पचपदरा रिफाइनरी लोकार्पण कार्यक्रम 5 बजे HPCL और मुख्यमंत्री जी ने कार्यक्रम रद्द होने की घोषणा कर दी , उसके बाद युवक मंच पर विडियो बनाता है और वायरल कर देता है इस विडियो को प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक बताकर पचपदरा थानाधिकारी अचलाराम ढाका को निलंबित कर दिया जाता है ..... जबकि रिफाइनरी में आग क्यों लगी ? कहा चूक हुई ? कौन जिम्मेदार है ? इस पर कोई चर्चा नहीं कर रहा है। क्या इस मामले में बड़े मगरमच्छों को बचाने के लिए छोटे अधिकारियों की बलि ली जा रही है ? जबकि पचपदरा थानाधिकारी अचलाराम ढाका बालोतरा लाइन में थे और प्रधानमंत्री की सुरक्षा बड़े आला-अधिकारी देख रहे थे , केन्द्रीय मंत्री , कैबिनेट मंत्री, मुख्यमंत्री, IG ,DIG, SP, DSP, SPG सहित केन्द्रीय सुरक्षा एजेंसियां देख रही थी फिर एक सामान्य पुलिस अधिकारी को निलंबित करने के पीछे क्या कारण है ? @PoliceRajasthan @RajCMO @BhajanlalBjp @Igp_Jodhpur को तत्काल संज्ञान लेते हुए उक्त आदेश पर पुनर्विचार करना चाहिए और निलंबन आदेश निरस्त करना चाहिए ।
पचपदरा रिफाइनरी लोकार्पण कार्यक्रम 5 बजे HPCL और मुख्यमंत्री जी ने कार्यक्रम रद्द होने की घोषणा कर दी , उसके बाद युवक मंच पर विडियो बनाता है और वायरल कर देता है इस विडियो को प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक बताकर पचपदरा थानाधिकारी अचलाराम ढाका को निलंबित कर दिया जाता है ..... जबकि रिफाइनरी में आग क्यों लगी ? कहा चूक हुई ? कौन जिम्मेदार है ? इस पर कोई चर्चा नहीं कर रहा है। क्या इस मामले में बड़े मगरमच्छों को बचाने के लिए छोटे अधिकारियों की बलि ली जा रही है ? जबकि पचपदरा थानाधिकारी अचलाराम ढाका बालोतरा लाइन में थे और प्रधानमंत्री की सुरक्षा बड़े आला-अधिकारी देख रहे थे , केन्द्रीय मंत्री , कैबिनेट मंत्री, मुख्यमंत्री, IG ,DIG, SP, DSP, SPG सहित केन्द्रीय सुरक्षा एजेंसियां देख रही थी फिर एक सामान्य पुलिस अधिकारी को निलंबित करने के पीछे क्या कारण है ? @PoliceRajasthan @RajCMO @BhajanlalBjp @Igp_Jodhpur को तत्काल संज्ञान लेते हुए उक्त आदेश पर पुनर्विचार करना चाहिए और निलंबन आदेश निरस्त करना चाहिए ।
- पचपदरा रिफाइनरी लोकार्पण कार्यक्रम 5 बजे HPCL और मुख्यमंत्री जी ने कार्यक्रम रद्द होने की घोषणा कर दी , उसके बाद युवक मंच पर विडियो बनाता है और वायरल कर देता है इस विडियो को प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक बताकर पचपदरा थानाधिकारी अचलाराम ढाका को निलंबित कर दिया जाता है ..... जबकि रिफाइनरी में आग क्यों लगी ? कहा चूक हुई ? कौन जिम्मेदार है ? इस पर कोई चर्चा नहीं कर रहा है। क्या इस मामले में बड़े मगरमच्छों को बचाने के लिए छोटे अधिकारियों की बलि ली जा रही है ? जबकि पचपदरा थानाधिकारी अचलाराम ढाका बालोतरा लाइन में थे और प्रधानमंत्री की सुरक्षा बड़े आला-अधिकारी देख रहे थे , केन्द्रीय मंत्री , कैबिनेट मंत्री, मुख्यमंत्री, IG ,DIG, SP, DSP, SPG सहित केन्द्रीय सुरक्षा एजेंसियां देख रही थी फिर एक सामान्य पुलिस अधिकारी को निलंबित करने के पीछे क्या कारण है ? @PoliceRajasthan @RajCMO @BhajanlalBjp @Igp_Jodhpur को तत्काल संज्ञान लेते हुए उक्त आदेश पर पुनर्विचार करना चाहिए और निलंबन आदेश निरस्त करना चाहिए ।1
