल जाती हैं, और उनकी आवाज उन वातानुकूलित कमरों तक नहीं पहुँच पाती जहाँ विकास की नई परिभाषाएँ गढ़ी जाती हैं।

सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आता है जब एक माँ अपनी बेटी की शादी से पहले दहेज की चिंता नहीं करती, बल्कि बारात के गाँव तक पहुँचने के लिए सड़क न होने की चिंता में रोती है। यह आँसू करोड़ों के विकास का दावा करने वाली व्यवस्था के चेहरे पर एक सवाल हैं, जो कुछ मीटर सड़क भी उपलब्ध नहीं करा पाती। इतिहास जब इस दौर को लिखेगा, तो वह यह जरूर दर्ज करेगा कि यह वह समय था जब विकास के महलों में जश्न मनाया जा रहा था और उसी देश के एक कोने में कुछ लोग कीचड़ में धँसकर यह पूछ रहे थे कि, 'क्या हम भी इसी भारत के नागरिक हैं, या सिर्फ़ आँकड़ों की भीड़ में गुम एक अनसुनी बस्ती?' और तब विकास शायद चुप रहेगा, क्योंकि उसके पास भाषण तो बहुत हैं, लेकिन इस बस्ती के सवालों का जवाब नहीं।
    user_Amod Kumar
    Amod Kumar
    रिपोर्टर बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • बाँदा-कानपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण का काम बहुत तेजी से चल रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि यह कार्य करीब दो साल के भीतर पूरा हो जाएगा। इस दोहरीकरण के परिणामस्वरूप, बाँदा जिले को कई नई ट्रेनें मिलेंगी, जिससे लोगों को दूसरे जिलों से ट्रेन पकड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे यात्रियों का समय भी बचेगा और डबल लाइन बनने से लोगों में खुशी का माहौल है।
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    बाँदा-कानपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण का काम बहुत तेजी से चल रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि यह कार्य करीब दो साल के भीतर पूरा हो जाएगा। इस दोहरीकरण के परिणामस्वरूप, बाँदा जिले को कई नई ट्रेनें मिलेंगी, जिससे लोगों को दूसरे जिलों से ट्रेन पकड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे यात्रियों का समय भी बचेगा और डबल लाइन बनने से लोगों में खुशी का माहौल है।
    user_दिलीप कुमार जैन
    दिलीप कुमार जैन
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    12 hrs ago
  • मौदहा कस्बे और ग्रामीण क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को विभिन्न स्थानों पर योग शिविरों का आयोजन किया गया। गल्ला मंडी समिति परिसर और रहमानिया ग्राउंड सहित कई सार्वजनिक स्थलों पर लोगों ने सामूहिक रूप से योगाभ्यास कर स्वस्थ और संतुलित जीवन का संकल्प लिया। इन कार्यक्रमों में बच्चों, युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। गल्ला मंडी समिति परिसर में आयोजित योग शिविर में प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, वज्रासन, प्राणायाम और ध्यान की विभिन्न विधियों का अभ्यास कराया। योग प्रशिक्षकों ने बताया कि नियमित योग से शरीर स्वस्थ रहता है, मानसिक तनाव कम होता है और व्यक्ति अनेक बीमारियों से बच सकता है। इस दौरान राम नारायण, शिवकरण, जयपाल, शत्रुघ्न, सत्य प्रकाश, जियालाल, रोहित और अनिल ने उपस्थित लोगों को योग का प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में युवराज सिंह, रामदेव सिंह और सुरेंद्र त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे। वहीं, रहमानिया ग्राउंड में आयोजित योग शिविर में भी लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और सामूहिक योगाभ्यास किया। योग ट्रेनर हामिद भाई, अरशद मामा, शहबाज अली, आशिफ, सकील और राजेंद्र मधुपिया ने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव, अनियमित दिनचर्या और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बीच योग एक प्रभावी समाधान बनकर उभरा है। उन्होंने आगे कहा कि योग न केवल शरीर को स्वस्थ बनाता है, बल्कि मन को भी एकाग्र, शांत और सकारात्मक रखता है। कार्यक्रमों के दौरान वक्ताओं ने प्रधानमंत्री के 'योग को जन-जन तक पहुंचाने' के आह्वान का समर्थन करते हुए सभी से योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने की अपील की। कई स्थानों पर योगाभ्यास के साथ स्वास्थ्य जागरूकता संबंधी संदेश भी दिए गए, जिसमें लोगों को नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित इन कार्यक्रमों के माध्यम से कस्बे में स्वास्थ्य, फिटनेस और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश प्रसारित हुआ। पूरे दिन विभिन्न स्थानों पर योग से जुड़े आयोजन होते रहे और लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
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    मौदहा कस्बे और ग्रामीण क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को विभिन्न स्थानों पर योग शिविरों का आयोजन किया गया। गल्ला मंडी समिति परिसर और रहमानिया ग्राउंड सहित कई सार्वजनिक स्थलों पर लोगों ने सामूहिक रूप से योगाभ्यास कर स्वस्थ और संतुलित जीवन का संकल्प लिया। इन कार्यक्रमों में बच्चों, युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

