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22 hrs ago
user_Shyamu Patel
Shyamu Patel
Police Officer सलोन, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
22 hrs ago

More news from Uttar Pradesh and nearby areas
  • दिल्ली का किराड़ी भयंकर जलभराव के कारण नर्क बन चुका है। लोग बेहद परेशान हैं, अपना बसा-बसाया घर छोड़कर पलायन करने को मजबूर हैं। वहीं, इन हालातों में BJP सरकार ने आदतन अपनी जिम्मेदारी व जवाबदेही से पीछा छुड़ाते हुए रहवासियों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। आज दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष @devendrayadvinc जी और कांग्रेस नेताओं ने किराड़ी के शर्मा इंक्लेव पहुंचकर स्थानीय निवासियों से बात की, स्थिति का जायजा लिया और जनता की आवाज उठाई। 📍 दिल्ली पराग प्रसाद रावत राष्ट्रीय महासचिव अखिल भारतीय राजीव गांधी विचार मंच
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    दिल्ली का किराड़ी भयंकर जलभराव के कारण नर्क बन चुका है। लोग बेहद परेशान हैं, अपना बसा-बसाया घर छोड़कर पलायन करने को मजबूर हैं।
वहीं, इन हालातों में BJP सरकार ने आदतन अपनी जिम्मेदारी व जवाबदेही से पीछा छुड़ाते हुए रहवासियों को उनके हाल पर छोड़ दिया है।
आज दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष @devendrayadvinc जी और कांग्रेस नेताओं ने किराड़ी के शर्मा इंक्लेव पहुंचकर स्थानीय निवासियों से बात की, स्थिति का जायजा लिया और जनता की आवाज उठाई।
📍  दिल्ली
पराग प्रसाद रावत
राष्ट्रीय महासचिव
अखिल भारतीय राजीव गांधी
विचार मंच
    user_Parag Prasad Rawat
    Parag Prasad Rawat
    Political party office Rae Bareli, Uttar Pradesh•
    14 min ago
  • रायबरेली गोरा बाजार मोहारी का पुरवा विधवा महिला ज्ञान वती के सास का नाम गुन्ता था गुन्ता ने अपने बेटे रामकुमार को वसीयत कर दिया रेखा बाजपेयी सदर तहसील मे नकली बैनामा दिखा कर मुन्सी ओर कर्मचारी को घूस देकर गुन्ता का नाम कटवा दिया ओर रेखा बाजपेयी नकली बैनामा दिखा कर अपने नाम चाडाॅ लिया जब ज्ञान वती को पता चला तो ज्ञान वती ने लखनऊ कमीशीनी से मुकादमा दैर किया लखनऊ कमीशीनी से केश चल रहा लेकिन रेखा बाजपेयी फर्जी कागज दिखा कर अधिकारियों ओर प्रशासन को घूस देकर आयेदिन जोर जबरदस्ती अवैध कप्जा है ज्ञानवती ने लगाई मुख्यमंत्री योगी बाबा महराज से वरासात चडाने कि गुहार
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    रायबरेली गोरा बाजार मोहारी का पुरवा विधवा महिला ज्ञान वती के सास का नाम गुन्ता था गुन्ता ने अपने बेटे रामकुमार को वसीयत कर दिया रेखा बाजपेयी सदर तहसील मे नकली बैनामा दिखा कर मुन्सी ओर कर्मचारी को घूस देकर गुन्ता का नाम कटवा दिया ओर रेखा बाजपेयी नकली बैनामा दिखा कर अपने नाम चाडाॅ लिया जब ज्ञान वती को पता चला तो ज्ञान वती ने लखनऊ कमीशीनी से मुकादमा दैर किया लखनऊ कमीशीनी से  केश चल रहा लेकिन रेखा बाजपेयी फर्जी कागज दिखा कर अधिकारियों ओर प्रशासन को घूस देकर आयेदिन जोर जबरदस्ती अवैध कप्जा है ज्ञानवती ने लगाई मुख्यमंत्री योगी बाबा महराज से वरासात चडाने कि गुहार
    user_User7530
    User7530
    Farmer Rae Bareli, Uttar Pradesh•
    1 hr ago
  • Post by Shyamu Patel
    1
    Post by Shyamu Patel
    user_Shyamu Patel
    Shyamu Patel
    Police Officer सलोन, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • 🪔 1) विवाद की शुरुआत — मौनी अमावस्या Magh Mela 2026 मौनी अमावस्या (19–20 जनवरी 2026) के अवसर पर प्रयागराज (संगम) में अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य स्नान करने निकले, लेकिन प्रशासन/पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इससे उनके अनुयायियों और अधिकारियों के बीच धक्कामुक्की हुई। � AajTak विवाद के दौरान उनकी पालकी रोकी गई, छत्र टूटने जैसे घटनाक्रम भी सामने आए। � AajTak इसके बाद उन्होंने धरना देकर विरोध जताया, प्रशासन पर अपने अनुयायियों के साथ मारपीट का आरोप लगाया और मांग की कि उनसे माफी ली जाए। � AajTak +1 👉 यह घटना धार्मिक आयोजन में शक्ति/प्रशासन बनाम एक धार्मिक व्यक्ति का पहला बड़ा टकराव थी। 