- Post by Pukhraj soni1
- कांग्रेस के 'संगठन बढ़ाओ, लोकतंत्र बचाओ' अभियान के तहत शुक्रवार, 24 अप्रैल को पोकरण विधानसभा क्षेत्र के फलसूंड में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की अध्यक्षता राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा करेंगे। कार्यक्रम को लेकर पूरे जैसलमेर जिले के कार्यकर्ता व पदाधिकारी जुटे हैं और फलसूंड में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरदीन फकीर ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य संगठन की जड़ों को और अधिक सशक्त करना व वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि पीसीसी अध्यक्ष कार्यकर्ताओं में नए जोश का संचार करेंगे और आगामी रणनीतियों पर चर्चा करेंगे। फलसूंड को इस आयोजन के लिए विशेष रूप से सजाया गया है, जहाँ जिले भर से हजारों कार्यकर्ताओं के जुटने की उम्मीद है।1
- बाड़मेर1
- जोधपुर | दिनांक: 23.04.2026 *जोधपुर डिस्कॉम जोधपुर ,जिले में 'निजीकरण' के विरुद्ध रैली का आगाज;* जोधपुर शहर सहित जोधपुर जिले के सभी उपखण्ड बिलाड़ा पीपाड़ बोरुंदा बावड़ी भोपालगंद्ध नानदड़ी माथानिया ओसिया मटोड़ा शेरगढ़ बालेसर तिवरी सालावस मंडोर लूणी उपखडो में हजारों बिजली कार्मिकों ने संभाला मोर्चा,समिति के संयोजक उमेद राम चौधरी ने बताया कि भारी संख्या में अधिकारियों व कर्मचारियों नेआक्रोषित रूप लेते हुए 23अप्रेल को OLD POWER HAUSE मैं इकट्ठे होकर नारेबाजी करते हुए शांतिपूर्ण अनुशासनात्मक विरोध प्रदर्शन कर oph से रैली के माध्यम से कलेक्ट्रेट कार्यलय पर प्रदर्शन कर जोधपुर डिस्कॉम संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन प्रस्तुत किया जोधपुर। जोधपुर विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के प्रस्ताव के विरुद्ध संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर डिस्कॉम के अंतर्गत आने वाले सभी 14 जिलों में 30 अप्रैल को अभूतपूर्व कार्य बहिष्कार और विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। डिस्कॉम के प्रत्येक उपखंड (Sub-division) और वृत्त (Circle) कार्यालय पर तकनीकी कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक ने लामबंद होकर राज्य सरकार की 'निजीकरण नीति' के खिलाफ हुंकार भरी और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने का निर्णय किया प्रमुख घटनाक्रम और व्यापकता: आज के विरोध प्रदर्शन का मुख्य केंद्र जोधपुर शहर, जोधपुर ग्रामीण, के सभी वर्ग के कार्मिकों , अधिकारियों व कर्मचारियों ने स्पष्ट संदेश है कि जोधपुर डिस्कॉम को 'पायलट प्रोजेक्ट फ्रेंचाइजी ppp मोड़ mbc या डिस्कोम को चार भागो मे बाटना बिल्कुल भी मंजूर नहीं होगा और निजीकरण ' के नाम पर निजी हाथों की कठपुतली नहीं बनने दिया जाएगा। ज्ञापन के मुख्य बिंदु एवं गंभीर तर्क: * करोडो अरबो रूपये का संरक्षण: संघर्ष समिति ने पुरजोर तरीके से मांग उठाई कि जब केंद्र और राज्य सरकारव कर्मचारियों की मेहनत से तैयार करोडो अरबो की भारी राशि से डिस्कॉम का बुनियादी ढांचा सम्पति (Infrastructure) तैयार क नेटवर्क को निजी कंपनियों को मुनाफा कमाने के लिए सौंपना जनता के साथ विश्वासघात है। * विफल मॉडल्स का बार बार परीक्षण के पश्चात वर्ष 2000 मे जो घाटा 2500करोड़ था जिसे