*"जातिमुक्त,शोषण मुक्त भारत के लिए संघर्षरत रहे थे महात्मा फुले "-डॉ रमेश बैरवा* वजीरपुर। राजकीय कन्या महाविद्यालय में आज भारत में सामाजिक क्रांति के अग्रदूत महात्मा ज्योतिराव फूले की जयंती मनाई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्राओं ने सहभागिता कर महात्मा फुले के विचार और जीवन संघर्ष से अच्छे विद्यार्थी और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा ली। नोडल अधिकारी एवं राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ रमेश बैरवा ने छात्राओं को बताया कि महात्मा फुले का जन्म पुणे में 1827 में हुआ। महात्मा जोतिराव फुले,जिन्हें 'जोतिबा फुले' नाम से भी जाना जाता है,एक क्रांतिकारी समाज सुधारक ही नहीं बल्कि एक गम्भीर सामाजिक चिंतक भी थे। फूले ने 'गुलामगिरी' 'सत्यशोधक समाज' 'किसान का कोड़ा' जैसी महत्वपूर्ण रचनाएं लिख कर सामाजिक-राजनैतिक चिंतक के तौर पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। विद्यार्थियों को इन रचनाओं का अध्ययन जरूर करना चाहिए। बाबा साहेब डॉ.भीमराव अंबेडकर महात्मा जोतिराव फुले को अपना वैचारिक गुरु मानते थे। फूले के विचार और संघर्ष आज भी प्रेरणा देते हैं। विश्व के महान चिंतक कार्ल मार्क्स एवं शहीदे आज़म भगतसिंह की तरह महात्मा फुले ने भी मनुष्य के मनुष्य द्वारा किये जाने वाले हर प्रकार के सामाजिक आर्थिक शोषण एवं भेदभाव के अंत का वैचारिक पक्ष लिया। समाज के शोषित,पीड़ित मेहनतकश तबकों की समग्र मुक्ति के लिए आजीवन संघर्ष किया। जाति एवं जेंडर आधारित जुल्म एवं ज्यादती का कड़ा विरोध किया। सामाजिक कुरूतियों एवं धार्मिक पाखण्ड के खिलाफ आमजन को जागरूक किया। मजदूर एवं किसान के हक के लिए संघर्ष किया। सबसे बढ़कर महात्मा फुले ने बड़ी यातनाएं झेलते हुए दलित,पिछड़े एवं महिला सहित मेहनतकश आमजन के लिए शिक्षा के महत्व का प्रचार प्रसार किया, अशिक्षा एवं अज्ञानता के कारण हुई बड़ी भारी क्षति के प्रति जागरूक किया। महिला शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए तो महात्मा फुले ने अपनी पत्नी सावित्री बाई फुले के साथ मिलकर अनूठा कार्य किया। महिलाओं की शिक्षा के लिए विद्यालय चलाया,जो कि भारत का प्रथम महिला विद्यालय बना।
*"जातिमुक्त,शोषण मुक्त भारत के लिए संघर्षरत रहे थे महात्मा फुले "-डॉ रमेश बैरवा* वजीरपुर। राजकीय कन्या महाविद्यालय में आज भारत में सामाजिक क्रांति के अग्रदूत महात्मा ज्योतिराव फूले की जयंती मनाई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्राओं ने सहभागिता कर महात्मा फुले के विचार और जीवन संघर्ष से अच्छे विद्यार्थी और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा ली। नोडल अधिकारी एवं राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ रमेश बैरवा ने छात्राओं को बताया कि महात्मा फुले का जन्म पुणे में 1827 में हुआ। महात्मा जोतिराव फुले,जिन्हें 'जोतिबा फुले' नाम से भी जाना जाता है,एक क्रांतिकारी समाज सुधारक ही नहीं बल्कि एक गम्भीर सामाजिक चिंतक भी थे। फूले ने 'गुलामगिरी' 'सत्यशोधक समाज' 'किसान का कोड़ा' जैसी महत्वपूर्ण रचनाएं लिख कर सामाजिक-राजनैतिक चिंतक के तौर पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। विद्यार्थियों को इन रचनाओं का अध्ययन जरूर करना चाहिए। बाबा साहेब डॉ.भीमराव अंबेडकर महात्मा जोतिराव फुले को अपना वैचारिक गुरु मानते थे। फूले के विचार और संघर्ष आज
