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शिवराज रजक 11वर्ष बच्चे की हत्या आसपास इलाके में सनसनी का माहौल बना हुआ है

3 hrs ago
user_AIMA MEDIYA (जन - जन की आवाज) सतना मध्यप्रदेश
AIMA MEDIYA (जन - जन की आवाज) सतना मध्यप्रदेश
Internet shop नागौद, सतना, मध्य प्रदेश•
3 hrs ago

शिवराज रजक 11वर्ष बच्चे की हत्या आसपास इलाके में सनसनी का माहौल बना हुआ है

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • Post by AIMA MEDIYA (जन - जन की आवाज) सतना मध्यप्रदेश
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    Post by AIMA MEDIYA (जन - जन की आवाज) सतना मध्यप्रदेश
    user_AIMA MEDIYA (जन - जन की आवाज) सतना मध्यप्रदेश
    AIMA MEDIYA (जन - जन की आवाज) सतना मध्यप्रदेश
    Internet shop नागौद, सतना, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • महिला आरक्षण बिल पर फिर बोले नारायण त्रिपाठी पूर्व विधायक मैहर
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    महिला आरक्षण बिल पर फिर बोले नारायण त्रिपाठी पूर्व  विधायक मैहर
    user_Ravi Shankar pathak
    Ravi Shankar pathak
    Local News Reporter उंचाहरा, सतना, मध्य प्रदेश•
    44 min ago
  • मध्य प्रदेश प्रदेश टॉपर कु प्रतिभा सिंह सोलंकी के द्वारा कक्षा दसवीं में 500 में से 499 अंक मध्य प्रदेश में पहला स्थान अर्जित कर समूचे जिले एवं मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया किसी को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष माननीय जीतू पटवारी ने फोन के माध्यम से प्रदेश टॉपर कुमारी प्रतिभा सिंह सोलंकी को प्रदेश में टॉपर आने पर शुभकामनाएं देते हुए जल भविष्य की कामना की
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    मध्य प्रदेश प्रदेश टॉपर कु प्रतिभा सिंह सोलंकी के द्वारा कक्षा दसवीं में 500 में से 499 अंक  मध्य प्रदेश में पहला स्थान अर्जित कर समूचे जिले एवं मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया किसी को लेकर कांग्रेस प्रदेश  अध्यक्ष माननीय जीतू पटवारी ने फोन के माध्यम से प्रदेश टॉपर कुमारी प्रतिभा सिंह सोलंकी को प्रदेश में टॉपर आने पर शुभकामनाएं देते हुए जल भविष्य की कामना की
    user_Sandeep shukla
    Sandeep shukla
    पत्रकारिता Devendranagar, Panna•
    17 hrs ago
  • Post by Unchehra news
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    Post by Unchehra news
    user_Unchehra news
    Unchehra news
    News Anchor उंचाहरा, सतना, मध्य प्रदेश•
    19 hrs ago
  • Post by Neeraj Ravi
    1
    Post by Neeraj Ravi
    user_Neeraj Ravi
    Neeraj Ravi
    Local News Reporter उंचाहरा, सतना, मध्य प्रदेश•
    21 hrs ago
  • गढ़ीपड़रिया में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान रुक्मिणी विवाह का भावविभोर कर देने वाला प्रसंग गढ़ीपड़रिया में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दौरान रुक्मिणी विवाह का पावन प्रसंग श्रद्धालुओं के लिए भावनाओं से भरा अविस्मरणीय क्षण बन गया। जैसे ही रुक्मिणी जी और भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य विवाह का वर्णन प्रारंभ हुआ, पूरा कथा पंडाल भक्ति रस में सराबोर हो गया और उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जो श्रद्धा और भक्ति भाव से कथा का श्रवण कर रहे हैं। कथा व्यास पं. जगदीश प्रसाद त्रिपाठी ने अपनी मधुर वाणी और भावपूर्ण शैली में रुक्मिणी जी की अटूट भक्ति, प्रेम और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति समर्पण का अत्यंत सुंदर वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार रुक्मिणी जी ने दृढ़ विश्वास और अटूट श्रद्धा के साथ भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में प्राप्त किया। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा रुक्मिणी हरण और विवाह का प्रसंग सुनते ही पूरा पंडाल “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा। भजन-कीर्तन के बीच श्रद्धालु झूमते नजर आए, वहीं कई भक्तों की आंखें भावुक होकर नम हो गईं। कथा श्रोता रामभागत विश्वकर्मा सहित समस्त श्रद्धालु इस दिव्य प्रसंग का रसपान कर भक्ति में लीन नजर आए। रुक्मिणी विवाह का यह प्रसंग श्रद्धा, प्रेम और अटूट विश्वास का संदेश देता है, जिसने सभी के हृदय को गहराई से स्पर्श किया।
