आंधी-तूफान भी नहीं डिगा पाए महाप्रभु जगन्नाथ के सेवक की आस्था! आंधी-तूफान भी नहीं डिगा पाए महाप्रभु जगन्नाथ के सेवक की आस्था! भीषण चक्रवाती तूफान और मूसलाधार बारिश के बीच 214 फीट ऊंचे मंदिर शिखर पर पहुंचकर बदला पतितपावन ध्वज, 800 साल पुरानी परंपरा रही अटूट। ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर में आस्था, साहस और समर्पण का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। भीषण चक्रवाती तूफान, तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के बावजूद मंदिर में सदियों पुरानी ध्वज परिवर्तन की परंपरा जारी रही। मंदिर के 214 फीट ऊंचे शिखर पर स्थित नील चक्र तक पहुंचकर चुनरा सेवक ने जान जोखिम में डालते हुए पतितपावन ध्वज बदला। खास बात यह रही कि इस जोखिम भरे कार्य के दौरान किसी आधुनिक सुरक्षा उपकरण का इस्तेमाल नहीं किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्री जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लगा ध्वज प्रतिदिन सूर्यास्त से पहले बदला जाता है। मान्यता है कि मौसम कैसा भी हो, महाप्रभु की यह परंपरा कभी बाधित नहीं होती। प्रकृति के प्रचंड रूप के सामने भी अडिग रही यह सेवा और समर्पण की भावना श्रद्धालुओं को भावविभोर कर रही है। सचमुच, यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि महाप्रभु जगन्नाथ के प्रति अटूट आस्था और समर्पण का प्रतीक है। 🙏 जय जगन्नाथ! जय जगन्नाथ! 🙏
आंधी-तूफान भी नहीं डिगा पाए महाप्रभु जगन्नाथ के सेवक की आस्था! आंधी-तूफान भी नहीं डिगा पाए महाप्रभु जगन्नाथ के सेवक की आस्था! भीषण चक्रवाती तूफान और मूसलाधार बारिश के बीच 214 फीट ऊंचे मंदिर शिखर पर पहुंचकर बदला पतितपावन ध्वज, 800 साल पुरानी परंपरा रही अटूट। ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर में आस्था, साहस और समर्पण का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। भीषण चक्रवाती तूफान, तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के बावजूद मंदिर में सदियों पुरानी ध्वज परिवर्तन की परंपरा जारी रही। मंदिर के 214 फीट ऊंचे शिखर पर स्थित नील चक्र तक पहुंचकर चुनरा सेवक ने जान जोखिम में डालते हुए पतितपावन ध्वज बदला। खास बात यह रही कि इस जोखिम भरे कार्य के दौरान किसी आधुनिक सुरक्षा उपकरण का इस्तेमाल नहीं किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्री जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लगा ध्वज प्रतिदिन सूर्यास्त से पहले बदला जाता है। मान्यता है कि मौसम कैसा भी हो, महाप्रभु की यह परंपरा कभी बाधित नहीं होती। प्रकृति के प्रचंड रूप के सामने भी अडिग रही यह सेवा और समर्पण की भावना श्रद्धालुओं को भावविभोर कर रही है। सचमुच, यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि महाप्रभु जगन्नाथ के प्रति अटूट आस्था और समर्पण का प्रतीक है। 🙏 जय जगन्नाथ! जय जगन्नाथ! 🙏
- राष्ट्रीय एकता दिवस पर कासगंज में गूंजा एकता का संदेश, डीएम-एसपी के नेतृत्व में निकली रन फॉर यूनिटी राष्ट्रीय एकता दिवस पर कासगंज में गूंजा एकता का संदेश, डीएम-एसपी के नेतृत्व में निकली रन फॉर यूनिटी सोरों गेट तिराहे से गांधी मूर्ति चौराहे तक पुलिसकर्मियों, व्यापारियों और छात्र-छात्राओं ने लगाई दौड़, ड्रोन कैमरे से हुई निगरानी कासगंज। राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर शनिवार, 31 अक्टूबर को जनपद कासगंज में रन फॉर यूनिटी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी प्रणय सिंह एवं पुलिस अधीक्षक ओपी सिंह के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिसकर्मियों, व्यापारी बंधुओं तथा छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग कर राष्ट्रीय एकता और अखंडता का संदेश दिया। एकता दौड़ का शुभारंभ सोरों गेट तिराहे से हुआ, जिसमें शामिल प्रतिभागियों ने गांधी मूर्ति चौराहे तक दौड़ लगाई। इस दौरान सभी ने देश की एकता, अखंडता और आपसी भाईचारे को मजबूत बनाए रखने का संकल्प प्रदर्शित किया। कार्यक्रम के समापन पर गांधी मूर्ति चौराहे पर प्रतिभागियों को जलपान एवं फल वितरित किए गए। वहीं कार्यक्रम को शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं सकुशल संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई। पूरे कार्यक्रम स्थल और दौड़ मार्ग पर ड्रोन कैमरे के माध्यम से हवाई निगरानी रखी गई। राष्ट्रीय एकता दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से आमजन को एकजुटता, सामाजिक समरसता और राष्ट्र की अखंडता बनाए रखने का संदेश दिया गया।1
- सिकंदराराऊ में भव्य कलश यात्रा के साथ रुद्राम्बिका महायज्ञ का शुभारंभ, 151 फीट ऊंची भगवा धर्मध्वजा बनेगी मुख्य आकर्षण सिकंदराराऊ में सात दिवसीय रुद्राम्बिका महायज्ञ और श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ हो गया। नगला जलाल स्थित श्री राधाजी बैंक्विट हॉल से निकली मंगल कलश यात्रा में सैकड़ों महिलाएं पीत वस्त्र पहनकर सिर पर कलश धारण किए शामिल हुईं। मुख्य यजमान समाजसेवी उदय पुंडीर अपनी पत्नी पूजा पुंडीर के साथ सुसज्जित रथ में भागवत पुराण लेकर यात्रा में शामिल हुए। इसके बाद स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती महाराज के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ और संगीतमय भागवत कथा शुरू हुई। इस भव्य आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण होगा 151 फीट ऊंचे एकल ध्वजदंड पर लहराने वाली विशाल भगवा सनातन धर्मध्वजा, जिसका आरोहण हवन-यज्ञ के पश्चात किया जाएगा। उदय पुंडीर के नेतृत्व में हो रहा यह आयोजन सिकंदराराऊ में धर्म, आस्था और सनातन संस्कृति का भव्य संगम बन गया है।1
- सड़क की नाली बंद होने से गांव दुरा प्रेम नगर में जलभराव, डेंगू का खतरा बढ़ा गंदे पानी से परेशान ग्रामीण, करीब आठ लोगों में डेंगू की शिकायत; ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा शिकायती पत्र अतरौली, अलीगढ़। तहसील अतरौली क्षेत्र के गांव दुरा प्रेम नगर में सड़क किनारे बनी नाली को कुछ लोगों द्वारा बंद किए जाने से जल निकासी की समस्या गंभीर हो गई है। नाली बंद होने के कारण गंदा पानी सड़क पर जमा हो रहा है। लंबे समय से जलभराव रहने के चलते ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, जमा गंदे पानी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ने और डेंगू सहित अन्य संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सड़क पर गंदा पानी भरा रहने से आवागमन में परेशानी हो रही है। दुर्गंध के कारण आसपास रहने वाले लोगों का जीवन भी प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में करीब आठ लोगों के डेंगू से पीड़ित होने की जानकारी सामने आई है। इससे गांव में बीमारी फैलने को लेकर लोगों में चिंता बनी हुई है। इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी अतरौली को शिकायती पत्र सौंपकर नाली बंद किए जाने की जांच कराने और जल निकासी की व्यवस्था तत्काल दुरुस्त कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके पर जांच कराकर नाली को खुलवाया जाए, सड़क पर जमा गंदे पानी की निकासी कराई जाए तथा मच्छरों से बचाव के लिए दवा का छिड़काव कराया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो गांव में संक्रामक बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन ग्रामीणों की शिकायत पर कितनी जल्दी कार्रवाई करता है।1
- आवागढ़ में अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का हुआ शुभारंभ, बड़ी संख्या में पहुंचे जैन समाज के लोग आवागढ़। कस्बा आवागढ़ स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर के पास बगीची में अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उत्साह और हर्षोल्लास के साथ हुआ। कवि सम्मेलन में जैन समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर भाग लिया। आयोजन को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता अनिल जैन बोर्रा वाले ने की। कार्यक्रम में समाज के गणमान्य लोगों सहित बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और अन्य लोग मौजूद रहे। कवि सम्मेलन के शुभारंभ के साथ ही कार्यक्रम स्थल पर लोगों की भीड़ जुटने लगी। सभी ने उत्साह के साथ कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस आयोजन का उद्देश्य लोगों को साहित्य और कविता से जोड़ना तथा कवियों के माध्यम से समाज में अच्छे विचारों का संदेश पहुंचाना रहा। अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन के आयोजन से कस्बे में साहित्यिक माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने आयोजन की सराहना की और कवि सम्मेलन में रुचि दिखाई। इस दौरान जैन समाज के लोगों ने कार्यक्रम में सहयोग किया। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी से आयोजन में उत्साह बना रहा।1
- Budaun Accident News: म्याऊं में दो बाइकों की भिड़ंत, दो लोग घायल | Star Today Samachar #budaunnews1
