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हरिशचंदु9766044617
Harish Chand
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- बंगाणा। जिला ऊना के गांव पंजाबर की बेटी नंदिनी ने संघ लोक सेवा आयोग (Union Public Service Commission) द्वारा आयोजित जियो साइंटिस्ट परीक्षा में प्रथम रैंक हासिल कर पूरे देश में प्रदेश और जिले का नाम रोशन किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से ऊना जिला ही नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश में हर्ष और गर्व का माहौल है। नंदिनी के पिता संजय कुमार एक मेहनती किसान हैं, जबकि उनकी माताजी गृहिणी हैं। साधारण परिवार से संबंध रखने वाली नंदिनी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय सरकारी स्कूलों में प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने बीएससी फिजिक्स ऑनर्स तथा एमएससी की पढ़ाई पूरी की और कड़ी मेहनत, अनुशासन एवं निरंतर अभ्यास के बल पर UPSC की जियो साइंटिस्ट परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया। नंदिनी अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। उनका कहना है कि यदि माता-पिता का मार्गदर्शन, प्रेरणा और आशीर्वाद न होता तो यह मुकाम हासिल करना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए मेहनत, अनुशासन और निरंतरता (कंसिस्टेंसी) अत्यंत आवश्यक हैं, और उन्होंने इन तीनों सिद्धांतों को जीवन में अपनाया। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि संघर्ष और परिश्रम से हर सपना साकार किया जा सकता है। असफलताओं से घबराने की बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। अंत में उन्होंने प्रेरणादायक पंक्तियों के साथ अपनी बात समाप्त की— “जो नहीं करते मेहनत और संघर्ष, तो क्या मजा है जीने में, बड़े-बड़े तूफान भी रास्ता छोड़ देते हैं, जब संघर्ष की आग लगी हो सीने में।” नंदिनी की इस उपलब्धि से क्षेत्र के युवाओं को नई दिशा और प्रेरणा मिली है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर देश में प्रथम स्थान प्राप्त करना यह सिद्ध करता है कि सच्ची लगन और दृढ़ संकल्प के आगे कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।1
- असेम्बली ऑफ़ एम पी जर्नलिस्ट ने पत्रकारों की समस्या पर की चर्चा1
- जोगिंदर नगर में बाइक की चपेट में आई स्कूली छात्रा, प्राथमिक उपचार के बाद टांडा रेफर।1
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- झूठ, अन्याय और साज़िश कितनी भी ऊँची दीवारें खड़ी कर ले, एक अकेला सच उन्हें गिराने के लिए काफ़ी होता है। Arvind Kejriwal1
- रिपोर्ट -28 फरवरी, बुद्धि सिंह ठाकुर सैंज शेंशर से अगला पड़ाव जारी: सैंज घाटी की अधिष्ठात्री माता आशापुरी महामाई की देव-यात्रा अपने दूसरे पड़ाव की ओर बढ़ चुकी है। मनु मंदिर शेंशर में रात्रि विश्राम और मनु ऋषि व माता शतरूपा से मिलन के बाद, आज माता का भव्य रथ अगले गंतव्य के लिए रवाना हो गया है। आज के मुख्य आकर्षण: ऋषि मिलन: आज माता के रथ का मिलन जगदामनी ऋषि के साथ होगा। घाटी में देव-मिलन के इस दृश्य को देखने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा हुआ है। भक्ति का माहौल: वाद्य यंत्रों की गूँज और पारंपरिक वेशभूषा में सजे देवलुओं के साथ यात्रा का कारवां बागी शियाड़ी की ओर बढ़ रहा है। कल का विशेष पड़ाव (काथल): कला संग्रह स्थल: कल माता का रथ 'काथल' पहुँचेगा, जो कला संग्रह का मुख्य स्थल है। परंपरा का निर्वहन: यहीं पर 12 वर्षों बाद उस महत्वपूर्ण देव-परंपरा का निर्वहन किया जाएगा, जिसके लिए माता अपने मंदिर से निकली हैं। "12 साल का इंतज़ार और अटूट विश्वास... सैंज घाटी में देव संस्कृति का वैभव।"1
- जिला ऊना की सोहलासिंगीधार पर स्थित चामुखा मंदिर के नजदीक घर की छत पर जंगल का राष्ट्रीय पक्षी मोर पंख फैलाए हुए मनमोहक दृश्य।1
- सुजानपुर सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र के सबसे पुराने और बड़े कढियार आयुर्वैदिक अस्पताल की उपेक्षा को लेकर एनसीपी अध्यक्ष एवं समाजसेवी रविन्द्र सिंह डोगरा ने पूर्व और वर्तमान सरकार के साथ-साथ उनके प्रतिनिधियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों से इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान की अनदेखी की जा रही है, जिससे क्षेत्र की जनता को बेहतर आयुर्वेदिक उपचार सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। डोगरा ने पूर्व विधायक और वर्तमान विधायक पर निशाना साधते हुए कहा कि सुजानपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण को लेकर उनका कोई स्पष्ट दृष्टिकोण नजर नहीं आता। उन्होंने आयुर्वेद विभाग के उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और कहा कि आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए विभाग के पास कोई ठोस विज़न नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आज लोग पंचकर्म और आयुर्वेदिक उपचार के लिए केरल और चंडीगढ़ जैसे राज्यों का रुख कर रहे हैं, जबकि कढियार अस्पताल जैसे पुराने और बड़े संस्थान को विकसित कर स्थानीय स्तर पर ही बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। रविन्द्र सिंह डोगरा ने साक्ष्यों सहित लिखित प्रार्थना पत्र मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को सुजानपुर वासियों की ओर से भेजा है। ज्ञापन में अस्पताल की सभी कमियों को दूर करने और इसे पुनः सशक्त बनाने की मांग की गई है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि क्षेत्र की 11 पंचायतों—जंदडू, चारियां दी धार, पौंहंज, लगदेवी, ऊटपुर, ऊहल, भटेड़, स्पाहल, कक्कड़, पुरली और गवारडू—के लगभग 20 हजार लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अस्पताल में पुनः एसएमओ की पोस्ट बहाल की जाएगी।इसके साथ ही 2 एएमओ, 3 एनएम, 1 महिला मसाजर तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियमित तैनाती की भी मांग की गई है, ताकि अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हो सकें और स्थानीय लोगों को आयुर्वेदिक उपचार का समुचित लाभ मिल सके।2
- भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष ने योगी को जी भरकर सुनाई खरी खरी1