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    गढ़ीपड़रिया में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान रुक्मिणी विवाह का भावविभोर कर देने वाला प्रसंग
गढ़ीपड़रिया में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दौरान रुक्मिणी विवाह का पावन प्रसंग श्रद्धालुओं के लिए भावनाओं से भरा अविस्मरणीय क्षण बन गया। जैसे ही रुक्मिणी जी और भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य विवाह का वर्णन प्रारंभ हुआ, पूरा कथा पंडाल भक्ति रस में सराबोर हो गया और उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जो श्रद्धा और भक्ति भाव से कथा का श्रवण कर रहे हैं। कथा व्यास पं. जगदीश प्रसाद त्रिपाठी ने अपनी मधुर वाणी और भावपूर्ण शैली में रुक्मिणी जी की अटूट भक्ति, प्रेम और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति समर्पण का अत्यंत सुंदर वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार रुक्मिणी जी ने दृढ़ विश्वास और अटूट श्रद्धा के साथ भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में प्राप्त किया।
भगवान श्रीकृष्ण द्वारा रुक्मिणी हरण और विवाह का प्रसंग सुनते ही पूरा पंडाल “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा। भजन-कीर्तन के बीच श्रद्धालु झूमते नजर आए, वहीं कई भक्तों की आंखें भावुक होकर नम हो गईं।
कथा श्रोता रामभागत विश्वकर्मा सहित समस्त श्रद्धालु इस दिव्य प्रसंग का रसपान कर भक्ति में लीन नजर आए। रुक्मिणी विवाह का यह प्रसंग श्रद्धा, प्रेम और अटूट विश्वास का संदेश देता है, जिसने सभी के हृदय को गहराई से स्पर्श किया।
    user_Ashok Vishwakarma
    Ashok Vishwakarma
    Mobile Phone Shop देवेंद्रनगर, पन्ना, मध्य प्रदेश•
    22 hrs ago
  • थाने में वीडियो-फोटो बनाना अपराध नहीं, नागरिक का अधिकार है: गुजरात हाईकोर्ट गुजरात हाईकोर्ट में एक सुनवाई के दौरान न्याय की वह तस्वीर उभरी, जो पूरे देश में पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की मिसाल बन गई है। जस्टिस निरजर एस. देसाई की अदालत में जब पुलिस पक्ष की महिला अधिवक्ता ने तर्क दिया कि थाने के अंदर आम नागरिक वीडियो रिकॉर्डिंग या फोटोग्राफी नहीं कर सकते, तो न्यायाधीश ने सख्त स्वर में पूछा – “बताइए, किस कानून की धारा के तहत वीडियोग्राफी प्रतिबंधित है?” यह सवाल केवल एक वकील से नहीं, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र से था। मामला हिरासत में यातना से जुड़ा था। पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि शिकायतकर्ता लोग घटना की वीडियो बना रहे थे। जस्टिस देसाई ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए तीखे सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि अगर पुलिस अपना कानूनी काम कर रही है तो वीडियो से उसे क्या आपत्ति हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के 80 प्रतिशत CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे हैं, फिर नागरिकों को रिकॉर्डिंग करने से कैसे रोका जा सकता है। जब सरकारी वकील ने बार-बार CCTV का हवाला दिया, तो कोर्ट ने साफ कहा कि यह तर्क तभी दिया जा सकता है जब 100 प्रतिशत CCTV कार्यरत हों। लेकिन हकीकत यह है कि 80 प्रतिशत कैमरे खराब पड़े हैं। भरी अदालत में न्यायाधीश ने स्पष्ट घोषणा की कि थाने में वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी करना कोई अपराध नहीं है। कोई भी पुलिसकर्मी या सरकारी कर्मचारी आम नागरिक को सबूत के रूप में वीडियो बनाने या फोटो खींचने से नहीं रोक सकता। थाना सार्वजनिक स्थान है। यह बयान न केवल उस मामले में निर्णायक साबित हुआ, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत संदेश बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस क्लिप को देखकर लाखों नागरिकों ने न्यायाधीश की तार्किक और साहसिक बहस की सराहना की। यह फैसला इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पुलिस जवाबदेही मजबूत होगी और हिरासत में मारपीट या दुरुपयोग के खिलाफ ठोस सबूत आसानी से तैयार किए जा सकेंगे। साथ ही नागरिकों के अधिकारों को भी मजबूती मिली है। थाना किसी प्रतिबंधित स्थान की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए Official Secrets Act भी यहां लागू नहीं होता। थाने या किसी सरकारी कार्यालय में शांतिपूर्वक, बिना ड्यूटी में बाधा डाले रिकॉर्डिंग करना कानूनी है। लेकिन हमेशा सावधानी बरतें – शांत रहें, आक्रामक न हों और यदि जरूरी हो तो दूसरे व्यक्ति की मदद लें। यह सुनवाई सिर्फ एक मुकदमे की नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तिकरण की बड़ी जीत है। जस्टिस निरजर एस. देसाई ने एक बार फिर साबित किया कि अदालत आम आदमी की आवाज और संवैधानिक मूल्यों की रक्षक है। जागरूक रहिए। सजग रहिए। जब हर नागरिक अपने अधिकारों को जानता और इस्तेमाल करता है, तभी लोकतंत्र सही मायने में मजबूत होता है।
