अलीगंज अग्निकांड के मामले में निलंबित किए गए एफएसएसओ कमलेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र भेजकर अपने खिलाफ हुई कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सिंह ने दावा किया है कि उन्हें भवनों से संबंधित एनओसी जारी करने जैसे अधिकार प्राप्त नहीं थे, जिसके चलते उन्हें इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। अपने पत्र में कमलेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि भवनों की एनओसी और अन्य महत्वपूर्ण निर्णय मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उन्होंने इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदारियों की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक जवाबदेही तय करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, सिंह ने दमकल के मौके पर देरी से पहुंचने के मुद्दे को भी उठाया है और इसकी भी विस्तृत जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है। फिलहाल, अलीगंज अग्निकांड से संबंधित जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया निरंतर जारी है, जिसमें विभिन्न विभागों की भूमिका की गहन पड़ताल की जा रही है।
अलीगंज अग्निकांड के मामले में निलंबित किए गए एफएसएसओ कमलेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र भेजकर अपने खिलाफ हुई कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सिंह ने दावा किया है कि उन्हें भवनों से संबंधित एनओसी जारी करने जैसे अधिकार प्राप्त नहीं थे, जिसके चलते उन्हें इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। अपने पत्र में कमलेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि भवनों की एनओसी और अन्य महत्वपूर्ण निर्णय मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उन्होंने इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदारियों की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक जवाबदेही तय करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, सिंह ने दमकल के मौके पर देरी से पहुंचने के मुद्दे को भी उठाया है और इसकी भी विस्तृत जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है। फिलहाल, अलीगंज अग्निकांड से संबंधित जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया निरंतर जारी है, जिसमें विभिन्न विभागों की भूमिका की गहन पड़ताल की जा रही है।
- उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक दोना-पत्तल फैक्ट्री में मजदूरों को 11 महीने तक बंधक बनाकर रखा गया, जहाँ उन्हें अमानवीय यातनाएं दी गईं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन मजदूरों को हंटर से बेतहाशा पीटा जाता था, भाले से शरीर को दागा जाता था और उन पर कुत्ते भी छोड़े जाते थे। इस क्रूर व्यवहार के चलते कई मजदूरों के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे, जबकि कुछ के हाथ-पांव मार-मारकर सुजा दिए गए थे। फैक्ट्री में काम खत्म होने के बाद इन मजदूरों को एक लॉकअप में बंद कर दिया जाता था और उन्हें पूरे 24 घंटे में केवल एक बार खाना मिलता था।1
- लखनऊ में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव केजीएमयू ट्रामा सेंटर पहुंचे। उन्होंने अलीगंज में हुए एक अग्निकांड में घायल हुए पीड़ितों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना।1
- अलीगंज अग्निकांड के मामले में निलंबित किए गए एफएसएसओ कमलेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र भेजकर अपने खिलाफ हुई कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सिंह ने दावा किया है कि उन्हें भवनों से संबंधित एनओसी जारी करने जैसे अधिकार प्राप्त नहीं थे, जिसके चलते उन्हें इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। अपने पत्र में कमलेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि भवनों की एनओसी और अन्य महत्वपूर्ण निर्णय मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उन्होंने इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदारियों की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक जवाबदेही तय करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, सिंह ने दमकल के मौके पर देरी से पहुंचने के मुद्दे को भी उठाया है और इसकी भी विस्तृत जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है। फिलहाल, अलीगंज अग्निकांड से संबंधित जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया निरंतर जारी है, जिसमें विभिन्न विभागों की भूमिका की गहन पड़ताल की जा रही है।1
