झोलाछाप इलाज ने बिगाड़ी युवक की हालत: गलत उपचार से जिंदगी–मौत से जूझ रहा डंडई का मजदूर, स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल हेमंत कुमार की रिपोर्ट डंडई प्रखंड में झोलाछाप चिकित्सकों की मनमानी एक बार फिर सामने आई है। रारो गांव अंतर्गत बाघीझरिया टोला निवासी उमेश भुइयां (35 वर्ष), पिता स्व. लौटन भुइयां, कथित गलत इलाज का शिकार हो गया है और इस समय जिंदगी व मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। शुक्रवार दोपहर 1:00 परिजनो ने जानकारी देते हुए बताया कि उमेश बाहर रहकर मजदूरी करता था। करीब दो माह पहले काम के दौरान उसके गाल में एक छोटी सी फुंसी हो गई थी, जिसमें हल्की सूजन थी। इलाज के लिए वह घर लौटा, लेकिन बेहतर अस्पताल या सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जाने के बजाय गांव के लोगों की सलाह पर लवाही कला गांव में स्थित कथित झोलाछाप डॉक्टर राजेंद्र रजक के पास चला गया। आरोप है कि बिना किसी जांच के डॉक्टर ने फुंसी को सामान्य सूजन बताकर पकने देने की सलाह दी। बाद में फुंसी पकने पर गाल को चीरकर मवाद निकाला गया, वहां बाती लगाई गई और लगातार इंजेक्शन दिए जाने लगे। कई दिनों तक इलाज चलने के बावजूद न तो मरीज की हालत सुधरी और न ही दर्द में कोई कमी आई। उल्टे जख्म बढ़ता चला गया और पीड़ा असहनीय होती गई। परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने मरीज को बाहर किसी बड़े अस्पताल में दिखाने की बात कही, तो कथित डॉक्टर ने यह कहकर रोक दिया कि वही इलाज कर देगा और कहीं ले जाने की जरूरत नहीं है। इस दौरान इलाज के नाम पर करीब 7 हजार रुपये खर्च कराए गए। वर्तमान में उमेश के गाल का जख्म काफी बड़ा और गंभीर हो चुका है। स्थानीय लोगों के अनुसार जख्म की स्थिति बेहद चिंताजनक है और किसी गंभीर बीमारी की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अब तक किसी विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा इसकी पुष्टि नहीं हुई है। परिजनों का यह भी आरोप है कि हालत बिगड़ने के बावजूद कथित डॉक्टर अब भी इलाज के नाम पर 4500 रुपये की मांग कर रहा है और जड़ी-बूटी देने की बात कह रहा है। मरीज की पत्नी सुनीता देवी और मां सानती कुंवर ने बताया कि अब उनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं बचे हैं। उमेश ही परिवार का एकमात्र कमाने वाला था। उसके दो छोटे बच्चे—एक बेटी और एक बेटा—हैं। परिजनों का कहना है कि यदि कथित डॉक्टर को सही इलाज की जानकारी नहीं थी, तो समय रहते मरीज को किसी बड़े अस्पताल भेजने की सलाह देनी चाहिए थी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच कर झोलाछाप चिकित्सकों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में कथित डॉक्टर राजेंद्र रजक ने स्वीकार किया है कि मरीज के गाल में फुंसी थी। उसने बताया कि फुंसी को चीरकर मवाद निकाला गया और करीब आठ दिनों तक सुबह-शाम कुल 16 इंजेक्शन (डेक्सोना सहित) लगाए गए। वहीं मामलेमें पूछे जाने पर सिविल सर्जन जॉन एफ. केनेडी ने स्पष्ट कहा कि यदि संबंधित व्यक्ति प्रशिक्षित डॉक्टर नहीं है, तो उसे इलाज करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मरीज को तत्काल डंडई अस्पताल या गढ़वा सदर अस्पताल रेफर किया जाना चाहिए था। झोलाछाप द्वारा इस तरह इलाज करना नियमों के विरुद्ध है और मामले की जांच कर दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
