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चौबेपुर में बड़ा हादसा: गड्ढे में जाने से अनियंत्रित टेंपो पेड़ से टकराया, छह घायल

1 hr ago
user_Laik AFTAB
Laik AFTAB
Local News Reporter सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
1 hr ago

चौबेपुर में बड़ा हादसा: गड्ढे में जाने से अनियंत्रित टेंपो पेड़ से टकराया, छह घायल

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • फर्जी सिम और एटीएम ठगी करने वालों की अब खैर नहीं, पुलिस ने कसी कमर
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    फर्जी सिम और एटीएम ठगी करने वालों की अब खैर नहीं, पुलिस ने कसी कमर
    user_Laik AFTAB
    Laik AFTAB
    Local News Reporter सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    49 min ago
  • चौबेपुर रोड पर ऑटो सवार हुए सवारी हुए घायल ब्रेकिंग न्यूज़ न्यूज टू इंडिया से हमारे संवाददाता सोनू सेठ की खास रिपोर्ट
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    चौबेपुर रोड पर ऑटो सवार हुए सवारी हुए घायल ब्रेकिंग न्यूज़ न्यूज टू इंडिया से हमारे संवाददाता सोनू सेठ की खास रिपोर्ट
    user_NEWS 2 INDIA
    NEWS 2 INDIA
    TV News Anchor सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • कलम के तेज धार से फिल्म 'हनुमान अंश' की सह-निर्माता अनुप्रिया नागर ने किए रामलला-हनुमानगढ़ी के दर्शन अयोध्या। फिल्म ‘हनुमान अंश’ की सह-निर्माता अनुप्रिया नागर फिल्म की सफलता के बाद अयोध्या पहुंचीं। यहां उन्होंने रामलला और हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन किया। अनुप्रिया नागर ने हनुमानगढ़ी में संतों से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि फिल्म की सफलता के बाद अयोध्या आना उनके लिए भावुक पल है। एक सर्किल पूरा हुआ है। उन्होंने फिल्म ‘हनुमान अंश’ की सफलता को हनुमान जी की कृपा बताया। कहा कि गुरुजी से मिली प्रेरणा को हनुमान जी के चरणों में अर्पित किया है।
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    कलम के तेज धार से
फिल्म 'हनुमान अंश' की सह-निर्माता अनुप्रिया नागर ने किए रामलला-हनुमानगढ़ी के दर्शन
अयोध्या।
फिल्म ‘हनुमान अंश’ की सह-निर्माता अनुप्रिया नागर फिल्म की सफलता के बाद अयोध्या पहुंचीं। यहां उन्होंने रामलला और हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन किया।
अनुप्रिया नागर ने हनुमानगढ़ी में संतों से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि फिल्म की सफलता के बाद अयोध्या आना उनके लिए भावुक पल है। एक सर्किल पूरा हुआ है।
उन्होंने फिल्म ‘हनुमान अंश’ की सफलता को हनुमान जी की कृपा बताया। कहा कि गुरुजी से मिली प्रेरणा को हनुमान जी के चरणों में अर्पित किया है।
    user_Dharmendra Chaurasia
    Dharmendra Chaurasia
    Varanasi, Uttar Pradesh•
    2 hrs ago
  • *एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार और लंका थाना प्रभारी राजकुमार शर्मा और उनकी टीम का ताबड़तोड़ एक्शन* *अवैध पार्किंग कर लँका थाना क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण मालवीय चौराहे पर जाम लगाने वाले 20 से अधिक टोटो सीज़* * *एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार और लंका थाना प्रभारी राजकुमार शर्मा और उनकी टीम का ताबड़तोड़ एक्शन* *अवैध पार्किंग कर लँका थाना क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण मालवीय चौराहे पर जाम लगाने वाले 20 से अधिक टोटो सीज़* *