- लखनऊ में हुए अलीगंज अग्निकांड के मामले में निलंबित फायर सुरक्षा सेवा अधिकारी (FSSO) कमलेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने अपने खिलाफ की गई कार्रवाई पर पुनर्विचार करने की मांग की है। कमलेंद्र सिंह ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि एक छोटे स्तर के अधिकारी पर ऐसी कार्रवाई करना अन्यायपूर्ण है, खासकर तब जब उनका कार्यक्षेत्र अत्यंत सीमित है। उन्होंने यह दावा भी किया कि फायर विभाग के भीतर सभी महत्वपूर्ण अधिकार मुख्य फायर अधिकारी (CFO) के पास होते हैं, और अग्नि सुरक्षा अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने की प्राथमिक जिम्मेदारी भी CFO की ही होती है। इसके अतिरिक्त, निलंबित अधिकारी ने आरोप लगाया कि आग लगने की घटना के दौरान दमकल की गाड़ियाँ मौके पर देर से पहुँचीं, जिसके लिए CFO की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। सिंह ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उनके निलंबन की कार्रवाई पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है।1
- सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ में हुए अग्निकांड पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस दुखद घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को कम से कम 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।1
- फूलपुर और ग्रामीण इलाकों के शिया आबादी वाले क्षेत्रों में सातवीं मोहर्रम का जुलूस अकीदत के साथ निकाला गया।2
- लखनऊ के अलीगंज थाना क्षेत्र में स्थित एक कॉम्पलेक्स में आग लगने की एक दुखद घटना सामने आई है। इस घटना के संबंध में जॉइंट सीपी द्वारा एक बाइट (जानकारी) भी दी गई है।1
- जनहित सर्व समाज सेवा समिति की राष्ट्रीय अध्यक्षा सोनी शुक्ला कांति ने भारत तिवारी की कथित तौर पर कानून के रखवालों द्वारा 'क्रूरता' से की गई हत्या पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक दिख रहा यह आक्रोश किसी एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरे समाज की आत्मा की तड़प है, और जिस व्यवस्था पर सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वह अब 'आईसीयू' में जा चुकी है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे अपनी चुप्पी तोड़ें, क्योंकि खामोश रहना भी गुनाह है और यह त्रासदी किसी के भी घर का दरवाज़ा खटखटा सकती है। सत्ता के गलियारों में बैठे लोगों को चेतावनी देते हुए सोनी शुक्ला कांति ने प्रशासन के सामने 6 मजबूत मांगें रखीं। इनमें बेकसूर भारत तिवारी को 'शहीद' का दर्जा देने, पीड़ित परिवार को तुरंत 2 करोड़ रुपये की सम्मानजनक आर्थिक सहायता प्रदान करने, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने, दोषियों को केवल निलंबित न कर नौकरी से बर्खास्त करने और वर्दी की आड़ में छिपे उन 'हत्यारों' पर धारा 302 (हत्या) के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजने की मांग शामिल है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने स्पष्ट रूप से यह भी कहा कि वे 'खून का बदला सिर्फ खून' के सिद्धांत से सहमत हैं, और जिस तरह निहत्थे भारत तिवारी का 'एनकाउंटर' हुआ, उसी तरह कथित तौर पर एनकाउंटर करने वाले पुलिसकर्मियों का भी 'एनकाउंटर' होना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि 'शहीद भारत तिवारी' के नाम पर एक पार्क बने, जिसमें उनकी प्रतिमा लगाई जाए और जिन पुलिसकर्मियों ने यह 'एनकाउंटर' किया, उनकी भी प्रतिमा वहां लगे ताकि 'हिसाब बराबर हो'। सोनी शुक्ला कांति ने जनता से अपील की कि वे लोकतंत्र में अपनी ताकत को पहचानें, अपनी आवाज बुलंद करें, और सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को साझा करके 'सोए हुए सिस्टम' को हिलाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारी खामोशी ही अत्याचारियों का सबसे बड़ा हौसला है। समिति ने प्रण लिया है कि जब तक भारत तिवारी की बूढ़ी मां को न्याय और दोषियों को सजा नहीं मिल जाती, तब तक यह कलम नहीं रुकेगी, यह आवाज नहीं थमेगी और उनका संघर्ष कमजोर नहीं पड़ेगा। उन्होंने 'न्याय की मशाल' घर-घर तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए 'भारत तिवारी को न्याय दो!' और 'इंकलाब जिंदाबाद!' का नारा दिया।1