झोलाछाप इलाज ने बिगाड़ी युवक की हालत: गलत उपचार से जिंदगी–मौत से जूझ रहा डंडई का मजदूर, स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल हेमंत कुमार की रिपोर्ट डंडई प्रखंड में झोलाछाप चिकित्सकों की मनमानी एक बार फिर सामने आई है। रारो गांव अंतर्गत बाघीझरिया टोला निवासी उमेश भुइयां (35 वर्ष), पिता स्व. लौटन भुइयां, कथित गलत इलाज का शिकार हो गया है और इस समय जिंदगी व मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। शुक्रवार दोपहर 1:00 परिजनो ने जानकारी देते हुए बताया कि उमेश बाहर रहकर मजदूरी करता था। करीब दो माह पहले काम के दौरान उसके गाल में एक छोटी सी फुंसी हो गई थी, जिसमें हल्की सूजन थी। इलाज के लिए वह घर लौटा, लेकिन बेहतर अस्पताल या सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जाने के बजाय गांव के लोगों की सलाह पर लवाही कला गांव में स्थित कथित झोलाछाप डॉक्टर राजेंद्र रजक के पास चला गया। आरोप है कि बिना किसी जांच के डॉक्टर ने फुंसी को सामान्य सूजन बताकर पकने देने की सलाह दी। बाद में फुंसी पकने पर गाल को चीरकर मवाद निकाला गया, वहां बाती लगाई गई और लगातार इंजेक्शन दिए जाने लगे। कई दिनों तक इलाज चलने के बावजूद न तो मरीज की हालत सुधरी और न ही दर्द में कोई कमी आई। उल्टे जख्म बढ़ता चला गया और पीड़ा असहनीय होती गई। परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने मरीज को बाहर किसी बड़े अस्पताल में दिखाने की बात कही, तो कथित डॉक्टर ने यह कहकर रोक दिया कि वही इलाज कर देगा और कहीं ले जाने की जरूरत नहीं है। इस दौरान इलाज के नाम पर करीब 7 हजार रुपये खर्च कराए गए। वर्तमान में उमेश के गाल का जख्म काफी बड़ा और गंभीर हो चुका है। स्थानीय लोगों के अनुसार जख्म की स्थिति बेहद चिंताजनक है और किसी गंभीर बीमारी की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अब तक किसी विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा इसकी पुष्टि नहीं हुई है। परिजनों का यह भी आरोप है कि हालत बिगड़ने के बावजूद कथित डॉक्टर अब भी इलाज के नाम पर 4500 रुपये की मांग कर रहा है और जड़ी-बूटी देने की बात कह रहा है। मरीज की पत्नी सुनीता देवी और मां सानती कुंवर ने बताया कि अब उनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं बचे हैं। उमेश ही परिवार का एकमात्र कमाने वाला था। उसके दो छोटे बच्चे—एक बेटी और एक बेटा—हैं। परिजनों का कहना है कि यदि कथित डॉक्टर को सही इलाज की जानकारी नहीं थी, तो समय रहते मरीज को किसी बड़े अस्पताल भेजने की सलाह देनी चाहिए थी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच कर झोलाछाप चिकित्सकों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में कथित डॉक्टर राजेंद्र रजक ने स्वीकार किया है कि मरीज के गाल में फुंसी थी। उसने बताया कि फुंसी को चीरकर मवाद निकाला गया और करीब आठ दिनों तक सुबह-शाम कुल 16 इंजेक्शन (डेक्सोना सहित) लगाए गए। वहीं मामलेमें पूछे जाने पर सिविल सर्जन जॉन एफ. केनेडी ने स्पष्ट कहा कि यदि संबंधित व्यक्ति प्रशिक्षित डॉक्टर नहीं है, तो उसे इलाज करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मरीज को तत्काल डंडई अस्पताल या गढ़वा सदर अस्पताल रेफर किया जाना चाहिए था। झोलाछाप द्वारा इस तरह इलाज करना नियमों के विरुद्ध है और मामले की जांच कर दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- User3609Giridih, Jharkhand😤on 19 January
- दही हांडी दही कांड धुरकी प्रखंड के मिरचैया गांव में श्री शतचंडी महायज्ञ में रशलिला के मटकी फोड़ने1