- बिल्सी में 50 फीट ऊंचे रावण के पुतले का हुआ दहन, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा मेला परिसर बिल्सी में 50 फीट ऊंचे रावण के पुतले का हुआ दहन, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा मेला परिसर बिल्सी (बदायूं)। गौशाला श्री रामलीला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित रामलीला महोत्सव के अंतर्गत शुक्रवार शाम विजयादशमी के अवसर पर रावण दहन का भव्य आयोजन किया गया। रावण दहन देखने के लिए नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों की संख्या में लोग मेला स्थल पहुंचे। भारी भीड़ के चलते पूरे मेला परिसर में उत्सव का माहौल नजर आया। शाम करीब पांच बजे मेला स्थल पर 50 फीट ऊंचे विशाल रावण के पुतले को अंतिम रूप दिया गया। इसके बाद करीब साढ़े पांच बजे भगवान श्रीराम ने अग्निबाण चलाकर रावण के पुतले का दहन किया। देखते ही देखते विशाल पुतला धू-धूकर जल उठा और पूरा मेला परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इस ऐतिहासिक दृश्य को देखने के लिए बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में खासा उत्साह दिखाई दिया। रावण दहन के बाद पुतले के जले हुए अवशेष और अस्थियां लेने के लिए लोगों में होड़ मच गई। मान्यता के अनुसार लोग रावण के पुतले के अवशेष अपने साथ ले जाने के लिए उत्सुक नजर आए। आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस बल मुस्तैद रहा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मियों ने सतर्कता बरती। कार्यक्रम को सफल बनाने में रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा। इस दौरान मेला कमेटी को पूर्ण सहयोग प्रदान करते हुए मेला अध्यक्ष सूर्य प्रकाश देवल, नगर अध्यक्ष आदित्य माहेश्वरी, मनीष असावा, सिक्की वार्ष्णेय, लव कुमार वार्ष्णेय सहित समस्त मेला कमेटी के सदस्य मौजूद रहे।1
- राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना का तृतीय एक दिवसीय शिविर का आयोजन हुआ सम्पन्न जलेसर। एटा। उत्तर प्रदेश। जनपद एटा के जलेसर तहसील क्षेत्र में शुक्रवार को राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना का तृतीय एक दिवसीय शिविर का आयोजन उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन प्राचार्य डॉo ओंकार सिंह के कुशल निर्देशन एवं कार्यक्रम प्रभारी डॉo गिरेंद्र सिंह के नेतृत्व में किया गया। शिविर का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं में समाज सेवा, अनुशासन, स्वच्छता और राष्ट्र निर्माण की भावना जागृत करना रहा। प्रथम सत्र में लक्ष्य गीत के साथ महाविद्यालय प्रांगण में स्वच्छता अभियान चलाया गया। एनएसएस के स्वयंसेवकों ने महाविद्यालय के मुख्य द्वार, प्रशासनिक भवन, विज्ञान संकाय, पुस्तकालय एवं खेल मैदान की साफ-सफाई कर पॉलिथीन व कचरे का निस्तारण किया और महाविद्यालय प्रांगण को पॉलिथीन मुक्त करने का संकल्प लिया। एन एस एस प्रभारी डॉo गिरेंद्र सिंह ने कहा कि पॉलिथीन पर्यावरण के लिए अभिशाप है, एन एस एस का यह प्रयास गांव-गांव तक ले जाया जाएगा। द्वितीय सत्र में बौद्धिक सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें व्यक्तित्व विकास में एन एस एस की भूमिका, नशा मुक्त भारत, डिजिटल युग में युवाओं के अवसर एवं राष्ट्र निर्माण में योगदान विषयों पर मार्गदर्शन दिया गया। प्राचार्य डॉo ओंकार ने कहा - "एन एस एस का मूल मंत्र 'मैं नहीं, आप' ही एक स्वयंसेवक को अच्छा नागरिक बनाता है। स्वच्छ, स्वस्थ और संस्कारित युवा ही विकसित भारत का सपना साकार करेगा।" कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉo शालिनी यादव, डॉo दिनेश कुमार, डॉo प्रणय छिब्बर, प्रदीप कुमार, अजय प्रताप सिंह, राजवीर सिंह आदि मौके पर उपस्थित रहे।1
- आंधी-तूफान भी नहीं डिगा पाए महाप्रभु जगन्नाथ के सेवक की आस्था! आंधी-तूफान भी नहीं डिगा पाए महाप्रभु जगन्नाथ के सेवक की आस्था! भीषण चक्रवाती तूफान और मूसलाधार बारिश के बीच 214 फीट ऊंचे मंदिर शिखर पर पहुंचकर बदला पतितपावन ध्वज, 800 साल पुरानी परंपरा रही अटूट। ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर में आस्था, साहस और समर्पण का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। भीषण चक्रवाती तूफान, तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के बावजूद मंदिर में सदियों पुरानी ध्वज परिवर्तन की परंपरा जारी रही। मंदिर के 214 फीट ऊंचे शिखर पर स्थित नील चक्र तक पहुंचकर चुनरा सेवक ने जान जोखिम में डालते हुए पतितपावन ध्वज बदला। खास बात यह रही कि इस जोखिम भरे कार्य के दौरान किसी आधुनिक सुरक्षा उपकरण का इस्तेमाल नहीं किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्री जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लगा ध्वज प्रतिदिन सूर्यास्त से पहले बदला जाता है। मान्यता है कि मौसम कैसा भी हो, महाप्रभु की यह परंपरा कभी बाधित नहीं होती। प्रकृति के प्रचंड रूप के सामने भी अडिग रही यह सेवा और समर्पण की भावना श्रद्धालुओं को भावविभोर कर रही है। सचमुच, यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि महाप्रभु जगन्नाथ के प्रति अटूट आस्था और समर्पण का प्रतीक है। 🙏 जय जगन्नाथ! जय जगन्नाथ! 🙏1