📜 2) प्रशासनिक कार्रवाई — “शंकराचार्य” शीर्षक पर नोटिस मेला प्रशासन ने उनके खिलाफ नोटिस जारी किया कि वे ‘शंकराचार्य’ का उपयोग क्यों कर रहे हैं, जबकि उस पद के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में लंबित विवाद है। � The Economic Times +2 नोटिस में यह भी कहा गया कि कोर्ट के आदेश के बावजूद वे स्वयं को उस पद से जोड़ रहे हैं, इसलिए स्पष्ट जवाब दें। � The Economic Times 📌 यह प्रशासनिक कदम विवाद को एक धार्मिक पद की वैधता और दस्तावेज़ों/न्यायिक स्थिति के स्तर तक ले गया है। ⚖️ 3) पृष्ठभूमि — 73 साल पुराना शंकराचार्य विवाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य पद को लेकर विवाद कोई नया नहीं है, बल्कि लंबे समय से न्यायालयों में मामला लंबित है कि ज्योतिषपीठ के वास्तविक शंकराचार्य कौन हैं। � AajTak इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में यह मामला वर्षों से जारी रहा है, और कोर्ट ने किसी नई पुष्टि से पहले संबंधित कदमों पर रोक लगा रखी है। � The Hans India 👉 प्रशासन का नोटिस इसी क़ानूनी अनिश्चितता को आधार बना रहा है। 🔥 4) राजनीतिक बवाल विवाद केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तेजी से राजनीतिक मोड़ ले लिया है: कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार किसी संत की हैसियत पर सवाल नहीं उठा सकती। � Amar Ujala समाजवादी पार्टी के नेता ने भी सरकार के रवैये को ‘सनातन परंपरा का अपमान’ बताया। � Devdiscourse अविमुक्तेश्वरानंद खुद भी योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे हिंदुओं के प्रति असंवेदनशील हैं। � Navbharat Live 👉 इस तरह विवाद धार्मिक अधिकार, प्रशासनिक नियंत्रण और राजनीतिक प्रतिक्रिया के बीच एक बड़ा मुद्दा बन गया है। 🧵 5) विवाद के इर्द-गिर्द अन्य आरोप-प्रत्यारोप विवाद से पहले भी अविमुक्तेश्वरानंद का सरकारी और धार्मिक पदाधिकारियों के बीच मतभेद रहा है, जैसे उन्हें महाराष्ट्र में “state guest” दर्जा खोने का मामला, � The Week कुछ संतों द्वारा उन्हें ‘fake Shankaracharya’ कहे जाने और उन पर आपत्तिजनक आरोप लगाने के मामले। � First India इस पर उन्होंने कानूनी कार्रवाई भी की है, जिसमें हाईकोर्ट में मुक़दमे चल चुके हैं। � latestlaws.com 👉 ये मामलों से यह स्पष्ट होता है कि विवाद केवल मौनी अमावस्या तक सीमित नहीं, बल्कि एक लंबा धार्मिक–राजनीतिक संघर्ष बन चुका है। 📍 वर्तमान स्थिति — अब तक कहाँ तक पहुँचा? ✅ मौनी अमावस्या के दौरान हुई रोक और झड़प से शुरू हुआ विवाद अब: प्रशासनिक नोटिसों और कानूनी प्रश्नों तक पहुँच गया है। � The Economic Times राजनीतिक दलों के बयानबाज़ी में बदल गया है। � Amar Ujala धर्म, सत्ता और न्यायपालिका के लंबित मामलों के बीच जुड़ा हुआ मुद्दा बन गया है। � AajTak 👉 इसका अगला चरण यह होगा कि न्यायालय इस विवादित शीर्षक पर अंतिम फैसला कब करेगा, और क्या प्रशासन या सरकार इससे संबंधित कार्रवाईें जारी रखेगी या नहीं — यह आगे की दिशा तय करेगा।
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    🪔 1) विवाद की शुरुआत — मौनी अमावस्या Magh Mela 2026
मौनी अमावस्या (19–20 जनवरी 2026) के अवसर पर प्रयागराज (संगम) में अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य स्नान करने निकले, लेकिन प्रशासन/पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इससे उनके अनुयायियों और अधिकारियों के बीच धक्कामुक्की हुई। �
AajTak
विवाद के दौरान उनकी पालकी रोकी गई, छत्र टूटने जैसे घटनाक्रम भी सामने आए। �
AajTak
इसके बाद उन्होंने धरना देकर विरोध जताया, प्रशासन पर अपने अनुयायियों के साथ मारपीट का आरोप लगाया और मांग की कि उनसे माफी ली जाए। �
AajTak +1
👉 यह घटना धार्मिक आयोजन में शक्ति/प्रशासन बनाम एक धार्मिक व्यक्ति का पहला बड़ा टकराव थी।
📜 2) प्रशासनिक कार्रवाई — “शंकराचार्य” शीर्षक पर नोटिस
मेला प्रशासन ने उनके खिलाफ नोटिस जारी किया कि वे ‘शंकराचार्य’ का उपयोग क्यों कर रहे हैं, जबकि उस पद के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में लंबित विवाद है। �
The Economic Times +2
नोटिस में यह भी कहा गया कि कोर्ट के आदेश के बावजूद वे स्वयं को उस पद से जोड़ रहे हैं, इसलिए स्पष्ट जवाब दें। �
The Economic Times
📌 यह प्रशासनिक कदम विवाद को एक धार्मिक पद की वैधता और दस्तावेज़ों/न्यायिक स्थिति के स्तर तक ले गया है।
⚖️ 3) पृष्ठभूमि — 73 साल पुराना शंकराचार्य विवाद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य पद को लेकर विवाद कोई नया नहीं है, बल्कि लंबे समय से न्यायालयों में मामला लंबित है कि ज्योतिषपीठ के वास्तविक शंकराचार्य कौन हैं। �
AajTak
इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में यह मामला वर्षों से जारी रहा है, और कोर्ट ने किसी नई पुष्टि से पहले संबंधित कदमों पर रोक लगा रखी है। �
The Hans India
👉 प्रशासन का नोटिस इसी क़ानूनी अनिश्चितता को आधार बना रहा है।
🔥 4) राजनीतिक बवाल
विवाद केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तेजी से राजनीतिक मोड़ ले लिया है:
कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार किसी संत की हैसियत पर सवाल नहीं उठा सकती। �
Amar Ujala
समाजवादी पार्टी के नेता ने भी सरकार के रवैये को ‘सनातन परंपरा का अपमान’ बताया। �
Devdiscourse
अविमुक्तेश्वरानंद खुद भी योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे हिंदुओं के प्रति असंवेदनशील हैं। �
Navbharat Live
👉 इस तरह विवाद धार्मिक अधिकार, प्रशासनिक नियंत्रण और राजनीतिक प्रतिक्रिया के बीच एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
🧵 5) विवाद के इर्द-गिर्द अन्य आरोप-प्रत्यारोप
विवाद से पहले भी अविमुक्तेश्वरानंद का सरकारी और धार्मिक पदाधिकारियों के बीच मतभेद रहा है, जैसे
उन्हें महाराष्ट्र में “state guest” दर्जा खोने का मामला, �
The Week
कुछ संतों द्वारा उन्हें ‘fake Shankaracharya’ कहे जाने और उन पर आपत्तिजनक आरोप लगाने के मामले। �
First India
इस पर उन्होंने कानूनी कार्रवाई भी की है, जिसमें हाईकोर्ट में मुक़दमे चल चुके हैं। �
latestlaws.com
👉 ये मामलों से यह स्पष्ट होता है कि विवाद केवल मौनी अमावस्या तक सीमित नहीं, बल्कि एक लंबा धार्मिक–राजनीतिक संघर्ष बन चुका है।
📍 वर्तमान स्थिति — अब तक कहाँ तक पहुँचा?
✅ मौनी अमावस्या के दौरान हुई रोक और झड़प से शुरू हुआ विवाद अब:
प्रशासनिक नोटिसों और कानूनी प्रश्नों तक पहुँच गया है। �
The Economic Times
राजनीतिक दलों के बयानबाज़ी में बदल गया है। �
Amar Ujala
धर्म, सत्ता और न्यायपालिका के लंबित मामलों के बीच जुड़ा हुआ मुद्दा बन गया है। �
AajTak
👉 इसका अगला चरण यह होगा कि न्यायालय इस विवादित शीर्षक पर अंतिम फैसला कब करेगा, और क्या प्रशासन या सरकार इससे संबंधित कार्रवाईें जारी रखेगी या नहीं — यह आगे की दिशा तय करेगा।
    user_Vinay Kumar Srivastav
    Vinay Kumar Srivastav
    Travel Agent सलोन, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • Post by Balvant singh Press
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    Post by Balvant singh Press
    user_Balvant singh Press
    Balvant singh Press
    Journalist डलमऊ, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • Post by भारत बजरंग दल अध्यक्ष
    1
    Post by भारत बजरंग दल अध्यक्ष
    user_भारत बजरंग दल अध्यक्ष
    भारत बजरंग दल अध्यक्ष
    ऊंचाहार, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
  • Post by Raja Team 0315. 8586
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    Post by Raja Team  0315.    8586
    user_Raja Team  0315.    8586
    Raja Team 0315. 8586
    Gauriganj, Amethi•
    13 hrs ago
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य मे मेरी अपनी राय...
    1
    वर्तमान परिप्रेक्ष्य मे मेरी अपनी राय...
    user_Vinay Kumar Srivastav
    Vinay Kumar Srivastav
    Travel Agent सलोन, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
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