रीवा जिले में इन दिनों बाहरी राज्यों के पंजीयन नंबर वाली मोटरसाइकिलों की खरीद-फरोख्त में तेजी देखी जा रही है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि ये वाहन बिना पर्याप्त सत्यापन और दस्तावेजी जांच के बेचे जा रहे हैं, जिससे जिले की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारों के अनुसार, दूसरे राज्यों से लाए गए वाहनों के स्वामित्व हस्तांतरण, एनओसी (NOC) तथा पुनः पंजीयन संबंधी नियमों का पालन आवश्यक होता है और इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया तथा दस्तावेजों की जरूरत होती है। स्थानीय लोगों ने चिंता व्यक्त की है कि जिले में कई बाहरी व्यक्ति लंबे समय से रह रहे हैं और विभिन्न राज्यों की नंबर प्लेट वाली मोटरसाइकिलों से आवागमन कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि इन व्यक्तियों एवं वाहनों का समुचित सत्यापन नहीं किया जाता है, तो भविष्य में यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। इसी के मद्देनजर, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और परिवहन विभाग से अपील की गई है कि वे बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों का विशेष अभियान चलाकर सत्यापन करें, संदिग्ध वाहनों की गहन जांच करें और बिना वैध दस्तावेजों के वाहन व्यापार करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करें। नागरिकों का मानना है कि समय रहते की गई प्रभावी जांच और निगरानी से न केवल अवैध वाहन कारोबार पर अंकुश लगेगा, बल्कि जिले की सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी।
रीवा जिले में इन दिनों बाहरी राज्यों के पंजीयन नंबर वाली मोटरसाइकिलों की खरीद-फरोख्त में तेजी देखी जा रही है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि ये वाहन बिना पर्याप्त सत्यापन और दस्तावेजी जांच के बेचे जा रहे हैं, जिससे जिले की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारों के अनुसार, दूसरे राज्यों से लाए गए वाहनों के स्वामित्व हस्तांतरण, एनओसी (NOC) तथा पुनः पंजीयन संबंधी नियमों का पालन आवश्यक होता है और इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया तथा दस्तावेजों की जरूरत होती है। स्थानीय लोगों ने चिंता व्यक्त की है कि जिले में कई बाहरी व्यक्ति लंबे समय से रह रहे हैं और विभिन्न राज्यों की नंबर प्लेट वाली मोटरसाइकिलों से
आवागमन कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि इन व्यक्तियों एवं वाहनों का समुचित सत्यापन नहीं किया जाता है, तो भविष्य में यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। इसी के मद्देनजर, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और परिवहन विभाग से अपील की गई है कि वे बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों का विशेष अभियान चलाकर सत्यापन करें, संदिग्ध वाहनों की गहन जांच करें और बिना वैध दस्तावेजों के वाहन व्यापार करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करें। नागरिकों का मानना है कि समय रहते की गई प्रभावी जांच और निगरानी से न केवल अवैध वाहन कारोबार पर अंकुश लगेगा, बल्कि जिले की सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी।
- रीवा में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) क्रांति का एक महत्वपूर्ण पड़ाव सामने आया है, जहाँ रीवा के रातहरा क्षेत्र में इसका भव्य उद्घाटन किया गया है। यह उद्घाटन इस बात का सूचक है कि रीवा में अब एक नया इलेक्ट्रिक वाहन युग शुरू हो रहा है।1
