लुकवासा चौकी क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ आपसी विवाद के बाद एक युवा दंपति ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। 22 वर्षीय चंद्रपाल आदिवासी और उसकी 21 वर्षीय पत्नी सावित्री, जो बीते छह माह से एक कृषि फार्म पर मजदूरी कर रहे थे, के बीच 1 अप्रैल की रात करीब 10 बजे किसी बात पर झगड़ा हुआ था। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों ने झोपड़ी में ही जहरीली दवा का सेवन कर लिया। हालत बिगड़ने पर साथी मजदूरों ने उन्हें अस्पताल पहुँचाया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। इलाज के दौरान शुक्रवार रात पहले सावित्री की मौत हुई और उसके महज 12 घंटे बाद शनिवार सुबह चंद्रपाल ने भी दम तोड़ दिया। तीन साल पहले प्रेम विवाह करने वाले इस जोड़े की मौत ने उनकी डेढ़ साल की मासूम बच्ची को अनाथ कर दिया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर शवों का पोस्टमार्टम कराया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। लुकवासा चौकी क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ आपसी विवाद के बाद एक युवा दंपति ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। 22 वर्षीय चंद्रपाल आदिवासी और उसकी 21 वर्षीय पत्नी सावित्री, जो बीते छह माह से एक कृषि फार्म पर मजदूरी कर रहे थे, के बीच 1 अप्रैल की रात करीब 10 बजे किसी बात पर झगड़ा हुआ था। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों ने झोपड़ी में ही जहरीली दवा का सेवन कर लिया। हालत बिगड़ने पर साथी मजदूरों ने उन्हें अस्पताल पहुँचाया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। इलाज के दौरान शुक्रवार रात पहले सावित्री की मौत हुई और उसके महज 12 घंटे बाद शनिवार सुबह चंद्रपाल ने भी दम तोड़ दिया। तीन साल पहले प्रेम विवाह करने वाले इस जोड़े की मौत ने उनकी डेढ़ साल की मासूम बच्ची को अनाथ कर दिया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर शवों का पोस्टमार्टम कराया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है।
लुकवासा चौकी क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ आपसी विवाद के बाद एक युवा दंपति ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। 22 वर्षीय चंद्रपाल आदिवासी और उसकी 21 वर्षीय पत्नी सावित्री, जो बीते छह माह से एक कृषि फार्म पर मजदूरी कर रहे थे, के बीच 1 अप्रैल की रात करीब 10 बजे किसी बात पर झगड़ा हुआ था। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों ने झोपड़ी में ही जहरीली दवा का सेवन कर लिया। हालत बिगड़ने पर साथी मजदूरों ने उन्हें अस्पताल पहुँचाया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। इलाज के दौरान शुक्रवार रात पहले सावित्री की मौत हुई और उसके महज 12 घंटे बाद शनिवार सुबह चंद्रपाल ने भी दम तोड़ दिया। तीन साल पहले प्रेम विवाह करने वाले इस जोड़े की मौत ने उनकी डेढ़ साल की मासूम बच्ची को अनाथ कर दिया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर शवों का पोस्टमार्टम कराया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। लुकवासा चौकी क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ आपसी विवाद के बाद एक युवा दंपति ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। 22 वर्षीय चंद्रपाल आदिवासी और उसकी 21 वर्षीय पत्नी सावित्री, जो बीते छह माह से एक कृषि फार्म पर मजदूरी कर रहे थे, के बीच 1 अप्रैल की रात करीब 10 बजे किसी बात पर झगड़ा हुआ था। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों ने झोपड़ी में ही जहरीली दवा का सेवन कर लिया। हालत बिगड़ने पर साथी मजदूरों ने उन्हें अस्पताल पहुँचाया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। इलाज के दौरान शुक्रवार रात पहले सावित्री की मौत हुई और उसके महज 12 घंटे बाद शनिवार सुबह चंद्रपाल ने भी दम तोड़ दिया। तीन साल पहले प्रेम विवाह करने वाले इस जोड़े की मौत ने उनकी डेढ़ साल की मासूम बच्ची को अनाथ कर दिया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर शवों का पोस्टमार्टम कराया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है।
- ग्वालियर में अचानक ओलावृष्टि से तापमान में हुई गिरावट...1
