Shuru
Apke Nagar Ki App…
मां की इच्छा को पूरा करने के लिए बेटी ने की पापा से शादी ऐसी आज्ञाकारी बेटियां तो नहीं मिलेगी और ऐसेबाप को फांसी पर चढ़ा देना चाहिए
Abhishek Pandey
मां की इच्छा को पूरा करने के लिए बेटी ने की पापा से शादी ऐसी आज्ञाकारी बेटियां तो नहीं मिलेगी और ऐसेबाप को फांसी पर चढ़ा देना चाहिए
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- Post by Deepesh Pandey Dist Chief Director ACFI Rewa1
- Post by Bolti Divare1
- आजादी के 75 साल बाद भी 'नर्क' जैसी जिंदगी: रीवा के गाढ़ा गांव में सड़क नहीं, इसलिए अस्पताल पहुँचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं मासूम रीवा जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो 'डिजिटल इंडिया' और 'विकास' के दावों की पोल खोलती है। जिले के अतरैला क्षेत्र के पास स्थित गाढ़ा गांव (138) के निवासियों के लिए आज भी पक्की सड़क एक लग्जरी बनी हुई है। आलम यह है कि यहाँ के लोग सड़क के लिए पिछले कई दशकों से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। चार महीने का 'स्वैच्छिक कारावास' गाढ़ा गांव के लोगों के लिए मानसून की पहली फुहार खुशियों के बजाय डर लेकर आती है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि बारिश के चार महीनों में गांव टापू बन जाता है। मुख्य मार्ग से संपर्क पूरी तरह टूट जाता है, जिसके कारण बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता है। बीमारों को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस तो दूर, पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। सड़क के अभाव में उजड़ रही हैं गोदें गांव का दर्द सिर्फ आवाजाही तक सीमित नहीं है। यहाँ की एक महिला, फूलमती ने नम आंखों से अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि उनकी बहू को प्रसव पीड़ा के दौरान अस्पताल ले जाना था, लेकिन रास्ता न होने के कारण मुख्य मार्ग तक पहुँचने में ही इतनी देरी हो गई कि अस्पताल पहुँचने से पहले ही बच्चे की मौत हो गई। गांव के युवाओं का कहना है कि सड़क न होने के कारण अब इस गांव में कोई अपनी बेटी की शादी करने को तैयार नहीं है, जिससे कई घरों के चिराग बुझने की कगार पर हैं। 1
- गुढ़ ब्रेकिंग रायपुर कर्चुलियान जनपद उपाध्यक्ष ने पूर्व माध्यमिक विद्यालय पतौता का किया निरीक्षण नदारद मिले हेड मास्टर रीवा जिले के रायपुर कर्चुलियान जनपद उपाध्यक्ष राम लखन सिंह महगना ने सोमवार को औचक निरीक्षण के दौरान पूर्व माध्यमिक विद्यालय पतौता में बड़ी लापरवाही पाई,जहाँ हेड मास्टर बाबूलाल बंसल नदारद मिले और विद्यालय का पंजीकृत रजिस्टर भी उपलब्ध नहीं था। जनपद उपाध्यक्ष ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि कई दिनों से हमको शिकायत मिल रही थी कि पूर्व माध्यमिक विद्यालय पतौता में पदस्थ हेड मास्टर की मनमानी चरम सीमा पर है।हेड मास्टर बाबूलाल बंसल का स्कूल आने जाने का कोई समय सीमा नहीं है वह अपने मनमर्जी से आते हैं और मनमर्जी से जाते हैं कभी कभार तो हेड मास्टर हफ्ते भर से ऊपर भी स्कूल नहीं पहुंचते हैं।यह सभी जानकारियां जनपद पंचायत उपाध्यक्ष ने स्कूल में उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों से संवाद करके मीडिया को अवगत कराया है।बल्कि उपाध्यक्ष ने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति को इतने बड़े विद्यालय का हेड मास्टर का प्रभार सौंपा गया है अगर उसकी मनमानी नहीं सुधरी तो बहुत जल्द इनकी उच्च अधिकारियों से शिकायत की जाएगी।1
- Post by Avi Standing with the truth9
- Post by बुद्धसेन चौरसिया1
- ग्रामीण वासियों को कहना है कि पैसा चढ़ाने पर ही आवास मिलता है1
- Post by Deepesh Pandey Dist Chief Director ACFI Rewa1
- शोसल मीडिया पर जातिवादी जहर उगल रहा युवक, सरेआम दी जान से मारने की धमकी रीवा। डिजिटल इंडिया के दौर में जहाँ सोशल मीडिया को संवाद का सेतु माना जाता है, वहीं कुछ असामाजिक तत्व इसे नफरत और हिंसा फैलाने का अड्डा बना रहे हैं। ताजा मामला रीवा जिले से सामने आया है, जहाँ एक युवक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में युवक न केवल जातिसूचक गालियाँ दे रहा है, बल्कि अन्य समुदायों को जान से मारने की धमकी भी दे रहा है। Fb के वायरल वीडियो 'शुभम रॉक' नामक युवक खुद को एक विशेष जाति (सेन) का बताते हुए अन्य जातियों, विशेषकर ब्राह्मण और ठाकुर समुदाय के प्रति अत्यंत आपत्तिजनक और मर्यादित भाषा का प्रयोग कर रहा है। युवक वीडियो में यह कहते सुना जा रहा है कि— "हमारे पास काटने के लिए औजार भी हैं... तुम सब हमारे सामने सिर झुकाते हो।" युवक ने न केवल धार्मिक और जातीय भावनाओं को आहत किया है, बल्कि खुलेआम समाज में वैमनस्य फैलाने की कोशिश की है। वीडियो के अंत में वह अपनी पहचान 'निक्की रॉक्स रीवा' के रूप में बताता है। फेसबुक प्रोफाइल से खुली पोल युवक की फेसबुक प्रोफाइल (Shubham Rok) के अनुसार, वह रीवा का निवासी है और उसने शहर के प्रतिष्ठित मार्तंड स्कूल क्रमांक-1 और टी.आर.एस. कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की है। प्रोफाइल के मुताबिक उसकी जन्मतिथि 23 अप्रैल 2000 है। शिक्षित होने के बावजूद इस तरह की कट्टरपंथी और हिंसक सोच सोशल मीडिया पर प्रदर्शित करना चिंता का विषय है। रीवा में इस तरह के भड़काऊ वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है। बुद्धिजीवियों का कहना है कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब नफरत फैलाना नहीं है। IT एक्ट की धारा 66: सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक संदेश भेजना अपराध है। रीवा पुलिस के लिए यह वीडियो एक बड़ी चुनौती है। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते ऐसे 'फेसबुकिया डॉन' पर लगाम नहीं कसी गई, तो क्षेत्र की शांति व्यवस्था भंग हो सकती है। अब देखना यह है कि साइबर सेल और स्थानीय पुलिस इस मामले में क्या संज्ञान लेती है।2