शंकराचार्य बनाम योगी आदित्यनाथ विवाद बना सनातनी बनाम सत्ता विवाद... 🪔 1) विवाद की शुरुआत — मौनी अमावस्या Magh Mela 2026 मौनी अमावस्या (19–20 जनवरी 2026) के अवसर पर प्रयागराज (संगम) में अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य स्नान करने निकले, लेकिन प्रशासन/पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इससे उनके अनुयायियों और अधिकारियों के बीच धक्कामुक्की हुई। � AajTak विवाद के दौरान उनकी पालकी रोकी गई, छत्र टूटने जैसे घटनाक्रम भी सामने आए। � AajTak इसके बाद उन्होंने धरना देकर विरोध जताया, प्रशासन पर अपने अनुयायियों के साथ मारपीट का आरोप लगाया और मांग की कि उनसे माफी ली जाए। � AajTak +1 👉 यह घटना धार्मिक आयोजन में शक्ति/प्रशासन बनाम एक धार्मिक व्यक्ति का पहला बड़ा टकराव थी। 📜 2) प्रशासनिक कार्रवाई — “शंकराचार्य” शीर्षक पर नोटिस मेला प्रशासन ने उनके खिलाफ नोटिस जारी किया कि वे ‘शंकराचार्य’ का उपयोग क्यों कर रहे हैं, जबकि उस पद के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में लंबित विवाद है। � The Economic Times +2 नोटिस में यह भी कहा गया कि कोर्ट के आदेश के बावजूद वे स्वयं को उस पद से जोड़ रहे हैं, इसलिए स्पष्ट जवाब दें। � The Economic Times 📌 यह प्रशासनिक कदम विवाद को एक धार्मिक पद की वैधता और दस्तावेज़ों/न्यायिक स्थिति के स्तर तक ले गया है। ⚖️ 3) पृष्ठभूमि — 73 साल पुराना शंकराचार्य विवाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य पद को लेकर विवाद कोई नया नहीं है, बल्कि लंबे समय से न्यायालयों में मामला लंबित है कि ज्योतिषपीठ के वास्तविक शंकराचार्य कौन हैं। � AajTak इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में यह मामला वर्षों से जारी रहा है, और कोर्ट ने किसी नई पुष्टि से पहले संबंधित कदमों पर रोक लगा रखी है। � The Hans India 👉 प्रशासन का नोटिस इसी क़ानूनी अनिश्चितता को आधार बना रहा है। 🔥 4) राजनीतिक बवाल विवाद केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तेजी से राजनीतिक मोड़ ले लिया है: कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार किसी संत की हैसियत पर सवाल नहीं उठा सकती। � Amar Ujala समाजवादी पार्टी के नेता ने भी सरकार के रवैये को ‘सनातन परंपरा का अपमान’ बताया। � Devdiscourse अविमुक्तेश्वरानंद खुद भी योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे हिंदुओं के प्रति असंवेदनशील हैं। � Navbharat Live 👉 इस तरह विवाद धार्मिक अधिकार, प्रशासनिक नियंत्रण और राजनीतिक प्रतिक्रिया के बीच एक बड़ा मुद्दा बन गया है। 🧵 5) विवाद के इर्द-गिर्द अन्य आरोप-प्रत्यारोप विवाद से पहले भी अविमुक्तेश्वरानंद का सरकारी और धार्मिक पदाधिकारियों के बीच मतभेद रहा है, जैसे उन्हें महाराष्ट्र में “state guest” दर्जा खोने का मामला, � The Week कुछ संतों द्वारा उन्हें ‘fake Shankaracharya’ कहे जाने और उन पर आपत्तिजनक आरोप लगाने के मामले। � First India इस पर उन्होंने कानूनी कार्रवाई भी की है, जिसमें हाईकोर्ट में मुक़दमे चल चुके हैं। � latestlaws.com 👉 ये मामलों से यह स्पष्ट होता है कि विवाद केवल मौनी अमावस्या तक सीमित नहीं, बल्कि एक लंबा धार्मिक–राजनीतिक संघर्ष बन चुका है। 