रायसेन दुर्ग के सोमेश्वर धाम में रक्षाबंधन पर महादेव को अर्पित हुआ भव्य रक्षासूत्र रायसेन। विंध्याचल की सुरम्य पहाड़ियों पर स्थित एक हजार वर्ष पुराने ऐतिहासिक रायसेन दुर्ग का प्राचीन सोमेश्वर धाम इस बार रक्षाबंधन पर अटूट जन-आस्था का केंद्र बना। उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध भगवान महाकालेश्वर मंदिर की तर्ज पर श्रद्धालुओं ने सोमेश्वर महादेव को विशाल रक्षासूत्र अर्पित कर एक नव-परंपरा का शुभारंभ किया। 'हर-हर सोमेश्वर, घर-घर सोमेश्वर' के गगनभेदी जयघोष के बीच आयोजित इस भव्य महाआरती में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। 'हर-हर सोमेश्वर घर-घर सोमेश्वर' संकल्प अभियान के अंतर्गत समाजसेवी अंकित गुप्ता एवं आयोजक शशिकांत जायसवाल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में शिवभक्त दुर्ग परिसर में एकत्रित हुए। भक्तों ने भोलेनाथ के विग्रह पर विशेष रक्षासूत्र की माला सुशोभित कर धूप-दीप से आरती उतारी। पूरा किला परिसर बम-बम भोले और जय सोमेश्वर के भक्तिमय उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। आयोजकों का मुख्य उद्देश्य भावी पीढ़ी को रायसेन की इस अमूल्य ऐतिहासिक व धार्मिक विरासत से जोड़ना है। 364 दिन कैद शिवालय के पट रोज खोलने की उठी मांग भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में स्थित यह अति-प्राचीन शिव मंदिर वर्ष में केवल एक बार महाशिवरात्रि पर 12 घंटे के लिए श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोला जाता है। शेष 364 दिन ताले में बंद रहने वाले इस देवालय को नियमित पूजा-अर्चना के लिए पूर्णतः तालामुक्त करने की मांग दशकों से चली आ रही है। इस अवसर पर गोलू चौबे, निलेश अहिरवार, सानू कुशवाहा, राज कुशवाहा और शरद मालवीय सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने एक स्वर में शासन-प्रशासन से इस ऐतिहासिक आस्था केंद्र के कपाट आम जनता के लिए प्रतिदिन खोलने की पुरजोर अपील की।
रायसेन दुर्ग के सोमेश्वर धाम में रक्षाबंधन पर महादेव को अर्पित हुआ भव्य रक्षासूत्र रायसेन। विंध्याचल की सुरम्य पहाड़ियों पर स्थित एक हजार वर्ष पुराने ऐतिहासिक रायसेन दुर्ग का प्राचीन सोमेश्वर धाम इस बार रक्षाबंधन पर अटूट जन-आस्था का केंद्र बना। उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध भगवान महाकालेश्वर मंदिर की तर्ज पर श्रद्धालुओं ने सोमेश्वर महादेव को विशाल रक्षासूत्र अर्पित कर एक नव-परंपरा का शुभारंभ किया। 'हर-हर सोमेश्वर, घर-घर
सोमेश्वर' के गगनभेदी जयघोष के बीच आयोजित इस भव्य महाआरती में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। 'हर-हर सोमेश्वर घर-घर सोमेश्वर' संकल्प अभियान के अंतर्गत समाजसेवी अंकित गुप्ता एवं आयोजक शशिकांत जायसवाल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में शिवभक्त दुर्ग परिसर में एकत्रित हुए। भक्तों ने भोलेनाथ के विग्रह पर विशेष रक्षासूत्र की माला सुशोभित कर धूप-दीप से आरती उतारी। पूरा किला परिसर बम-बम भोले और
जय सोमेश्वर के भक्तिमय उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। आयोजकों का मुख्य उद्देश्य भावी पीढ़ी को रायसेन की इस अमूल्य ऐतिहासिक व धार्मिक विरासत से जोड़ना है। 364 दिन कैद शिवालय के पट रोज खोलने की उठी मांग भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में स्थित यह अति-प्राचीन शिव मंदिर वर्ष में केवल एक बार महाशिवरात्रि पर 12 घंटे के लिए श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोला जाता है।