- भारत के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), और मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना जैसी पहलें अत्यंत कारगर हैं। ये योजनाएं सीधे बैंक खातों में वित्तीय सहायता (₹6000/वर्ष), फसल सुरक्षा, कम ब्याज पर कर्ज और आधुनिक कृषि तकनीकों तक पहुंच सुनिश्चित करती हैं। PM India +4 किसानों के उत्थान के लिए सबसे महत्वपूर्ण योजनाएं: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN): इसके तहत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खाते (DBT) में दी जाती है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY): प्राकृतिक आपदाओं, कीटों या बीमारी के कारण फसल खराब होने पर किसानों को बीमा सुरक्षा और वित्तीय राहत प्रदान करती है। प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PM-KMY): यह छोटे और सीमांत किसानों के लिए 60 वर्ष की आयु के बाद ₹3,000 की मासिक पेंशन सुनिश्चित करने वाली एक स्वैच्छिक और अंशदायी योजना है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना (Soil Health Card Scheme): मिट्टी की उर्वरता का आकलन कर उर्वरकों के संतुलित उपयोग की सलाह देती है, जिससे लागत कम और उपज बढ़ती है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY): "प्रति बूंद अधिक फसल" (More Crop Per Drop) के उद्देश्य से सिंचाई की सुविधा सुनिश्चित करती है। कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund - AIF): फसल कटाई के बाद प्रबंधन और सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियों के लिए ऋण पर ब्याज छूट प्रदान करती है। प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC): कम ब्याज दर पर ऋण की सुविधा और फसल बेचने के लिए बेहतर मार्केटिंग विकल्प (e-NAM) उपलब्ध कराती है। एफपीओ (FPO) का गठन: 10,000 नए किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के माध्यम से किसानों को सामूहिक शक्ति और बेहतर बाजार मूल्य दिलाने का प्रयास।1
- गढ़वा जिले के बरडीहा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत में एक बार आज फिर मौसम खराब देखने के लिए मिल रहा है। जिससे आसमान में बादल छाया हुआ दिख रहा है। जिससे किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों ने रवि फसल काटकर अपने खलिहान में रखे हुए हैं।2
- बाबा बैद्यनाथ झारखंड, द्वादश ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित है बाबा बैजनाथ धाम का काफी दूर-दूर से लोग आते हैं और यहां पर जो भक्त लोग आए हैं बी आई पी पास के बारे में क्या कहा है उसको मैं आप लोगों तक पहुंचा रहा हूं1
- यह मामला गढ़वा जिला के कांडी थाना अंतर्गत का है एक कुता को देखा जाए तो अपने बच्चा को मौत होने के बियूग में दिन भर खाना तक खाया नही किसी ने दिया था खाने के लिए तो दिन भर साथ में बैठा रहा, कहा जाता है की पशु में भी उतानही दर्द होता है जितना मनुष्य को होता है फर्क इतना की बोलता नही है पालतू पशु1
- इन दोनों बलरामपुर जिले में छोटे-मोटे व्यापार करने वाले तथा घरेलू उपयोग करने वाले को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जिसकी वजह से जंगलों पर अब प्रभाव देखने को मिल रहा है जो हरे-भरे जंगल को काटकर घर ला रहे हैं चूल्हा जलाने के उपयोग के लिए1
- आये दिन अवैध बालू करोबार का, बाजार तेजी से बड़ा हो रहा है l उपजौ खेती को बंजर बने प्यास लोग द्वारा किया जा रहा है l 09/12 /2025 चमरही खेत के रास्ते अवैध बालू उठाव बंद कर के लिए, गढ़वा प्रशासन को आवेदन दिया गया है l प्रशान की ओर से संगराहे खुर्द-पंचायत के चमराही गांव के खेत से होकर कोयल नदी से बालू बेचा का मामला को pusty भी किया गया है l भीर भी बंद नहीं हुवा बालू बेचने का करोबार l1
