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35वीं श्रीराधारानी ब्रजयात्रा का शुभारंभ, राधा नाम संकीर्तन के साथ निकले हजारों श्रद्धालु मथुरा जनपद के बरसाना। वैदिक मंत्रोच्चार, ध्वज पूजन, कन्या पूजन और ठाकुरजी की पूजा-अर्चना के साथ शनिवार को 35वीं श्रीराधारानी ब्रजयात्रा का शुभारंभ हुआ। ब्रजनिष्ठ संत पद्मश्री रमेश बाबा महाराज द्वारा प्रारंभ की गई इस वार्षिक यात्रा में देश के विभिन्न प्रांतों से 15 हजार से अधिक श्रद्धालु और सैकड़ों विदेशी भक्त शामिल हुए। यात्रा से पहले सभी ब्रजयात्रियों ने 36 दिवसीय यात्रा के नियम और संकल्प ग्रहण किए। राधा नाम संकीर्तन करते हुए निकली यात्रा के पहले दिन श्रद्धालुओं ने तुंगविद्या सखी के गांव ढभाला, सूर्यकुंड, नौबारी-चौबारी और रत्नकुंड के दर्शन किए। यात्रा 26 नवंबर को बरसाना लौटकर संपन्न होगी। बरसाना स्थित माताजी गौशाला के समीप बनाए गए यात्रा शिविर में मान मंदिर के आचार्य पंडित महेश चंद्र शास्त्री और सुरेश चंद्र शास्त्री ने वैदिक रीति से यात्रियों को संकल्प दिलाया तथा वैष्णव परंपरा के अनुसार यात्रा के नियम समझाए। इसके बाद डॉ. रामजीलाल शास्त्री, मान मंदिर के महंत ब्रजशरण दास महाराज, नरसिंह दास महाराज और राधाकांत शास्त्री सहित संतों ने ध्वज पूजन, कन्या पूजन और ठाकुरजी की पूजा-अर्चना की। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद ठाकुरजी के डोले के पीछे-पीछे राधा नाम संकीर्तन करते हुए श्रद्धालु यात्रा पर निकले। यात्रा सबसे पहले माताजी गौशाला पहुंची, जहां गौसेवकों ने पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। इसके बाद ब्रजयात्रियों का विशाल समूह तुंगविद्या सखी के गांव ढभाला पहुंचा। यहां सूर्यकुंड स्थित तुंगविद्या सखी मंदिर में दर्शन किए गए। गांव के ब्रजवासियों ने यात्रियों का स्वागत कर केला प्रसाद भेंट किया। इसके बाद यात्रा नौबारी-चौबारी पहुंची, जहां यात्रा का नेतृत्व कर रहे नरसिंह दास महाराज ने स्थल की धार्मिक महत्ता बताई। उन्होंने बताया कि ब्रज की मान्यता के अनुसार, यहां श्रीराधारानी अपनी सखियों के साथ गुड्डा-गुड़िया का खेल खेलती थीं और श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ समीप स्थित पर्वत की श्यामशिला से इन बाल लीलाओं का दर्शन करते थे। नौबारी-चौबारी के बाद श्रद्धालुओं ने रत्नकुंड के दर्शन किए। इसके बाद राधा नाम संकीर्तन करते हुए यात्रा अपने पड़ाव स्थल पहुंची, जहां प्रमुख व्यवस्थापक ब्रजदास ने स्वयंसेवकों के सहयोग से यात्रियों के लिए प्रसाद की व्यवस्था कराई। शाम पांच बजे मुख्य यात्रा पंडाल में भक्तशरण महाराज ने पहले दिन दर्शन किए गए तीर्थस्थलों की शास्त्रीय एवं धार्मिक महिमा बताई। विभिन्न ग्रंथों में वर्णित मंत्रों के माध्यम से प्रार्थना कराकर श्रद्धालुओं को तीर्थस्थलों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विधान कराया गया। यात्रा व्यवस्थापक राधाकांत शास्त्री और ब्रजदास ने बताया कि मान मंदिर सेवा संस्थान रमेश बाबा महाराज के आदर्शों और सेवा-संकल्पों के अनुरूप यात्रा का संचालन कर