आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र के सैफाबाद बाजार स्थित एक अस्पताल को डिप्टी सीएमओ ने सोमवार देर शाम सील कर दिया। यह कार्रवाई एक प्रसूता और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत के मामले के बाद प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की गई थी। हालांकि, इस सीलिंग की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल सील होने के बावजूद भी यहाँ इलाज का कार्य जारी है। इसकी सच्चाई जानने के लिए जब मीडियाकर्मी मौके पर पहुँचे, तो वहाँ नर्स समेत अन्य स्टाफ मौजूद मिले। यह सामने आया कि अस्पताल के मुख्य गेट को भले ही प्रशासन ने सील कर दिया हो, लेकिन बगल में बनी एक गैलरी से अस्पताल के अंदर जाने का रास्ता खुला है। इस गैलरी के माध्यम से अस्पताल कर्मियों को अंदर दाखिल होने का पूरा अवसर दिया गया है, जिससे डिप्टी सीएमओ की सीलिंग की कार्रवाई की प्रभावशीलता और मंशा पर प्रश्नचिह्न लग गया है। इस दौरान, अस्पताल स्टाफ ने मीडियाकर्मियों का वीडियो बनाना शुरू कर दिया, और घटना की सूचना मिलते ही सैफाबाद चौकी इंचार्ज तुरंत मौके पर पहुँच गए। वहाँ मौजूद एक महिला, जिसे स्टाफ नर्स बताया जा रहा था, मीडियाकर्मियों को लगातार निशाना बनाने का प्रयास करती रही। मंगलवार शाम करीब 6 बजे, थाना अध्यक्ष राकेश चौरसिया ने इस संबंध में बताया कि उन्हें स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल सील होने की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, और उन्हें अस्पताल के सील होने की कोई जानकारी नहीं है। यह स्थिति अस्पताल सीलिंग की प्रशासनिक कार्रवाई की पारदर्शिता और उसकी वास्तविक प्रभावकारिता पर बड़े सवाल खड़े करती है, खास तौर पर मेडिकल लापरवाही से जुड़ी एक गंभीर घटना के बाद।
आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र के सैफाबाद बाजार स्थित एक अस्पताल को डिप्टी सीएमओ ने सोमवार देर शाम सील कर दिया। यह कार्रवाई एक प्रसूता और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत के मामले के बाद प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की गई थी। हालांकि, इस सीलिंग की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल सील होने के बावजूद भी यहाँ इलाज का कार्य जारी है। इसकी सच्चाई जानने के लिए जब मीडियाकर्मी मौके पर पहुँचे, तो वहाँ नर्स समेत अन्य स्टाफ मौजूद मिले। यह सामने आया कि अस्पताल के मुख्य गेट को भले ही प्रशासन ने सील कर दिया हो, लेकिन बगल में बनी एक गैलरी से अस्पताल के अंदर जाने का रास्ता खुला है। इस गैलरी के माध्यम से अस्पताल कर्मियों को अंदर दाखिल होने का पूरा अवसर दिया गया है, जिससे डिप्टी सीएमओ की सीलिंग की कार्रवाई की प्रभावशीलता और मंशा पर प्रश्नचिह्न लग गया है। इस दौरान, अस्पताल स्टाफ ने मीडियाकर्मियों का वीडियो बनाना शुरू कर दिया, और घटना की सूचना मिलते ही सैफाबाद चौकी इंचार्ज तुरंत मौके पर पहुँच गए। वहाँ मौजूद एक महिला, जिसे स्टाफ नर्स बताया जा रहा था, मीडियाकर्मियों को लगातार निशाना बनाने का प्रयास करती रही। मंगलवार शाम करीब 6 बजे, थाना अध्यक्ष राकेश चौरसिया ने इस संबंध में बताया कि उन्हें स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल सील होने की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, और उन्हें अस्पताल के सील होने की कोई जानकारी नहीं है। यह स्थिति अस्पताल सीलिंग की प्रशासनिक कार्रवाई की पारदर्शिता और उसकी वास्तविक प्रभावकारिता पर बड़े सवाल खड़े करती है, खास तौर पर मेडिकल लापरवाही से जुड़ी एक गंभीर घटना के बाद।
- आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र के सैफाबाद बाजार स्थित एक अस्पताल को डिप्टी सीएमओ ने सोमवार देर शाम सील कर दिया। यह कार्रवाई एक प्रसूता और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत के मामले के बाद प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की गई थी। हालांकि, इस सीलिंग की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल सील होने के बावजूद भी यहाँ इलाज का कार्य जारी है। इसकी सच्चाई जानने के लिए जब मीडियाकर्मी मौके पर पहुँचे, तो वहाँ नर्स समेत अन्य स्टाफ मौजूद मिले। यह सामने आया कि अस्पताल के मुख्य गेट को भले ही प्रशासन ने सील कर दिया हो, लेकिन बगल में बनी एक गैलरी से अस्पताल के अंदर जाने का रास्ता खुला है। इस गैलरी के माध्यम से अस्पताल कर्मियों को अंदर दाखिल होने का पूरा अवसर दिया गया है, जिससे डिप्टी सीएमओ की सीलिंग की कार्रवाई की प्रभावशीलता और मंशा पर प्रश्नचिह्न लग गया है। इस दौरान, अस्पताल स्टाफ ने मीडियाकर्मियों का वीडियो बनाना शुरू कर दिया, और घटना की सूचना मिलते ही सैफाबाद चौकी इंचार्ज तुरंत मौके पर पहुँच गए। वहाँ मौजूद एक महिला, जिसे स्टाफ नर्स बताया जा रहा था, मीडियाकर्मियों को लगातार निशाना बनाने का प्रयास करती रही। मंगलवार शाम करीब 6 बजे, थाना अध्यक्ष राकेश चौरसिया ने इस संबंध में बताया कि उन्हें स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल सील होने की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, और उन्हें अस्पताल के सील होने की कोई जानकारी नहीं है। यह स्थिति अस्पताल सीलिंग की प्रशासनिक कार्रवाई की पारदर्शिता और उसकी वास्तविक प्रभावकारिता पर बड़े सवाल खड़े करती है, खास तौर पर मेडिकल लापरवाही से जुड़ी एक गंभीर घटना के बाद।1
- राजधानी लखनऊ के बाजार खाला कोतवाली क्षेत्र में एक पति अपनी पत्नी को पढ़ाकर वकील बनाने के बाद अब पछता रहा है। मोबाइल की दुकान चलाने वाले इस पति ने कर्ज लेकर अपनी पत्नी को वकील बनाया था, लेकिन वकील बनते ही पत्नी उससे अलग हो गई। अब यह मामला अदालत में विचाराधीन है। इसी बीच, कल शाम पत्नी ने अपने साथियों के साथ मिलकर पति पर जानलेवा हमला कर दिया। जब पति का भाई बीच-बचाव करने आया, तो हमलावरों ने उसे भी बुरी तरह मारा-पीटा, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। इस घटना के बाद, पीड़ित पति रात 11 बजे तक कोतवाली में बैठा रहा, लेकिन उसे कोई सुनवाई नहीं मिली।1
- प्रतापगढ़ में टीजीटी परीक्षा पर प्रशासन द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही है। जिले में परीक्षा के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) लगातार निरीक्षण कर रहे हैं।1
- प्रतापगढ़ में अपराध और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के क्रम में, थाना कोतवाली नगर में गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मामलों से संबंधित गैंग लीडर मस्सन, गैंग सदस्य मो० इलियास और अलीम उर्फ मोनू के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही की गई है। इस कार्रवाई के तहत, माननीय जिला मजिस्ट्रेट प्रतापगढ़ द्वारा उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के अंतर्गत इन तीनों की कुल ₹45,30,000/- (पैंतालीस लाख तीस हजार रुपये) मूल्य की अवैध चल और अचल संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश पारित किया गया है। अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) श्री आलोक कुमार भाटी ने इस संबंध में अपनी बाइट भी दी है।1
