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विकासखंड हरचंदपुर के रहवा गांव में एक पत्रकार के साथ स्थानीय महिलाओं की तीखी बहस हुई। यह पूरी घटना गांव की महिलाएं पूर्व प्रधान महेंद्र विक्रम सिंह उर्फ डब्बू सिंह के समर्थन में पत्रकार से भिड़ गईं।
RAMA SHANKAR SHUKLA
विकासखंड हरचंदपुर के रहवा गांव में एक पत्रकार के साथ स्थानीय महिलाओं की तीखी बहस हुई। यह पूरी घटना गांव की महिलाएं पूर्व प्रधान महेंद्र विक्रम सिंह उर्फ डब्बू सिंह के समर्थन में पत्रकार से भिड़ गईं।
- User3208Amethi, Uttar Pradesh😤4 hrs ago
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- प्रतापगढ़ के दिलीपपुर थाना क्षेत्र के पाण्डेय का पुरवा में एक जमीन विवाद सामने आया है। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि उनकी जमीन पर खड़े नीम के पेड़ को काटा जा रहा है। इस मामले को लेकर अब कार्रवाई और न्याय की मांग तेज हो गई है।1
- रहवा गांव में पूर्व प्रधान महेंद्र विक्रम सिंह उर्फ डब्बू सिंह ने जनसेवा की एक अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने मठ गांव की एक बुजुर्ग माता जी और उनके मानसिक रूप से दिव्यांग पुत्र की परेशानी को देखते हुए अपने निजी धन से एक शौचालय और रास्ते का निर्माण करवाया है। डब्बू सिंह, जो लगातार जनसेवा के कार्यों में जुटे रहते हैं और क्षेत्र की जनता के सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहते हैं, उनके इस कार्य की ग्रामीणों द्वारा व्यापक सराहना की जा रही है। इस पहल को मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया जा रहा है।1
- प्रतापगढ़ जिले की मानिकपुर नगर पंचायत के कार्यालय में सोमवार को आयोजित मिनी सदन की बैठक उस समय भारी हंगामे में बदल गई, जब एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के हस्तक्षेप को लेकर सभासद भड़क उठे। चेयरपर्सन श्रीमती चंद्र लता जायसवाल की अध्यक्षता में चल रही इस महत्वपूर्ण बैठक में तीन-चार वर्ष पहले सेवानिवृत्त हो चुके प्रधान लिपिक आत्मानंद अचानक पहुंच गए और अनाधिकृत रूप से दखल देने लगे। उनकी इस हरकत से आक्रोशित सभासदों ने तीखी बहस शुरू कर दी और उनके कड़े विरोध के बाद आखिरकार सेवानिवृत्त बाबू को बैठक से बाहर जाना पड़ा। सभासदों ने गंभीर आरोप लगाया है कि यह पूर्व बाबू अब भी कार्यालय में अपनी पसंद का अधिशासी अधिकारी (ईओ) रखवाकर पिछले दरवाजे से मनमानी चलाना चाहता है। दरअसल, मानिकपुर नगर पंचायत इस समय एक अजीबोगरीब प्रशासनिक संकट का सामना कर रही है, जहाँ एक साथ दो अधिशासी अधिकारी कार्यरत हैं। ईओ अतुल रघुवंशी का तबादला होने के बाद कुंडा के ईओ अजय सिंह को मानिकपुर का अतिरिक्त प्रभार मिला था, लेकिन अतुल रघुवंशी हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर लेकर वापस लौट आए हैं। इस दोहरे प्रभार के कारण नगर पंचायत के सभी विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़ गए हैं। कर्मचारी असमंजस में हैं कि वे किस अधिकारी के आदेश का पालन करें, जिसका सीधा खमियाजा उन्हें दो महीने से वेतन न मिलने के रूप में भुगतना पड़ रहा है, जिससे वे भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मानिकपुर कार्यालय अब राजनीति का अखाड़ा बन गया है। इस गतिरोध और अव्यवस्था पर चेयरपर्सन श्रीमती चंद्र लता जायसवाल ने बताया कि दो ईओ की स्थिति पर स्पष्टीकरण और उचित दिशानिर्देश के लिए उत्तर प्रदेश शासन तथा जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया है, हालांकि अभी तक कोई गाइडलाइन नहीं मिली है। उन्होंने कर्मचारियों के वेतन पर सफाई देते हुए कहा कि आउटसोर्सिंग कर्मियों का भुगतान सेवा प्रदाता कंपनी के माध्यम से होता है, जिसकी प्रक्रिया नगर पंचायत स्तर से की जाती है। बैठक में चेयरमैन प्रतिनिधि आशुतोष जायसवाल (डिंपू भैया), सभासद कृष्णा देवी, रुखसाना बानो, ललित जायसवाल, जगन्नाथ यादव, मोहम्मद अनस, मोहम्मद शहिद, रमेश मौर्य, रमेश सिंह, धर्मचंद्र सहित नामित सभासद अनिल पटेल, नन्हेंलाल गौतम, गयादीन प्रजापति समेत सभी 20 सभासद उपस्थित थे। चेतावनी दी गई है कि यदि इस प्रशासनिक अराजकता पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया, तो आने वाले दिनों में नगर की सफाई, पानी और लाइट जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा जाएंगी।1