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    *एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार और लंका थाना प्रभारी राजकुमार शर्मा और उनकी टीम का ताबड़तोड़ एक्शन*

*अवैध पार्किंग कर लँका थाना क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण मालवीय चौराहे पर जाम लगाने वाले 20 से अधिक टोटो सीज़*

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*एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार और लंका थाना प्रभारी राजकुमार शर्मा और उनकी टीम का ताबड़तोड़ एक्शन*
*अवैध पार्किंग कर लँका थाना क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण मालवीय चौराहे पर जाम लगाने वाले 20 से अधिक टोटो सीज़*
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    user_अचूक रणनीति अख़बार
    अचूक रणनीति अख़बार
    Newspaper publisher सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • ज्ञानदीप पब्लिक स्कूल में ‘मेरे सपनों का भारत’ प्रतियोगिता का भव्य आयोजन, 200 विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा जनता न्यूज़ टीवी संवाददाता रितेश कुमार वाराणसी
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    ज्ञानदीप पब्लिक स्कूल में ‘मेरे सपनों का भारत’ प्रतियोगिता का भव्य आयोजन, 200 विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा
जनता न्यूज़ टीवी संवाददाता रितेश कुमार वाराणसी
    user_जनता न्यूज टीवी
    जनता न्यूज टीवी
    TV News Anchor सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • वाराणसी के रामनगर- मिल्कीपुर में बंदरगाह परियोजना को लेकर तनाव, पुलिस फोर्स और ग्रामीण में टकराव न्यूज़ टू इंडिया से उप संपादक प्रदीप कुमार वर्मा उर्फ राजन की खास रिपोर्ट वाराणसी/रामनगर। लाल बहादुर शास्त्री की जन्मभूमि रामनगर के मिल्कीपुर गांव (दलित बस्ती) में प्रस्तावित बंदरगाह परियोजना को लेकर लगातार दूसरे दिन तनाव का माहौल बना रहा। ग्रामीणों के अनुसार 20 सितंबर को बड़े पैमाने पर पुलिस फोर्स गांव पहुंची थी, जिसका ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ता विद्याधर के नेतृत्व में विरोध किया गया, जिसके बाद पुलिस लौट गई।ग्रामीणों का आरोप है कि आज फिर से पुलिस फोर्स गांव में पहुंच रही है। वीडियो में बड़ी संख्या में हेलमेट पहने पुलिसकर्मी और हाथों में नीले झंडे और बौद्ध धम्म के झंडे लिए ग्रामीण आमने-सामने दिख रहे हैं।क्या है ग्रामीणों का पक्ष?ग्रामीणों और सर्व सेवा संघ से जुड़े लोगों का कहना है कि गंगा में पानी का स्तर कम होने के बावजूद यहां बंदरगाह बनाया जाना व्यवहारिक नहीं है।यह बंदरगाह एक छलावा है,असल में गंगा किनारे की जमीन लेकर भविष्य में रिवर-व्यू कॉलोनी विकसित करने की योजना है। प्रशासन जबरन जमीन अधिग्रहण कर अदानी समूह को दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है-जान देंगे,जमीन नहीं देंगे।सर्व सेवा संघ,वाराणसी के राम धीरज ने बताया कि विद्याधर सच्चे गांधीवादी, सत्याग्रही, बौद्ध धर्म के अनुयायी और समाज सेवक हैं, जो 3 साल तक चले सर्व सेवा संघ के संघर्ष में साथ रहे हैं। उन्होंने सभी साथियों से मिल्कीपुर गांव बुद्ध विहार पहुंचकर समर्थन देने और दूर रहने वाले लोगों से सोशल मीडिया पर आवाज उठाने की अपील की है। फिलहाल मौके पर शांति बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात है। प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में आधिकारिक बयान नहीं आया है।