- जौनपुर के मछलीशहर में जज सिंह अन्ना की मांगों के बाद प्रशासन ने अवैध अस्पतालों के खिलाफ जाँच अभियान चलाने की पूरी तैयारी कर ली है। उपजिलाधिकारी अजय कुमार उपाध्याय ने इस अभियान की कमान संभालने का आश्वासन दिया है। अन्ना ने प्रसूता महिला की मृत्यु पर 25 लाख रुपये और नवजात शिशु की मृत्यु पर 5 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की है, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार के पास लिखित में भेजा जा रहा है। डिप्टी सीएमओ डॉ प्रभात कुमार ने बताया है कि दो दिन बाद से अस्पतालों पर लगातार दस दिनों तक छापे मारे जाएंगे। एसडीएम मछलीशहर ने आश्वस्त किया है कि इस अभियान के लिए जितनी भी फोर्स की आवश्यकता होगी, वह उपलब्ध कराई जाएगी, और जरूरत पड़ने पर वे अवैध अस्पतालों को सीज करने में सीएमओ और एडिशनल सीएमओ का सहयोग करेंगे। उन्होंने चिकित्सा पद्धति को सुधारने और जाँच अभियान में हर संभव सहयोग देने की बात कही। एसडीएम मछलीशहर ने अन्ना की इन मुआवजे की मांगों को जायज बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से इसे पास कराने की पूरी कोशिश करने का संकल्प लिया है। साथ ही उन्होंने प्रसूता और नवजात की मृत्यु को रोकने के लिए आज से एक सघन अभियान चलाने की घोषणा की। दूसरी ओर, जज सिंह अन्ना ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो वे 15 दिन बाद दोबारा आंदोलन करेंगे, इसे उन्होंने 'जन-संघर्ष की एक और जीत' बताया है।1
- आगामी 5 जून को मनाए जाने वाले पर्यावरण दिवस के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण अपील की गई है। इस संदेश में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि पर्यावरण के नाम पर यह दिवस कतई खाली नहीं जाना चाहिए। चेताया गया है कि यदि इस संबंध में अभी विचार नहीं किया गया, तो आने वाले कुछ ही वर्षों में तापमान बढ़कर 60 डिग्री तक पहुँच सकता है, जो 'नौतपा' के रूप में देखा जाएगा।1
- प्रतापगढ़ पुलिस ने एक सराहनीय पहल करते हुए लोगों की खुशियां लौटाई हैं। पुलिस ने कुल 170 गुम हुए मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन सभी मोबाइलों को उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिया गया है। इस पूरे मामले पर अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी ने भी टिप्पणी की है।1
- प्रतापगढ़ जिले के कंधई थाना क्षेत्र के परानपुर गांव से एक पेड़ काटने को लेकर हुए विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो के आधार पर कंधई थाना प्रभारी आदित्य सिंह पर एक महिला को थप्पड़ मारने का गंभीर आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि आंधी में गिरे यूकेलिप्टस (सफेदा) के एक पेड़ को लेकर ग्रामीणों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया था। इसकी सूचना मिलने पर थाना प्रभारी आदित्य सिंह राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचे, और उनकी मौजूदगी में पेड़ की कटाई शुरू कराई जा रही थी। इसी दौरान कुछ महिलाओं ने इसका विरोध जताना शुरू कर दिया। वायरल वीडियो में पुलिसकर्मियों और विरोध कर रही महिलाओं के बीच तीखी नोकझोंक दिखाई दे रही है, जिसके बाद ही थाना प्रभारी पर महिला को थप्पड़ मारने का यह आरोप लगाया जा रहा है। हालांकि, थाना प्रभारी आदित्य सिंह ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि भीड़ सरकारी कार्य में बाधा डाल रही थी, जिसे केवल मौके से हटाया गया था, और किसी भी महिला के साथ कोई मारपीट नहीं की गई है। यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन प्रशासन की ओर से इस पूरे प्रकरण को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।1