छत्तीसगढ़ के सूरजपुर ज़िले में एक ही दिन में महज़ 10 घंटे के भीतर लगभग 70 हज़ार लोगों द्वारा नशा मुक्ति का संकल्प लेकर विश्व रिकॉर्ड बनाने का दावा चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, यह उपलब्धि सराहनीय है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह संकल्प ज़मीन पर भी दिखाई दे रहा है या सिर्फ़ कागज़ों तक ही सीमित है? यदि संकल्प लेने के कुछ ही समय बाद सार्वजनिक स्थानों, स्कूल परिसरों, चौक-चौराहों और गाँवों में फिर से नशाखोरी का वही पुराना माहौल नज़र आता है, तो विश्व रिकॉर्ड के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जनता का स्पष्ट मानना है कि सिर्फ़ शपथ दिला देने से नशा ख़त्म नहीं होगा, बल्कि इसके लिए लगातार जन-जागरूकता, कड़ी निगरानी और प्रभावी कार्रवाई की भी ज़रूरत है। लोगों का कहना है कि नशा मुक्ति का यह विश्व रिकॉर्ड तभी सार्थक माना जाएगा, जब इसका असर वास्तव में ज़मीन पर दिखे। अगर हालात पहले जैसे ही बने रहते हैं, तो ऐसी वाहवाही और रिकॉर्ड के दावों पर सवाल उठना लाज़मी है। प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि नशा मुक्ति अभियान केवल एक कार्यक्रम या रिकॉर्ड बनाने तक सीमित न रहे, बल्कि इसे एक जन-आंदोलन का रूप देकर वास्तविक बदलाव सुनिश्चित किया जाए। जनता की दो टूक मांग है कि उन्हें 'रिकॉर्ड नहीं, परिणाम चाहिए' और 'संकल्प नहीं, उसका पालन चाहिए' तभी नशा मुक्त समाज का सपना साकार हो पाएगा।
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर ज़िले में एक ही दिन में महज़ 10 घंटे के भीतर लगभग 70 हज़ार लोगों द्वारा नशा मुक्ति का संकल्प लेकर विश्व रिकॉर्ड बनाने का दावा चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, यह उपलब्धि सराहनीय है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह संकल्प ज़मीन पर भी दिखाई दे रहा है या सिर्फ़ कागज़ों तक ही सीमित है? यदि संकल्प लेने के कुछ ही समय बाद सार्वजनिक स्थानों, स्कूल परिसरों, चौक-चौराहों और गाँवों में फिर से नशाखोरी का वही पुराना माहौल नज़र आता है, तो विश्व रिकॉर्ड के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जनता का स्पष्ट मानना है कि सिर्फ़ शपथ दिला देने से नशा ख़त्म नहीं होगा, बल्कि इसके लिए लगातार जन-जागरूकता, कड़ी निगरानी और प्रभावी कार्रवाई की भी ज़रूरत है। लोगों का कहना है कि नशा मुक्ति का यह विश्व रिकॉर्ड तभी सार्थक माना जाएगा, जब इसका असर वास्तव में ज़मीन पर दिखे। अगर हालात पहले जैसे ही बने रहते हैं, तो ऐसी वाहवाही और रिकॉर्ड के दावों पर सवाल उठना लाज़मी है। प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि नशा मुक्ति अभियान केवल एक कार्यक्रम या रिकॉर्ड बनाने तक सीमित न रहे, बल्कि इसे एक जन-आंदोलन का रूप देकर वास्तविक बदलाव सुनिश्चित किया जाए। जनता की दो टूक मांग है कि उन्हें 'रिकॉर्ड नहीं, परिणाम चाहिए' और 'संकल्प नहीं, उसका पालन चाहिए' तभी नशा मुक्त समाज का सपना साकार हो पाएगा।
- कोरिया जिले में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI), बैकुंठपुर द्वारा आयोजित A-HELP पशु सखी प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। 23 जून से 7 जुलाई 2026 तक चले इस 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले की कुल 34 महिला पशु सखियों ने भाग लिया और प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान, प्रतिभागियों को पशुओं के स्वास्थ्य प्रबंधन, प्राथमिक उपचार, विभिन्न रोगों की पहचान एवं रोकथाम, टीकाकरण, पोषण प्रबंधन, स्वच्छ पशुपालन तथा आधुनिक पशुपालन तकनीकों का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त, पूर्व से कार्यरत पशु सखियों को कृत्रिम गर्भाधान (एआई) की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन कराया गया और इससे संबंधित आवश्यक तकनीकी जानकारी भी उपलब्ध कराई गई। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं सुनिश्चित करना था। समापन समारोह में सभी 34 प्रशिक्षित महिला पशु सखियों को उनके कार्य के लिए आवश्यक टूल किट प्रदान की गई। इस अवसर पर ईडीपी श्री एन. बी. जिला कार्यक्रम प्रबंधक, बिहान श्री तरुण कुमार रघुवंशी, जिला अग्रणीय प्रबंधक सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया श्री शशिभूषण पाठक, RSETI के निदेशक श्री महती बनरा तथा ऑफिस असिस्टेंट सुश्री रिंकी सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।1