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    वाराणसी के रामनगर-
मिल्कीपुर में बंदरगाह परियोजना को लेकर तनाव, पुलिस फोर्स और ग्रामीण में टकराव

न्यूज़ टू इंडिया से उप संपादक प्रदीप कुमार वर्मा उर्फ राजन की खास रिपोर्ट 
वाराणसी/रामनगर। लाल बहादुर शास्त्री की जन्मभूमि रामनगर के मिल्कीपुर गांव (दलित बस्ती) में प्रस्तावित बंदरगाह परियोजना को लेकर लगातार दूसरे दिन तनाव का माहौल बना रहा। ग्रामीणों के अनुसार 20 सितंबर को बड़े पैमाने पर पुलिस फोर्स गांव पहुंची थी, जिसका ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ता विद्याधर के नेतृत्व में विरोध किया गया, जिसके बाद पुलिस लौट गई।ग्रामीणों का आरोप है कि आज फिर से पुलिस फोर्स गांव में पहुंच रही है। वीडियो में बड़ी संख्या में हेलमेट पहने पुलिसकर्मी और हाथों में नीले झंडे और बौद्ध धम्म के झंडे लिए ग्रामीण आमने-सामने दिख रहे हैं।क्या है ग्रामीणों का पक्ष?ग्रामीणों और सर्व सेवा संघ से जुड़े लोगों का कहना है कि गंगा में पानी का स्तर कम होने के बावजूद यहां बंदरगाह बनाया जाना व्यवहारिक नहीं है।यह बंदरगाह एक छलावा है,असल में गंगा किनारे की जमीन लेकर भविष्य में रिवर-व्यू कॉलोनी विकसित करने की योजना है। प्रशासन जबरन जमीन अधिग्रहण कर अदानी समूह को दे रहा है।
ग्रामीणों का कहना है-जान देंगे,जमीन नहीं देंगे।सर्व सेवा संघ,वाराणसी के राम धीरज ने बताया कि विद्याधर सच्चे गांधीवादी, सत्याग्रही,
बौद्ध धर्म के अनुयायी और समाज सेवक हैं, जो 3 साल तक चले सर्व सेवा संघ के संघर्ष में साथ रहे हैं। उन्होंने सभी साथियों से मिल्कीपुर गांव बुद्ध विहार पहुंचकर समर्थन देने और दूर रहने वाले लोगों से सोशल मीडिया पर आवाज उठाने की अपील की है।
फिलहाल मौके पर शांति बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात है। प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में आधिकारिक बयान नहीं आया है।
    user_NEWS 2 INDIA (NTI)
    NEWS 2 INDIA (NTI)
    Court reporter सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • निठारी कांड की शुरुआत साल 2005-2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव से हुई थी पूरी कहानी केशव की जुबानी में देखे निठारी कांड की शुरुआत साल 2005-2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव से हुई थी, जो भारतीय आपराधिक इतिहास के सबसे खौफनाक मामलों में से एक माना जाता है। सिलसिलेवार ढंग से पूरी कहानी इस प्रकार है:1. बच्चों की गुमशुदगी और पुलिस की लापरवाही (2005-2006)साल 2005 से 2006 के बीच निठारी गांव की झुग्गियों से अचानक छोटे बच्चे और युवतियां रहस्यमयी तरीके से गायब होने लगे।पीड़ित परिवार जब शिकायत लेकर पुलिस के पास जाते, तो पुलिस अक्सर उन्हें डांटकर भगा देती या गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखने में टालमटोल करती थी।2. कंकालों की बरामदगी और खौफनाक खुलासा (दिसंबर 2006)29 दिसंबर 2006: निठारी गांव के पास स्थित एक बिजनेसमैन मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी (D-5) के पीछे बने नाले की खुदाई के दौरान इंसानी खोपड़ियां और बच्चों के कंकाल मिलने शुरू हुए।देखते ही देखते नाले और कोठी के पिछले हिस्से से करीब 19 महिलाओं और बच्चों के नरकंकाल और अवशेष बरामद हुए।पुलिस ने कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार कर लिया।3. रोंगटे खड़े करने वाले आरोप (2007)जांच के दौरान सुरेंद्र कोली पर आरोप लगे कि वह बच्चों को टॉफी और चॉकलेट का लालच देकर कोठी के अंदर बुलाता था।