रहा है। यात्रियों के भोजन, आवास, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं निशुल्क रहेंगी। यात्रा का उद्देश्य ब्रज के पवित्र स्थलों के दर्शन के साथ श्रीराधारानी की भक्ति, गौसेवा और ब्रज की प्राचीन धार्मिक परंपराओं का प्रसार करना है। यात्रा प्रबंधन के अनुसार, रविवार को श्रद्धालु मान मंदिर, कुशल बिहारी मंदिर, श्रीजी मंदिर, दानगढ़, मयूरकुटी, सांकरी खोर, विलासगढ़, माहेश्वर सर और दोहनी कुंड के दर्शन करेंगे। आगामी दिनों में यात्रा नंदगांव, सिरथला, होडल, भिड़ूकी, धनौता, उझानी, विहारवन, गंगरौल, भांडीरवन, बेलवन, वृंदावन, दाऊजी, चिंताहरण महादेव, रावल, मधुवन, बहुलावन, मुखराई, पूछरी, उमराव, टांकोली, खोह, आदिबद्री, केदारनाथ और कामां सहित ब्रज के विभिन्न धार्मिक स्थलों से होकर गुजरेगी। यात्रा में डॉ. रामजीलाल शास्त्री, मान मंदिर के महंत ब्रजशरण दास महाराज, नीलमणि बाबा, लाल बाबा, राजकुमार गरुण, भगत जी, संजय सिंह प्रधान, बंसी मेंबर, भारत गोस्वामी, राघव गोस्वामी और सज्जन शर्मा सहित अनेक संत, सेवक और श्रद्धालु मौजूद रहे।

1 day ago
user_Lokesh Garg
Lokesh Garg
छाता, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
1 day ago

35वीं श्रीराधारानी ब्रजयात्रा का शुभारंभ, राधा नाम संकीर्तन के साथ निकले हजारों श्रद्धालु मथुरा जनपद के बरसाना। वैदिक मंत्रोच्चार, ध्वज पूजन, कन्या पूजन और ठाकुरजी की पूजा-अर्चना के साथ शनिवार को 35वीं श्रीराधारानी ब्रजयात्रा का शुभारंभ हुआ। ब्रजनिष्ठ संत पद्मश्री रमेश बाबा महाराज द्वारा प्रारंभ की गई इस वार्षिक यात्रा में देश के विभिन्न प्रांतों से 15 हजार से अधिक श्रद्धालु और सैकड़ों विदेशी भक्त शामिल हुए। यात्रा से पहले सभी ब्रजयात्रियों ने 36 दिवसीय यात्रा के नियम और संकल्प ग्रहण किए। राधा नाम संकीर्तन करते हुए निकली यात्रा के पहले दिन श्रद्धालुओं ने तुंगविद्या सखी के गांव ढभाला, सूर्यकुंड, नौबारी-चौबारी और रत्नकुंड के दर्शन किए। यात्रा 26 नवंबर को बरसाना लौटकर संपन्न होगी। बरसाना स्थित माताजी गौशाला के समीप बनाए गए यात्रा शिविर में मान मंदिर के आचार्य पंडित महेश चंद्र शास्त्री और सुरेश चंद्र शास्त्री ने वैदिक रीति से यात्रियों को संकल्प दिलाया तथा वैष्णव परंपरा के अनुसार यात्रा के नियम समझाए। इसके बाद डॉ. रामजीलाल शास्त्री, मान मंदिर के महंत ब्रजशरण दास महाराज, नरसिंह दास महाराज और राधाकांत शास्त्री सहित संतों ने ध्वज पूजन, कन्या पूजन और ठाकुरजी की पूजा-अर्चना की। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद ठाकुरजी के डोले के पीछे-पीछे राधा नाम संकीर्तन करते हुए श्रद्धालु यात्रा पर निकले। यात्रा सबसे पहले माताजी गौशाला पहुंची, जहां गौसेवकों ने पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। इसके बाद ब्रजयात्रियों का विशाल समूह तुंगविद्या सखी के गांव ढभाला पहुंचा। यहां सूर्यकुंड स्थित तुंगविद्या सखी मंदिर में दर्शन किए गए। गांव के ब्रजवासियों ने यात्रियों का स्वागत कर केला प्रसाद भेंट किया। इसके बाद यात्रा नौबारी-चौबारी पहुंची, जहां यात्रा का नेतृत्व कर रहे नरसिंह दास महाराज ने स्थल की धार्मिक महत्ता बताई। उन्होंने बताया कि ब्रज की मान्यता के अनुसार, यहां