भी प्रेरणा देते हैं। विश्व के महान चिंतक कार्ल मार्क्स एवं शहीदे आज़म भगतसिंह की तरह महात्मा फुले ने भी मनुष्य के मनुष्य द्वारा किये जाने वाले हर प्रकार के सामाजिक आर्थिक शोषण एवं भेदभाव के अंत का वैचारिक पक्ष लिया। समाज के शोषित,पीड़ित मेहनतकश तबकों की समग्र मुक्ति के लिए आजीवन संघर्ष किया। जाति एवं जेंडर आधारित जुल्म एवं ज्यादती का कड़ा विरोध किया। सामाजिक कुरूतियों एवं धार्मिक पाखण्ड के खिलाफ आमजन को जागरूक किया। मजदूर एवं किसान के हक के लिए संघर्ष किया। सबसे बढ़कर महात्मा फुले ने बड़ी यातनाएं झेलते हुए दलित,पिछड़े एवं महिला सहित मेहनतकश आमजन के लिए शिक्षा के महत्व का प्रचार प्रसार किया, अशिक्षा एवं अज्ञानता के कारण हुई बड़ी भारी क्षति के प्रति जागरूक किया। महिला शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए तो महात्मा फुले ने अपनी पत्नी सावित्री बाई फुले के साथ मिलकर अनूठा कार्य किया। महिलाओं की शिक्षा के लिए विद्यालय चलाया,जो कि भारत का प्रथम महिला विद्यालय बना।
- वजीरपुर। राजकीय कन्या महाविद्यालय में आज भारत में सामाजिक क्रांति के अग्रदूत महात्मा ज्योतिराव फूले की जयंती मनाई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्राओं ने सहभागिता कर महात्मा फुले के विचार और जीवन संघर्ष से अच्छे विद्यार्थी और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा ली। नोडल अधिकारी एवं राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ रमेश बैरवा ने छात्राओं को बताया कि महात्मा फुले का जन्म पुणे में 1827 में हुआ। महात्मा जोतिराव फुले,जिन्हें 'जोतिबा फुले' नाम से भी जाना जाता है,एक क्रांतिकारी समाज सुधारक ही नहीं बल्कि एक गम्भीर सामाजिक चिंतक भी थे। फूले ने 'गुलामगिरी' 'सत्यशोधक समाज' 'किसान का कोड़ा' जैसी महत्वपूर्ण रचनाएं लिख कर सामाजिक-राजनैतिक चिंतक के तौर पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। विद्यार्थियों को इन रचनाओं का अध्ययन जरूर करना चाहिए। बाबा साहेब डॉ.भीमराव अंबेडकर महात्मा जोतिराव फुले को अपना वैचारिक गुरु मानते थे। फूले के विचार और संघर्ष आज भी प्रेरणा देते हैं। विश्व के महान चिंतक कार्ल मार्क्स एवं शहीदे आज़म भगतसिंह की तरह महात्मा फुले ने भी मनुष्य के मनुष्य द्वारा किये जाने वाले हर प्रकार के सामाजिक आर्थिक शोषण एवं भेदभाव के अंत का वैचारिक पक्ष लिया। समाज के शोषित,पीड़ित मेहनतकश तबकों की समग्र मुक्ति के लिए आजीवन संघर्ष किया। जाति एवं जेंडर आधारित जुल्म एवं ज्यादती का कड़ा विरोध किया। सामाजिक कुरूतियों एवं धार्मिक पाखण्ड के खिलाफ आमजन को जागरूक किया। मजदूर एवं किसान के हक के लिए संघर्ष किया। सबसे बढ़कर महात्मा फुले ने बड़ी यातनाएं झेलते हुए दलित,पिछड़े एवं महिला सहित मेहनतकश आमजन के लिए शिक्षा के महत्व का प्रचार प्रसार किया, अशिक्षा एवं अज्ञानता के कारण हुई बड़ी भारी क्षति के प्रति जागरूक किया। महिला शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए तो महात्मा फुले ने अपनी पत्नी सावित्री बाई फुले के साथ मिलकर अनूठा कार्य किया। महिलाओं की शिक्षा के लिए विद्यालय चलाया,जो कि भारत का प्रथम महिला विद्यालय बना।1
- वजीरपुर। राजकीय कन्या महाविद्यालय में आज भारत में सामाजिक क्रांति के अग्रदूत महात्मा ज्योतिराव फूले की जयंती मनाई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्राओं ने सहभागिता कर महात्मा फुले के विचार और जीवन संघर्ष से अच्छे विद्यार्थी और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा ली। नोडल अधिकारी एवं राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ रमेश बैरवा ने छात्राओं को बताया कि महात्मा फुले का जन्म पुणे में 1827 में हुआ। महात्मा जोतिराव फुले,जिन्हें 'जोतिबा फुले' नाम से भी जाना जाता है,एक क्रांतिकारी समाज सुधारक ही नहीं बल्कि एक गम्भीर सामाजिक चिंतक भी थे। फूले ने 'गुलामगिरी' 'सत्यशोधक समाज' 'किसान का कोड़ा' जैसी महत्वपूर्ण रचनाएं लिख कर सामाजिक-राजनैतिक चिंतक के तौर पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। विद्यार्थियों को इन रचनाओं का अध्ययन जरूर करना चाहिए। बाबा साहेब डॉ.