आज अरबो पार कराने के जिम्मेदारो अधिकारियो और नेताओं के विरुद्ध श्वेत पत्र क्यों नहीं कर्मचारियों पर दोषारोपण क्यों,ज्ञापन में स्पष्ट उल्लेख किया गया कि कोटा, बीकानेर और भरतपुर में निजी फ्रेंचाइजी मॉडल पूरी तरह विफल रहा है। निजी कंपनियां केवल मलाईदार क्षेत्रों का लाभ उठाती हैं और संकट के समय जिम्मेदारी से भाग जाती हैं। * उपभोक्ता विरोधी नीति: निजीकरण से न केवल कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय होगा, बल्कि किसानों की सब्सिडी और आम उपभोक्ताओं की सस्ती बिजली पर भी सीधा प्रहार होगा। जारी रहेगा संघर्ष: संयुक्त संघर्ष समिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह विरोध केवल प्रतीकात्मक नहीं है। आगे भी संपूर्ण जोधपुर डिस्कॉम में इसी प्रकार का उग्र विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। यदि सरकार ने निजीकरण के इस आत्मघाती कदम को तुरंत वापस नहीं लिया, तो संघर्ष समिति आगामी दिनों में पूर्ण कार्य बहिष्कार और बिजली ठप करने जैसे कठोर निर्णय लेने के लिए बाध्य होगी। एकजुटता की अपील: आज के सफल प्रदर्शन के बाद संघर्ष समिति ने सभी संविदा कर्मियों, तकनीकी स्टाफ और अधिकारियों को बधाई देते हुए आह्वान किया है कि जब तक निजीकरण रूपी तलवार नहीं हटती, तब तक कोई भी पीछे नहीं हटेगा। , मीडिया प्रभारी संयुक्त संघर्ष समिति, जोधपुर डिस्कॉम1
- आग लगते ही आसपास गांव में लोगों को सूचना दी आग बुझाने की कोशिश की तेज हवा चलने से आग और तेजी से फेल रही है फिर भी गांव वालों ने लग भग आग बुझाई गई बहुत-बहुत धन्यवाद प्रशासन और गांव वालों का न्यूज़ रिपोर्टर के साथ में एस पी चौधरी 📷🎥वीडियो एडिटिंग फुलाराम जी दर्जी जैतपुर 👆👌👍 बहुत बहुत आभार1
- बाड़मेर बाड़मेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने कहा पचपदरा रिफाइनरी की भीषण आगजनी और PM सुरक्षा में हुई चूक पर सरकार का रवैया "खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे" जैसा है। विश्व स्तरीय अत्याधुनिक तकनीक वाली HPCL रिफाइनरी में प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के 21 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित दौरे से मात्र 20 घंटे पहले 20 अप्रैल को मुख्य प्रोसेसिंग CDU-VDU यूनिट में आग लग जाना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि और PM की सुरक्षा में चूक व गंभीर लापरवाही पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। लेकिन बड़ा अफसोस यह हैं कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद चार दिन बाद भी किसी पर स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं की गई। इस घटना के लिए जिम्मेदार कौन है, यह अब तक स्पष्ट नहीं किया गया। केवल पचपदरा थानाधिकारी, CI अचलाराम ढाका को निलंबित किया गया है। क्या इतनी गंभीर घटना पर यही जवाबदेही तय होती है? कारण यह बताया गया कि 20 अप्रैल 2026 को शाम 07:00 बजे एक युवक ने सभास्थल के पांडाल में वीआईपी मूवमेंट क्षेत्र, मंच और डी-ब्लॉक के पास जाकर वीडियो बना लिया। जबकि इससे पहले शाम 05:00 बजे पेट्रोलियम मंत्रालय ने X (ट्विटर) पर प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के स्थगित होने की घोषणा कर दी थी। इसके तुरंत बाद 06:50 बजे मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी ने भी कार्यक्रम रद्द/स्थगित होने की सूचना जारी कर दी थी। ऐसे में आगजनी जैसी गंभीर घटना को नजरअंदाज कर इस प्रकार के कारण प्रस्तुत करना न केवल हास्यास्पद प्रतीत होता है, बल्कि यह शासन और सुरक्षा एजेंसियों की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े करता है। जब कार्यक्रम पहले ही रद्द हो चुका था, तब खाली मंच पर किसी युवक द्वारा वीडियो बना लेना “प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक” मानकर SHO को निलंबित करना क्या न्यायसंगत है? वहीं दूसरी ओर, रिफाइनरी में हुई भीषण आगजनी, जिससे देश की संपत्ति को करोड़ों का नुकसान हुआ, उस पर अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई? – तो क्या प्रधानमंत्री की सुरक्षा में वास्तविक चूक वह आगजनी नहीं थी, बल्कि कार्यक्रम रद्द होने के बाद बना यह वीडियो था? – क्या PM और CM के दौरे की सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा सिर्फ एक थानेदार पर होता है? जबकि प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी SPG और उच्चाधिकारियों के अधीन होती है। – रिफाइनरी के अंदर हुई आगजनी की घटना क्या सुरक्षा तंत्र की लापरवाही, प्रबंधन की तकनीकी खामियों और संभावित भ्रष्टाचार को भी उजागर नहीं करती हैं? इस दिशा में अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? – चार दिन बाद भी जवाबदेही तय करने के बजाय लीपापोती क्यों की जा रही है? यह गंभीर संदेह उत्पन्न करता है कि आखिर किसे बचाने का प्रयास किया जा रहा है? – यदि घटना के 7 घंटे बाद PM के कार्यक्रम के स्थगन का आधिकारिक आदेश जारी हो चुका था और टेंट/डोम लगाने वाली कंपनी ने अपना सामान समेटना शुरू कर दिया था, तो शाम 07:00 बजे किस प्रकार की सुरक्षा का प्रश्न रह जाता है? वहीं पिछले वर्ष 25 सितंबर 2025 को बांसवाड़ा जिले के नापला गांव में PM मोदी जी की जनसभा के दौरान तकनीकी खराबी के कारण 10 मिनट के लिए वीडियो सिस्टम बंद हो गया था। उस समय सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग (DOIT) की एक IAS अधिकारी को उसी दिन तत्काल APO कर दिया गया था। लेकिन पचपदरा रिफाइनरी की इस गंभीर घटना जिसने प्रधानमंत्री की सुरक्षा, देश की संपत्ति और अंतरराष्ट्रीय छवि तीनों को प्रभावित किया उसमें चार दिन बाद भी किसी जिम्मेदार अधिकारी पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? – क्या रिफाइनरी में आग लगना इतनी बड़ी घटना नहीं है कि 4 दिन बाद भी किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई न हो? – क्या जांच एजेंसियों को अब तक किसी की गलती नजर नहीं आई है? – क्या एक वीडियो सिस्टम की तकनीकी खराबी, प्रधानमंत्री की सुरक्षा से जुड़ी इस गंभीर घटना से बड़ी थी? – क्या बांसवाड़ा की तकनीकी खराबी, रिफाइनरी में हुए करोड़ों के नुकसान से भी अधिक गंभीर थी, जिस पर तत्काल कार्रवाई हुई? पचपदरा की इस भीषण आगजनी और सुरक्षा में इतनी बड़ी ढिलाई पर अब तक किसी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इससे यह साफ है कि बड़ी मछलियों को बचाने के लिए छोटे अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। सरकार बताए कि आखिर किसे बचाने की कोशिश की जा रही है?1
- Post by Pukhraj soni1