📍 वर्तमान स्थिति — अब तक कहाँ तक पहुँचा? ✅ मौनी अमावस्या के दौरान हुई रोक और झड़प से शुरू हुआ विवाद अब: प्रशासनिक नोटिसों और कानूनी प्रश्नों तक पहुँच गया है। � The Economic Times राजनीतिक दलों के बयानबाज़ी में बदल गया है। � Amar Ujala धर्म, सत्ता और न्यायपालिका के लंबित मामलों के बीच जुड़ा हुआ मुद्दा बन गया है। � AajTak 👉 इसका अगला चरण यह होगा कि न्यायालय इस विवादित शीर्षक पर अंतिम फैसला कब करेगा, और क्या प्रशासन या सरकार इससे संबंधित कार्रवाईें जारी रखेगी या नहीं — यह आगे की दिशा तय करेगा।
शंकराचार्य बनाम योगी आदित्यनाथ विवाद बना सनातनी बनाम सत्ता विवाद... 🪔 1) विवाद की शुरुआत — मौनी अमावस्या Magh Mela 2026 मौनी अमावस्या (19–20 जनवरी 2026) के अवसर पर प्रयागराज (संगम) में अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य स्नान करने निकले, लेकिन प्रशासन/पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इससे उनके अनुयायियों और अधिकारियों के बीच धक्कामुक्की हुई। � AajTak विवाद के दौरान उनकी पालकी रोकी गई, छत्र टूटने जैसे घटनाक्रम भी सामने आए। � AajTak इसके बाद उन्होंने धरना देकर विरोध जताया, प्रशासन पर अपने अनुयायियों के साथ मारपीट का आरोप लगाया और मांग की कि उनसे माफी ली जाए। � AajTak +1 👉 यह घटना धार्मिक आयोजन में शक्ति/प्रशासन बनाम एक धार्मिक व्यक्ति का पहला बड़ा टकराव थी। 📜 2) प्रशासनिक कार्रवाई — “शंकराचार्य” शीर्षक पर नोटिस मेला प्रशासन ने उनके खिलाफ नोटिस जारी किया कि वे ‘शंकराचार्य’ का उपयोग क्यों कर रहे हैं, जबकि उस पद के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में लंबित विवाद है। � The Economic Times +2 नोटिस में यह भी कहा गया कि कोर्ट के आदेश के बावजूद वे स्वयं को उस पद से जोड़ रहे हैं, इसलिए स्पष्ट जवाब दें। � The Economic Times 📌 यह प्रशासनिक कदम विवाद को एक धार्मिक पद की वैधता और दस्तावेज़ों/न्यायिक स्थिति के स्तर तक ले गया है। ⚖️ 3) पृष्ठभूमि — 73 साल पुराना शंकराचार्य विवाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य पद को लेकर विवाद कोई नया नहीं है, बल्कि लंबे समय से न्यायालयों में मामला लंबित है कि ज्योतिषपीठ के वास्तविक शंकराचार्य कौन हैं। � AajTak इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में यह मामला वर्षों से जारी रहा है, और कोर्ट ने किसी नई पुष्टि से पहले संबंधित कदमों पर रोक लगा रखी है। � The Hans India 👉 प्रशासन का नोटिस इसी क़ानूनी अनिश्चितता को आधार बना रहा है। 🔥 4) राजनीतिक बवाल विवाद केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तेजी से राजनीतिक मोड़ ले लिया है: कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार किसी संत की हैसियत पर सवाल नहीं उठा सकती। � Amar Ujala समाजवादी पार्टी के नेता ने भी सरकार के रवैये को ‘सनातन परंपरा का अपमान’ बताया। � Devdiscourse अविमुक्तेश्वरानंद खुद भी योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे हिंदुओं के प्रति असंवेदनशील हैं। � Navbharat Live 👉 इस तरह विवाद धार्मिक अधिकार, प्रशासनिक नियंत्रण और राजनीतिक प्रतिक्रिया के बीच एक बड़ा मुद्दा बन गया है। 