श्रीराधारानी अपनी सखियों के साथ गुड्डा-गुड़िया का खेल खेलती थीं और श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ समीप स्थित पर्वत की श्यामशिला से इन बाल लीलाओं का दर्शन करते थे। नौबारी-चौबारी के बाद श्रद्धालुओं ने रत्नकुंड के दर्शन किए। इसके बाद राधा नाम संकीर्तन करते हुए यात्रा अपने पड़ाव स्थल पहुंची, जहां प्रमुख व्यवस्थापक ब्रजदास ने स्वयंसेवकों के सहयोग से यात्रियों के लिए प्रसाद की व्यवस्था कराई। शाम पांच बजे मुख्य यात्रा पंडाल में भक्तशरण महाराज ने पहले दिन दर्शन किए गए तीर्थस्थलों की शास्त्रीय एवं धार्मिक महिमा बताई। विभिन्न ग्रंथों में वर्णित मंत्रों के माध्यम से प्रार्थना कराकर श्रद्धालुओं को तीर्थस्थलों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विधान कराया गया। यात्रा व्यवस्थापक राधाकांत शास्त्री और ब्रजदास ने बताया कि मान मंदिर सेवा संस्थान रमेश बाबा महाराज के आदर्शों और सेवा-संकल्पों के अनुरूप यात्रा का संचालन कर रहा है। यात्रियों के भोजन, आवास, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं निशुल्क रहेंगी। यात्रा का उद्देश्य ब्रज के पवित्र स्थलों के दर्शन के साथ श्रीराधारानी की भक्ति, गौसेवा और ब्रज की प्राचीन धार्मिक परंपराओं का प्रसार करना है। यात्रा प्रबंधन के अनुसार, रविवार को श्रद्धालु मान मंदिर, कुशल बिहारी मंदिर, श्रीजी मंदिर, दानगढ़, मयूरकुटी, सांकरी खोर, विलासगढ़, माहेश्वर सर और दोहनी कुंड के दर्शन करेंगे। आगामी दिनों में यात्रा नंदगांव, सिरथला, होडल, भिड़ूकी, धनौता, उझानी, विहारवन, गंगरौल, भांडीरवन, बेलवन, वृंदावन, दाऊजी, चिंताहरण महादेव, रावल, मधुवन, बहुलावन, मुखराई, पूछरी, उमराव, टांकोली, खोह, आदिबद्री, केदारनाथ और कामां सहित ब्रज के विभिन्न धार्मिक स्थलों से होकर गुजरेगी। यात्रा में डॉ. रामजीलाल शास्त्री, मान मंदिर के महंत ब्रजशरण दास महाराज, नीलमणि बाबा, लाल बाबा, राजकुमार गरुण, भगत जी, संजय सिंह प्रधान, बंसी मेंबर, भारत गोस्वामी, राघव गोस्वामी और सज्जन शर्मा सहित अनेक संत, सेवक और श्रद्धालु मौजूद रहे।

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    मथुरा में नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, कंटेनर से 250 किलो गांजा बरामद
मथुरा के रिफाइनरी थाना क्षेत्र में हाईवे पर चेकिंग के दौरान एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, कंटेनर से भारी मात्रा में मादक पदार्थ गांजा बरामद।
SSP मथुरा और SP एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स लखनऊ के निर्देशन में CO रिफाइनरी और एंटी नारकोटिक्स टीम आगरा ने की कार्रवाई।
    user_Lokesh Garg
    Lokesh Garg
    छाता, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • गोवर्धन में शरद पूर्णिमा पर RSS ने निकाला जयघोष पथ...... see more गोवर्धन में शरद पूर्णिमा पर RSS ने निकाला जयघोष पथ......