इसके बाद उनके साथ दुष्कर्म, हत्या और शव के टुकड़े-टुकड़े करके नाले में फेंकने के गंभीर आरोप लगाए गए। पुलिस और शुरुआती बयानों में हत्या, बलात्कार, शव-मैथुन (necrophilia) और आदमखोरी (cannibalism) जैसी खौफनाक बातें सामने आईं, हालांकि बाद में अदालतों में इन दावों पर सवाल भी उठे।देशव्यापी गुस्से के बाद जनवरी 2007 में इस केस की जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी गई।4. निचली अदालत से कई बार मौत की सजा (2009-2021)सीबीआई ने दोनों के खिलाफ अलग-अलग मामलों के तहत चार्जशीट दाखिल की।2009: गाजियाबाद की विशेष सीबीआई कोर्ट ने पहली बार रिम्पा हलदर केस में सुरेंद्र कोली को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई।इसके बाद 2010 से 2021 के बीच अलग-अलग मुकदमों की सुनवाई में सुरेंद्र कोली को 12 से अधिक मामलों में फांसी की सजा सुनाई गई, जबकि पंढेर को भी कुछ मामलों में दोषी पाया गया।5. अदालती मोड़ और सबूतों की कमी (2023-2025)अक्टूबर 2023: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को कई मामलों में बरी कर दिया। कोर्ट ने जांच पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच बेहद घटिया और लापरवाही से की गई थी और पुलिस अंग तस्करी (organ trade) जैसे बड़े पहलुओं की जांच करने में पूरी तरह नाकाम रही।नवंबर 2025: आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली के खिलाफ बचे आखिरी मामले में भी उनकी दोषमुक्ति (acquittal) को बरकरार रखा और करीब 19 साल बाद उन्हें जेल से रिहा करने का आदेश दिया। अदालत का मानना था कि जो कबूलनामे (confessions) लिए गए थे, वे प्रताड़ना के तहत लिए गए थे और उनके खिलाफ ठोस वैज्ञानिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्य नहीं थे।6. रिहाई के बाद का जीवन और अंत (2026)जेल से पूरी तरह बरी होकर बाहर आने के बाद सुरेंद्र कोली उत्तराखंड के हरिद्वार चले गए।उन्होंने अपनी पहचान छुपाकर एक निजी फर्म में सुरक्षाकर्मी के तौर पर काम किया और हाल ही में भूपतवाला इलाके में चाय की दुकान शुरू की थी।18 सितंबर 2026: सुबह के समय उसी चाय की दुकान में सुरेंद्र कोली का शव फंदे से लटका हुआ पाया गया। पुलिस का शुरुआती अनुमान है कि यह आत्महत्या का मामला है, हालांकि मामले की जांच अभी जारी है।यह पूरा मामला लगभग दो दशकों तक भारत की कानूनी और जांच व्यवस्था की खामियों को उजागर करने वाला एक बेहद चर्चित और विवादित केस बना रहा
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    निठारी कांड की शुरुआत साल 2005-2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव से हुई थी पूरी कहानी केशव की जुबानी में देखे 
निठारी कांड की शुरुआत साल 2005-2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव से हुई थी, जो भारतीय आपराधिक इतिहास के सबसे खौफनाक मामलों में से एक माना जाता है। सिलसिलेवार ढंग से पूरी कहानी इस प्रकार है:1. बच्चों की गुमशुदगी और पुलिस की लापरवाही (2005-2006)साल 2005 से 2006 के बीच निठारी गांव की झुग्गियों से अचानक छोटे बच्चे और युवतियां रहस्यमयी तरीके से गायब होने लगे।पीड़ित परिवार जब शिकायत लेकर पुलिस के पास जाते, तो पुलिस अक्सर उन्हें डांटकर भगा देती या गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखने में टालमटोल करती थी।2. कंकालों की बरामदगी और खौफनाक खुलासा (दिसंबर 2006)29 दिसंबर 2006: निठारी गांव के पास स्थित एक बिजनेसमैन मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी (D-5) के पीछे बने नाले की खुदाई के दौरान इंसानी खोपड़ियां और बच्चों के कंकाल मिलने शुरू हुए।