बारां जिले के छीपाबड़ौद स्थित सुशीला देवी आदर्श विद्या मंदिर माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों के बीच अनुशासन, स्वच्छता और विद्यालय के प्रति आत्मीयता की भावना विकसित करने के उद्देश्य से एक 'पूर्ण गणवेश प्रतियोगिता' आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने विद्यालय की निर्धारित गणवेश में पूरे उत्साह के साथ भाग लिया, जिसका मूल्यांकन स्वच्छता, अनुशासन, समयपालन और समग्र व्यक्तित्व के आधार पर निर्णायक मंडल द्वारा किया गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य जोधराज नागर ने प्रतियोगिता के दौरान पूर्ण गणवेश को अनुशासन, समानता और संस्कारों का प्रतीक बताया और सभी विद्यार्थियों को प्रतिदिन स्वच्छ गणवेश में आने के लिए प्रेरित किया। शनिवारीय कार्यक्रम प्रमुख भारतीय सिरोहिया ने परिणामों की घोषणा करते हुए बताया कि कक्षा षष्ठम से दशम तक की प्रतियोगिता में बंधन सहरिया ने प्रथम, रविकांत गौतम ने द्वितीय और गौरव कुशवाह ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इन विजेताओं को सोमवार की वंदना सभा में पुरस्कृत किया जाएगा।
बारां जिले के छीपाबड़ौद स्थित सुशीला देवी आदर्श विद्या मंदिर माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों के बीच अनुशासन, स्वच्छता और विद्यालय के प्रति आत्मीयता की भावना विकसित करने के उद्देश्य से एक 'पूर्ण गणवेश प्रतियोगिता' आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने विद्यालय की निर्धारित गणवेश में पूरे उत्साह के
साथ भाग लिया, जिसका मूल्यांकन स्वच्छता, अनुशासन, समयपालन और समग्र व्यक्तित्व के आधार पर निर्णायक मंडल द्वारा किया गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य जोधराज नागर ने प्रतियोगिता के दौरान पूर्ण गणवेश को अनुशासन, समानता और संस्कारों का प्रतीक बताया और सभी विद्यार्थियों को प्रतिदिन स्वच्छ गणवेश में आने के लिए प्रेरित किया।
शनिवारीय कार्यक्रम प्रमुख भारतीय सिरोहिया ने परिणामों की घोषणा करते हुए बताया कि कक्षा षष्ठम से दशम तक की प्रतियोगिता में बंधन सहरिया ने प्रथम, रविकांत गौतम ने द्वितीय और गौरव कुशवाह ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इन विजेताओं को सोमवार की वंदना सभा में पुरस्कृत किया जाएगा।
- राजस्थान के बारां जिले के छीपाबड़ौद स्थित स्टेडियम में समुद्र मंथन प्राणायाम के सांध्यकालीन सत्र का आयोजन किया गया।1
- बारां जिले के छीपाबड़ौद स्थित सुशीला देवी आदर्श विद्या मंदिर माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों के बीच अनुशासन, स्वच्छता और विद्यालय के प्रति आत्मीयता की भावना विकसित करने के उद्देश्य से एक 'पूर्ण गणवेश प्रतियोगिता' आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने विद्यालय की निर्धारित गणवेश में पूरे उत्साह के साथ भाग लिया, जिसका मूल्यांकन स्वच्छता, अनुशासन, समयपालन और समग्र व्यक्तित्व के आधार पर निर्णायक मंडल द्वारा किया गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य जोधराज नागर ने प्रतियोगिता के दौरान पूर्ण गणवेश को अनुशासन, समानता और संस्कारों का प्रतीक बताया और सभी विद्यार्थियों को प्रतिदिन स्वच्छ गणवेश में आने के लिए प्रेरित किया। शनिवारीय कार्यक्रम प्रमुख भारतीय सिरोहिया ने परिणामों की घोषणा करते हुए बताया कि कक्षा षष्ठम से दशम तक की प्रतियोगिता में बंधन सहरिया ने प्रथम, रविकांत गौतम ने द्वितीय और गौरव कुशवाह ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इन विजेताओं को सोमवार की वंदना सभा में पुरस्कृत किया जाएगा।3
- राजस्थान के बारां जिले की छबड़ा तहसील में तेलनी ग्राम पंचायत के निकट प्रकृति के बीच स्थित ऐतिहासिक कोटड़ा मेघनाथ का किला आज सरकारी उपेक्षा के चलते महज खंडहर के रूप में तब्दील हो चुका है। छबड़ा कस्बे से करीब 20 किलोमीटर दूर हिंगलोट और नियामतपुर बाँधों के बीच पहाड़ी पर बना यह दुर्ग अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। जंगलों से होकर जाने वाले दुर्गम रास्तों के बीच स्थित इस मौन गवाह को इतिहास की किताबों में भले ही जगह नहीं मिल सकी हो, लेकिन यह स्थानीय लोगों की स्मृतियों में आज भी जीवित है। स्थानीय जनश्रुतियों और इसकी स्थापत्य शैली के अनुसार, इस किले का निर्माण संभवतः 11वीं से 15वीं शताब्दी के बीच खींची चौहानों द्वारा कराया गया था। यह किला गागरोन दुर्ग की सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। बड़े-बड़े पत्थरों को चूने से जोड़कर बने इस किले के मुख्य दुर्ग क्षेत्र, आवासीय व मंदिर परिसर और गुप्त सुरंगों व जल स्रोतों के अवशेष आज भी दिखाई देते हैं। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, यह किला खींची चौहानों की संकटकालीन राजधानी और सैन्य छावनी था, जहां से आसपास के क्षेत्रों पर नजर रखी जाती थी। इसके साथ ही, अंग्रेजी शासनकाल में भी इस किले से कर वसूला जाता था। यहाँ हनुमान जी के मंदिर के साथ-साथ राजस्थान का एकमात्र मेघनाथ मंदिर भी स्थित है, जहां हर चतुर्दशी को विशेष पूजा की जाती है और मान्यता है कि यहाँ आने से हर समस्या का समाधान हो जाता है। वर्तमान समय में प्राकृतिक क्षरण और देखरेख के अभाव में इस किले की दीवारें गिर चुकी हैं। इस प्राचीन धरोहर को बचाने के लिए सेवानिवृत्त व्याख्याता और भूगोलवेत्ता एस.एल. नागर ने छबड़ा तहसील की प्राचीन विरासतों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया है। लेखक व अध्यापक अरविंद गुर्जर का कहना है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और राजस्थान पर्यटन विभाग को इस किले का अध्ययन कर इसे संरक्षित करना चाहिए और पर्यटन के रूप में विकसित करना चाहिए। उन्होंने स्थानीय युवाओं और इतिहास प्रेमियों से भी इस अमूल्य धरोहर को बचाने के लिए आगे आने की अपील की है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत को सुरक्षित रखा जा सके।4
- झालावाड़ के खानपुर में मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीद मुकुट बिहारी मीणा को शत-शत नमन किया जा रहा है। वीरों के इस महान बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। शहीद मुकुट बिहारी मीणा का अद्वितीय साहस, त्याग और राष्ट्रप्रेम हम सभी के लिए सदैव एक प्रेरणास्रोत बना रहेगा। देश की रक्षा में सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर शहीद को याद करते हुए 'शहीद मुकुट बिहारी मीणा अमर रहें' और 'जय हिंद' के उद्घोष के साथ उनके प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की जा रही है।1
- झालावाड़ जिले के खानपुर क्षेत्र स्थित दहीखेड़ा के राजकीय पशु चिकित्सालय में आज तड़के शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई। इस घटना में अस्पताल परिसर में रखा एक डीप फ्रीज पूरी तरह जलकर खाक हो गया। चिकित्सालय प्रभारी रिजवाना बेगम को सुबह करीब 6 बजे स्थानीय निवासी महेश गुर्जर ने फोन के जरिए घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही वे तुरंत मौके पर पहुंचीं और अस्पताल का दरवाजा खुलवाया। इसके बाद महेश गुर्जर, चेतन शर्मा, मनीष मीणा और नजीर मोहम्मद सहित अन्य ग्रामीणों के सहयोग से समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे अस्पताल में होने वाले एक बड़े नुकसान को टाला जा सका।1
- झालावाड़ में पुलिस द्वारा पौधरोपण किया गया। इस पौधरोपण कार्यक्रम के दौरान महिला कांस्टेबल भी विशेष रूप से मौजूद रहीं।1
- मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक गोदावर्मन बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भ्रष्टाचार विरोधी संस्था 'सिस्टम परिवर्तन अभियान' (Crusaders Against Corruption) ने मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद राज्य में अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। संस्था ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि 15 मई 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने गोदावर्मन प्रकरण में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए राज्यों को निर्देश दिए थे कि वास्तविक रूप से वन श्रेणी में आने वाली सभी जमीनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। इसके तहत वन भूमि से अवैध कब्जे हटाने, अवैध उपयोग की स्थिति में संबंधितों से भूमि का मूल्य वसूलने और उस राशि का उपयोग वनीकरण व वन संरक्षण में करने का निर्देश था। संगठन का आरोप है कि इस आदेश के लगभग 14 महीने बीत जाने के बाद भी मध्य प्रदेश में न तो अतिक्रमण हटाया गया है और न ही अवैध उपयोगकर्ताओं से भूमि की कीमत वसूली गई है, जबकि कई क्षेत्रों में वन भूमि पर निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां लगातार जारी हैं। पत्र में सीहोर वनमंडल के एक मामले को प्रमुखता से उठाते हुए आरोप लगाया गया है कि लगभग 50 लाख वर्गफुट वन भूमि पर्यटन विभाग को हस्तांतरित कर दी गई, जहां अब एक निजी होटल और रिसॉर्ट परियोजना विकसित की जा रही है। संस्था का दावा है कि इस वन क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ मौजूद थे और निर्माण के चलते यह क्षेत्र प्रभावित हुआ है। संगठन ने पूरे प्रदेश में वन भूमि का सर्वे कराने, अवैध कब्जे हटाने, भूमि का मूल्य वसूलने और दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की वन विभाग या किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है और इस मामले पर फिलहाल वन विभाग की प्रतिक्रिया आना बाकी है।1
- राजस्थान के बारां जिले के छीपाबड़ोद स्थित स्टेडियम में भ्रामरी प्राणायाम का आयोजन किया गया।2