गल्ला मंडी समिति परिसर में आयोजित योग शिविर में प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, वज्रासन, प्राणायाम और ध्यान की विभिन्न विधियों का अभ्यास कराया। योग प्रशिक्षकों ने बताया कि नियमित योग से शरीर स्वस्थ रहता है, मानसिक तनाव कम होता है और व्यक्ति अनेक बीमारियों से बच सकता है। इस दौरान राम नारायण, शिवकरण, जयपाल, शत्रुघ्न, सत्य प्रकाश, जियालाल, रोहित और अनिल ने उपस्थित लोगों को योग का प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में युवराज सिंह, रामदेव सिंह और सुरेंद्र त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।

वहीं, रहमानिया ग्राउंड में आयोजित योग शिविर में भी लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और सामूहिक योगाभ्यास किया। योग ट्रेनर हामिद भाई, अरशद मामा, शहबाज अली, आशिफ, सकील और राजेंद्र मधुपिया ने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव, अनियमित दिनचर्या और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बीच योग एक प्रभावी समाधान बनकर उभरा है। उन्होंने आगे कहा कि योग न केवल शरीर को स्वस्थ बनाता है, बल्कि मन को भी एकाग्र, शांत और सकारात्मक रखता है। कार्यक्रमों के दौरान वक्ताओं ने प्रधानमंत्री के 'योग को जन-जन तक पहुंचाने' के आह्वान का समर्थन करते हुए सभी से योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने की अपील की।

कई स्थानों पर योगाभ्यास के साथ स्वास्थ्य जागरूकता संबंधी संदेश भी दिए गए, जिसमें लोगों को नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित इन कार्यक्रमों के माध्यम से कस्बे में स्वास्थ्य, फिटनेस और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश प्रसारित हुआ। पूरे दिन विभिन्न स्थानों पर योग से जुड़े आयोजन होते रहे और लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
    user_ISLAM
    ISLAM
    Local News Reporter मौदहा, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • हमीरपुर जिले में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को जिला मुख्यालय स्थित राजकीय स्पोर्ट्स स्टेडियम में एक भव्य योग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जहाँ उन्होंने सामूहिक योगाभ्यास किया और नियमित रूप से योग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने का संकल्प लिया। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। मुख्य अतिथि ने उपस्थित जनसमूह के साथ मिलकर विभिन्न योगासन एवं प्राणायामों का अभ्यास कर योग के महत्व पर प्रकाश डाला। अपने संबोधन में उन्होंने योग को भारतीय संस्कृति की एक अमूल्य धरोहर बताते हुए स्वस्थ जीवन के लिए प्रतिदिन योग करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान गायत्री परिवार के बच्चों ने योग पर आधारित अपनी आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं, जिनसे लोगों को जागरूक किया गया और वहाँ मौजूद सभी ने उनकी सराहना की। कार्यक्रम में सदर विधायक मनोज प्रजापति, नगर पालिका चेयरमैन, भाजपा जिला अध्यक्ष, खनिज निदेशक माला श्रीवास्तव और मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) सहित जिले के कई अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे। योग शिविर के दौरान प्रतिभागियों ने प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का गहन अभ्यास किया। कार्यक्रम का समापन लोगों से नियमित रूप से योग को अपनाने और एक स्वस्थ व निरोग जीवन जीने की अपील के साथ हुआ।
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    हमीरपुर जिले में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को जिला मुख्यालय स्थित राजकीय स्पोर्ट्स स्टेडियम में एक भव्य योग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जहाँ उन्होंने सामूहिक योगाभ्यास किया और नियमित रूप से योग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने का संकल्प लिया। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