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    गोवर्धन में शरद पूर्णिमा पर RSS ने निकाला जयघोष पथ...... see more
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    user_राष्ट्र की आवाज न्यूज मीडिया
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    7 hrs ago
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    user_Raju kashyap
    Raju kashyap
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    8 hrs ago
  • मथुरा में भीषण जाम से हाहाकार कृष्णा नगर से गोवर्धन चौराहे तक राहगीर परेशान एंकर*मथुरा श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में जाम की समस्या से आमजन बेहाल हैं कृष्णा नगर चौराहे से गोवर्धन चौराहे तक शाम करीब 6:30 बजे से जाम की स्थिति बनी हुई है जाम में फंसे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है जी हां मथुरा में यातायात व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं कृष्णा नगर से गोवर्धन चौराहे तक लगे जाम के चलते राहगीरों बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी झेलनी पड़ रही है लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है अब सवाल यह है कि आखिर इस जाम से लोगों को राहत कब मिलेगी संबंधित यातायात और पुलिस प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है यह देखना होगा
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    मथुरा में भीषण जाम से हाहाकार कृष्णा नगर से गोवर्धन चौराहे तक राहगीर परेशान


एंकर*मथुरा श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में जाम की समस्या से आमजन बेहाल हैं कृष्णा नगर चौराहे से गोवर्धन चौराहे तक शाम करीब 6:30 बजे से जाम की स्थिति बनी हुई है जाम में फंसे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है जी हां मथुरा में यातायात व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं कृष्णा नगर से गोवर्धन चौराहे तक लगे जाम के चलते राहगीरों बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी झेलनी पड़ रही है लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है अब सवाल यह है कि आखिर इस जाम से लोगों को राहत कब मिलेगी संबंधित यातायात और पुलिस प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है यह देखना होगा
    user_RPR NEWS TV
    RPR NEWS TV
    Court reporter Mathura, Uttar Pradesh•
    18 min ago
  • भाजपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस "सरदार पटेल अभियान"सरदार पटेल को सम्मान #BJP #सरदार_पटेल_अभियान #mathurakeshrinewss
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    भाजपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस "सरदार पटेल अभियान"सरदार पटेल को सम्मान
#BJP #सरदार_पटेल_अभियान #mathurakeshrinewss
    user_MATHURA KESARI NEWS
    MATHURA KESARI NEWS
    मीडिया/न्यूज कम्पनी मथुरा, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    34 min ago