- ब्रेकिंग न्यूज शिवपुरी जिले की तहसील पिछोर से है जहां फिर से हुई बेमौसम ओलावृष्टि ने मचाई तबाही: गेहूं-चने की फसल बर्बाद, किसानों के चेहरे पर छाई मायूसी शिवपुरी जिले की तहसील पिछोर के आसपास की ग्रामों में शाम 7.32 मिनिट पर (4 अप्रैल 2026): जिले में अचानक बदले मौसम के मिजाज से किसानों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। शिवपुरी जिले के तहसील पिछोर के कई हिस्सों, में विशेषकर भारी हुई ओलावृष्टि ग्राम खेरवास,बाचरौन भरतपुर पिछोर जराय काली पहाड़ी बमना नांद कमालपुर फतेहपुर कोटरा और भितरगुवा-खुरई काली पहाड़ी के ग्रामीण इलाकों में झमाझम बारिश के साथ जमकर ओलावृष्टि हुई। खेतों में बिछी ओलों की चादर कई स्थानों पर ओलों का आकार इतना बड़ा था कि खेतों में खड़ी गेहूं, चना और सरसों की फसलें पूरी तरह से बिछ गई हैं। किसानों ने बताया कि कटी हुई फसल जो खलिहान में रखी थी, वह भी भीगकर खराब हो गई है। कई गांवों में घरों के छप्पर और गाड़ियों के शीशे टूटने की भी खबर है।। संवाददाता पत्रकार चंद्रभान/पुष्पेंद्र बघेल2
- जनसेवा की अनूठी मिसाल 'मेरा वार्ड, मेरा परिवार' के संकल्प के साथ जनता के बीच पहुँच रहे युवा पार्षद [शिवपुरी पार्षद] | राजनीति में अक्सर बड़े-बड़े वादों और रैलियों का शोर सुनाई देता है, लेकिन धरातल पर जनता के सुख-दुख का साथी बनने वाले नेता कम ही मिलते हैं। इन्हीं अपवादों में से एक हैं कांग्रेस विचारधारा के समर्पित युवा पार्षद, जिन्होंने अपनी कार्यशैली से न केवल अपने वार्ड, बल्कि पूरे क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। हर दिन एक घर में भोजन: रिश्तों को मज़बूत करने की पहल अपनी कर्मठता के लिए जाने जाने वाले इस युवा नेता ने अब एक नया और भावुक अभियान शुरू किया है— 'मेरा वार्ड, मेरा परिवार'। इस अभियान के तहत वे प्रतिदिन अपने वार्ड के एक अलग परिवार के घर जाकर उनके साथ भोजन करते हैं। इस पहल का उद्देश्य केवल राजनीति नहीं, बल्कि वार्ड के हर नागरिक के साथ पारिवारिक संबंध स्थापित करना है। भोजन की मेज पर बैठकर वे लोगों की समस्याओं को करीब से समझते हैं और वहीं बैठकर उनके निराकरण की योजना भी बनाते हैं। विचारधारा से ऊपर उठकर 'सेवा' को प्राथमिकता वैसे तो वे कांग्रेस विचारधारा से जुड़े हैं, लेकिन क्षेत्र की सेवा के मामले में वे दलगत राजनीति से कोसों दूर हैं। उनके लिए वार्ड का हर व्यक्ति, चाहे वह किसी भी विचारधारा का हो, उनके परिवार का हिस्सा है। यही कारण है कि आज वे हर वर्ग और हर आयु के लोगों की पहली पसंद बन चुके हैं। नेता वह नहीं जो सिर्फ मंच से भाषण दे, नेता वह है जो अपने क्षेत्र के हर घर के चूल्हे की फ़िक्र करे।" - एमडी गुर्जर युवा पार्षद शिवपुरी क्षेत्र में चर्चा का विषय बना 'जज्बा' पार्षद होने के बावजूद उनकी सादगी और लगन ने सबको प्रभावित किया है। वार्ड में साफ-सफाई हो, बिजली-पानी की व्यवस्था हो या किसी गरीब की व्यक्तिगत मदद—वे हमेशा तत्पर रहते हैं। उनकी इस नई तैयारी ने शहर के अन्य जनप्रतिनिधियों के सामने भी एक बड़ी लकीर खींच दी है। 'मेरा वार्ड, मेरा परिवार' के तहत जन-संवाद। प्रतिदिन एक वार्डवासी के घर जाकर भोजन और चर्चा।1
- खबर – मगरौनी, जिला शिवपुरी (मध्य प्रदेश) रिपोर्ट – विपिन कुमार मंगल नगर परिषद मगरौनी की अनाज मंडी, जो कभी ग्वालियर जिले की डबरा मंडी के बाद दूसरे स्थान पर मानी जाती थी, आज अपनी बदहाल व्यवस्थाओं के कारण किसानों की नाराजगी का केंद्र बन गई है। मंडी में मूलभूत सुविधाओं का अभाव साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। वर्तमान स्थिति यह है कि मंडी परिसर में न तो पर्याप्त बिजली (लाइट) की व्यवस्था है और न ही पीने के पानी की कोई सुविधा उपलब्ध है। दूर-दराज से अपनी फसल लेकर आने वाले किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ एक-एक, दो-दो दिन तक मंडी में रुकने को मजबूर हैं, लेकिन उनके लिए पानी जैसी बुनियादी जरूरत तक पूरी नहीं हो पा रही है। स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब शासकीय शौचालय, जो किसानों की सुविधा के लिए बनाया गया था, वह भी हमेशा ताला बंद रहता है। इससे किसानों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। लगातार अनदेखी के कारण किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि मंडी में जल्द से जल्द बिजली, पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें परेशानियों से राहत मिल सके।1
- खबर शिवपुरी जिले के करैरा से महिला एवं बाल विकाश मे गंभीर समस्या पर क्या कुछ माग रखी केन्द्रीय सरकार एवं राज्य सरकार से क्षेत्रीय महिलायो कि समस्या क्या है ।1
- करैरा के शासकीय माध्यमिक विद्यालय नारई में “स्कूल चलें हम अभियान” के तहत आयोजित कार्यक्रम में करैरा एसडीएम अनुराग निंगवाल ने कक्षा में शिक्षक बनकर बच्चों को पढ़ाया और उनका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने बच्चों को बड़े सपने देखने की प्रेरणा दी और सादगी का परिचय देते हुए उनके साथ जमीन पर बैठकर मध्यान्ह भोजन भी किया, जिससे विद्यार्थियों में खास उत्साह देखा गया।1
- Post by बंटी कुमार सहरिया1
- ग्राम खेरवास में हुई भारी ओलावृष्टि किसानों का हुआ हुआ नुकसान....1