मुख्य अतिथि ने उपस्थित जनसमूह के साथ मिलकर विभिन्न योगासन एवं प्राणायामों का अभ्यास कर योग के महत्व पर प्रकाश डाला। अपने संबोधन में उन्होंने योग को भारतीय संस्कृति की एक अमूल्य धरोहर बताते हुए स्वस्थ जीवन के लिए प्रतिदिन योग करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान गायत्री परिवार के बच्चों ने योग पर आधारित अपनी आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं, जिनसे लोगों को जागरूक किया गया और वहाँ मौजूद सभी ने उनकी सराहना की। कार्यक्रम में सदर विधायक मनोज प्रजापति, नगर पालिका चेयरमैन, भाजपा जिला अध्यक्ष, खनिज निदेशक माला श्रीवास्तव और मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) सहित जिले के कई अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे।

योग शिविर के दौरान प्रतिभागियों ने प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का गहन अभ्यास किया। कार्यक्रम का समापन लोगों से नियमित रूप से योग को अपनाने और एक स्वस्थ व निरोग जीवन जीने की अपील के साथ हुआ।
    user_Raj kumar जिला ब्यूरो चीफ
    Raj kumar जिला ब्यूरो चीफ
    मौदहा, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • मौसम विभाग ने देश के कई क्षेत्रों में आगामी बारिश, तेज हवाओं और बदलते मौसम को लेकर एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। इस चेतावनी के मद्देनजर, लोगों को आवश्यक सावधानी बरतने और मौसम से जुड़ी आधिकारिक जानकारी पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है। विभाग ने आगाह किया है कि मौसम में हो रहे इन बदलावों के कारण कुछ प्रभावित क्षेत्रों में दैनिक जीवन और यातायात पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
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    मौसम विभाग ने देश के कई क्षेत्रों में आगामी बारिश, तेज हवाओं और बदलते मौसम को लेकर एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। इस चेतावनी के मद्देनजर, लोगों को आवश्यक सावधानी बरतने और मौसम से जुड़ी आधिकारिक जानकारी पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है। विभाग ने आगाह किया है कि मौसम में हो रहे इन बदलावों के कारण कुछ प्रभावित क्षेत्रों में दैनिक जीवन और यातायात पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
    user_Dilip Kumar Bharti
    Dilip Kumar Bharti
    Local News Reporter नरैनी, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • बाँदा शहर के इमामबाड़ों और अज़ाखानों में इन दिनों गम-ए-हुसैन का माहौल छाया हुआ है। शाम होते ही शहर में मजलिस, मातम और नौहाख्वानी का सिलसिला शुरू हो जाता है, जहाँ बड़ी तादाद में अकीदतमंद हजरत इमाम हुसैन और शोहदाए कर्बला को याद कर अश्कों का नज़राना पेश कर रहे हैं। पूर्वी कोठी में गाजीपुर से आए मौलाना सैय्यद हैदर करबलाई ने मिंबर से इमाम हुसैन की हक और इंसानियत के लिए दी गई कुर्बानी बयान की। अंजुमन अब्बासिया के शमसुल हसन रिजवी ने 'मरहबा, मरहबा ऐ हुसैन मरहबा' नौहा पढ़ा, जिसे सुनकर सभी की आंखें नम हो गईं। इसी तरह अनवरी बेगम कंपाउंड में झाँसी से आए मौलाना सैय्यद फरमान अली आब्दी ने मासूमीन के फज़ाइल और कर्बला के मसाएब पर रोशनी डाली। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हुसैन वो दर हैं जहाँ मजहब की कोई कैद नहीं, और इमाम हुसैन ने जालिम के आगे सर नहीं झुकाया। यहाँ औन अब्बास और शमसुल हसन ने भी नौहाख्वानी की। क्योटरा रेलवे क्रासिंग पर मरहूम मिर्जा बाकर साहब दरोगा के इमामबाड़े में शमसुल हसन रिजवी ने मर्सियाख्वानी की, जिसे सुनकर अहलेबैत के फज़ाइल पर अकीदतमंदों ने वाहवाही की। इसके बाद औन अब्बास ने नौहा पढ़ा और मातमदारों ने सीनाजनी की। इस दौरान अली इमाम आब्दी, मिर्जा यावर हुसैन अधिवक्ता, अली अकबर, आगा अनसार, मजहर हुसैन, रजा मेंहदी, शोएब रिजवी, जफर रजा, शजरुल हसन, वसीम हैदर, शमीम हैदर, साजिद हुसैन, अहमद रजा, हैदर शिकोह अधिवक्ता समेत सैकड़ों अकीदतमंद शामिल हुए। पूरे वातावरण में कर्बला का पैगाम सब्र, कुर्बानी और इंसानियत का गूंज रहा है, और मजलिसों में उठने वाली 'या हुसैन' की सदा यह बता रही है कि हुसैनियत आज भी जिंदा है।
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    बाँदा शहर के इमामबाड़ों और अज़ाखानों में इन दिनों गम-ए-हुसैन का माहौल छाया हुआ है। शाम होते ही शहर में मजलिस, मातम और नौहाख्वानी का सिलसिला शुरू हो जाता है, जहाँ बड़ी तादाद में अकीदतमंद हजरत इमाम हुसैन और शोहदाए कर्बला को याद कर अश्कों का नज़राना पेश कर रहे हैं।