- सिद्ध बाबा पहाड़ के निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिससे परियोजना में भ्रष्टाचार पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। ऐसी चिंता व्यक्त की गई है कि भ्रष्टाचार अब भगवान के दरबार तक भी अपनी पैठ बना चुका है, जो इस पूरे मामले की गंभीरता को दर्शाता है।1
- कोरिया जिले के पटना थाना क्षेत्र में एक पारिवारिक विवाद ने युवक की जान ले ली है, जहाँ घर और जमीन के बंटवारे को लेकर बड़े भाई के साथ मारपीट करने के आरोप में छोटे भाई को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब 26 जून 2026 को राम प्रकाश कुशवाहा ने ललित कुशवाहा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की सूचना पटना थाने में दी, जिस पर जांच शुरू की गई। पंचनामा, परिजनों के बयान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि मृतक ललित कुशवाहा और उसके छोटे भाई शारदा कुशवाहा के बीच घर तथा जमीन के बंटवारे को लेकर अक्सर विवाद होता था और दोनों शराब के नशे में भी रहते थे। जांच में यह भी सामने आया कि 23 जून की सुबह करीब 9:30 बजे शारदा कुशवाहा ने अपने बड़े भाई ललित कुशवाहा को हाथ-मुक्कों और डंडे से पीटा था। मारपीट में गंभीर रूप से घायल ललित की तबीयत बिगड़ने पर उसे पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पटना में भर्ती कराया गया, जहाँ से डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल बैकुंठपुर रेफर कर दिया। उपचार के दौरान ही 25 जून की शाम करीब 6:15 बजे ललित कुशवाहा की मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मर्ग जांच में यह स्पष्ट होने के बाद कि ललित की मृत्यु मारपीट में आई चोटों के कारण हुई, पुलिस ने आरोपी शारदा कुशवाहा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज किया। विवेचना के दौरान पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर 8 जुलाई 2026 को ग्राम सावांरावां, थाना पटना, जिला कोरिया निवासी 36 वर्षीय आरोपी शारदा कुशवाहा को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।1
- सरगुजा जिले के अंबिकापुर में अजरदीप सोनवानी के डीजे सॉन्ग 'गोरिया बिहार वाली मौसी' को लेकर चर्चा देखी जा रही है। यह गाना स्थानीय स्तर पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।4
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दमन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार का मुख्य लक्ष्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है, जिसके तहत गरीब, किसान, युवा और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। दमन की इन परियोजनाओं को क्षेत्र के आर्थिक विकास, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है, जो विकसित भारत के निर्माण में सहायक होंगी। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश की आर्थिक प्रगति पर प्रकाश डालते हुए डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों को भारत की नई पहचान बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने करोड़ों लोगों को पक्के घर, स्वच्छ पेयजल, बिजली, गैस कनेक्शन और मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की हैं। नारी शक्ति को विकास की मुख्य ताकत बताते हुए उन्होंने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर बल दिया, जबकि युवाओं के लिए नई शिक्षा नीति और कौशल विकास कार्यक्रमों को अवसर पैदा करने वाला बताया। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को दोहराते हुए उन्होंने 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयास का आह्वान किया, ताकि भारत विश्व की अग्रणी शक्तियों में शामिल हो सके।1