  • निकोड़ी धाम ग्वालियर के पास बंगाली बाबा देवेंद्र सिंह बने जरूरतमंदों के सहारे, दुखियों की सेवा को समर्पित है जीवन अमर दीप सेन, डीग। राजस्थान आस्था, सेवा और मानवता की भावना भारतीय संस्कृति की पहचान रही है। इसी भावना से जुड़ा नाम ग्वालियर के पास छोटे से गांव स्थित निकोड़ी धाम के बंगाली बाबा देवेंद्र सिंह का भी लिया जाता है। श्रद्धालुओं के बीच बाबा देवेंद्र सिंह को लेकर गहरी आस्था देखने को मिलती है। उनके अनुयायी उन्हें दुखी, परेशान और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने वाले संत के रूप में मानते हैं। बाबा देवेंद्र सिंह के दरबार में अपनी समस्याओं और परेशानियों को लेकर पहुंचने वाले श्रद्धालु अपनी बात रखते हैं तथा आध्यात्मिक मार्गदर्शन और मन की शांति की कामना करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा के सान्निध्य में उन्हें हौसला, सकारात्मक सोच और जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ मानव सेवा का भाव भी समाज में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। दुखी व्यक्ति को सांत्वना देना, जरूरतमंद की सहायता करना और निराश लोगों में उम्मीद जगाना ही सेवा का वास्तविक स्वरूप है। बाबा देवेंद्र सिंह के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था भी इसी विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव से जुड़ी हुई है। आस्था के साथ सेवा और सद्भाव का संदेश ग्वालियर के पास स्थित निकोड़ी धाम के बंगाली बाबा देवेंद्र सिंह का नाम श्रद्धालुओं के बीच धार्मिक विश्वास के साथ जुड़ा हुआ है। उनके अनुयायी बाबा से आशीर्वाद लेने और अपनी परेशानियों के समाधान के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करने पहुंचते हैं। धार्मिक स्थलों पर लोगों का ऐसा जुड़ाव उन्हें मानसिक संबल देने और समाज में आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।बाबा कहां जो नंबर पर आएगा उसी को देखते हैं बीच में किसी के नहीं लेते नंबरएकदम फ्री सेवा होती है बाबा देवेंद्र सिंह के अनुयायियों के लिए निकोड़ी धाम
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    निकोड़ी धाम ग्वालियर के पास बंगाली बाबा देवेंद्र सिंह बने जरूरतमंदों के सहारे, दुखियों की सेवा को समर्पित है जीवन
अमर दीप सेन, डीग। राजस्थान
आस्था, सेवा और मानवता की भावना भारतीय संस्कृति की पहचान रही है। इसी भावना से जुड़ा नाम ग्वालियर के पास छोटे से गांव  स्थित निकोड़ी धाम के बंगाली बाबा देवेंद्र सिंह का भी लिया जाता है। श्रद्धालुओं के बीच बाबा देवेंद्र सिंह को लेकर गहरी आस्था देखने को मिलती है। उनके अनुयायी उन्हें दुखी, परेशान और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने वाले संत के रूप में मानते हैं।
बाबा देवेंद्र सिंह के दरबार में अपनी समस्याओं और परेशानियों को लेकर पहुंचने वाले श्रद्धालु अपनी बात रखते हैं तथा आध्यात्मिक मार्गदर्शन और मन की शांति की कामना करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा के सान्निध्य में उन्हें हौसला, सकारात्मक सोच और जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है।
धार्मिक आस्था के साथ-साथ मानव सेवा का भाव भी समाज में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। दुखी व्यक्ति को सांत्वना देना, जरूरतमंद की सहायता करना और निराश लोगों में उम्मीद जगाना ही सेवा का वास्तविक स्वरूप है। बाबा देवेंद्र सिंह के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था भी इसी विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव से जुड़ी हुई है।
