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उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में हरैया के मझा स्थित एक बगीचे में गैस की खुलेआम कालाबाजारी की जा रही है। इस बगीचे में लोगों से 100, 200 और 500 रुपये तक अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं, जिसके बाद ही उन्हें गैस मिल पाती है। ब्लैक में गैस बेचने का अड्डा बन चुके इस बगीचे की व्यवस्था पूरी तरह से खराब हो चुकी है और स्थानीय लोग इस बदहाली से बेहद परेशान हैं। इस व्यवस्था से त्रस्त एक पीड़ित ने बताया कि वह भी वहां गैस लेने गए थे और पिछले 20 दिनों से उनका पैसा और पासबुक वहां जमा है। इसके बावजूद, अब तक न तो उन्हें गैस मिली है और न ही उनकी पासबुक का कोई अता-पता है। पीड़ित द्वारा इस मामले की शिकायत के लिए 276 पर कॉल भी किया गया था, लेकिन इसके बाद भी प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
Shivam Pandey
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में हरैया के मझा स्थित एक बगीचे में गैस की खुलेआम कालाबाजारी की जा रही है। इस बगीचे में लोगों से 100, 200 और 500 रुपये तक अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं, जिसके बाद ही उन्हें गैस मिल पाती है। ब्लैक में गैस बेचने का अड्डा बन चुके इस बगीचे की व्यवस्था पूरी तरह से खराब हो चुकी है और स्थानीय लोग इस बदहाली से बेहद परेशान हैं। इस व्यवस्था से त्रस्त एक पीड़ित ने बताया कि वह भी वहां गैस लेने गए थे और पिछले 20 दिनों से उनका पैसा और पासबुक वहां जमा है। इसके बावजूद, अब तक न तो उन्हें गैस मिली है और न ही उनकी पासबुक का कोई अता-पता है। पीड़ित द्वारा इस मामले की शिकायत के लिए 276 पर कॉल भी किया गया था, लेकिन इसके बाद भी प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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- उत्तर प्रदेश के बस्ती में टांडा नदी और सरयू नदी के किनारे जलस्तर काफी ज्यादा बढ़ चुका है और पानी खतरे के निशान को पार कर गया है। नदी का बहाव बहुत तेज़ है, जिसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से यहाँ पहुँच रहे हैं। यहाँ सुरक्षा के कोई भी इंतज़ाम नहीं हैं और प्रशासन का इस गंभीर स्थिति पर कोई विशेष ध्यान नहीं है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे यहाँ घूमने जाएँ तो पूरी सावधानी बरतें और केवल किनारे पर ही रहकर इसे देखें ताकि कोई दुर्घटना न हो।4
- उत्तर प्रदेश की मिल्कीपुर विधानसभा को लेकर पूर्व विधायक गोरखनाथ बाबा ने अपनी बात रखी है। पूर्व विधायक गोरखनाथ बाबा द्वारा कही गई इस बात को लोगों से बेहद ध्यान से सुनने की अपील की जा रही है।1
- अयोध्या के सिविल लाइन स्थित गांधी पार्क में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे शिक्षाविद् सोनम वांगचुक के समर्थन में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नगर कोतवाल मनोज शर्मा के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन प्रेषित कर युवाओं के हित में शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की। ज्ञापन में देश के युवाओं के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्याओं को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। कार्यकर्ताओं ने सोनम वांगचुक द्वारा उठाए गए मुद्दों और उनके साथ हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही, लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के संवैधानिक अधिकार की रक्षा, शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी व जवाबदेह बनाने और पेपर लीक रोकने के लिए कठोर कानून बनाने का आग्रह किया गया है। प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी, अयोध्या के जिलाध्यक्ष एवं अधिवक्ता अनिल कुमार प्रजापति ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की। उन्होंने केंद्र सरकार पर युवाओं की आवाज दबाने और असहमति के स्वरों को कुचलने का आरोप लगाया। इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में यू.के. द्विवेदी, राजीव पाठक, शारजाह मास्टर, गायत्री मिश्रा, सुनील मौर्य, रघुनाथ प्रताप, मनोज दुबे, अखिलेश गौतम, चंद्र प्रकाश, साक्षी पासवान, शिवानी, सुनीता, गुड़िया राइन, दिलीप वर्मा और रामजी वर्मा सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।2
- रामनगरी अयोध्या में एक बैठक के बाद पत्रकारों और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के बीच हुई कथित बातचीत को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बैठक समाप्त होने के बाद जब पत्रकारों ने एक सामान्य सवाल पूछा कि "आज की बैठक में क्या रहा?", तो इस पर चंपत राय ने कथित तौर पर कहा, "आज की बैठक में ऐसी कोई बात नहीं रही जो आपकी बुद्धि में आ सके... जाओ, जाओ, भागो यहां से।" इस कथित अपमानजनक टिप्पणी के बाद पत्रकारों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। इसके साथ ही लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के सम्मान पर भी सवाल उठने लगे हैं कि क्या मीडिया के साथ इस तरह का व्यवहार और भाषा उचित है? लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनहित के मुद्दों पर सवाल पूछना मीडिया का संवैधानिक दायित्व है, और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों से संवाद की मर्यादा बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है। यह मामला अब अयोध्या की सियासत और स्थानीय चर्चाओं में गरमाया हुआ है। जहां कई लोग इसे सीधे तौर पर मीडिया के मान-सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं कुछ लोग इस पूरे घटनाक्रम पर संबंधित पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार करने की बात कह रहे हैं। यह कथित बयान लोकतांत्रिक संवाद की मर्यादा पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। इस मामले में चंपत राय का पक्ष सामने आने पर उसे भी समान प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाना चाहिए।1
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