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*पिछले डेढ़ वर्षों से बदहाल स्थिति में पड़ी है। सड़क निर्माण कार्य में भारी लापरवाही के कारण संवेदक द्वारा सड़क को उखाड़कर अधूरा छोड़ दिया गया,* *फिलहाल, मोंगर पंचायत के हजारों लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी यह समस्या कब ह दूर होगी।* *डेढ़ साल से उखड़ी पड़ी सड़क बनी मुसीबत: मोंगर पंचायत के हजारों ग्रामीण परेशान, आंदोलन की चेतावनी* *पिछले डेढ़ वर्षों से बदहाल स्थिति में पड़ी है। सड़क निर्माण कार्य में भारी लापरवाही के कारण संवेदक द्वारा सड़क को उखाड़कर अधूरा छोड़ दिया गया,* *फिलहाल, मोंगर पंचायत के हजारों लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी यह समस्या कब ह दूर होगी।*
MUKESH NATH
*पिछले डेढ़ वर्षों से बदहाल स्थिति में पड़ी है। सड़क निर्माण कार्य में भारी लापरवाही के कारण संवेदक द्वारा सड़क को उखाड़कर अधूरा छोड़ दिया गया,* *फिलहाल, मोंगर पंचायत के हजारों लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी यह समस्या कब ह दूर होगी।* *डेढ़ साल से उखड़ी पड़ी सड़क बनी मुसीबत: मोंगर पंचायत के हजारों ग्रामीण परेशान, आंदोलन की चेतावनी* *पिछले डेढ़ वर्षों से बदहाल स्थिति में पड़ी है। सड़क निर्माण कार्य में भारी लापरवाही के कारण संवेदक द्वारा सड़क को उखाड़कर अधूरा छोड़ दिया गया,* *फिलहाल, मोंगर पंचायत के हजारों लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी यह समस्या कब ह दूर होगी।*
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- *डेढ़ साल से उखड़ी पड़ी सड़क बनी मुसीबत: मोंगर पंचायत के हजारों ग्रामीण परेशान, आंदोलन की चेतावनी* *पिछले डेढ़ वर्षों से बदहाल स्थिति में पड़ी है। सड़क निर्माण कार्य में भारी लापरवाही के कारण संवेदक द्वारा सड़क को उखाड़कर अधूरा छोड़ दिया गया,* *फिलहाल, मोंगर पंचायत के हजारों लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी यह समस्या कब ह दूर होगी।*1
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- Post by AAM JANATA1
- गारू प्रखंड अंतर्गत कोटाम स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी को लेकर अब मामला गरमा गया है। सांसद प्रतिनिधि मंगल उरांव ने सीधे तौर पर बीईओ पर मनमानी का आरोप लगाया है।उन्होंने बताया कि पहले स्कूल में चार शिक्षक थे, जिससे बच्चों की पढ़ाई ठीक चल रही थी। खासकर शिक्षक रोबर्ट केरकेट्टा बच्चों को अच्छी शिक्षा दे रहे थे। लेकिन बीईओ ने उन्हें “दो-चार दिन” के बहाने डोमाखाड़ भेज दिया और आज तक वापस नहीं किया।मंगल उरांव ने कहा कि इस मामले को लेकर कई बार बीईओ से लेकर डीएसई तक गुहार लगाई गई, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार मजबूर होकर आज डीसी को आवेदन सौंपा गया है।ग्रामीणों में भी इसको लेकर नाराजगी है। उनका कहना है कि अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा सीधे बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है। अब सवाल ये है—क्या बच्चों की पढ़ाई से खिलवाड़ पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी, या फाइलों में ही दब जाएगा मामला?1
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