🧵 5) विवाद के इर्द-गिर्द अन्य आरोप-प्रत्यारोप विवाद से पहले भी अविमुक्तेश्वरानंद का सरकारी और धार्मिक पदाधिकारियों के बीच मतभेद रहा है, जैसे उन्हें महाराष्ट्र में “state guest” दर्जा खोने का मामला, � The Week कुछ संतों द्वारा उन्हें ‘fake Shankaracharya’ कहे जाने और उन पर आपत्तिजनक आरोप लगाने के मामले। � First India इस पर उन्होंने कानूनी कार्रवाई भी की है, जिसमें हाईकोर्ट में मुक़दमे चल चुके हैं। � latestlaws.com 👉 ये मामलों से यह स्पष्ट होता है कि विवाद केवल मौनी अमावस्या तक सीमित नहीं, बल्कि एक लंबा धार्मिक–राजनीतिक संघर्ष बन चुका है। 📍 वर्तमान स्थिति — अब तक कहाँ तक पहुँचा? ✅ मौनी अमावस्या के दौरान हुई रोक और झड़प से शुरू हुआ विवाद अब: प्रशासनिक नोटिसों और कानूनी प्रश्नों तक पहुँच गया है। � The Economic Times राजनीतिक दलों के बयानबाज़ी में बदल गया है। � Amar Ujala धर्म, सत्ता और न्यायपालिका के लंबित मामलों के बीच जुड़ा हुआ मुद्दा बन गया है। � AajTak 👉 इसका अगला चरण यह होगा कि न्यायालय इस विवादित शीर्षक पर अंतिम फैसला कब करेगा, और क्या प्रशासन या सरकार इससे संबंधित कार्रवाईें जारी रखेगी या नहीं — यह आगे की दिशा तय करेगा।
- कामाख्या धाम महाविद्या ज्योतिष अनुसंधान केन्द्रVaranasi, Uttar Pradeshअधर्म का परिचय बीजेपी ही दे रही है1 hr ago
- कामाख्या धाम महाविद्या ज्योतिष अनुसंधान केन्द्रVaranasi, Uttar Pradeshये कौन कुत्ता है1 hr ago
- Vinay Kumar Srivastavसलोन, रायबरेली, उत्तर प्रदेश🤝11 hrs ago
- आज महात्मा गांधी रोजगार गारंटी कानून ( मनरेगा ) मनरेगा बचाओ संग्राम चौपालें न्याय पंचायत बैंती के अन्तर्गत ग्राम पंचायत देहली के मजरे बलभद्र खेड़ा, ग्राम पंचायत दहिगवां के मजरे नाइन का पुरवा में संयोजक न्याय पंचायत अध्यक्ष बैंती श्री बीरेंद्र दीक्षित एवं आयोजकों में ग्राम पंचायत अध्यक्षों, बूथ अध्यक्षों के नेतृत्व में की गयी। चौपालों की अध्यक्षता ब्लाक अध्यक्ष दिनेश यादव ने किया। चौपाल में मुख्य वक्ता मनरेगा बचाओ संग्राम जिला कोआर्डिनेटर श्री उमेश बहादुर सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी रोजगार गारंटी कानून ग्रामीण विकास गरीब अकुशल श्रमिकों के हित की विश्व सबसे बड़ी योजना लागू किया जिसमें ग्राम वासियों को ग्रामो के विकास करने का अधिकार एवं श्रमिकों को काम का कानूनी अधिकार दिया गया गांव का चहुंमुखी विकास हुआ। जिसको मोदी सरकार ने मनरेगा कानून में संशोधन करके बीबीजी राम योजना, ग्राम पंचायतों को योजनाएं बनाने एवं श्रमिकों के भुगतान समय से करने का कोई उल्लेख नहीं है। कांग्रेस की सरकार में समय से भुगतान मिलता था जबसे कांग्रेस की सरकार केन्द्र में नहीं है समय से मजदूरी भुगतान 6 माह तक नहीं दिया जा रहा है । आदरणीय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी माननीया श्रीमती सोनिया गांधी जी, नेता बिपक्ष आदरणीय राहुल गांधी जी, आदरणीया प्रियंका गांधी वाड्रा जी, ने मनरेगा बचाओ संग्राम का मनरेगा कानून के स्थान केन्द्र सरकार के द्वारा बदलाव खत्म करने तक जारी रहेगा। पराग प्रसाद रावत राष्ट्रीय महासचिव अखिल भारतीय राजीव गांधी विचार मंच ने कहा कि भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करते पंचायतीराज कानून लागू किया जिसमें पिछड़े दलितों महिलाओं को आरक्षण देकर प्रधान , ब्लाक प्रमुख जिला पंचायत अध्यक्ष बनने का मौका दिया ग्रामीण विकास के लिए जवाहर रोजगार योजना के माध्यम से विकास की बुनियाद मजबूत किया मोदी सरकार ने कांग्रेस सरकार की योजना का नाम बदलने का कार्य किया प्रमुख राजीव गांधी विद्युतीकरण, इन्दिरा गांधी आवास प्रमुख हैं उनकी विकास की कोई उपलब्धि नहीं है। मोदी सरकार ने सिर्फ महंगाई भृष्टाचार महिलाओं पर अत्याचार दुष्कर्म चरम पर है। मनरेगा कानून बहाल होने तक सड़क एवं जरूरत पड़ने पर जेल भरो आंदोलन होगा। ब्लाक अध्यक्ष दिनेश श्री यादव ने कहा कि यूपीए सरकार ने गरीबों को भूख से बचाने के लिए खाद्य सुरक्षा कानून बनाया जिसमें 72 प्रतिशत देश के गरीबों दो रुपए 3 रूपये प्रति किलो गेहूं चावल उपलब्ध कराया मोदी सरकार ने मिट्टी का तेल बंद कर गरीबों का चिराग छीना महंगाई चरम पर सोना चांदी इतना महंगा है गरीबों के विवाह आदि करना मुश्किल है जबकि यूपीए सरकार में काफी कम था गैस सिलेंडर इतना महंगा है कि खाना बनाना मुश्किल है गरीब महिलाएं चूल्हा जलाने पर मजबूर हैं। मनरेगा कानून में संशोधन वापस न लेने पर ब्लाक स्तर पर बिशाल धरना प्रदर्शन किया जायेगा। जिला सचिव ब्लाक प्रभारी श्री पल्टू दास पासी कैलाश नाथ विक्रम, साहब दीन पासी राजकुमारी रामनरेश बूथ अध्यक्ष नीलेश कुमार मिश्र, बिनोद कुमार सविता, ग्राम सभा अध्यक्ष ग्रामीणों एवं महिलाओं की उपस्थिति रही संचालन न्याय पंचायत अध्यक्ष बीरेंद्र दीक्षित ने किया।4
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- पूर्व विधायक राकेश सिंह का बड़ा फैसला राम भक्त हरचंदपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक का बड़ा फैसला, पंचायत चुनाव में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेंगे Rakesh Singh1
- फतेहपुर में हाईप्रोफाइल मर्डर से सनसनी करोड़ों की जमीन के कारोबारी जयराज मानसिंह की गला रेतकर हत्या अंकित नामक युवक के साथ खेत गए थे, फिर मिला सरसों के खेत में शव फोरेंसिक टीम और एसओजी जांच में जुटी, हत्या के पीछे जमीन विवाद की आशंका जमींदार परिवार से ताल्लुक, प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंप फतेहपुर में दिनदहाड़े उद्योगपति की गला रेतकर हत्या, जिले में मचा हड़कंप करोड़ों की जमीन बना हत्या का कारण? पुलिस हर एंगल से कर रही जांच महर्षि विद्या मंदिर के पास खेत में मिला शव, इलाके में दहशत हाईप्रोफाइल केस: SOG, इंटेलिजेंस व सर्विलांस टीम जांच में जुटी 24–48 घंटे में खुलासे का दावा, नौकर हिरासत में 📰 ND NEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) फतेहपुर में कारोबारी की निर्मम हत्या, जिले में दहशत फतेहपुर जिले से एक सनसनीखेज और हाईप्रोफाइल हत्या की घटना सामने आई है। जिले के जाने-माने कारोबारी और जमींदार जयराज मानसिंह की दिनदहाड़े गला रेतकर निर्मम हत्या कर दी गई। उनका शव सदर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत महर्षि विद्या मंदिर के पास स्थित उनके ही खेत में मिला, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। अंकित के साथ खेत गए, फिर अचानक लापता परिजनों के अनुसार, जयराज मानसिंह बुधवार शाम करीब 4 बजे एक युवक अंकित के साथ अपने बाग की ओर गए थे। लगभग साढ़े चार बजे अंकित ने ही फोन कर परिजनों को बताया कि जयराज मानसिंह से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसके बाद परिजनों ने तलाश शुरू की तो सरसों के खेत में उनका गला कटा हुआ शव मिला। उत्तर प्रदेश के जिले में बुधवार को दिनदहाड़े हुई एक निर्मम हत्या ने पूरे जनपद को झकझोर कर रख दिया। जिले के जाने-माने उद्योगपति और बड़े जमीदार जयराज मान सिंह की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी गई। उनका शव सदर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत महर्षि विद्या मंदिर के पास स्थित उनके ही खेत में मिला, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जयराज मान सिंह शाम करीब 4 बजे बुलेट चौराहे स्थित अपने आवास से खेत की ओर निकले थे। परिजनों का कहना है कि वह अंकित नामक युवक के साथ बाग गए थे। कुछ समय बाद अंकित ने फोन कर बताया कि जयराज मान सिंह से संपर्क नहीं हो पा रहा है। तलाश के दौरान परिजन खेत पहुंचे, जहां सरसों के खेत में उनका गला कटा शव मिला। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस अधीक्षक भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और फॉरेंसिक टीम को बुलाकर साक्ष्य संकलन कराया गया। परिजन इस दौरान बेहद आक्रोशित नजर आए और मीडिया को घटनास्थल से दूर रहने को कहा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हत्या के पीछे करोड़ों रुपये की जमीन से जुड़ा विवाद एक बड़ा कारण हो सकता है। मृतक के पास जनपद में सैकड़ों बीघा भूमि थी और शहर में कई सरकारी भवन—जैसे एसपी आवास, डीएम आवास और जिला कारागार—मानसिंह परिवार की जमीन पर किराए से संचालित बताए जाते हैं। यह मामला इसलिए भी हाईप्रोफाइल माना जा रहा है क्योंकि मृतक को समाजवादी पार्टी सरकार में प्रमुख सचिव रहे आईएएस का रिश्तेदार बताया जा रहा है। पुलिस ने खुलासे के लिए इंटेलिजेंस विंग, एसओजी, सर्विलांस और कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीमें लगा दी हैं। मृतक का नौकर फिलहाल पुलिस हिरासत में है और उससे कड़ी पूछताछ की जा रही है। पुलिस का दावा है कि घटना से जुड़े अहम सुराग हाथ लगे हैं और 24 से 48 घंटे के भीतर मामले का खुलासा किया जा सकता है। ✊ जनहित में अपील यह घटना केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। ND News प्रशासन से मांग करता है कि दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार कर सख्त सजा दिलाई जाए, ताकि कानून व्यवस्था पर जनता का भरोसा बना रहे। नागरिकों से भी अपील है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें और अफवाहों से बचें। करोड़ों की जमीन, प्रशासनिक भवन भी किराए पर जयराज मानसिंह एक प्रतिष्ठित जमींदार परिवार से ताल्लुक रखते थे। जनपद में सैकड़ों बीघा जमीन के मालिक जयराज मान सिंह की संपत्तियों में एसपी आवास, जिला कारागार और डीएम आवास जैसे सरकारी भवन भी शामिल हैं, जिन्हें सरकार किराए पर उपयोग कर रही है। परिवार के कई सदस्य विदेशों में रहकर बड़े व्यवसाय से जुड़े हैं। NDNEWS | आपकी आवाज़, निष्पक्ष खबर 👇👇 @dgpup @RSSorg @UPGovt @wpl1090 @RSSgeet @Uppolice @MIB_India @PMOIndia @HMOIndia @VHPDigital @igrangealld @myogioffice @InfoDeptUP @dmfatehpur @sdmsadarftp @CMOfficeUP @CMOUP_RC @UPPRD1948 @ChiefSecyUP @ChiefSecyUP @MahantYogiG @FatehpurSdm @fatehpurpolice @BajrangDalOrg @112UttarPradesh @myogiadityanath @CommissionerPrg @ADGZonPrayagraj @ANOOPSINGH_IPS1
