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*फिल्मी स्टाइल में लूट: पुलिस को चकमा देकर भागे लुटेरे* सतना।जिले के चित्रकूट थाना अंतर्गत सीधी से बारात लौट रहे रैपुरा निवासी प्रदीप की कार को बगदरा घटिया के पास दो गाड़ियों ने ओवरटेक कर टक्कर मारी। कार रुकते ही शातिरों ने प्रदीप के गले से सोने की चेन झपटी और फरार हो गए। वारदात में प्रयुक्त कारों के नंबर GJ 05 CN 0594 और UP 90 K 724 हैं। खाली पड़ी बगदरा चौकी और SAF जवानों की गैर-मौजूदगी के बीच, लुटेरे मौके पर पहुंची डायल 112 की गाड़ी को भी ओवरटेक कर भाग निकले।
Ravi Shankar pathak
*फिल्मी स्टाइल में लूट: पुलिस को चकमा देकर भागे लुटेरे* सतना।जिले के चित्रकूट थाना अंतर्गत सीधी से बारात लौट रहे रैपुरा निवासी प्रदीप की कार को बगदरा घटिया के पास दो गाड़ियों ने ओवरटेक कर टक्कर मारी। कार रुकते ही शातिरों ने प्रदीप के गले से सोने की चेन झपटी और फरार हो गए। वारदात में प्रयुक्त कारों के नंबर GJ 05 CN 0594 और UP 90 K 724 हैं। खाली पड़ी बगदरा चौकी और SAF जवानों की गैर-मौजूदगी के बीच, लुटेरे मौके पर पहुंची डायल 112 की गाड़ी को भी ओवरटेक कर भाग निकले।
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- थाने में वीडियो-फोटो बनाना अपराध नहीं, नागरिक का अधिकार है: गुजरात हाईकोर्ट गुजरात हाईकोर्ट में एक सुनवाई के दौरान न्याय की वह तस्वीर उभरी, जो पूरे देश में पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की मिसाल बन गई है। जस्टिस निरजर एस. देसाई की अदालत में जब पुलिस पक्ष की महिला अधिवक्ता ने तर्क दिया कि थाने के अंदर आम नागरिक वीडियो रिकॉर्डिंग या फोटोग्राफी नहीं कर सकते, तो न्यायाधीश ने सख्त स्वर में पूछा – “बताइए, किस कानून की धारा के तहत वीडियोग्राफी प्रतिबंधित है?” यह सवाल केवल एक वकील से नहीं, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र से था। मामला हिरासत में यातना से जुड़ा था। पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि शिकायतकर्ता लोग घटना की वीडियो बना रहे थे। जस्टिस देसाई ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए तीखे सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि अगर पुलिस अपना कानूनी काम कर रही है तो वीडियो से उसे क्या आपत्ति हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के 80 प्रतिशत CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे हैं, फिर नागरिकों को रिकॉर्डिंग करने से कैसे रोका जा सकता है। जब सरकारी वकील ने बार-बार CCTV का हवाला दिया, तो कोर्ट ने साफ कहा कि यह तर्क तभी दिया जा सकता है जब 100 प्रतिशत CCTV कार्यरत हों। लेकिन हकीकत यह है कि 80 प्रतिशत कैमरे खराब पड़े हैं। भरी अदालत में न्यायाधीश ने स्पष्ट घोषणा की कि थाने में वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी करना कोई अपराध नहीं है। कोई भी पुलिसकर्मी या सरकारी कर्मचारी आम नागरिक को सबूत के रूप में वीडियो बनाने या फोटो खींचने से नहीं रोक सकता। थाना सार्वजनिक स्थान है। यह बयान न केवल उस मामले में निर्णायक साबित हुआ, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत संदेश बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस क्लिप को देखकर लाखों नागरिकों ने न्यायाधीश की तार्किक और साहसिक बहस की सराहना की। यह फैसला इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पुलिस जवाबदेही मजबूत होगी और हिरासत में मारपीट या दुरुपयोग के खिलाफ ठोस सबूत आसानी से तैयार किए जा सकेंगे। साथ ही नागरिकों के अधिकारों को भी मजबूती मिली है। थाना किसी प्रतिबंधित स्थान की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए Official Secrets Act भी यहां लागू नहीं होता। थाने या किसी सरकारी कार्यालय में शांतिपूर्वक, बिना ड्यूटी में बाधा डाले रिकॉर्डिंग करना कानूनी है। लेकिन हमेशा सावधानी बरतें – शांत रहें, आक्रामक न हों और यदि जरूरी हो तो दूसरे व्यक्ति की मदद लें। यह सुनवाई सिर्फ एक मुकदमे की नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तिकरण की बड़ी जीत है। जस्टिस निरजर एस. देसाई ने एक बार फिर साबित किया कि अदालत आम आदमी की आवाज और संवैधानिक मूल्यों की रक्षक है। जागरूक रहिए। सजग रहिए। जब हर नागरिक अपने अधिकारों को जानता और इस्तेमाल करता है, तभी लोकतंत्र सही मायने में मजबूत होता है।1
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- मैहर। मध्य प्रदेश के मैहर जिले में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है, जहाँ स्कूल से घर लौट रही एक 13 वर्षीय नाबालिग छात्रा का अपहरण कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) की वारदात को अंजाम दिया गया। इस मामले में सक्रियता दिखाते हुए अमदरा थाना पुलिस ने दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। क्या है पूरा मामला? घटना शुक्रवार शाम करीब 4 बजे की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, नाबालिग छात्रा जब स्कूल से अपनी छुट्टी के बाद घर वापस लौट रही थी, तभी रास्ते में दो दरिंदों ने उसे अपना निशाना बनाया। आरोपियों ने छात्रा को जबरन अगवा किया और उसके साथ दुष्कर्म की घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। आरोपियों की हुई पहचान अमदरा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रविवार शाम को दोनों आरोपियों को दबोच लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है: सनी कोहली (उम्र 25 वर्ष, निवासी कटनी) गोलू उर्फ दीपक (उम्र 38 वर्ष, निवासी झुकेही, हाल निवासी कटनी) पुलिस की कार्रवाई मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपियों को स्थानीय न्यायालय में पेश किया। माननीय न्यायालय के आदेश के बाद दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेज दिया गया है। इस घटना के बाद से क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश है और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है। मध्य भारत न्यूज़ (MBN) के लिए मैहर से ब्यूरो रिपोर्ट।1
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