भीमराव अंबेडकर महात्मा जोतिराव फुले को अपना वैचारिक गुरु मानते थे। फूले के विचार और संघर्ष आज भी प्रेरणा देते हैं। विश्व के महान चिंतक कार्ल मार्क्स एवं शहीदे आज़म भगतसिंह की तरह महात्मा फुले ने भी मनुष्य के मनुष्य द्वारा किये जाने वाले हर प्रकार के सामाजिक आर्थिक शोषण एवं भेदभाव के अंत का वैचारिक पक्ष लिया। समाज के शोषित,पीड़ित मेहनतकश तबकों की समग्र मुक्ति के लिए आजीवन संघर्ष किया। जाति एवं जेंडर आधारित जुल्म एवं ज्यादती का कड़ा विरोध किया। सामाजिक कुरूतियों एवं धार्मिक पाखण्ड के खिलाफ आमजन को जागरूक किया। मजदूर एवं किसान के हक के लिए संघर्ष किया। सबसे बढ़कर महात्मा फुले ने बड़ी यातनाएं झेलते हुए दलित,पिछड़े एवं महिला सहित मेहनतकश आमजन के लिए शिक्षा के महत्व का प्रचार प्रसार किया, अशिक्षा एवं अज्ञानता के कारण हुई बड़ी भारी क्षति के प्रति जागरूक किया। महिला शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए तो महात्मा फुले ने अपनी पत्नी सावित्री बाई फुले के साथ मिलकर अनूठा कार्य किया। महिलाओं की शिक्षा के लिए विद्यालय चलाया,जो कि भारत का प्रथम महिला विद्यालय बना।2
- इस अवसर पर सभापति शिवरतन अग्रवाल द्वारा भारतीय जनता पार्टी का ध्वज विधिवत रूप से फहराया गया। इस अवसर पर शहर मण्डल अध्यक्ष मिथलेश व्यास, महामंत्री कमलेश महावर एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने पार्टी के गौरवशाली इतिहास, सिद्धांतों एवं राष्ट्र सेवा के संकल्प को दोहराया। इस अवसर पर सभापति ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने सदैव राष्ट्रहित, विकास और जनसेवा को सर्वोपरि रखा है और इसी भावना के साथ कार्यकर्ता निरंतर समाज के बीच कार्य कर रहे हैं। ध्वजारोहण के पश्चात सभी ने एकजुट होकर देश की प्रगति एवं समृद्धि के लिए अपना योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं में उत्साह एवं उमंग का वातावरण देखने को मिला। अंत में सभी कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं एवं पार्टी की मजबूती के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया।1
- शिक्षा विभाग के निर्देश पर ऋषभदेव पखवाड़े की शुरुआत बामनवास l शिक्षा विभाग की अभिनव पहल पर देवाधिदेव ऋषभदेव भगवान के जीवन चरित्र पर आयोजित होने वाली प्रतियोगिता की शुरुआत ज्योति शिक्षण संस्थान सीनियर सैकण्डरी स्कूल और वर्धमान कोचिंग सेन्टर के संयुक्त तत्वाधान में प्री-प्राइमरी कक्षा के विद्यार्थियों से की l बच्चों को इस अवसर पर भगवान ऋषभदेव के जीवन चरित्र पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई गई l इसके बाद उन्हें विद्यालय के निदेशक अखलेश गुर्जर ने माता मरूदेवी के सोलह सपनो के बारे में बताते हुए उनका अर्थ बताया l *नन्हे मुन्नों ने ध्यान मुद्रा में किया णमोकार महामंत्र का जाप* विश्व णमोकार महामंत्र दिवस पर बच्चों ने एक साथ समधुर आवाज में णमोकार महामंत्र का निर्दोष आवाज में जाप किया जिससे पूरे विद्यालय का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर गया l इस अवसर पर वर्धमान कोचिंग सेन्टर की निदेशक एकता जैन ने बताया कि णमोकार महामंत्र में पांच परमेष्ठि को नमन किया जाता है l अरिहंत,सिद्ध,आचार्य,उपाध्याय और सर्वसाधु इन परम पद को पाने के लिए आपको धर्म की राह पर चलकर भावना बनाकर जीवन को त्याग की ओर करने का पुरूषार्थ करना होगा l इस अवसर पर प्रधानाचार्य श्रीमति कृपा गुर्जर ने बताया कि सोमवार को विद्यालय में शिक्षा