शेष 364 दिन ताले में बंद रहने वाले इस देवालय को नियमित पूजा-अर्चना के लिए पूर्णतः तालामुक्त करने की मांग दशकों से चली आ रही है। इस अवसर पर गोलू चौबे, निलेश अहिरवार, सानू कुशवाहा, राज कुशवाहा और शरद मालवीय सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने एक स्वर में शासन-प्रशासन से इस ऐतिहासिक आस्था केंद्र के कपाट आम जनता के लिए प्रतिदिन खोलने की पुरजोर अपील की।
- रायसेन जिला जेल में दिखा भाई-बहन के अटूट प्रेम का भावुक नजारा, बहनों ने भाइयों की कलाई पर बांधी राखी रायसेन जिला जेल में दिखा भाई-बहन के अटूट प्रेम का भावुक नजारा, बहनों ने भाइयों की कलाई पर बांधी राखी1
- रायसेन दुर्ग के सोमेश्वर धाम में रक्षाबंधन पर महादेव को अर्पित हुआ भव्य रक्षासूत्र रायसेन। विंध्याचल की सुरम्य पहाड़ियों पर स्थित एक हजार वर्ष पुराने ऐतिहासिक रायसेन दुर्ग का प्राचीन सोमेश्वर धाम इस बार रक्षाबंधन पर अटूट जन-आस्था का केंद्र बना। उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध भगवान महाकालेश्वर मंदिर की तर्ज पर श्रद्धालुओं ने सोमेश्वर महादेव को विशाल रक्षासूत्र अर्पित कर एक नव-परंपरा का शुभारंभ किया। 'हर-हर सोमेश्वर, घर-घर सोमेश्वर' के गगनभेदी जयघोष के बीच आयोजित इस भव्य महाआरती में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। 'हर-हर सोमेश्वर घर-घर सोमेश्वर' संकल्प अभियान के अंतर्गत समाजसेवी अंकित गुप्ता एवं आयोजक शशिकांत जायसवाल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में शिवभक्त दुर्ग परिसर में एकत्रित हुए। भक्तों ने भोलेनाथ के विग्रह पर विशेष रक्षासूत्र की माला सुशोभित कर धूप-दीप से आरती उतारी। पूरा किला परिसर बम-बम भोले और जय सोमेश्वर के भक्तिमय उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। आयोजकों का मुख्य उद्देश्य भावी पीढ़ी को रायसेन की इस अमूल्य ऐतिहासिक व धार्मिक विरासत से जोड़ना है। 364 दिन कैद शिवालय के पट रोज खोलने की उठी मांग भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में स्थित यह अति-प्राचीन शिव मंदिर वर्ष में केवल एक बार महाशिवरात्रि पर 12 घंटे के लिए श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोला जाता है। शेष 364 दिन ताले में बंद रहने वाले इस देवालय को नियमित पूजा-अर्चना के लिए पूर्णतः तालामुक्त करने की मांग दशकों से चली आ रही है। इस अवसर पर गोलू चौबे, निलेश अहिरवार, सानू कुशवाहा, राज कुशवाहा और शरद मालवीय सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने एक स्वर में शासन-प्रशासन से इस ऐतिहासिक आस्था केंद्र के कपाट आम जनता के लिए प्रतिदिन खोलने की पुरजोर अपील की।4
- कलेक्टर श्री विश्वकर्मा ने गढ़ी में शासकीय स्कूल और आंगनवाड़ी केन्द्र का किया निरीक्षण रायसेन, कलेक्टर श्री अरूण कुमार विश्वकर्मा द्वारा गुरूवार को गैरतगंज विकासखण्ड की ग्राम पंचायत गढ़ी में शासकीय स्कूल और आंगनवाड़ी केन्द्र का निरीक्षण किया गया। उन्होंने शासकीय स्कूल के निरीक्षण के दौरान प्राचार्य तथा शिक्षकों से कक्षावार विद्यार्थियों की संख्या तथा नियमित उपस्थिति, शैक्षणिक प्रगति, गत वर्ष का परीक्षा परिणाम सहित अन्य शैक्षणिक जानकारी लेते हुए शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम की प्राप्ति के लक्ष्य के साथ मेहनत करने के निर्देश दिए। कलेक्टर श्री विश्वकर्मा ने विभिन्न कक्षाओं का भ्रमण कर विद्यार्थियों से अध्यापन कार्य, विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं, शैक्षणिक गतिविधियों, मध्यान्ह भोजन, शिक्षकों की नियमित उपस्थिति आदि के बारे में संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों से पाठ्यपुस्तक से पाठ भी पढ़वाया। कलेक्टर श्री विश्वकर्मा ने विद्यार्थियों को मन लगाकर पढ़ाई करने, नियमित विद्यालय आने तथा अपने लक्ष्य निर्धारित कर पूरी मेहनत और लगन