आस्था के साथ सेवा और सद्भाव का संदेश
ग्वालियर के पास स्थित निकोड़ी धाम के बंगाली बाबा देवेंद्र सिंह का नाम श्रद्धालुओं के बीच धार्मिक विश्वास के साथ जुड़ा हुआ है। उनके अनुयायी बाबा से आशीर्वाद लेने और अपनी परेशानियों के समाधान के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करने पहुंचते हैं। धार्मिक स्थलों पर लोगों का ऐसा जुड़ाव उन्हें मानसिक संबल देने और समाज में आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।बाबा कहां जो नंबर पर आएगा उसी को देखते हैं बीच में किसी के नहीं लेते नंबरएकदम फ्री सेवा होती है
बाबा देवेंद्र सिंह के अनुयायियों के लिए निकोड़ी धाम
    user_Amardeep sain ripoter
    Amardeep sain ripoter
    Advertising Photographer डीग, भरतपुर, राजस्थान•
    1 hr ago
  • समालखा में निरंकारी संत समागम बना प्रेम, भक्ति और सद्भावना का संगम समालखा में निरंकारी संत समागम बना प्रेम, भक्ति और सद्भावना का संगम
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    समालखा में निरंकारी संत समागम बना प्रेम, भक्ति और सद्भावना का संगम
समालखा में निरंकारी संत समागम बना प्रेम, भक्ति और सद्भावना का संगम
    user_ATV INDIA HD  (Ajeet chauhan)
    ATV INDIA HD (Ajeet chauhan)
    Local News Reporter Mathura, Uttar Pradesh•
    4 hrs ago
  • 35वीं श्रीराधारानी ब्रजयात्रा का शुभारंभ, राधा नाम संकीर्तन के साथ निकले हजारों श्रद्धालु मथुरा जनपद के बरसाना। वैदिक मंत्रोच्चार, ध्वज पूजन, कन्या पूजन और ठाकुरजी की पूजा-अर्चना के साथ शनिवार को 35वीं श्रीराधारानी ब्रजयात्रा का शुभारंभ हुआ। ब्रजनिष्ठ संत पद्मश्री रमेश बाबा महाराज द्वारा प्रारंभ की गई इस वार्षिक यात्रा में देश के विभिन्न प्रांतों से 15 हजार से अधिक श्रद्धालु और सैकड़ों विदेशी भक्त शामिल हुए। यात्रा से पहले सभी ब्रजयात्रियों ने 36 दिवसीय यात्रा के नियम और संकल्प ग्रहण किए। राधा नाम संकीर्तन करते हुए निकली यात्रा के पहले दिन श्रद्धालुओं ने तुंगविद्या सखी के गांव ढभाला, सूर्यकुंड, नौबारी-चौबारी और रत्नकुंड के दर्शन किए। यात्रा 26 नवंबर को बरसाना लौटकर संपन्न होगी। बरसाना स्थित माताजी गौशाला के समीप बनाए गए यात्रा शिविर में मान मंदिर के आचार्य पंडित महेश चंद्र शास्त्री और सुरेश चंद्र शास्त्री ने वैदिक रीति से यात्रियों को संकल्प दिलाया तथा वैष्णव परंपरा के अनुसार यात्रा के नियम समझाए। इसके बाद डॉ. रामजीलाल शास्त्री, मान मंदिर के महंत ब्रजशरण दास महाराज, नरसिंह दास महाराज और राधाकांत शास्त्री सहित संतों ने ध्वज पूजन, कन्या पूजन और ठाकुरजी की पूजा-अर्चना की। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद ठाकुरजी के डोले के पीछे-पीछे राधा नाम संकीर्तन करते हुए श्रद्धालु यात्रा पर निकले। यात्रा सबसे पहले माताजी गौशाला पहुंची, जहां गौसेवकों ने पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। इसके बाद ब्रजयात्रियों का विशाल समूह तुंगविद्या सखी के गांव ढभाला पहुंचा। यहां सूर्यकुंड स्थित तुंगविद्या सखी मंदिर में दर्शन किए गए। गांव के ब्रजवासियों ने यात्रियों का स्वागत कर केला प्रसाद भेंट किया। इसके बाद यात्रा नौबारी-चौबारी पहुंची, जहां यात्रा का