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लखनऊ में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव केजीएमयू ट्रामा सेंटर पहुंचे। उन्होंने अलीगंज में हुए एक अग्निकांड में घायल हुए पीड़ितों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना।
Anurag Kashyap
लखनऊ में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव केजीएमयू ट्रामा सेंटर पहुंचे। उन्होंने अलीगंज में हुए एक अग्निकांड में घायल हुए पीड़ितों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना।
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- राजधानी लखनऊ के अलीगंज सेक्टर-डी में 22 जून 2026 को हुए एक दर्दनाक अग्निकांड से पूरा क्षेत्र शोकाकुल है, जिसमें मासूम बच्चों सहित कई लोगों की असमय मृत्यु हो गई थी। इस हृदयविदारक घटना से प्रभावित दिवंगत आत्माओं की शांति और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एक भावपूर्ण कैंडल मार्च और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। इस दुखद अवसर पर पार्षद हरिश्चंद्र लोधी जी, मंडल अध्यक्ष सुश्री रीना चौरसिया जी, मंडल उपाध्यक्ष सौरभ त्रिपाठी जी और मंडल महामंत्री संदीप पाठक जी सहित भारतीय जनता पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर मोमबत्तियां जलाईं और दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे मृतकों की आत्मा को शांति प्रदान करें और शोक संतप्त परिवारों को इस असीम दुःख को सहने की शक्ति दें। कार्यक्रम में मौजूद सभी जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने इस घटना को अत्यंत पीड़ादायक बताते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। इसके साथ ही, उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। भारतीय जनता पार्टी परिवार, अलीगंज पूर्व मंडल 3 मंडल, लखनऊ की ओर से यह विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिसमें ईश्वर से दिवंगत आत्माओं को शांति और शोकाकुल परिवारों को संबल देने की प्रार्थना की गई। यह रिपोर्ट विमल चौबे द्वारा संकलित की गई।4
- उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक दोना-पत्तल फैक्ट्री में मजदूरों को 11 महीने तक बंधक बनाकर रखा गया, जहाँ उन्हें अमानवीय यातनाएं दी गईं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन मजदूरों को हंटर से बेतहाशा पीटा जाता था, भाले से शरीर को दागा जाता था और उन पर कुत्ते भी छोड़े जाते थे। इस क्रूर व्यवहार के चलते कई मजदूरों के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे, जबकि कुछ के हाथ-पांव मार-मारकर सुजा दिए गए थे। फैक्ट्री में काम खत्म होने के बाद इन मजदूरों को एक लॉकअप में बंद कर दिया जाता था और उन्हें पूरे 24 घंटे में केवल एक बार खाना मिलता था।1
- लखनऊ में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव केजीएमयू ट्रामा सेंटर पहुंचे। उन्होंने अलीगंज में हुए एक अग्निकांड में घायल हुए पीड़ितों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना।1
- अलीगंज अग्निकांड के मामले में निलंबित किए गए एफएसएसओ कमलेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र भेजकर अपने खिलाफ हुई कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सिंह ने दावा किया है कि उन्हें भवनों से संबंधित एनओसी जारी करने जैसे अधिकार प्राप्त नहीं थे, जिसके चलते उन्हें इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। अपने पत्र में कमलेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि भवनों की एनओसी और अन्य महत्वपूर्ण निर्णय मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उन्होंने इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदारियों की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक जवाबदेही तय करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, सिंह ने दमकल के मौके पर देरी से पहुंचने के मुद्दे को भी उठाया है और इसकी भी विस्तृत जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है। फिलहाल, अलीगंज अग्निकांड से संबंधित जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया निरंतर जारी है, जिसमें विभिन्न विभागों की भूमिका की गहन पड़ताल की जा रही है।1
- सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ में हुए अग्निकांड पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस दुखद घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को कम से कम 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।1
- फूलपुर और ग्रामीण इलाकों के शिया आबादी वाले क्षेत्रों में सातवीं मोहर्रम का जुलूस अकीदत के साथ निकाला गया।2
- लखनऊ के अलीगंज में हुए अग्निकांड स्थल पर एक कर्मचारी ने फायर डिपार्टमेंट की 'पोल खोल' दी, यानी उनकी कार्यप्रणाली से जुड़े कुछ सच उजागर किए। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस ने उस कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया है।1
- जनहित सर्व समाज सेवा समिति की राष्ट्रीय अध्यक्षा सोनी शुक्ला कांति ने भारत तिवारी की कथित तौर पर कानून के रखवालों द्वारा 'क्रूरता' से की गई हत्या पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक दिख रहा यह आक्रोश किसी एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरे समाज की आत्मा की तड़प है, और जिस व्यवस्था पर सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वह अब 'आईसीयू' में जा चुकी है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे अपनी चुप्पी तोड़ें, क्योंकि खामोश रहना भी गुनाह है और यह त्रासदी किसी के भी घर का दरवाज़ा खटखटा सकती है। सत्ता के गलियारों में बैठे लोगों को चेतावनी देते हुए सोनी शुक्ला कांति ने प्रशासन के सामने 6 मजबूत मांगें रखीं। इनमें बेकसूर भारत तिवारी को 'शहीद' का दर्जा देने, पीड़ित परिवार को तुरंत 2 करोड़ रुपये की सम्मानजनक आर्थिक सहायता प्रदान करने, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने, दोषियों को केवल निलंबित न कर नौकरी से बर्खास्त करने और वर्दी की आड़ में छिपे उन 'हत्यारों' पर धारा 302 (हत्या) के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजने की मांग शामिल है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने स्पष्ट रूप से यह भी कहा कि वे 'खून का बदला सिर्फ खून' के सिद्धांत से सहमत हैं, और जिस तरह निहत्थे भारत तिवारी का 'एनकाउंटर' हुआ, उसी तरह कथित तौर पर एनकाउंटर करने वाले पुलिसकर्मियों का भी 'एनकाउंटर' होना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि 'शहीद भारत तिवारी' के नाम पर एक पार्क बने, जिसमें उनकी प्रतिमा लगाई जाए और जिन पुलिसकर्मियों ने यह 'एनकाउंटर' किया, उनकी भी प्रतिमा वहां लगे ताकि 'हिसाब बराबर हो'। सोनी शुक्ला कांति ने जनता से अपील की कि वे लोकतंत्र में अपनी ताकत को पहचानें, अपनी आवाज बुलंद करें, और सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को साझा करके 'सोए हुए सिस्टम' को हिलाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारी खामोशी ही अत्याचारियों का सबसे बड़ा हौसला है। समिति ने प्रण लिया है कि जब तक भारत तिवारी की बूढ़ी मां को न्याय और दोषियों को सजा नहीं मिल जाती, तब तक यह कलम नहीं रुकेगी, यह आवाज नहीं थमेगी और उनका संघर्ष कमजोर नहीं पड़ेगा। उन्होंने 'न्याय की मशाल' घर-घर तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए 'भारत तिवारी को न्याय दो!' और 'इंकलाब जिंदाबाद!' का नारा दिया।1