से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसके उपरांत कलेक्टर श्री विश्वकर्मा द्वारा आंगनवाड़ी केन्द्र का निरीक्षण कर बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाओं तथा आंगनवाड़ी में संचालित गतिविधियों का जायजा लिया गया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री विश्वकर्मा ने महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से आंगनवाड़ी केन्द्र की व्यवस्थाओं, बच्चों की उपस्थिति, पोषण आहार तथा अन्य गतिविधियों के संबंध में जानकारी ली। साथ ही बच्चों से भी संवाद कर उनकी रुचियों, दैनिक गतिविधियों, पोषण आहार आदि के बारे में जानकारी ली।4
- न्यूज कोलार की धड़कन आज पूरे भारतवर्ष में रक्षाबंधन का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया गया बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधे बहनों के चेहरे पर खुशी ही-खुशी दिखाई दे रही है आज पूरे भारतवर्ष में रक्षाबंधन का त्यौहार बड़ी धूमधाम उत्सव पूर्वक मनाया गया जहां बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर आशीर्वाद लिया और दिया भाई और बहन का पवित्र रिश्ते का त्यौहार रक्षाबंधन जो पूरे भारतवर्ष में बहुत ही खुशी-खुशी उत्साह पूर्वक मनाया जा रहा है सभी बहनों के चेहरों पर खुशी देखी जा रही है बाजारों में रौनक है हर तरफ करोड़ों रुपए की खरीदारी की गई है इसमें कपड़े और मिठाई ज्यादातर खरीदी जाती है उपहार स्वरूप साड़ियां कपड़े मिठाइयां नारियल राखियां खरीदी गई है पूरे भारतवर्ष में बड़ा ही उल्लास और खुशहाल माहौल में भाई और बहन का रक्षाबंधन उत्सव मनाया गया कोलार की धड़कन परिवार की ओर से सभी माता बहनों को रक्षाबंधन की हार्दिक-हार्दिक बधाई शुभकामनाएं सभी बहनों के चेहरे पर खुशी रहे सदा सुखी रहे ऐसी कामना करते हैं न्यूज कोलार की धड़कन4
- 26 अगस्त को तरुका गांव में कैमरे में कैद हुआ खौफनाक मंजर, जहां बाढ़ के तेज बहाव में एक बड़ी चट्टान बहती हुई नजर आई। यह गांव बाढ़ के स्रोत से करीब 50 मील नीचे स्थित है। 26 अगस्त को तरुका गांव में कैमरे में कैद हुआ खौफनाक मंजर, जहां बाढ़ के तेज बहाव में एक बड़ी चट्टान बहती हुई नजर आई। यह गांव बाढ़ के स्रोत से करीब 50 मील नीचे स्थित है।1
- जुझारपुर में कपिलधारा कुआं की राशि अटकी, छह माह से भुगतान का इंतजार; किसानों ने कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार जुझारपुर में कपिलधारा कुआं की राशि अटकी, छह माह से भुगतान का इंतजार; किसानों ने कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार1
- इतिहास और प्रकृति का अद्भुत संगम: बारिश में निखर उठी रायसेन दुर्ग की हरियाली, 800 साल पुराने गौरवशाली इतिहास को खुद में समेटे है यह पहाड़ी रायसेन। रिमझिम बारिश की फुहारों और सुहावने मौसम के बीच रायसेन का सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक दुर्ग इन दिनों अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक भव्यता का केंद्र बना हुआ है। विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की विशाल बलुआ पत्थर (Sandstone) की पहाड़ी पर स्थित यह किला मानसून की दस्तक के साथ ही घनी हरियाली की चादर ओढ़ चुका है। शहर के शोर-शराबे से दूर पहाड़ी पर फैली यह प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक धरोहर का संगम यहाँ आने वाले लोगों को एक अनोखा सुकून दे रहा है। 