- रीवा जिले में इन दिनों बाहरी राज्यों के पंजीयन नंबर वाली मोटरसाइकिलों की खरीद-फरोख्त में तेजी देखी जा रही है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि ये वाहन बिना पर्याप्त सत्यापन और दस्तावेजी जांच के बेचे जा रहे हैं, जिससे जिले की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारों के अनुसार, दूसरे राज्यों से लाए गए वाहनों के स्वामित्व हस्तांतरण, एनओसी (NOC) तथा पुनः पंजीयन संबंधी नियमों का पालन आवश्यक होता है और इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया तथा दस्तावेजों की जरूरत होती है। स्थानीय लोगों ने चिंता व्यक्त की है कि जिले में कई बाहरी व्यक्ति लंबे समय से रह रहे हैं और विभिन्न राज्यों की नंबर प्लेट वाली मोटरसाइकिलों से आवागमन कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि इन व्यक्तियों एवं वाहनों का समुचित सत्यापन नहीं किया जाता है, तो भविष्य में यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। इसी के मद्देनजर, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और परिवहन विभाग से अपील की गई है कि वे बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों का विशेष अभियान चलाकर सत्यापन करें, संदिग्ध वाहनों की गहन जांच करें और बिना वैध दस्तावेजों के वाहन व्यापार करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करें। नागरिकों का मानना है कि समय रहते की गई प्रभावी जांच और निगरानी से न केवल अवैध वाहन कारोबार पर अंकुश लगेगा, बल्कि जिले की सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी।2
- मध्य प्रदेश कांग्रेस ने अगले एक महीने के भीतर राज्य के सभी जिलों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यालयों का घेराव करने की घोषणा की है। यह कदम भाजपा द्वारा किए गए 'लोकतंत्र के चीर हरण' के खिलाफ उठाया जा रहा है।1
- सतना जिले के रामपुर बाघेलान थाना क्षेत्र में एक मकान के बंटवारे को लेकर हुए विवाद में छोटे भाई ने अपने साले के साथ मिलकर बड़े भाई की हत्या कर दी। यह घटना 1 जून को ग्राम तिवनी निवासी राजबहोर कोरी (उम्र 30 वर्ष) की तुर्की स्टेशन के पास हुई। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जांच में सामने आया कि मृतक राजबहोर का छोटा भाई कृष्णा कोरी (उम्र 26 वर्ष) ने अपनी दादी से मकान अपनी पत्नी के नाम वसीयत करा लिया था। जब राजबहोर ने मकान में अपना हिस्सा मांगा, तो कृष्णा ने उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाई। योजना के तहत, आरोपी कृष्णा कोरी और उसके साले लवकुश कोरी (उम्र 25 वर्ष) ने राजबहोर को रोककर लकड़ी की फंटी से उसके सिर पर वार किया। गंभीर रूप से घायल राजबहोर को एक दुकान के अंदर छोड़कर दोनों फरार हो गए। अस्पताल ले जाते समय राजबहोर की मौत हो गई। थाना प्रभारी निरीक्षक संदीप चतुर्वेदी के नेतृत्व में पुलिस ने इस मामले में धारा 103(1) और 3(5) BNS के तहत केस दर्ज किया। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल किए गए ऑटो और लकड़ी की फंटी को भी जब्त कर लिया है।1
- रामपुर बघेलान में आगामी पंचायत निर्वाचन की तैयारियों को तेज़ करते हुए, जनपद पंचायत सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विधानसभा मतदाता सूची और पंचायत मतदाता सूची के मिलान पर चर्चा करना था। तहसीलदार सुजीत नागेश की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में खंड पंचायत अधिकारी महेश शर्मा, सभी पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और बीएलओ उपस्थित रहे। इस दौरान, निर्वाचन आयोग के निर्देशों का पालन करते हुए, विधानसभा की अंतिम प्रकाशित मतदाता सूची में हुए नए नामांकन, संशोधनों और विलोपन की जानकारी को पंचायत मतदाता सूची में अद्यतन करने के निर्देश दिए गए। यह पहल त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रशासनिक तैयारियों को गति देने के लिए की गई है।2
- घूमने गए एक स्थान से माता रानी के कंधों को प्रदर्शित करता एक वीडियो जारी किया गया है। यह वीडियो उस विशेष स्थल से संबंधित है जहाँ पोस्ट करने वाले लोग भ्रमण के लिए गए थे।1
- रीवा जिले में बिरसा मुंडा जयंती के कार्यक्रम के दौरान विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस विवाद के कारण गांव में तनाव बढ़ गया है।1
- मऊगंज तहसीलदार पर नामांतरण के नाम पर ₹50,000 की रिश्वत मांगने का एक गंभीर आरोप लगा है। यह आरोप तहसीलदार द्वारा भूमि नामांतरण की प्रक्रिया के लिए ₹50,000 की राशि की मांग करने से संबंधित है।1