नेतृत्व कर रहे नरसिंह दास महाराज ने स्थल की धार्मिक महत्ता बताई। उन्होंने बताया कि ब्रज की मान्यता के अनुसार, यहां श्रीराधारानी अपनी सखियों के साथ गुड्डा-गुड़िया का खेल खेलती थीं और श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ समीप स्थित पर्वत की श्यामशिला से इन बाल लीलाओं का दर्शन करते थे। नौबारी-चौबारी के बाद श्रद्धालुओं ने रत्नकुंड के दर्शन किए। इसके बाद राधा नाम संकीर्तन करते हुए यात्रा अपने पड़ाव स्थल पहुंची, जहां प्रमुख व्यवस्थापक ब्रजदास ने स्वयंसेवकों के सहयोग से यात्रियों के लिए प्रसाद की व्यवस्था कराई। शाम पांच बजे मुख्य यात्रा पंडाल में भक्तशरण महाराज ने पहले दिन दर्शन किए गए तीर्थस्थलों की शास्त्रीय एवं धार्मिक महिमा बताई। विभिन्न ग्रंथों में वर्णित मंत्रों के माध्यम से प्रार्थना कराकर श्रद्धालुओं को तीर्थस्थलों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विधान कराया गया। यात्रा व्यवस्थापक राधाकांत शास्त्री और ब्रजदास ने बताया कि मान मंदिर सेवा संस्थान रमेश बाबा महाराज के आदर्शों और सेवा-संकल्पों के अनुरूप यात्रा का संचालन कर रहा है। यात्रियों के भोजन, आवास, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं निशुल्क रहेंगी। यात्रा का उद्देश्य ब्रज के पवित्र स्थलों के दर्शन के साथ श्रीराधारानी की भक्ति, गौसेवा और ब्रज की प्राचीन धार्मिक परंपराओं का प्रसार करना है। यात्रा प्रबंधन के अनुसार, रविवार को श्रद्धालु मान मंदिर, कुशल बिहारी मंदिर, श्रीजी मंदिर, दानगढ़, मयूरकुटी, सांकरी खोर, विलासगढ़, माहेश्वर सर और दोहनी कुंड के दर्शन करेंगे। आगामी दिनों में यात्रा नंदगांव, सिरथला, होडल, भिड़ूकी, धनौता, उझानी, विहारवन, गंगरौल, भांडीरवन, बेलवन, वृंदावन, दाऊजी, चिंताहरण महादेव, रावल, मधुवन, बहुलावन, मुखराई, पूछरी, उमराव, टांकोली, खोह, आदिबद्री, केदारनाथ और कामां सहित ब्रज के विभिन्न धार्मिक स्थलों से होकर गुजरेगी। यात्रा में डॉ. रामजीलाल शास्त्री, मान मंदिर के महंत ब्रजशरण दास महाराज, नीलमणि बाबा, लाल बाबा, राजकुमार गरुण, भगत जी, संजय सिंह प्रधान, बंसी मेंबर, भारत गोस्वामी, राघव गोस्वामी और सज्जन शर्मा सहित अनेक संत, सेवक और श्रद्धालु मौजूद रहे।
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    35वीं श्रीराधारानी ब्रजयात्रा का शुभारंभ, राधा नाम संकीर्तन के साथ निकले हजारों श्रद्धालु
मथुरा जनपद के बरसाना। वैदिक मंत्रोच्चार, ध्वज पूजन, कन्या पूजन और ठाकुरजी की पूजा-अर्चना के साथ शनिवार को 35वीं श्रीराधारानी ब्रजयात्रा का शुभारंभ हुआ। ब्रजनिष्ठ संत पद्मश्री रमेश बाबा महाराज द्वारा प्रारंभ की गई इस वार्षिक यात्रा में देश के विभिन्न प्रांतों से 15 हजार से अधिक श्रद्धालु और सैकड़ों विदेशी भक्त शामिल हुए। यात्रा से पहले सभी ब्रजयात्रियों ने 36 दिवसीय यात्रा के नियम और संकल्प ग्रहण किए। राधा नाम संकीर्तन करते हुए निकली यात्रा के पहले दिन श्रद्धालुओं ने तुंगविद्या सखी के गांव ढभाला, सूर्यकुंड, नौबारी-चौबारी और रत्नकुंड के दर्शन किए। यात्रा 26 नवंबर को बरसाना लौटकर संपन्न होगी।