पूर्वी कोठी में गाजीपुर से आए मौलाना सैय्यद हैदर करबलाई ने मिंबर से इमाम हुसैन की हक और इंसानियत के लिए दी गई कुर्बानी बयान की। अंजुमन अब्बासिया के शमसुल हसन रिजवी ने 'मरहबा, मरहबा ऐ हुसैन मरहबा' नौहा पढ़ा, जिसे सुनकर सभी की आंखें नम हो गईं। इसी तरह अनवरी बेगम कंपाउंड में झाँसी से आए मौलाना सैय्यद फरमान अली आब्दी ने मासूमीन के फज़ाइल और कर्बला के मसाएब पर रोशनी डाली। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हुसैन वो दर हैं जहाँ मजहब की कोई कैद नहीं, और इमाम हुसैन ने जालिम के आगे सर नहीं झुकाया। यहाँ औन अब्बास और शमसुल हसन ने भी नौहाख्वानी की।

क्योटरा रेलवे क्रासिंग पर मरहूम मिर्जा बाकर साहब दरोगा के इमामबाड़े में शमसुल हसन रिजवी ने मर्सियाख्वानी की, जिसे सुनकर अहलेबैत के फज़ाइल पर अकीदतमंदों ने वाहवाही की। इसके बाद औन अब्बास ने नौहा पढ़ा और मातमदारों ने सीनाजनी की। इस दौरान अली इमाम आब्दी, मिर्जा यावर हुसैन अधिवक्ता, अली अकबर, आगा अनसार, मजहर हुसैन, रजा मेंहदी, शोएब रिजवी, जफर रजा, शजरुल हसन, वसीम हैदर, शमीम हैदर, साजिद हुसैन, अहमद रजा, हैदर शिकोह अधिवक्ता समेत सैकड़ों अकीदतमंद शामिल हुए। पूरे वातावरण में कर्बला का पैगाम सब्र, कुर्बानी और इंसानियत का गूंज रहा है, और मजलिसों में उठने वाली 'या हुसैन' की सदा यह बता रही है कि हुसैनियत आज भी जिंदा है।
    user_Altmush Husain
    Altmush Husain
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
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