देखते ही देखते नाले और कोठी के पिछले हिस्से से करीब 19 महिलाओं और बच्चों के नरकंकाल और अवशेष बरामद हुए।पुलिस ने कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार कर लिया।3. रोंगटे खड़े करने वाले आरोप (2007)जांच के दौरान सुरेंद्र कोली पर आरोप लगे कि वह बच्चों को टॉफी और चॉकलेट का लालच देकर कोठी के अंदर बुलाता था।इसके बाद उनके साथ दुष्कर्म, हत्या और शव के टुकड़े-टुकड़े करके नाले में फेंकने के गंभीर आरोप लगाए गए। पुलिस और शुरुआती बयानों में हत्या, बलात्कार, शव-मैथुन (necrophilia) और आदमखोरी (cannibalism) जैसी खौफनाक बातें सामने आईं, हालांकि बाद में अदालतों में इन दावों पर सवाल भी उठे।देशव्यापी गुस्से के बाद जनवरी 2007 में इस केस की जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी गई।4. निचली अदालत से कई बार मौत की सजा (2009-2021)सीबीआई ने दोनों के खिलाफ अलग-अलग मामलों के तहत चार्जशीट दाखिल की।2009: गाजियाबाद की विशेष सीबीआई कोर्ट ने पहली बार रिम्पा हलदर केस में सुरेंद्र कोली को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई।इसके बाद 2010 से 2021 के बीच अलग-अलग मुकदमों की सुनवाई में सुरेंद्र कोली को 12 से अधिक मामलों में फांसी की सजा सुनाई गई, जबकि पंढेर को भी कुछ मामलों में दोषी पाया गया।5. अदालती मोड़ और सबूतों की कमी (2023-2025)अक्टूबर 2023: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को कई मामलों में बरी कर दिया। कोर्ट ने जांच पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच बेहद घटिया और लापरवाही से की गई थी और पुलिस अंग तस्करी (organ trade) जैसे बड़े पहलुओं की जांच करने में पूरी तरह नाकाम रही।नवंबर 2025: आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली के खिलाफ बचे आखिरी मामले में भी उनकी दोषमुक्ति (acquittal) को बरकरार रखा और करीब 19 साल बाद उन्हें जेल से रिहा करने का आदेश दिया। अदालत का मानना था कि जो कबूलनामे (confessions) लिए गए थे, वे प्रताड़ना के तहत लिए गए थे और उनके खिलाफ ठोस वैज्ञानिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्य नहीं थे।6. रिहाई के बाद का जीवन और अंत (2026)जेल से पूरी तरह बरी होकर बाहर आने के बाद सुरेंद्र कोली उत्तराखंड के हरिद्वार चले गए।उन्होंने अपनी पहचान छुपाकर एक निजी फर्म में सुरक्षाकर्मी के तौर पर काम किया और हाल ही में भूपतवाला इलाके में चाय की दुकान शुरू की थी।18 सितंबर 2026: सुबह के समय उसी चाय की दुकान में सुरेंद्र कोली का शव फंदे से लटका हुआ पाया गया। पुलिस का शुरुआती अनुमान है कि यह आत्महत्या का मामला है, हालांकि मामले की जांच अभी जारी है।यह पूरा मामला लगभग दो दशकों तक भारत की कानूनी और जांच व्यवस्था की खामियों को उजागर करने वाला एक बेहद चर्चित और विवादित केस बना रहा
    user_Keshav Choudhary
    Keshav Choudhary
    सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • चौबेपुर में बड़ा हादसा: गड्ढे में जाने से अनियंत्रित टेंपो पेड़ से टकराया, छह घायल
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    चौबेपुर में बड़ा हादसा: गड्ढे में जाने से अनियंत्रित टेंपो पेड़ से टकराया, छह घायल
    user_Laik AFTAB
    Laik AFTAB
    Local News Reporter सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
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