800 साल पुराना वास्तुकला और संघर्ष का इतिहास 12वीं शताब्दी (लगभग 1200 ईस्वी) में निर्मित यह विशाल दुर्ग स्थापत्य कला और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। इतिहास के पन्नों में यह किला तोमर राजाओं, शेरानी शासकों और मालवा के सुल्तानों के आधिपत्य का गवाह रहा है। इस किले की सबसे प्रमुख ऐतिहासिक घटना सन 1543 की है, जब शेरशाह सूरी ने रायसेन किले पर चढ़ाई की थी। उस समय राजपूत राजा पूरनमल और शेरशाह सूरी के बीच भीषण युद्ध हुआ था। शेरशाह सूरी के धोखे से किए गए आक्रमण के दौरान रानी रत्नावली और सैकड़ों वीरांगनाओं ने अपने स्वाभिमान और धर्म की रक्षा के लिए ऐतिहासिक 'जौहर' किया था। जल संरक्षण की अद्भुत प्राचीन तकनीक रायसेन किला अपनी विशिष्ट स्थापत्य कला के साथ-साथ जल संचयन तकनीक के लिए भी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। दुर्ग परिसर में वर्षा जल को सहेजने के लिए 84 प्राचीन तालाब और विशाल जलकुंड बनाए गए थे। जल प्रबंधन की यह उन्नत प्रणाली आज के आधुनिक दौर के लिए भी एक बड़ी मिसाल है। मानसून के दौरान बारिश के पानी से लबालब भरे ये प्राचीन कुंड किले की ऐतिहासिकता के साथ-साथ यहाँ की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देते हैं। धार्मिक सौहार्द और सांस्कृतिक धरोहर पहाड़ी की ऊंचाई पर स्थित यह दुर्ग धार्मिक एवं सांस्कृतिक समरसता का भी प्रतीक है। किले के ऊपरी हिस्से में स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर वर्ष में एक बार महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। इसके अलावा परिसर में स्थित प्राचीन मस्जिद, रानी महल, मदार साहब की दरगाह और बादल महल इतिहास की कई कहानियों को बयां करते हैं। बादलों की आगोश में प्राचीर और पर्यटकों का जमावड़ा समुद्र तल से अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित होने के कारण बारिश के मौसम में काले बादल और कोहरा किले की विशाल बुर्जों और दीवारों को छूकर गुजरते हैं। पहाड़ी की चोटी से नीचे फैले दूर-दूर तक के मैदानी इलाकों और हरे-भरे जंगलों का दृश्य देखते ही बनता है। इस सुहावने मौसम और ऐतिहासिक वैभव को करीब से महसूस करने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में पर्यटक, इतिहास प्रेमी और स्थानीय नागरिक दुर्ग पहाड़ी पहुँच रहे हैं।3
- भोपाल गंगा-जमुनी तहज़ीब का एक जीवंत उदाहरण है, जो धर्म की दीवारों से परे इंसानी रिश्तों की अहमियत को दर्शाती है।1
- पीड़ित महिला ने मीडिया के सामने रखी आपबीती भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ग्वालियर की पीड़ित महिला अनुराधा तोमर ने मीडिया के माध्यम से न्याय की गुहार लगाई है। महिला का आरोप है कि रुपेश शर्मा ने वर्ष 2024 में फेसबुक के जरिए संपर्क बनाया और बाद में शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता के अनुसार, इसके बाद दोनों 2025 से 2026 तक ग्वालियर में लिव-इन रिलेशनशिप में रहे। पीड़िता ने बताया कि इस दौरान वह गर्भवती हुई और वर्ष 2026 में उसने एक बच्ची को जन्म दिया। महिला का कहना है कि डीएनए रिपोर्ट में भी स्पष्ट हुआ है कि बच्ची रुपेश शर्मा की ही संतान है। इसके बावजूद आरोपी परिजनों और पुलिस में अपने प्रभाव का उपयोग कर मामले को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है। अनुराधा तोमर ने आरोप लगाया कि रुपेश शर्मा की पत्नी एकता शर्मा भी उसे धमकाती है और पति को बचाने के लिए दबाव बनाती है। पीड़िता के अनुसार, आरोपी पक्ष अपनी पुलिस में पहुंच और ओहदे का फायदा उठाकर उसे बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। महिला ने कहा कि उसे लगातार मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। मामले को पुलिस मुख्यालय में डीजीपी पुलिस ने संज्ञान में लिया है। पीड़िता के अनुसार, आरोपी के विरुद्ध सस्पेंशन की कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया है। फिलहाल यह मामला पुलिस के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है और जांच जारी है। पीड़िता ने निष्पक्ष जांच और त्वरित न्याय की मांग की है।2