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    थाने में वीडियो-फोटो बनाना अपराध नहीं, नागरिक का अधिकार है: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट में एक सुनवाई के दौरान न्याय की वह तस्वीर उभरी, जो पूरे देश में पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की मिसाल बन गई है। जस्टिस निरजर एस. देसाई की अदालत में जब पुलिस पक्ष की महिला अधिवक्ता ने तर्क दिया कि थाने के अंदर आम नागरिक वीडियो रिकॉर्डिंग या फोटोग्राफी नहीं कर सकते, तो न्यायाधीश ने सख्त स्वर में पूछा – “बताइए, किस कानून की धारा के तहत वीडियोग्राफी प्रतिबंधित है?”
यह सवाल केवल एक वकील से नहीं, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र से था। मामला हिरासत में यातना से जुड़ा था। पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि शिकायतकर्ता लोग घटना की वीडियो बना रहे थे। जस्टिस देसाई ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए तीखे सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि अगर पुलिस अपना कानूनी काम कर रही है तो वीडियो से उसे क्या आपत्ति हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के 80 प्रतिशत CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे हैं, फिर नागरिकों को रिकॉर्डिंग करने से कैसे रोका जा सकता है।
जब सरकारी वकील ने बार-बार CCTV का हवाला दिया, तो कोर्ट ने साफ कहा कि यह तर्क तभी दिया जा सकता है जब 100 प्रतिशत CCTV कार्यरत हों। लेकिन हकीकत यह है कि 80 प्रतिशत कैमरे खराब पड़े हैं।
भरी अदालत में न्यायाधीश ने स्पष्ट घोषणा की कि थाने में वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी करना कोई अपराध नहीं है। कोई भी पुलिसकर्मी या सरकारी कर्मचारी आम नागरिक को सबूत के रूप में वीडियो बनाने या फोटो खींचने से नहीं रोक सकता। थाना सार्वजनिक स्थान है।
यह बयान न केवल उस मामले में निर्णायक साबित हुआ, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत संदेश बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस क्लिप को देखकर लाखों नागरिकों ने न्यायाधीश की तार्किक और साहसिक बहस की सराहना की।
यह फैसला इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पुलिस जवाबदेही मजबूत होगी और हिरासत में मारपीट या दुरुपयोग के खिलाफ ठोस सबूत आसानी से तैयार किए जा सकेंगे। साथ ही नागरिकों के अधिकारों को भी मजबूती मिली है। थाना किसी प्रतिबंधित स्थान की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए Official Secrets Act भी यहां लागू नहीं होता।
थाने या किसी सरकारी कार्यालय में शांतिपूर्वक, बिना ड्यूटी में बाधा डाले रिकॉर्डिंग करना कानूनी है। लेकिन हमेशा सावधानी बरतें – शांत रहें, आक्रामक न हों और यदि जरूरी हो तो दूसरे व्यक्ति की मदद लें।
यह सुनवाई सिर्फ एक मुकदमे की नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तिकरण की बड़ी जीत है। जस्टिस निरजर एस. देसाई ने एक बार फिर साबित किया कि अदालत आम आदमी की आवाज और संवैधानिक मूल्यों की रक्षक है।
जागरूक रहिए। सजग रहिए। जब हर नागरिक अपने अधिकारों को जानता और इस्तेमाल करता है, तभी लोकतंत्र सही मायने में मजबूत होता है।
    user_Tej pratap Kacher
    Tej pratap Kacher
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • इस तरह मरीज और उनके परिजनों से वसूले जाते पैसे।
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    इस तरह मरीज और उनके परिजनों से वसूले जाते पैसे।
    user_Ravi Shankar pathak
    Ravi Shankar pathak
    Local News Reporter उंचाहरा, सतना, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
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