- कौशांबी जिले के अफजलपुर वारी में एक मामूली विवाद के चलते मारपीट की घटना सामने आई है। इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों के चालान किए हैं।1
- विकासखंड हरचंदपुर के रहवा गांव में एक पत्रकार के साथ स्थानीय महिलाओं की तीखी बहस हुई। यह पूरी घटना गांव की महिलाएं पूर्व प्रधान महेंद्र विक्रम सिंह उर्फ डब्बू सिंह के समर्थन में पत्रकार से भिड़ गईं।1
- केंद्र सरकार के स्वच्छता अभियान के 12 वर्ष पूरे होने पर जहाँ देश भर में सफाई व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं प्रतापगढ़ के नगर पंचायत मांधाता की तस्वीर इन दावों की सच्चाई को आईना दिखा रही है। नगर पंचायत क्षेत्र में मुख्य सड़क के किनारे कूड़े और गंदगी का इतना बड़ा अंबार लगा हुआ है कि स्वच्छता अभियान केवल कागजी और फोटोबाजी तक ही सीमित नजर आता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से प्लास्टिक, घरेलू कचरा और अन्य अपशिष्ट खुले में पड़े हैं, जिससे दुर्गंध फैल रही है और राहगीरों व आसपास के लोगों का वहाँ से गुजरना तक मुश्किल हो गया है। इस स्थिति से गर्मी और बरसात के मौसम में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर जमीनी हकीकत से बेखबर आँखें मूंदे बैठे हैं, जबकि वे सरकारी कार्यक्रमों में झाड़ू हाथ में लेकर स्वच्छता का संदेश देने और फोटो खिंचवाने में व्यस्त रहते हैं। जिले से लेकर नगर पंचायत तक स्वच्छता को लेकर सफलता की रिपोर्टें शासन को भेजी जा रही हैं, लेकिन मांधाता के जमीनी हालात उन रिपोर्टों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अधिकारी केवल कागजों और बैठकों में स्वच्छता अभियान को सफल दिखाने में जुटे हैं, जबकि नगर पंचायत क्षेत्र में नियमित सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। स्वच्छ भारत मिशन और सफाई व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद मांधाता में गंदगी का यह दृश्य सवाल खड़ा करता है कि आखिर सफाई के नाम पर खर्च होने वाला धन कहाँ जा रहा है। नागरिकों की मांग है कि उच्च अधिकारी मौके पर पहुँचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करें और जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय करें। साथ ही, जिले के अधिकारियों द्वारा शासन को भेजी जा रही रिपोर्टों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि कागजों में सफाई और धरातल पर गंदगी का यह खेल बंद हो और जनता को स्वच्छ व स्वस्थ वातावरण मिल सके।1
- राजधानी लखनऊ के थाना विकास नगर क्षेत्र स्थित आनंद टाइल के बगल में चल रहा एक देसी शराब ठेका एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। नियमों का उल्लंघन करते हुए इस ठेके पर सुबह 4 बजे से ही अवैध रूप से अधिक दामों पर शराब बेची जा रही है। कुछ ही दिन पहले इसी ठेके का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें दिखाया गया था कि समय से पहले अवैध रूप से दुकान खोलकर शराब को अधिक दाम में बेचा जा रहा था। इन घटनाओं के बावजूद, दारू माफिया बेखौफ होकर अपना कारोबार सुबह 4 बजे से धड़ल्ले से चला रहे हैं। एक ताजा वीडियो में भी साफ देखा जा सकता है कि किस तरह दुकान के अंदर से अवैध रूप से और अधिक दाम पर शराब बेची जा रही है। नियमों का इस तरह खुलेआम उल्लंघन किए जाने के बाद भी अभी तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।1