- अमेठी से उठी पूर्वांचल राज्य की मांग, ‘पूर्वांचल राज्य संयुक्त संकल्प मंच’ का गठन अमेठी। पूर्वांचल को अलग राज्य बनाए जाने की मांग को लेकर अमेठी में एक नई राजनीतिक–सामाजिक पहल की शुरुआत हुई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह के नेतृत्व में ‘पूर्वांचल राज्य संयुक्त संकल्प मंच’ का गठन किया गया है। मंच के माध्यम से उत्तर प्रदेश के 28 जिलों को मिलाकर पृथक पूर्वांचल राज्य बनाए जाने की मांग को संगठित रूप देने का संकल्प लिया गया। इसकी औपचारिक घोषणा अमेठी स्थित ददन सदन में आयोजित खिचड़ी भोज एवं स्नेह मिलन कार्यक्रम के दौरान की गई। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, संतों और समाज के प्रबुद्ध वर्ग ने एक स्वर में पूर्वांचल राज्य गठन के समर्थन में सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. संजय सिंह ने कहा कि पूर्वांचल क्षेत्र लंबे समय से विकास की मुख्यधारा से पीछे रहा है। अलग राज्य बनने से प्रशासनिक व्यवस्था सुदृढ़ होगी, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और बड़े पैमाने पर हो रहे पलायन पर प्रभावी रोक लगेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि अमेठी से उठी यह आवाज़ दिल्ली तक पहुंचेगी और देश का नेतृत्व इस मांग पर गंभीरता से विचार करेगा। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल न केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध है, बल्कि यहां काशी विश्वनाथ, गोरखनाथ धाम और कुशीनगर जैसे विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल स्थित हैं। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश को कई मुख्यमंत्री भी इसी क्षेत्र ने दिए हैं, इसके बावजूद पूर्वांचल अपेक्षित विकास से वंचित रहा है। कार्यक्रम में पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. अमिता सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश अग्रहरि, कालिकन पीठाधीश्वर श्री महाराज, पूर्व विधायक चंद्र प्रकाश मिश्र ‘मटियारी’, एमएलसी शैलेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष उमाशंकर पांडेय, पूर्व विधायक तेज भान सिंह सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान “पूर्वांचल मांगे अपना प्रदेश, तभी बनेगा विकसित प्रदेश” का नारा गूंजता रहा। अंत में यह निर्णय लिया गया कि पूर्वांचल राज्य की मांग को जन-जन तक पहुंचाकर इसे राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया जाएगा।1
- Post by Shyamu Patel1
- Post by Vinay Kumar Srivastav1
- UP,फतेहपुर के बड़े जमींदार जयराज मान सिंह का मर्डर। धारदार हथियार से गला काटा गया। DM/SP आवास तक इनकी पुश्तैनी जमीनों पर बने हैं। बड़े जमींदारों में गिनती होती है। हत्या की वजह अभी स्पष्ट नहीं।1