विभाग के आदेशों की अनुपालना में विद्यार्थियों के अन्दर ऋषभदेव पखवाड़े के तहत ऋषभ स्तुति, ऋषभदेव पर आधारित शिक्षाप्रद कहानी,चित्रकला एवं पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता एवं रंगोली प्रतियोगिता मंगलवार को निबन्ध और प्रश्नोत्तर,रचनात्मक लेखन एवं कविता पाठ प्रतियोगिता बुधवार को योग शिविर का आयोजन किया जाएगा l विश्व णमोकार महामंत्र दिवस पर बच्चों को विद्यालय में मिठाई का वितरण किया गया l इस अवसर पर विद्यालय की नीरज गुर्जर,शिवानी मीणा,गणेश योगी,योग शिक्षक रीना गुर्जर आदि कई शिक्षक उपस्थित थे l3
- हिंडौन बयाना रोड स्थित जाट की सराय के अभय भारत पेट्रोल पंप के पास आयोजित राजस्थान मेगा ट्रेड फेयर बाल मनोरंजन मेले में शुक्रवार शाम 5 बजे पूजा अर्चना के साथ गणेश प्रतिमा की स्थापना की गई। मेले के आयोजक रिंकू यादव ने बताया कि हिंडौन की जाट की सराय के अभय भारत पैट्रोल पंप के पास राजस्थान मेगा ट्रेड फेयर मेले का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें बच्चों के लिए नाव, झूला, ड्रैगन ट्रेन, कैटरपिलर झूला, ब्रेक डांस, शैयलंबों झूला, आदि कई मनोरंजन के साधन स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा मेले में आने वाले लोगों के खान पान के लिए कैंटीन के साथ खिलौने, चूरन चटनी, रेडीमेड कपड़े, क्रोकरी की स्टॉलें भी लगाई गई है। मेले में गणेश स्थापना के अवसर पर प्रकाश सिंह बेनीवाल, अभय भारत पेट्रोल पंप के निदेशक धीरज बिंदल, सोनू बेनीवाल, गगन जिंदल, प्रदीप अग्रवाल, अरविंद कुमार सहित कई लोग मौजूद रहे।1
- हिंडौन सिटी। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का परिवार शुक्रवार को करौली जिले के दौरे पर रहा। इस दौरान सीएम के परिवार के सदस्यों ने धार्मिक आस्था के चलते जिले में स्थित विभिन्न मंदिरों में पहुंच कर भगवान की प्रतिमा के दर्शन किए। सीएम शर्मा के परिवार का काफिला सबसे पहले हिंडौन के सूरौठ कस्बा पहुंचा। जहां परिवार के सदस्यों ने सूरौठ महल स्थित गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद परिवार के सदस्यों का काफिला करौली के लिए रवाना हुआ। करौली पहुंचने पर परिवार के सदस्यों ने प्रसिद्ध मदन मोहन जी मंदिर में भगवान की प्रतिमा के दर्शन के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ता सहित आम जन में भारी उत्साह का माहौल देखने को मिला। सीएम परिवार के करौली जिले के दौरे को लेकर पुलिस और प्रशासन सुरक्षा की दृष्टि से पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दिया।1
- 🟥 ब्रेकिंग न्यूज़ संत रामपाल जी महाराज हुए रिहा करीब 11 साल, 4 महीने और 21 दिन के लंबे इंतजार के बाद आज शाम 05:05 बजे संत रामपाल जी महाराज जेल से रिहा हो गए हैं। रिहाई के बाद वे सीधे सतलोक आश्रम, धनाना धाम पहुंच चुके हैं। यह खबर उनके अनुयायियों के लिए बेहद खुशी का विषय है। 📢 #SaintRampalJiMaharaj #SatlokAshram #KabirisGod #SantRampalJi #VkNewsRajasthan4
- बामनवास में इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (आईएफडब्ल्यूजे) के बैनर तले पत्रकारों ने जैसलमेर कलेक्टर पर मनमानी और वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र सिंह राठौड़ के साथ अन्याय का आरोप लगाते हुए जताया विरोध। जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में बामनवास तहसीलदार मेघा मीना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम सौपा गया ज्ञापन । ज्ञापन में राठौड़ के रेस्टोरेंट पर प्रशासनिक कार्रवाई को प्रतिशोधात्मक बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को प्रधानमंत्री से मिलने की अनुमति देने का भी आग्रह किया गया। @sudeepkumar03922