बरसाना स्थित माताजी गौशाला के समीप बनाए गए यात्रा शिविर में मान मंदिर के आचार्य पंडित महेश चंद्र शास्त्री और सुरेश चंद्र शास्त्री ने वैदिक रीति से यात्रियों को संकल्प दिलाया तथा वैष्णव परंपरा के अनुसार यात्रा के नियम समझाए। इसके बाद डॉ. रामजीलाल शास्त्री, मान मंदिर के महंत ब्रजशरण दास महाराज, नरसिंह दास महाराज और राधाकांत शास्त्री सहित संतों ने ध्वज पूजन, कन्या पूजन और ठाकुरजी की पूजा-अर्चना की। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद ठाकुरजी के डोले के पीछे-पीछे राधा नाम संकीर्तन करते हुए श्रद्धालु यात्रा पर निकले।
यात्रा सबसे पहले माताजी गौशाला पहुंची, जहां गौसेवकों ने पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। इसके बाद ब्रजयात्रियों का विशाल समूह तुंगविद्या सखी के गांव ढभाला पहुंचा। यहां सूर्यकुंड स्थित तुंगविद्या सखी मंदिर में दर्शन किए गए। गांव के ब्रजवासियों ने यात्रियों का स्वागत कर केला प्रसाद भेंट किया। इसके बाद यात्रा नौबारी-चौबारी पहुंची, जहां यात्रा का नेतृत्व कर रहे नरसिंह दास महाराज ने स्थल की धार्मिक महत्ता बताई। उन्होंने बताया कि ब्रज की मान्यता के अनुसार, यहां श्रीराधारानी अपनी सखियों के साथ गुड्डा-गुड़िया का खेल खेलती थीं और श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ समीप स्थित पर्वत की श्यामशिला से इन बाल लीलाओं का दर्शन करते थे।
नौबारी-चौबारी के बाद श्रद्धालुओं ने रत्नकुंड के दर्शन किए। इसके बाद राधा नाम संकीर्तन करते हुए यात्रा अपने पड़ाव स्थल पहुंची, जहां प्रमुख व्यवस्थापक ब्रजदास ने स्वयंसेवकों के सहयोग से यात्रियों के लिए प्रसाद की व्यवस्था कराई। शाम पांच बजे मुख्य यात्रा पंडाल में भक्तशरण महाराज ने पहले दिन दर्शन किए गए तीर्थस्थलों की शास्त्रीय एवं धार्मिक महिमा बताई। विभिन्न ग्रंथों में वर्णित मंत्रों के माध्यम से प्रार्थना कराकर श्रद्धालुओं को तीर्थस्थलों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विधान कराया गया।
यात्रा व्यवस्थापक राधाकांत शास्त्री और ब्रजदास ने बताया कि मान मंदिर सेवा संस्थान रमेश बाबा महाराज के आदर्शों और सेवा-संकल्पों के अनुरूप यात्रा का संचालन कर रहा है। यात्रियों के भोजन, आवास, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं निशुल्क रहेंगी। यात्रा का उद्देश्य ब्रज के पवित्र स्थलों के दर्शन के साथ श्रीराधारानी की भक्ति, गौसेवा और ब्रज की प्राचीन धार्मिक परंपराओं का प्रसार करना है।
यात्रा प्रबंधन के अनुसार, रविवार को श्रद्धालु मान मंदिर, कुशल बिहारी मंदिर, श्रीजी मंदिर, दानगढ़, मयूरकुटी, सांकरी खोर, विलासगढ़, माहेश्वर सर और दोहनी कुंड के दर्शन करेंगे। आगामी दिनों में यात्रा नंदगांव, सिरथला, होडल, भिड़ूकी, धनौता, उझानी, विहारवन, गंगरौल, भांडीरवन, बेलवन, वृंदावन, दाऊजी, चिंताहरण महादेव, रावल, मधुवन, बहुलावन, मुखराई, पूछरी, उमराव, टांकोली, खोह, आदिबद्री, केदारनाथ और कामां सहित ब्रज के विभिन्न धार्मिक स्थलों से होकर गुजरेगी। यात्रा में डॉ. रामजीलाल शास्त्री, मान मंदिर के महंत ब्रजशरण दास महाराज, नीलमणि बाबा, लाल बाबा, राजकुमार गरुण, भगत जी, संजय सिंह प्रधान, बंसी मेंबर, भारत गोस्वामी, राघव गोस्वामी और सज्जन शर्मा सहित अनेक संत, सेवक और श्रद्धालु मौजूद रहे।
    user_Lokesh Garg
    Lokesh Garg
    छाता, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    1 day ago
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