- कोरिया जिले में कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्रीमती रोक्तिमा यादव ने 99 जुलाई 2026 को जिला आबकारी विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। इस दौरान उन्होंने विभाग के कार्यों और राजस्व संग्रहण की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों को शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध एवं प्रभावी ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने राजस्व लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सुनियोजित कार्ययोजना बनाकर लगातार प्रयास करने पर जोर दिया। उन्होंने अवैध मदिरा के निर्माण, परिवहन, संग्रहण और विक्रय के विरुद्ध प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण और निरंतर कार्रवाई सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए, ताकि जिले में अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण स्थापित किया जा सके। साथ ही, उन्होंने सभी आबकारी दुकानों के आसपास स्वच्छता बनाए रखने, परिसर को व्यवस्थित रखने तथा दुकानों के इर्द-गिर्द होने वाली किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर सख्ती से रोक लगाने के भी निर्देश दिए। श्रीमती यादव ने कहा कि नागरिकों को सुरक्षित एवं व्यवस्थित वातावरण प्रदान करना विभाग की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को पारदर्शिता, जवाबदेही, अनुशासन एवं संवेदनशीलता को अपने कार्य का मूल आधार बनाते हुए कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया। कलेक्टर ने यह भी कहा कि सुशासन की भावना के अनुरूप कार्य करते हुए विभाग की कार्यप्रणाली में गुणवत्ता, दक्षता एवं जनविश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने जिले में राजस्व संग्रहण, प्रवर्तन संबंधी कार्रवाई एवं अन्य गतिविधियों की जानकारी प्रस्तुत की, जिसके बाद कलेक्टर ने आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान जिला आबकारी अधिकारी सहित सहायक जिला आबकारी अधिकारी, आबकारी उप निरीक्षक और आबकारी आरक्षक उपस्थित थे।1
- छत्तीसगढ़ के सूरजपुर ज़िले में एक ही दिन में महज़ 10 घंटे के भीतर लगभग 70 हज़ार लोगों द्वारा नशा मुक्ति का संकल्प लेकर विश्व रिकॉर्ड बनाने का दावा चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, यह उपलब्धि सराहनीय है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह संकल्प ज़मीन पर भी दिखाई दे रहा है या सिर्फ़ कागज़ों तक ही सीमित है? यदि संकल्प लेने के कुछ ही समय बाद सार्वजनिक स्थानों, स्कूल परिसरों, चौक-चौराहों और गाँवों में फिर से नशाखोरी का वही पुराना माहौल नज़र आता है, तो विश्व रिकॉर्ड के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जनता का स्पष्ट मानना है कि सिर्फ़ शपथ दिला देने से नशा ख़त्म नहीं होगा, बल्कि इसके लिए लगातार जन-जागरूकता, कड़ी निगरानी और प्रभावी कार्रवाई की भी ज़रूरत है। लोगों का कहना है कि नशा मुक्ति का यह विश्व रिकॉर्ड तभी सार्थक माना जाएगा, जब इसका असर वास्तव में ज़मीन पर दिखे। अगर हालात पहले जैसे ही बने रहते हैं, तो ऐसी वाहवाही और रिकॉर्ड के दावों पर सवाल उठना लाज़मी है। प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि नशा मुक्ति अभियान केवल एक कार्यक्रम या रिकॉर्ड बनाने तक सीमित न रहे, बल्कि इसे एक जन-आंदोलन का रूप देकर वास्तविक बदलाव सुनिश्चित किया जाए। जनता की दो टूक मांग है कि उन्हें 'रिकॉर्ड नहीं, परिणाम चाहिए' और 'संकल्प नहीं, उसका पालन चाहिए' तभी नशा मुक्त समाज का सपना साकार हो पाएगा।1