- निराश्रित एवं घुमंतू गौवंशीय पशुओं के संरक्षण, संवर्धन तथा उनके समुचित देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा गौधाम योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना के माध्यम से गौवंशीय पशुओं को सुरक्षित आश्रय प्रदान करने के साथ ही वैज्ञानिक पद्धति से उनके संरक्षण और प्रबंधन की दिशा में प्रभावी पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने गौधाम लाखासार एवं गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रेक्षागार, बिलासपुर से गौधाम योजना का विधिवत शुभारंभ किया। इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थापित गौधामों का वर्चुअल माध्यम से लोकार्पण भी किया गया। इसी क्रम में जनपद पंचायत रामचन्द्रपुर के सभाकक्ष में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें जिले के प्रथम सुरभि गौधाम श्याम-श्यामा गौशाला, देवीगंज का भी वर्चुअल रूप से शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हीरामुनी निकुंज, उपाध्यक्ष श्री धीरज सिंह देव, गौसेवा आयोग के जिला अध्यक्ष श्री आषीष केषरी, जिला पंचायत सदस्य श्री बद्री यादव, जनपद उपाध्यक्ष श्री सुनील तिवारी, गणमान्य नागरिक श्री भानूप्रकाष दीक्षित, अन्य जनप्रतिनिधिगण सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम को वर्चुअल रूप से संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य के विकास में महत्वपूर्ण कड़ी जूड़ रही है। जिसके तहत 29 गौधाम का शुभारंभ किया जा रहा है, जिसमें गौवंषीय पशुओं का संरक्षण एवं संवर्धन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारे देष में गाय को माता का दर्जा दिया जाता है और गौवंष की सेवा करना हमारा कर्तव्य ही नहीं हमारा धर्म भी है। गौधाम योजना के तहत प्रषिक्षण केन्द्र का भी शुभारंभ किया जाएगा, जिसमें कृषकों एवं पशुपालकों को प्रषिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की मंषा है कि पशुपालकों की आय में वृद्धि हो इसके लिए विभाग द्वारा कार्ययोजना तैयार किया जा रहा है, जिसमें पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि आज हमारे लिए ऐतिहासिक दिन है, आज मुख्यमंत्री के द्वारा गौधाम योजना का शुभारंभ हुआ है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार निराश्रित एवं घुमंतू आवारा पशुओं की सेवा करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके तहत आज 29 गौधाम का शुभारंभ हुआ है। गौधाम में सड़कों पर घुमने वाले निराश्रित आवारा पशुओं को रखा जाएगा। जहां उनके लिए समुचित व्यवस्था होगी। साथ ही उनके देखभाल के लिए गौसेवक भी रहेंगे, जिन्हें शासन द्वारा मानदेय भी दिया जाएगा। जिला स्तरीय कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हीरामुनी निकुंज ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई गौधाम योजना ग्रामीण क्षेत्रों में निराश्रित एवं घुमंतू गौवंश के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के माध्यम से गौवंशीय पशुओं के लिए सुरक्षित आश्रय, उचित देखभाल एवं चारे-पानी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों के सहयोग से इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाएगा, ताकि गौवंश संरक्षण के साथ-साथ गांवों में स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित वातावरण का निर्माण हो सके। जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री धीरज सिंह देव ने कहा कि गौधाम योजना के माध्यम से निराश्रित एवं घुमंतू गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए बेहतर व्यवस्था की जा रही है। इस योजना से गांवों एवं शहरों में खुले में घूमने वाले गौवंश को सुरक्षित स्थान मिलेगा और सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं में कमी भी आएगी। उन्होंने कहा कि यह योजना गौवंश संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।1
- आपको बलरामपुर जिला बता दे की सिलेंडर गैस की बढ़ती कीमत से ग्रामीण जनता परेशान हो चुके हैं और पूरे बलरामपुर जिले में गैस नहीं मिलने के कारण हाहाकार मच रहा है दूसरी बात अब सीधा प्रभाव जंगल में देखने को मिलाने लगे जो कि ग्रामीण क्षेत्र में पेड़ की कटाई बढ़ चुकी1